बांग्लादेश के ख़िलाफ़ अमेरिका ने उठाया कड़ा क़दम, बढ़ा तनाव

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अमेरिकी वित्त मंत्रालय के ऑफ़िस ऑफ़ फ़ॉरेन असेट्स कंट्रोल (OFAC) ने बांग्लादेश के सुरक्षाबल रैपिड एक्शन बटालियन (RAB) और कुछ सुरक्षा अधिकारियों पर प्रतिबंध लगा दिया है. बांग्लादेश ने अमेरिका के इस फ़ैसले पर ख़ासी नाराज़गी जताई है.
शुक्रवार को बांग्लादेश ने इस मामले में ढाका स्थित अमेरिकी दूतावास के राजदूत को तलब किया था.
अमेरिका के वित्त मंत्रालय के OFAC ने शुक्रवार को कई देशों के 10 संगठनों और 15 लोगों पर प्रतिबंध लगाए, जिनमें बांग्लादेश भी शामिल है. ये प्रतिबंध मानवाधिकार हनन और प्रताड़ना के मामलों में शामिल रहने पर लगाए गए हैं.
10 दिसंबर को अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस था, जिस मौक़े पर अमेरिका ने बांग्लादेश के अलावा चीन, रूस, म्यांमार और उत्तर कोरिया पर 'गंभीर मानवाधिकार हनन' को लेकर कई तरह के प्रतिबंध लगाए.
अमेरिका ने RAB के साथ-साथ उसके पूर्व प्रमुख और देश के वर्तमान पुलिस प्रमुख बेनज़ीर अहमद और RAB के वर्तमान प्रमुख चौधरी अब्दुल्ला अल मामून के अलावा कुछ और अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाए हैं.
इन प्रतिबंधों के कारण अब इन लोगों को अमेरिका का वीज़ा नहीं मिल सकेगा और अगर इनकी संपत्तियां अमेरिका में हुईं तो उन्हें ज़ब्त कर लिया जाएगा.

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बांग्लादेश का विरोध
इस फ़ैसले के सामने आने के तुरंत बाद बांग्लादेश के विदेश मंत्री एके अब्दुल मोमिन ने अमेरिका के राजदूत अर्ल आर. मिलर को तलब किया.
शनिवार को ढाका में एक कार्यक्रम में एक रिपोर्टर के सवाल के जवाब में विदेश मंत्री मोमिन ने कहा, "इस सुबह को हमने अमेरिकी राजदूत को बुलाया था. मेरे विदेश सचिव ने चर्चा की थी. इस तरह की घटना हुई है और यह हमारे लिए बेहद चौंकाने वाला है."
उनके साथ मौजूद रहे विदेश सचिव मसूद मोमिन ने इस पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया था.
हालांकि, विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी करके कहा है कि पुलिस और RAB प्रमुखों पर प्रतिबंध लगाने पर बांग्लादेश ने अमेरिकी राजदूत अर्ल आर. मिलर के आगे अपने अंसतोष को ज़ाहिर कर दिया है.
बयान में कहा गया है कि मिलर ने विदेश सचिव को कहा है कि वो बांग्लादेश सरकार की चिंताओं के बारे में अपनी सरकार को बताएंगे.
अंग्रेज़ी अख़बार 'द हिंदू' के मुताबिक़ बांग्लादेश सरकार ने अपने बयान में कहा है, "विदेश सचिव ने अमेरिका के फ़ैसले पर खेद व्यक्त किया है. ऐसा फ़ैसला जो सरकार की एक एजेंसी को कमज़ोर करता है, वो एजेंसी जो आतंकवाद, ड्रग्स तस्करी और अन्य जघन्य अंतरराष्ट्रीय अपराधों से लड़ने के लिए हमेशा आगे रही है. इन अपराधों से लड़ना अमेरिकी प्रशासनों के साथ साझा प्राथमिकताएं मानी जाती थीं."
बांग्लादेश सरकार ने अपने बयान में कहा है कि ये फ़ैसला 'एकतरफ़ा' और 'बिना किसी सूचना' के लिया गया है.

बांग्लादेश के विदेश मंत्री ने और क्या-क्या कहा
ढाका में एक कार्यक्रम के दौरान विदेश मंत्री मोमिन ने पत्रकारों से इस प्रतिबंध पर भी बात की.
बांग्लादेश के पुलिस प्रमुख और RAB पर मानवाधिकार हनन के आरोपों में प्रतिबंध लगाने के एक सवाल के जवाब में विदेश मंत्री ने कहा कि 'यह बेहद दुखद है. कुछ NGO और मानवाधिकार समूहों ने शिकायत की थी.'
इसके बाद विदेश मंत्री मोमिन ने अमेरिका पर ही निशाना साध दिया और दावा किया कि 'अमेरिका में हर साल 60 लाख लोग ग़ायब हो जाते हैं लेकिन अमेरिकी सरकार को नहीं पता है कि यह कैसे होता है.'
उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिकी पुलिस हर साल 'ड्यूटी के दौरान हज़ारों लोगों को मार देती है. अमेरिका को इसके बारे में सूचित करना चाहिए था.'
उन्होंने कहा, "अमेरिका में 60 लाख लोगों के ग़ायब होने पर कोई भी राष्ट्र उसे सज़ा नहीं दे रहा है."
"लोगों को दिखाने के लिए यह शरारती कोशिशें हैं. सभी देशों में कुछ लोग ग़ायब हो रहे हैं. यह बेहद दुखद है."
"अमेरिका जैसे विकसित और परिपक्व देश ऐसे क़दम उठाते हैं जो कि अपरिपक्व हैं. कई देशों में उनके फ़ैसले किसी के लिए भी अच्छे नहीं रहे हैं, यहां तक कि अमेरिकी लोगों के लिए भी."
"वास्तव में विकासशील देशों में वहाँ कि सरकारें लोगों की भलाई के लिए अच्छा काम कर रही हैं और उन पर अक्सर हमला किया जाता है. अगर आप अच्छे काम करते हैं तो वहाँ दिक़्कत है. कई देशों में लोग संतुष्ट हैं."

गृह मंत्री भी बोले
बांग्लादेश के गृह मंत्री असदुज़्ज़मां ख़ान ने इन प्रतिबंधों पर सीधी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है लेकिन वो RAB से जुड़े कथित मानवाधिकार उल्लंघनों और गोलीबारी के मामलों पर बोले हैं. RAB उन्हीं के मंत्रालय के अंतर्गत आता है.
उन्होंने कहा है कि बांग्लादेश में कोई भी व्यक्ति जानबूझकर की गई गोलीबारी का शिकार नहीं बना है.
ढाका में उन्होंने एक कार्यक्रम में कहा, "हमारा सिस्टम ख़ूबसूरत है. कोई भी जानबूझकर या किसी को निशाना बनाकर फ़ायरिंग नहीं कर सकता. हमें लगता है कि इन घटनाओं के पीछे कुछ अच्छे कारण रहे होंगे."
"अमेरिकी प्रतिबंधों के मुद्दे को देखे बिना कोई भी टिप्पणी नहीं की जा सकती है. इन प्रतिबंधों के कारणों पर एक न्यायिक जांच की ज़रूरत है कि वो दुर्घटनाएं थीं या लापरवाही."
गृह मंत्री ने कहा कि आतंकी जब अपने हथियारों से गोलियां बरसाते हैं तो सुरक्षाबल लोगों की ज़िंदगियां बचाने के लिए गोली चलाते हैं.
"लेकिन यह जांच का विषय है कि इसकी कितनी ज़रूरत थी. अभी हमें पता नहीं है कि यह (प्रतिबंध) क्यों लगाया गया है और इसके मक़सद क्या हैं."

अमेरिका ने क्यों लगाया प्रतिबंध
अमेरिका ने बांग्लादेश के विशेष सुरक्षाबल RAB और उससे जुड़े छह अफ़सरों पर कथित तौर पर 'गंभीर मानवाधिकर हनन' में शामिल रहने पर प्रतिबंध लगाए हैं.
अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है, "ड्रग्स के ख़िलाफ़ बांग्लादेश सरकार की जंग के दौरान रैपिड एक्शन बटालियन (RAB) द्वारा बांग्लादेश में गंभीर मानवाधिकार हनन के आरोप लगते रहे हैं. क़ानून के शासन, मानवाधिकार के सम्मान, मौलिक स्वतंत्रता और बांग्लादेश के लोगों की आर्थिक समृद्धि की अवहेलना अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा हितों के लिए एक ख़तरा है."
2004 में जॉइंट टास्क फ़ोर्स RAB का गठन हुआ था. इसके पूर्व महानिदेशक बेनज़ीर अहमद समेत छह वरिष्ठ पुलिस अफ़सरों पर यह प्रतिबंध लगाए गए हैं.
बेनज़ीर अहमद पिछले साल बांग्लादेश के इंस्पेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस बनाए गए हैं. RAB के अपने कार्यकाल के दौरान वो देश में आतंकी समूहों के ख़िलाफ़ अभियान में सबसे आगे थे. उनके नेतृत्व में ISIS से प्रेरित JMB आतंकियों के ख़िलाफ़ अभियान चलाया गया था.

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जुलाई 2016 में ढाका की होली आर्टिसन बेकरी में बंधकों को छुड़ाने के दौरान चलाए गए अभियान में 20 लोग मारे गए थे.
अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है कि बेनज़ीर अहमद की 'मानवाधिकारों के घोर उल्लंघन में संलिप्तता उन्हें अमेरिका में दाख़िल होने के लिए अयोग्य पाती है.'
अमेरिकी वित्त मंत्रालय के मुताबिक़ बांग्लादेश के ख़िलाफ़ यह प्रतिबंध बड़े पैमाने पर आरोपों और NGO की रिपोर्ट के आधार पर लिए गए हैं.
बयान के मुताबिक़, "NGO ने आरोप लगाए हैं कि RAB और बांग्लादेशी क़ानूनी एजेंसियां 2009 से 600 से अधिक लोगों के ग़ायब होने के लिए ज़िम्मेदार हैं. इसके साथ ही 2018 से अब तक 600 एक्स्ट्रा जुडिशियल किलिंग और प्रताड़ना के लिए ज़िम्मेदार हैं. कई रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इन घटनाओं में विपक्षी पार्टियों के सदस्यों, पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को भी निशाना बनाया गया है."
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