बीबीसी ने साल 2021 के सबसे प्रेरक और प्रभावशाली 100 महिलाओं की सूची जारी कर दी है.
इस साल उन महिलाओं को इस सूची में जगह मिली है जो दुनिया भर में रीसेट का बटन दबा रही हैं. दरअसल दुनिया भर में महिलाएं समाज और संस्कृति को नए सिर से बदलने में अपनी भूमिकाएं निभा रही हैं.
जिन महिलाओं को इस साल सूची में जगह मिली है उनमें सबसे कम उम्र में नोबेल पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफ़ज़ई, सामोआ की पहली महिला प्रधानमंत्री फ़ियामे नाओमी माताफ़ा, वैक्सीन कांफ़िडेंस प्रोजेक्ट की प्रमुख प्रोफ़ेसर हेयडी जे लॉर्सन और मशहूर लेखिका चिमामांडा नगोज़ी अडिची शामिल हैं.
इस सूची में इस बार दो भारतीय महिलाएं भी शामिल हैं, एक हैं मंजुला प्रदीप और दूसरी हैं मुग्धा कालरा. इन्हें किन वजहों से इस सूची में जगह मिली है, ये आपको जल्द ही हमारी कहानियों से जानने को मिलेगा.
इस सूची में आधी संख्या में आपको अफ़ग़ानिस्तान की महिलाएं दिखेंगी. इनमें से कुछ के वास्तविक नाम हमलोग प्रकाशित नहीं कर रहे हैं और सुरक्षा कारणों के चलते ही कुछ महिलाओं की तस्वीर भी इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं.
2021 में तालिबान की अफ़ग़ानिस्तान में वापसी से लाखों अफ़ग़ान महिलाओं का जीवन पूरी तरह से बदल गया है- तालिबान के शासन में लड़कियों के हायर सेकेंडरी एजुकेशन पर भी पाबंदी है. महिला मामलों के मंत्रालय को बंद कर दिया गया है और कई मामलों में महिलाओं को काम पर आने से मना कर दिया गया है. इस साल की सूची में इन महिलाओं के हौसले और उनकी उपलब्धियों को सेलिब्रेट किया जा रहा है.
साल 2021 की बीबीसी 100 वीमेन
लीमा आफ़शीद
अफ़ग़ानिस्तानकवियत्री
पुरस्कार विजेता कवियत्री और लेखिका हैं. उनकी कविता और लेख अफ़ग़ानी संस्कृति में पितृसत्तात्मक मानकों को चुनौती देते हैं.
पांच साल से ज़्यादा समय से लीमा स्वतंत्र पत्रकार और समाज विश्लेषक की भूमिका निभा रही हैं.
लीमा क़ाबुल यूनिवर्सिटी के कविता संघ, शेर-ए-दानेशग़ाह की सदस्य हैं. इस मंच ने महामारी के दौरान वर्चुअल कविता सत्र चलाए और स्वास्थ्य संकट के बावजूद अपने 200 से अधिक सदस्यों के बीच सामुदायिक भावना बनाए रखने में मदद की.
*अफ़ग़ानिस्तान में सरकार के पतन से लगा कि उसी दलदल में फिर से धंस गए हैं जिससे निकलने के लिए हमने 20 साल संघर्ष किया था. फिर भी मुझे उम्मीद है कि सघन जंगल में जैसे कोई डाल रोशनी का रुख़ कर ही लेती है हम भी वैसे ही उबर आएंगें.
हालिमा अडेन
केन्या मानवीय कार्यकर्ता एवं पूर्व मॉडल
हिजाब पहने वाली पहली सुपर मॉडल हालिमा अडेन सोमालियाई मूल की हैं लेकिन उनका जन्म केन्याई शरणार्थी कैंप में हुआ है. 2017 में उन्होंने दुनिया की सबसे बड़ी मॉडलिंग एजेंसी आईएमजी मॉडल्स के साथ अनुबंध किया. उन्होंने अपने अनुबंध की शर्तों में शामिल कराया कि उन्हें मॉडलिंग करते वक्त हिजाब उतारने के लिए नहीं कहा जाएगा.
ब्रिटिश वोग़, अल्यूरे और स्पोर्ट्स इलस्ट्रेटेड स्वीमशूट एडिशन के कवर पर हिजाब में छपने वाली वह पहली मॉडल हैं. अडेन बाल अधिकार के मुद्दों पर यूनिसेफ़ की दूत हैं जबकि मुस्लिम महिलाओं को पहचान दिलाने के लिए उनके बीच ज़ारुकता बढ़ाने के अभियान से भी जुड़ी हुई हैं.
2020 में उन्होंने ख़ुद को मॉडलिंग से दूर कर लिया. उन्होंने इसे अपनी इस्लामिक धार्मिक मान्यताओं के प्रतिकूल पाया. लेकिन इसके बाद भी फ़ैशन इंडस्ट्री पर और उसके बाहर भी उनका असर देखने को मिलता है.
*कोविड महामारी में यह साफ़ दिखा है कि फ्रंटलाइन हेल्थ वर्कर्स हमें सुरक्षित रखने के लिए बेहद मुश्किल परिस्थितयों का सामना कर रहे हैं. मैं प्रार्थना करती हूं कि हमलोग उनके त्याग की सराहना कर सकें. हम उनके प्रति कृतज्ञता के साथ दुनिया को फिर से पुरानी गति में ला सकते हैं.
ओलुयेमी एडेतिबा-ओरिजा
नाइजीरियाहेडफ़ोर्ट फ़ाउंडेशन की संस्थापिका
आपराधिक मामलों से जुड़ी वकील और लोक कल्याण के लिए कानूनी सेवाएं देने वाली, स्त्री-संचालित लॉ फर्म हेडफ़ोर्ट फाउंडेशन की संस्थापक हैं.
लागोस में उनकी चार सदस्यों वाली टीम जेलों का दौरा कर उनमें बंद ग़रीब और फ़र्ज़ी आरोपों के शिकार कैदियों की मदद करती हैं जिन्हें जमानत नहीं मिल पाती. विचाराधीन कैदियों की भी मदद की जाती है. (नाईजीरिया में जेल में बंद विचाराधीन कैदियों की तादाद करीब 70 फ़ीसद है). ओलुयेमी और उनकी टीम कम उम्र के अभियुक्तों की भी मदद करती है और उन्हें जेल से बाहर जीवन जीने का मौका मुहैया कराती है.
2018 में संस्था का काम शुरू हुआ था, अब तक उन्होंने 125 से ज़्यादा लोगों को मुफ़्त क़ानूनी मदद मुहैया कराई है जो कम गंभीर मामलों में जेल में बंद थे.
*दुनिया को फिर से नया करने के लिए हम सबको अपना रोल निभाना होगा. अच्छे कामों के बारे में बोलिए, उनकी वकालत और उनका समर्थन कीजिए जिससे दुनिया में आज़ादी और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.
मुक़दसा अहमदज़ई
अफ़ग़ानिस्तानसामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ता
इन्होंने पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान के नंगरहार प्रांत की 400 से अधिक युवा महिला कार्यकर्ताओं का एक नेटवर्क तैयार किया, जो आस-पास के ज़िलों में जाकर घरेलू हिंसा से पीड़ित लोगों की मदद कर सकें.
एक सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता के रूप में, मुक़दसा अहमदज़ई ने कोविड -19 महामारी के दौरान हो रहे बड़े पैमाने पर दुष्प्रचार का सामना करने में महिलाओं और उनके समुदायों की सहायता करने की ज़िम्मेदारी उठायी. वह अफ़ग़ानिस्तान की युवा संसद की पूर्व सदस्य हैं, जहां उन्होंने महिलाओं और बच्चों के अधिकारों के लिए काम किया.
उन्हें 2018 में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम ने एन-पीस पुरस्कार से सम्मानित किया. यह पुरस्कार उन महिलाओं को दिया जाता है जो शांति बहाली और संघर्ष के दौरान शांति स्थापित करने में उल्लेखनीय योगदान देती हैं.
*मैंने कभी इस तरह के अचानक परिवर्तन का अनुभव नहीं किया था - मानो पहले कोई सरकार ही नहीं थी. अब हमारी एकमात्र उम्मीद युवा पीढ़ी से है कि वे इस फासले को भरें और व्यवस्था में सुधार करें, लेकिन यह केवल अंतरराष्ट्रीय समर्थन से ही संभव होगा.
रादा अकबर
अफ़ग़ानिस्तानकलाकार
इस अफ़ग़ानी विजुअल आर्टिस्ट के काम के केंद्र में महिलाओं से द्वेष और उत्पीड़न दिखाई देता है. रादा अकबर ने कला का इस्तेमाल महिलाओं की आवाज़ को समाज में सामने लाने और कहीं ज़्यादा दिखाने के लिए किया है.
2019 से ही रादा अकबर हर साल अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के दिन सुपरवुमेन सिरीज़ की प्रदर्शनी का आयोजन करती हैं. इस आयोजन के ज़रिए वह अफ़ग़ानिस्तान के इतिहास में महिलाओं की केंद्रीय भूमिका का जश्न मनाती हैं. हाल तक, काबुल या किसी और जगह पर महिलाओं के इतिहास पर म्यूज़ियम बनाने की कोशिश कर रहीं थीं.
रादा मानती हैं कि अपनी कला के ज़रिए उन सामाजिक मान्यताओं की आलोचना कर पाती हैं जो राजनीतिक, आर्थिक और धार्मिक मान्यताओं के चलते महिलाओं की निंदा करती हैं.
*विश्व के नेताओं और चरमपंंथियों ने दशकों तक अफ़ग़ानिस्तान और उनके नागरिकों के साथ दुर्व्यवहार किया है, उपेक्षा की है. लेकिन हमने कभी भी प्रगतिशील देश के तौर पर काम करना बंद नहीं किया है. हम एक बार फिर से स्वतंत्र और समृद्ध अफ़ग़ानिस्तान में रहेंगे.
अबिया अकरम
पाकिस्तान विकलांग नेता
आबिया अकरम 1997 से विकलांगता अभियान में एक एक्टिविस्ट हैं. एक छात्रा के रूप में उन्होंने विशेष प्रतिभा आदान-प्रदान कार्यक्रम (स्टेप) की शुरुआत की थी. वह खुद भी शारीरिक रूप से विकलांग हैं.
वह पाकिस्तान की पहली महिला हैं जिन्हें कॉमनवेल्थ यंग डिसेबल्ड पीपुल्स फोरम के समन्वयक के रूप में नामांकित किया गया है. अकरम विकलांग महिलाओं के राष्ट्रीय फोरम की संस्थापक हैं. उन्होंने विकलांगों के अधिकार और समावेशी विकास के संयुक्त राष्ट्र समझौते को लागू करने के लिए अभियान भी चलाया है.
वह संयुक्त राष्ट्र के 2030 के एजेंडे और टिकाऊ विकास लक्ष्यों में भी विकलांगता को शामिल कराना चाहती हैं.
*कोविड-19 महामारी के बाद दुनिया को फिर से सामान्य बनाने के लिए हमें अपने समाजों के तमाम पहलुओं में सुधार की कोशिशें मिलकर करनी होंगी. उन्हीं के आधार पर आज का सच निर्मित होगा और नतीजे में हम और अधिक समावेशी विकास देख पाएंगें.
लीना आलम
अफ़ग़ानिस्तानअभिनेत्री
पुरस्कार विजेता टीवी, फ़िल्म और थियेटर अदाकारा और मानवाधिकार एक्टिविस्ट लीना आलम अफ़ग़ानिस्तान में नारीवादी टीवी कार्यक्रमों में अपनी प्रस्तुतियों से जानी जाती हैं. ऐसा ही एक शो है- शिरीन और फरखुंदा की हत्या- जिसमें एक अफ़ग़ानी औरत की दास्तान दिखाई गई है जिस पर क़ुरान को जलाने का गल़त इल्ज़ाम लगाया गया है और गुस्सैल मर्दों की भीड़ उसे खुलेआम पीट पीट कर मार डालती है.
आलम 1980 के दशक में अफ़ग़ानिस्तान से निकल भागीं और इन दिनों अमेरिका में रहती हैं लेकिन अपने मुल्क की दास्तानें सुनाती रहती हैं.
2009 में उन्हें अफ़ग़ानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र के सहायता मिशन का शांतिदूत नियुक्त किया गया था.
*इतने त्याग देकर और इतना ख़ून बहाकर हमें दशकों लग गए पुनर्निर्माण में. एक झटके में सब कुछ ढहता हुआ देखना दिल तोड़ देने वाला है. लेकिन लड़ाई जारी रहनी चाहिए, इस बार और मज़बूत बुनियादों के साथ.
डॉ. अलेमा
अफ़ग़ानिस्तानदार्शनिक एवं चिंतक
दर्शनशास्त्र और सामाजिक विज्ञान में प्रतिष्ठित विदुषी डॉ अलेमा, शांति के मंत्रालय में मानवाधिकार और सिविल सोसायटी की उपमंत्री थीं. वो स्वतंत्र महिला राजनीतिक भागीदारी कमेटी की संस्थापक हैं और स्त्री अधिकारों की एक्टिविस्ट हैं.
जर्मनी से दर्शनशास्त्र में पीएचडी कर चुकीं डॉ अलेमा को संकटों के विश्लेषण का 20 साल से ज्यादा का अनुभव है.
उन्होंने जर्मन-अफ़गान अंतरराष्ट्रीय संबंधों और अफ़ग़ानिस्तान में महिला सशक्तीकरण के बारे में किताबें लिखी हैं. शरणार्थियों, प्रवासियों और विस्थापितों पर विशेष फ़ोकस के साथ वो मानवाधिकार कानूनों की पेशेवर ट्रेनर और मॉडरेटर भी हैं.
*मेरा सपना आज़ाद और लोकतांत्रिक अफ़ग़ानिस्तान का है जहां आधुनिक संविधान के आधार पर नागरिक अधिकारों की हिफ़ाज़त की जा सके और जहां जीवन के हर क्षेत्र में बराबरी के साथ भागीदारी के औरतों के अधिकारों की गारंटी मिले.
सेवडा अल्तुनोलुक
तुर्कीपेशेवर गोलबॉल खिलाड़ी
जन्म से दृष्टिबाधित, सेवडा अल्तुनोलुक एक पेशेवर गोलबॉल खिलाड़ी हैं (गोलबॉल एक ऐसा खेल है जिसमें दृष्टिबाधित या आंखों पर पट्टी बांधे तीन खिलाड़ियों की टीम अपनी विरोधी टीमों के जाल में घंटियों वाली गेंद फेंकती है).
आम तौर पर दुनिया की सर्वश्रेष्ठ गोलबॉल खिलाड़ी मानी जाने वाली, सेवडा दो पैरालंपिक खेलों, दो विश्व चैंपियनशिप और चार यूरोपीय चैंपियनशिप में सबसे अधिक गोल करने वाली खिलाड़ी रही हैं. अल्तुनोलुक ने तुर्की की महिला टीम को रियो 2016 और टोक्यो 2020 में पैरालंपिक स्वर्ण जीतने में मदद की.
अनातोलिया के टोकट में जन्मी सेवडा ने अंकारा में शारीरिक शिक्षा की डिग्री प्राप्त की है.
*विकलांगता को बाधा के रूप में नहीं, बल्कि आत्म-अभिव्यक्ति के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए.
लाइब्रेरियन और पुस्तक प्रेमी, वाहिदा अमीरी एक क़ानून स्नातक और लगातार विरोध प्रदर्शन करने वाली महिला हैं. जब तालिबान ने अफ़ग़ानिस्तान में सत्ता संभाली और वह अपने पुस्तकालय में काम पर नहीं जा पायीं तब वह काबुल की सड़कों पर उतर गईं. उन्होंने असंख्य अन्य महिलाओं के साथ अफ़ग़ानिस्तान की महिलाओं के काम और शिक्षा के अधिकारों का समर्थन करने का अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह करते हुए मार्च निकाला.
तालिबान ने जब से विरोध को गैरक़ानूनी घोषित कर दिया है, अमीरी अन्य महिलाओं के साथ पढ़ने और चर्चा को बढ़ावा देने में जुट गई हैं.
उनकी लाइब्रेरी 2017 से चल रही थी और अमीरी का कहना है कि अपनी किताबों के बिना उन्होंने अपनी पहचान खो दी है.
*दुनिया हमारा इंसानों की तरह सम्मान नहीं करती. लेकिन जैसे-जैसे अफ़ग़ानिस्तान विनाश के दौर से गुजर रहा है, हमलोग विरोध, न्याय की मांग और पुस्तक पढ़ने को प्रोत्साहित करने के माध्यम से उम्मीद को पुनर्जीवित कर रहे हैं.
उत्सर्जन मुक्त परिवहन की ओर बदलाव में तेजी लाने के लिए एक जलवायु विशेषज्ञ के रूप में काम कर रहीं, मोनिका अराया ने अमेरिकी महाद्वीप के देशों और यूरोप में टिकाऊ विकास के अभियानों को गाइड किया है. इनमें कोस्टा रिका लिम्पिया नाम का नागरिक अभियान भी शामिल है जिसकी बदौलत उनके देश को अक्षय ऊर्जा में अग्रणी देश के रूप में अपनी पहचान को बहाल रखने में मदद मिली है.
परिवहन मुद्दों पर संयुक्त राष्ट्र की एक उच्चस्तरीय कमेटी- ‘चैंपियन फॉर क्लाइमेट ऐक्शन’ में अराया विशेष सलाहकार हैं. वो शून्य उत्सर्जन आवाजाही से जुड़े अभियान, ‘रूटज़ीरो’ की भी सलाहकार हैं. और क्लाइमेट वर्क्स फाउंडेशन में विशिष्ट फैलो हैं.
उनकी टेडटॉक्स को करीब चालीस लाख व्यूज़ मिले हैं और 31 भाषाओं में उनका अनुवाद हुआ है. 2016 में अराया, दुनिया के सबसे बड़े स्त्री-चालित अंटार्कटिका अभियान में भी शामिल हुई थीं.
*जो कुछ भी हमें सामान्य दिखता है उसे बदलने की जरूरत है. पेट्रोल और डीजल की अपनी मांग में हमें कटौती हर हाल मे करनी होगी और इसी से हमें दूसरे ज्यादा जरूरी सामाजिक बदलावों के लिए राजनीतिक समर्थन हासिल करने में भी मदद मिलेगी.
नताशा असग़र
ब्रिटेनसांसद, वेल्स
उन्होंने हाल में तब इतिहास बनाया था जब वो सेनेड या वेल्श की 1999 में स्थापित संसद में इस साल, पहली गैर-गोरी महिला सांसद के रूप में चुनी गई थीं.
कंजरवेटिव पार्टी की सदस्य और साउथ वेल्स पूर्व से संसद की क्षेत्रीय सदस्य नताशा असग़र परिवहन और प्रौद्योगिकी की शेडो मिनिस्टर यानी आभासी मंत्री हैं. वो एक ऐसा यात्रा कार्ड लॉन्च करने की इच्छुक हैं जो वेल्स में स्थानीय लोगों और टूरिस्टों को सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल के लिए प्रेरित करेगा और जिससे आर्थिक वृद्धि को गति मिलेगी.
राजनीति में आने से पहले उन्होंने एक बैंकर, टीवी प्रस्तोता और रेडियो डीजे के रूप में काम किया है. उन्होंने दो किताबें भी लिखी हैं.
*एकजुट होकर, हम नयी दुनिया के कठिन रास्ते का सफ़र करेंगे और उन अवसरों को हाथोंहाथ लेंगे जिनके जरिए हम आइंदा अपने जीने और काम करने के तरीकों का बेहतरीन उपयोग कर सकें.
ज़ुहाल अतमार
अफ़ग़ानिस्तानउद्यमी- गुल ए मर्सल रिसाइक्लिंग
अफ़ग़ानिस्तान में रद्दी काग़ज़ों को रिसाइकिल करने वाली पहली फ़ैक्ट्री, गुल-ए-मुरसल, व्यवसायी ज़ुहल अतमार ने लगाई थी. अर्थशास्त्र और बिजनेस में पढ़ाई की पृष्ठभूमि वाली ज़ुहाल की 2016 में काबुल में लगाई फ़ैक्ट्री को औरतें ही संभालती हैं. यहां 100 लोग काम करते हैं जिनमें से 30 प्रतिशत औरते हैं. वे बुनियादी कामों से लेकर मार्केटिंग तक में शामिल हैं.
गैर सरकारी संगठनों से रद्दी और फालतू काग़ज़ इकट्ठा किया जाता है और हर सप्ताह करीब 35 टन कागज़ रिसाइकिल कर उनसे टिश्यू पेपर बनाया जाता है. वो फिर पूरे देश में बेचा जाता है.
अतमार मुखर होकर ये सवाल उठाती रही हैं कि अफ़ग़ानिस्तान मे अपनी इकाई लगाने और बिज़नेस चलाने के लिए वित्तीय मदद हासिल कर पाना औरतों के लिए कितना मुश्किल होता है.
*कैसा दिखता है भविष्य? युवाओं और औरतों के सपने, इरादे, और उम्मीदें नष्ट होती जा रही हैं.
मार्सेलीना बाउतिस्ता
मेक्सिकोयूनियन लीडर
मार्सेलीना पहले खुद भी घरेलू कामगार थी. अब वो मेक्सिको के घरेलू कामगारों के लिए सपोर्ट और ट्रेनिंग सेंटर (सीएसीईएच) की निदेशक हैं. 21 साल पहले उन्होंने इसकी स्थापना की थी. वो अधिकारों की हिफ़ाज़त के लिए मुहिम चलाती हैं. जैसे कि सही पगार और बीमार पड़ने पर छुट्टी, जो दूसरे कामगारों को भी मिलती है, और उनका सामाजिक दर्जा सुधारने के लिए भी.
श्रमिकों को शिक्षा, नियोक्ता और सामुदायिक सदस्यों से जोड़ने का काम उनकी इनिशिएटिव करती है. बाउतिस्ता ने उस अभियान में काफ़ी सक्रिय थीं जिसके बाद मेक्सिको की सरकार अंतरराष्ट्रीय श्रम समझौतों में शामिल हुई. जिसके चलते घरेलू कामगारों को शोषण, हिंसा और असुरक्षित कामकाजी स्थितियों से बचाना संभव हुआ है.
2010 में उन्हें जर्मनी के फ्रीडरिश-एबर्ट-श्टिफटुंग की ओर से अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार पुरस्कार भी मिला था.
*दुनिया को बदलने का मतलब है लाखों घरेलू कामगारों के हालात को बदलना, ज़्यादातर औरतें, जो घर पर काम करती हैं जबकि दूसरे पेशेवर तरक्की कर जाते हैं. सामाजिक असमानता तभी खत्म होगी जब घरेलू काम को वो पहचान मिलेगी जिसका वो हकदार है.
क्रिस्टल बयात
अफ़ग़ानिस्तान कार्यकर्ता
सामाजिक एक्टिविस्ट और मानवाधिकार वकील क्रिस्टल बयात 2021 में तालिबानी क़ब्ज़े के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शनों में प्रमुखता से नज़र आई थीं. 19 अगस्त यानी अफ़ग़ानिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के मौक पर काबुल में उन्होंने एक विरोध प्रदर्शन के आयोजन में मदद भी की थी.
अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के नियंत्रण के चलते में पढ़ाई रुकने से पहले बयात ने राजनीतिक प्रबंधन में पीएचडी शुरू कर दी थी.
वह फ़िलहाल अमेरिका में हैं जहां वो अफ़ग़ानी मनवाधिकार उपलब्धियों को संरक्षित रखने की लड़ाई जारी रखे हुए हैं. उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही अपनी पीएचडी पूरी कर लेंग और एक किताब भी लिखेंगी.
*अंततः मैं अफ़ग़ानिस्तान में भविष्य के किसी भी लोकतांत्रिक बदलाव का हिस्सा बनना चाहती हूं. मेरा सपना है कि संयुक्त राष्ट्र में देशों को संबोधित करूं क्योंकि मैं मानती हूं कि दुनिया को ये सुनना चाहिए कि असली अफ़ग़ानी, ख़ासकर औरतें, क्या कहना चाहती हैं.
रज़िया बराक़ज़ई
अफ़ग़ानिस्तान प्रदर्शनकारी
कई साल तक राष्ट्रपति भवन में विभिन्न ज़िम्मेदारियों के साथ काम करने के बाद तालिबान के सत्ता संभालने के बाद बराक़ज़ई ने खुद को बेरोज़गार पाया.
तब से वह काबुल में निकलने वाले विरोध मार्च में सक्रिय तौर पर शामिल रहीं. इन विरोध प्रदर्शनों में महिलाएं कामऔर शिक्षा का अधिकार मांग रही हैं. वह #AfghanWomenExist स्लोन के पीछे की महिलाओं में शामिल थीं, यह नारा डर के चलते अफ़ग़ान महिलाओं के सोशल मीडिया से दूर होने के तथ्य को उजागर करता है.
बराक़ज़ई के पास क़ानून और राजनीति विज्ञान में डिग्री है, वह एमबीए भी कर चुकी हैं. बीबीसी को लिखे पत्र में उन्होंने विरोध प्रदर्शनों से जुड़े अपने अनुभवों के बारे में बताया है, "गुलामी में जीने से मरना बेहतर है."
*देश की शिक्षित और युवा-ख़ास तौर पर अफ़ग़ानिस्तान की बहादुर योद्धा महिलाएं एक दिन आज़ादी का झंडा लहराएंगी. मैं सड़कों पर होने वाले प्रदर्शनों में हर दिन इसे देखती हूं.
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नीलोफ़र बयात
अफ़ग़ानिस्तान व्हीलचेयर बॉस्केटबॉल खिलाड़ी
राष्ट्रीय व्हीलचेयर बॉस्केटबॉल की कप्तान और विकलांग महिलाओं की आवाज़ नीलोफ़र बयात तालिबान से बचने के लिए अफ़ग़ानिस्तान छोड़ चुकी हैं. वह और उनके पति जो खुद व्हीलचेयर खिलाड़ी हैं- दोनों इंटरनेशनल रेड क्रॉस के साथ काम किया है.
जब वह दो साल की थीं तब एक रॉकेट ने उनके घर को निशाना बनाया, जिसमें उनके भाई की मौत हो गई और उनकी रीढ़ की हड्डी की क्षतिग्रस्त हो गई. बयात ने बॉस्केटबॉल का पहला मैच काबुल के मध्य में ओपन कोर्ट में खेला था. यह अफ़ग़ानिस्तान की महिला खिलाड़ियों के लिए अहम मोड़ साबित हुआ. इसके बाद वह अपनी मातृभूमि से भागे शरणार्थियों के लिए एक आवाज़ बन गई हैं और उन्होंने अफ़ग़ान महिलाओं के लिए एक संघ की स्थापना की.
बयात को उम्मीद है कि एक दिन फिर वह बॉस्केटबॉल खेलेंगी.
*मुझे उम्मीद है कि अफ़ग़ानिस्तान में खेल ख़त्म हो चुका है और हम एक दूसरी युद्ध की क़ीमत नहीं चुका सकते हैं. मुझे अपने लोगों के चेहरे पर एक वास्तविक मुस्कान देखने की उम्मीद है.
जोस ब्वॉयज
ब्रिटेनआर्किटेक्ट
जोस ब्वॉयज विकलांग कलाकारों की मदद से निर्माण के तरीकों और आकारों में नवोन्मेष लाने के लिए चलाए जा रहे डिसऑर्डिनेरी आर्किटेक्चर प्रोजेक्ट में सह-निदेशक हैं.
अपनी एक्टिविज़्म को आर्किटेक्ट के अपने काम से जोड़कर, जोस ब्वॉयज ने 1980 के दशक में ‘मैट्रिक्स फेमेनिस्ट डिजाइन कलेक्टिव’ की स्थापना में सहयोग किया था. वो ‘मेकिंग स्पेसः वीमन एंड द मैन मेड एन्वायरेनमेंट’ किताब की सह लेखिका हैं. उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में अकादमिक के रूप में काम करते हुए वास्तुशिल्प डिजाइन में प्रचलित मान्यताओं को रचनात्मक रूप से चुनौती देने के लिए नारीवादी स्थानिक अभ्यासों को खंगाला है.
40 साल के अपने करियर में उन्होंने इस बारे मे ज़ागरूकता पैदा की है कि कैसे हर रोज़ सामाजिक और भौतिक अभ्यासों के इस्तेमाल से विकलांग लोगों की मदद की जा सकती है.
*हमें पिछले एक साल के दरमियान विकलागों और हाशिए के अन्य लोगों के विविध अनुभवों पर ध्यान देना चाहिएः इसे एक रचनात्मक उत्प्रेरक की तरह देखते हुए अपने आसपास की जगहों को इस तरह तैयार करना चाहिए कि वे सामूहिक देखरेख और पारस्परिक निर्भरता की जगहें बन उठें.
कैथरीन कोरलैस
आयरलैंडशौकिया इतिहासकार
शौकिया इतिहासकार कैथरीन ने गालवे में बॉन सिकोर्स मदर एंड बेबी होम में 796 बच्चों की मौत की जांच की थी. सालों की तकलीफ़देह रिसर्च से अनब्याही माओं के पूर्वी आयरिश संस्थान के एक ठिकाने पर मिली सामूहिक कब्र का पता चल पाया था. 1920 से 1950 के दरमियान सैकड़ों नवजात शिशु ग़ायब हो गए थे. और उनको दफ़न किए जाने का कोई सबूत नहीं मिला था.
इस साल, अधिकांशतः कैथोलिक ननों द्वारा संचालित इन संस्थानों के बारे में, लंबे समय से प्रतीक्षारत रिपोर्ट में “नवजात बच्चों की मृत्यु के भयावह स्तर” का पता चला था. इसके बाद आयरिश सरकार ने माफी भी मांगी थी.
कोरलेस को अपनी असाधारण मानव सेवा के लिए बार ऑफ आयरलैंड ह्युमन राइट्स अवार्ड मिला है.
*अगर मैं नई दुनिया बना सकूं तो मैं उससे “शेम” यानी “शर्म” शब्द को पौंछ दूंगी. शब्दकोष में उसे इस तरह परिभाषित किया गया है कि “ये अपमान की दर्दभरी भावना है, ये भावना कि आपका समूचा वजूद ही ग़लत है.”
फ़ैज़ा दरख़ानी
अफ़ग़ानिस्तानपर्यावरण कार्यकर्ता
अफ़ग़ानिस्तान में जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में काम करे चुनिंदा लोगों में से एक फ़ैज़ा दरख़ानी एक असिस्टेंट प्रोफ़ेसर हैं और राष्ट्रीय पर्यावरण बचाव एजेंसी की पूर्व निदेशक हैं. महिला अधिकारों की भी वो प्रखर प्रवक्ता हैं.
दरख़ानी ने यूनवर्सिटी पुत्र मलेशिया से लैंडस्केप आर्किटेक्चर में एमए किया है. टिकाऊ अर्बन लैंडस्केप प्रबंधन और सघन आबादी वाले शहरों में खाद्य उत्पादन के लिए वर्टिकल फ़ार्मिंग जैसी नवोन्मेषी तकनीकों पर उन्होंने शोधपत्र लिखे हैं.
वो पर्यावरणीय सुरक्षा और स्त्री केंद्रित टिकाऊ विकास कार्यक्रमों के बारे में जनता को ज़ागरूक करने पर यकीन रखती हैं.
*भीड़ से अलग होकर खड़े होना एक साहसी फ़ैसला है. आपको अपने सपनों को हक़ीक़त में बदलने के लिए काम करते रहना चाहिए. मेरा सपना है एक साफ़ और सुरक्षित पर्यावरण, जो युद्ध से मुक्त हो और हर किस्म के प्रदूषण से.
जेंडर, प्रोद्यौगिकी और मानवाधिकारों की विशेषज्ञ, अज़मिना द्रोडिया मौजूदा समय में डेटिंग ऐप बंबल की सुरक्षा नीति प्रमुख के तौर पर काम कर रही हैं. उन्होंने सोशल मीडिया पर उत्पीड़न के मामलों में ठोस कार्रवाई करने की मांग करते हुए एक अभियान चलाया था जिसे 200 से ज़्यादा हाई-प्रोफ़ाइल महिलाओं का समर्थन मिला था.
वह टॉक्सिक ट्वीटर: महिलाओं के साथ ऑनलाइन हिंसा और उत्पीड़न के मामले की लेखिका हैं. यह वर्ग, नस्ल के साथ जेंडर आधारित दुर्व्यवहार और भेदभाव पर आधारित रिपोर्ट है.
द्रोडिया पहले वर्ल्ड वाइड वेब फाउंडेशन में जेंडर और डेटा राइट्स पर काम कर रही थीं. इसके अलावा विभिन्न टेक कंपनियों के साथ काम कर वह महिलाओं और उपेक्षित समुदायों के लिए ऑनलाइन की दुनिया को बेहतर बनाने का काम कर रही थीं.
*मैं ऐसी दुनिया चाहती हूँ जहां ऑनलाइन की दुनिया महिलाओं की सोच समझ के मुताबिक हो. एक ऐसी दुनिया जहां महिलाएं अपनी सोच समझ और अपनी अलग पहचान के साथ इस स्पेस का एकसमानता के साथ बिना किसी डर के स्वतंत्र रुप से इस्तेमाल कर सकें.
पश्ताना दुर्रानी
अफ़ग़ानिस्तानशिक्षिका-लर्न अफ़ग़ानिस्तान
लर्न अफ़ग़ानिस्तान की संस्थापिका और कार्यकारी निदेशक पश्ताना दुर्रानी लड़कियों के अधिकारों पर केंद्रित शिक्षा के नवोन्मेष को समर्पित एक अध्यापिका हैं. इस संस्था ने कंधार में स्कूल स्थापित किए हैं और शिक्षकों की ट्रिंग और छात्रों को मेंटरशिप उपलब्ध कराई है.
रूमी ऐप के ज़रिए संगठन, लड़कियों को अकादमिक संसाधनों, वीडियो और शैक्षिक खेलों तक पहुंच मुहैया कराता है. वो ग्रामीण इलाकों में महिलाओं को दाई के रूप में ट्रेनिंग भी देता है.
दुर्रानी संयुक्त राष्ट्र में अफ़ग़ानी युवा प्रतिनिधि हैं और अफ़ग़ान लड़कियों के लिए शिक्षा तक पहुंच बनाने की कोशिशों के लिए मलाला फंड एजुकेशन चैंपियन अवार्ड जीत चुकी हैं.
*हैरानी होती है कि दुनिया हम लोगों को, जो कि हम हैं उसके लिए कितना नीचे गिरा देना चाहती है. लेकिन हम कितनी भी चोटिल, भयभीत और ज़ख़्मी क्यों न हो जाएं, हम लोग डटी रहेंगी- सड़क कितनी भी लंबी क्यों न हो.
नाजला एलमनगौश
ब्रिटेन विदेश मंत्री, लीबिया
इस साल नियुक्त लीबिया की पहली महिला विदेश मंत्री एक राजनयिक और वकील भी हैं. 2011 में लीबियाई क्रांति के दौरान, नाजला एलमनगौश राष्ट्रीय संक्रमण कालीन परिषद का हिस्सा थीं, और उन्होंने सिविल सोसायटी संगठनों के साथ संबंध बनाने पर काम किया.
वह यूनाइटेड स्टेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ़ पीस में लीबिया की प्रतिनिधि थीं और उन्होंने सेंटर फॉर वर्ल्ड रिलीजन, डिप्लोमेसी एंड कॉन्फ्लिक्ट रेजोल्यूशन में शांति बहाली और क़ानून संबंधी कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से भाग लिया. उनके देश में आपसी राजनीतिक कलह ने एलमनगौश पर इस्तीफ़े के लिए दबाव डाला और उन्हें हाल ही में यात्रा करने से रोक दिया गया है.
बेनग़ाज़ी विश्वविद्यालय से क़ानून की डिग्री प्राप्त है और वह जॉर्ज मेसन विश्वविद्यालय से संघर्ष विश्लेषण और समाधान में पीएचडी हैं.
*दुनिया 2021 में बहुत विकसित हुई है - मैं चाहती हूं कि हमारे जीवन को अर्थपूर्ण और उद्देश्य परक बनाने के लिए और समग्र रूप से मानवता की बेहतर सेवा के लिए दुनिया फिर से शुरूआत करे.
शीला एनसांडोस्ट
अफ़ग़ानिस्तानशिक्षिका
महिलाओं और लड़कियों के शिक्षा के अधिकारों के बारे में ज़ागरुकता बढ़ाना अफ़ग़ान शिक्षिका शीला एनसांडोस्ट की प्राथमिकता है.
एनसांडोस्ट के पास धार्मिक अध्ययन की डिग्री है. वह राजनीतिक और वह नागरिक मामलों में महिलाओं की भूमिका को बढ़ावा देने में सक्रिय रहीं. काम करने और सीखने संबंधी महिलाओं के अधिकारों पर भी वह मीडिया में बात करती रहीं. उन्होंने हाल ही में काबुल में एक सार्वजनिक प्रदर्शन में हिस्सा लिया जहां वह अपने देश में महिला उत्पीड़न के विरोध कफ़न जैसे सफ़ेद कपड़ा पहन रखा था.
शिक्षिका के तौर पर वह अफ़ग़ानिस्तान की विभिन्न महिला संगठनों की सक्रिय सदस्य रही हैं.
*मैं महिलाओं को राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक मामलों में शामिल देखना चाहती हूं. इसके अलावा मैं महिलाओं की शिक्षा हासिल करने के अधिकार का कायम रखना चाहती हूं जबकि महिलाओं और अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ हिंसा और असमानताओं को मिटाना चाहती हूं.
सईदा एतेबारी
अफ़ग़ानिस्तानज्वैलरी डिज़ाइनर
सईदा एक उद्यमी हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जानीमानी जेवरात डिज़ाइनर और आभूषण निर्माता हैं.
उनका काम वाशिंगटन में स्मिथसोनियन में प्रदर्शित है और उनकी मातृभूमि अफ़ग़ानिस्तान की पारंपरिक शैलियों से प्रेरित है जिसमें स्थानीय रत्नों और नमूनों का इस्तेमाल किया गया है.
एक साल की थी, तभी उन्हें सुनाई देना बंद हो गया था. एक शरणार्थी शिविर में सेरेब्रल मेनिनजाइटिस की चपेट में आने के बाद वो बहरेपन की शिकार हो गई थीं. उनके पिता ने तलाश कर बहरों के एक स्कूल में उनका दाख़िला कराया जहां से वो पढ़कर निकलीं. उसके बाद एतेबारी अफ़ग़ान कला और वास्तुशिल्प के टॉरक्वॉयज़ माउंटेन इन्स्टीट्यूट से जुड़ीं और वहां उन्होनें ज्वलरी डिज़ाइन में विशेषज्ञता हासिल की.
*औरतें अब बेरोज़गार हैं और सिर्फ़ आदमी ही काम कर सकते हैं. हुकूमत बदल गई है, अफ़ग़ानिस्तान के बेहतर भविष्य को लेकर मेरी उम्मीदें, निराशा में बदल गई हैं.
सहर फ़ेतरात
अफ़ग़ानिस्तान नारीवादी कार्यकर्ता
लैंगिक रूढ़िवादिता के ख़िलाफ़ अनेक विरोधों के पीछे की ताक़त, नारीवादी कार्यकर्ता सहर फ़ेतरत पहले तालिबानी शासन के समय ईरान और पाकिस्तान में एक युवा शरणार्थी थी. वह 2006 में काबुल लौटीं और किशोरी के रूप में नारीवादी सक्रियता को अपनाया.
वह लेखन और फिल्म निर्माण के माध्यम से कहानी में नारीवाद को शामिल करती हैं जैसे कि सड़क पर उत्पीड़न विषय पर बना उनका वृत्तचित्र, डू नॉट ट्रस्ट माई साइलेंस (2013). फ़ेतरत ने अफ़ग़ानिस्तान में यूनेस्को की शिक्षा इकाई और ह्यूमन राइट्स वॉच के साथ काम कर चुकी हैं.
उन्होंने सेंट्रल यूरोपियन यूनिवर्सिटी से महत्वपूर्ण जेंडर स्टडी में मास्टर डिग्री हासिल की और वर्तमान में किंग्स कॉलेज लंदन के वार स्टडीज़ विभाग में पढ़ रही हैं.
*मैं एक ऐसा दिन देखने की उम्मीद करती हूं जब लड़कियों की शिक्षा तक पहुंच उनका बुनियादी अधिकार हो, न कि उन्हें उसके लिए लड़ना पड़े. मैं अफ़ग़ान लड़कियों को उनकी मातृभूमि के पहाड़ों से भी ऊंचे सपनों के लिए काम करते हुए देखना चाहती हूं.
समाजसेवी, व्यवसायी और महिलाओं और लड़कियों के लिए वैश्विक हिमायती मेलिंडा फ्रेंच गेट्स दुनिया के सबसे बड़े समाजसेवी संगठनों में से एक — बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन की सह-अध्यक्षता करते हुए इस संगठन की दिशा और प्राथमिकताएं निर्धारित करती हैं.
वह महिलाओं और परिवारों की सामाजिक प्रगति के लिए काम करने वाली निवेश कंपनी पिवॉटल वेंचर्स की संस्थापक और सबसे ज़्यादा बिकने वाली किताब द मोमेंट ऑफ़ लिफ्ट की लेखिका भी हैं.
फ्रेंच गेट्स ने कंप्यूटर साइंस में डिग्री लेने के बाद ड्यूक यूनिवर्सिटी से एमबीए किया है. अपने परिवार और परोपकारी कार्यों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कंपनी छोड़ने से पहले एक दशक तक उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट में मल्टीमीडिया उत्पादों को विकसित करने का काम किया.
*कोविड-19 महामारी ने दुनिया भर में गहराई से व्याप्त असमानताओं को उजागर किया और बढ़ाया है. इससे उबरने के हमारे प्रयासों के केंद्र में महिलाओं और लड़कियों को रखने से वर्तमान की तकलीफ़ें कम होने के साथ ही भविष्य की मजबूत नींव पड़ेगी.
फ़ातिमा गिलानी
अफ़ग़ानिस्तान शांति वार्ताकार
तालिबान के साथ 2020 के शांति वार्ताकारों में शामिल चार महिलाओं में से एक, फ़ातिमा गिलानी एक "निष्पक्ष राजनीतिक समझौता" करवाने की कोशिश कर रही हैं. वह एक प्रमुख राजनीतिक नेता और कार्यकर्ता हैं, जो पिछले 43 वर्षों से लोगों के कल्याण के लिये कार्य कर रही हैं.
वह 1980 के दशक के सोवियत क़ब्ज़े के ख़िलाफ़ अफ़ग़ान विरोध के महिला चेहरों में से एक थीं और लंदन में निर्वासन के दौरान अफ़ग़ान मुजाहिदीन की प्रवक्ता थीं. 2001 के अमेरिकी नेतृत्व वाले हमले के बाद वह अफ़ग़ानिस्तान लौट आईं और नये अफ़ग़ान संविधान को लिखने में मदद की.
वे 2005 से 2016 तक अफ़ग़ान रेड क्रिसेंट सोसाइटी की अध्यक्ष थीं, जिसके बोर्ड में वह अभी भी शामिल हैं.
*मैं एक सार्थक राष्ट्रीय संवाद की आशा करती हूं जो एक वास्तविक राष्ट्र निर्माण का मार्ग प्रशस्त कर सके.
कैरोलीना गार्सिया
नेटफ़्लिक्स-निर्देशक
वेब स्ट्रीमिंग की विशाल कंपनी नेटफ़्लिक्स में मौलिक सीरीज विभाग की निदेशक, कैरोलीना गार्सिया अर्जेटीना में पैदा हुई और कैलिफोर्निया में पली बढ़ीं. वो एक प्रशिक्षित नृत्यांगना और गायिका हैं. ट्वेंटियथ सेंचुरी फॉक्स में इंटर्न के रूप में शुरुआत करते हुए उन्होंने मनोरंजन उद्योग में एक लंबा रास्ता तय कर अपना मुकाम बनाया है.
क्रिएटिव मामलों की अधिकारी के रूप में नेटफ्लिक्स की बहुत सी हिट सीरीजों की देखरेख का जिम्मा उन पर है. जिनमें स्ट्रेंजर थिंग्स, द चिलिंग एडवेंचर्स ऑफ सबरीना, 13 रीजन्स व्हाई, एटिपिकल और रेजिंग डियोन जैसी वेब सीरिज शामिल हैं.
हॉलीवुड में अग्रणी भूमिकाओं में लातिन अमेरिका से चुनिंदा पेशेवर ही हैं, गार्सिया उनमें से एक हैं. वो लातिन दुनिया का पर्दे पर प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए काम करती हैं और उनकी कहानियां को हाइलाइट करती हैं. अमेरिकी आबादी के हर पांच में से एक व्यक्ति में जातीयता का प्रतिनिधित्व है.
*पिछले कुछ साल हम सब पर बहुत भारी गुज़रे हैं, लेकिन जिंदगी छोटी है- तो अपना कीमती समय डरते हुए क्यों खर्च करें? मेरी नानी कहती है, जिंदगी तो जीने के लिए होती है, और नानी की बात पर गौर करने का वक्त आ गया है.
सघी घहरेमान
ईरानकवियत्री
ईरानी-कनाडाई लेखक और ईरानी क्वीर संगठन (आईआरक्यूओ) की सह-संस्थापक और अध्यक्ष.
टोरंटो स्थित यह संगठन ईरान में रहने वाले या जबरन निर्वासित समलैंगिक महिला और पुरुष, उभयलिंगी और ट्रांसजेंडर लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए काम करता है. साथ ही ईरान में समलैंगिक अधिकारों के उल्लंघन की निगरानी भी करता है.
घहरेमान ने 2010 में ईरानी "क्वीर साहित्य" पर ध्यान केंद्रित करते हुए गिलगामिशान बुक्स की स्थापना की. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसित संपादक और कविता के चार खंडों की रचयिता, साथ ही अनेक लेख लिखने वाली घहरेमान के काम को विषमलैंगिकता के विचार को चुनौती देने के लिए जाना जाता है. विषमलैंगिकता के विचार के अनुसार लैंगिक भूमिकाएं जैविक सेक्स द्वारा परिभाषित की जाती हैं और विषम लैंगिकता सामान्य यौन व्यवहार है.
*जब दुनिया को फिर से ठीक किया जाए, तो इसमें हम में से हर एक को शामिल किया जाना चाहिए. दुनिया केवल तभी कोविड-मुक्त हो सकती है जब "हम" सभी विशेष सुविधाओं में समलैंगिक यानी एलजीबीटीक्यूआईए प्लस लोगों को शामिल करेंगे.
घावघा
अफ़ग़ानिस्तानसंगीतकार
प्रतिभाशाली गायिका, गीतकार और संगीतकार घावघा ने पांच साल से ज़्यादा समय तक संगीत उद्योग में काम किया है. उनके गाने अक्सर अफ़ग़ानी लड़कियों और औरतों के बारे में होते हैं और उनके अटूट प्रशंसक हैं. उनके गीत मौजूदा हालात का विरोध करते हैं.
2019 में, उन्होंने रमीन मज़हर की लिखी कविता ‘तालिबान के बीच मैं तुम्हें चूमता हूं’ को संगीत दिया था. ये फौरन ही वायरल हो गई. उनका सबसे हाल का सिंगल अल्बम, तबस्सुम उन बच्चों को समर्पित है जिनके सपने लड़ाई ने मिटा दिए.
घावघा कहती हैं कि वो संगीत इसलिए करती हैं क्योंकि ‘मेरे देश में अंतहीन युद्धों ने कभी मुझे चैन से रहने नहीं दिया.’ और उनके गीत इस वेदना की झलक दिखाते हैं.
*मेरी मातृभूमि का आसमान बहुत सारी रंगबिरंगी पतंगों से सजा हुआ है जैसे कि वहां मिसाइलें तड़क रही हों. मैं अपने लोगों के बारे में सोचती हूं, हर मिनट हर घड़ी, ख़ासकर औरतों और बच्चों के बारे में. उनकी हिफ़ाज़त का डर मेरा अनवरत साथी है.
एंजेला घायोर
अफ़ग़ानिस्तानहेरात ऑनलाइन स्कूल की संस्थापिका शिक्षक
लगभग 1,000 छात्र और 400 से अधिक स्वयंसेवी शिक्षक अब शिक्षक एंजेला घायोर द्वारा स्थापित द हेरात ऑनलाइन स्कूल का हिस्सा हैं. जब तालिबान ने अफ़ग़ान लड़कियों और युवतियों को घर पर रहने का निर्देश दिया, तब घायोर ने कदम उठाने का फैसला किया, और उनका ऑनलाइन स्कूल अब ऑनलाइन प्रोग्राम टेलीग्राम और स्काइप के माध्यम से गणित और संगीत से लेकर खाना पकाने और पेंटिंग तक की 170 से अधिक विभिन्न कक्षाएं आयोजित कर रहा है.
जब 1992 में गृहयुद्ध छिड़ा, तब घायोर खुद हेरात से ईरान चली गईं और परिवार की अस्थायी वीज़ा स्थिति के कारण वह पांच साल तक स्कूल नहीं जा सकीं.
बाद में उन्होंने सेकेंडरी स्कूल शिक्षिका के रूप में योग्यता प्राप्त की, उन्होंने कई बार यहां से वहां प्रवास किया और अब ब्रिटेन में बस गई हैं.
*मैं बुराई की तथाकथित आवश्यकता को मानने से इंकार करती हूं. स्थायी सुख तब प्राप्त होगा जब दुनिया बुराई के दुष्चक्र को तोड़ देगी और तालिबान या किसी अन्य बुराई को नहीं स्वीकार करेगी.
आर्टिफ़िशियल इंटेलीजेंस (एआई) के बारे में एक प्रखर चिंतक के रूप में उभरीं जमीला गोर्डन ने लूमाचेन की स्थापना की है. ये वैश्विक खाद्य आपूर्ति सिरीज में टूटे हुए संपर्कों को जोड़ने के लिए, एआई का इस्तेमाल करने वाला दुनिया का पहला प्लेटफॉर्म है.
एक सोमाली गांव में उनका जन्म हुआ था और देश में जारी गृहयुद्ध से भागकर किशोर उम्र में विकलांग के रूप में केन्या चली आईं. फिर वो ऑस्ट्रेलिया गईं जहां प्रौद्योगिकी के प्रति उनका प्यार जगा. लूमाचेन को लॉन्च करने से पहले गोर्डन आईबीएम में एक वैश्विक कार्यकारी के रूप में और कन्तास में ग्रुप चीफ इंफॉर्मेशन ऑफिसर के रूप मे काम कर चुकी थीं.
2018 के अंतरराष्ट्रीय स्त्री उद्यमिता चैलेंज में वो माइक्रोसॉफ्ट की ग्लोबल विजेता थीं. और ‘वीमन इन द एआई’ पुरस्कारों में वो ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की ओर से 2021 की ‘इनोवेटर ऑफ़ द ईयर’ के रूप में चुनी गई थीं.
*मुझे आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की ताकत पर गहरा विश्वास है. उसकी बदौलत वंचित, सुविधाहीन पृष्ठभूमि वाले लोगों को समाज में उनकी सम्मानजनक जगह मिल पाएगी. और व्यापार गतिविधियों का भी रूपांतरण हो पाएग.
नाजीला हबीबयार
अफ़ग़ानिस्तानउद्यमी
अफ़ग़ानी महिलाओं को बुनकरी का बिज़नेस खोलने और किसी महंगे बिचौलिए के बिना ही विदेशों में अपना सामान बेचने में मदद करने के लिए, नाजीला हबीबयार ने ब्लू ट्रेज़प इन्क ऐंड आर्क ग्रुप की स्थापना की थी. उन्होंने यूएएआईडी और विश्व बैंक के लिए महिलाओं के सशक्तीकरण और व्यापार से संबद्ध जलवायु परिवर्तन पर केंद्रित प्रोजेक्ट किए हैं.
2012 से 2015 तक हबीबयार ने सरकार की निर्यात प्रोत्साहन एजेंसी में मुख्य कार्यकारी के रूप मे काम किया और पूरी दुनिया में अफ़ग़ानी निर्यात बढ़ाने में मदद की.
उन्होंने स्वयंसेवी सेक्टर में भी 13 साल से ज़्यादा समय तक काम किया है, लड़कियों की शिक्षा में सहायता की है और बेघरों के लिए अफ़ग़ान वेरासिटी केयर फ़ॉर अनशेल्टर्ड फैमिलीज़ ऑर्गनेजाइशेन की स्थापना की है.
*अफ़ग़ानी औरत के रूप में मुश्किलें झेलने के बावजूद मुझे उम्मीद है कि अगली पीढ़ी के लिए युद्ध की विरासत छोड़ कर न जाने में अपना योगदान दे पाऊंगी.
लैला हैदरी
पाकिस्तानसंस्थापिका - मदर कैंप
काबुल में नशे की लत से छुटकारा दिलाने वाले सेंटर, मदर कैंप के ज़रिए लैला हैदरी ने 2010 से क़रीब 6400 अफ़ग़ानियों की मदद की है. उन्हें अपनी बचत के पैसो से शिविर खड़ा किया और रेस्तरां चलाकर उसमें पैसे डालती रहीं. इस रेस्तरां को चलाने वाले भी ठीक हो रहे नशाखोर थे. काबुल पर तालिबान के क़ब्ज़े के बाद इस रेस्तरां को बंद करा पड़ा.
हैदरी का परिवार मूल रूप से बामयान का है लेकिन वो पाकिस्तान में शरणार्थी के रूप में पैदा हुई थीं. 12 साल की उम्र में उनकी शादी कर दी गई थी. वो अब महिला अधिकारों की मुखर अधिवक्ता हैं.
लैला एट द ब्रिज (2018) में बनी मशहूर डॉक्युमेंट्री में उन्होंने भूमिका निभाई थी. जिसमें उन्होंने तमाम धमकियों और विरोधों के बावजूद अपने सेंटर को खुला रखने के संघर्षों के बारे में बताया था.
*मुझे उम्मीद है कि ज़ागरूकता फैलेगी. और इससे हमारी दुनिया और नैतिक और मानवीय बन पाएगी. हम लोग पारस्परिक जुड़ाव वाली दुनिया में रहते हैं जहां एक अमेरिकी नागरकि का वोट एक अफ़गानी की किस्मत को बुनियादी रूप से बदल सकता है.
ज़रलश्त हलाइमज़ाई
अफ़ग़ानिस्तान मुख्य कार्यकारी- रिफ्यूजी ट्रॉमा इनिशिएटिव
ज़रलश्त अफ़ग़ानिस्तान की एक पूर्व शरणार्थी हैं और इस समय रिफ़्यूजी ट्रॉमा इनीशिएटिव (आरटीआई) की सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी हैं. ये संगठन शरणार्थियों को मनोवैज्ञानिक सहायता मुहैया कराता है और उन्हें हिंसा और विस्थापन के भावनात्मक झटके का सामना करने में मदद करता है.
आरटीआई की स्थापना से पहले, वो तुर्की से लगी सीरिया की सीमा पर काम कर चुकी हैं जहां उन्होंने शिक्षा तक पहुंच बनाने में असहाय बच्चों की मदद की है और गैर सरकारी सगंठनों को शरणार्थियों की शिक्षा और देखरेख के बारे में सलाह दी है.
हलाइमज़ाई 2018 में नागरिक नवोन्मेष के 20 वैश्विक नेताओं के समूह के तहत ओबामा फाउंडेशन की फैलो रही हैं. ये फाउंडेशन पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा प्रायोजित है.
*भविष्य के लिए मेरी उम्मीद हिंसा के चक्र को खत्म करने की है जो अफ़ग़ानिस्तान के लोगों की ज़िंदगियां तबाह करता आ रहा है.
शम्सिया हस्सानी
ईरानस्ट्रीट आर्टिस्ट
संघर्ष और टकराव से बरबाद शहर में रंग भरते हुए शम्सिया हस्सानी अफ़गानिस्तान की पहली महिला ग्रैफ़िटी और स्ट्रीट कलाकार हैं. वो काबुल की उजाड़ या बरबाद इमारतों का इस्तेमाल वो अपने म्युरलों के लिए करती हैं जिनमें औरतें आत्मविश्वास से भरी, ताक़तवर और महत्वाकांक्षी व्यक्तियों की तरह दिखती हैं.
अफ़ग़ानी माता-पिता की संतान शम्सिया ईरान में पैदा ही थीं. उन्होंने काबुल में विज़ुअल आर्ट्स की पढ़ाई की. काबुल यूनिवर्सिटी में अध्यापन के साथ साथ 15 से अधिक देशों में म्युरल बनाए. फॉरेन पॉलिसी पत्रिका ने उन्हें दुनिया के शीर्ष 100 चिंतकों में शामिल किया है. पथ-प्रदर्शक महिलाओं के जीवनवृत्त पर तैयार संकलन, रिबल गर्ल्स दो के लिए बेस्ट सेलिंग गुडनाइट स्टोरीज़ में भी उनका नाम है.
तालिबानी क़ब्ज़े के बावजूद हस्सानी सोशल मीडिया पर अपनी कला पोस्ट करती रहती हैं.
*पिछले 15 साल के दरमियान जब भी मेरे मन में अपने देश के लिए कोई उम्मीद जगती, तभी चीज़ें और बुरी होने लग जातीं. आज मुझे एक बेहतर अफ़ग़ानिस्तान की ज़रा भी उम्मीद नहीं है- निराश हो जाने से अच्छा है कई उम्मीद ही न करना.
नसरीन हुसैनी काबुल विश्वविद्यालय में पशु चिकित्सा पाठ्यक्रम के लगभग 75 छात्रों की कक्षा में केवल दो महिलाओं में से एक थीं. वह एक शरणार्थी के रूप में ईरान में पली-बढ़ी लेकिन पढ़ाई के लिए अफ़ग़ानिस्तान लौट आईं और बाद में गुएल्फ़ विश्वविद्यालय में पशु स्वास्थ्य का अध्ययन करने के लिए छात्रवृत्ति लेकर कनाडा चली गईं.
हुसैनी इम्युनोलॉजी (प्रतिरक्षा विज्ञान) प्रयोगशाला में काम कर रही हैं और अपने खाली समय में कनेडियाई हज़ारा ह्यूमैनिटेरियन सर्विसेज के साथ जुड़ कर कनाडा में बसना चाह रहे अफ़ग़ानिस्तान के हज़ारा समुदाय और समाज में हाशिए पर रहने वाले अन्य लोगों की मदद कर रही हैं.
वह बुकीज यूथ प्रोग्राम के साथ भी सहयोग करती हैं, जो अफ़ग़ान बच्चों में पढ़ने और कहानी सुनाने को बढ़ावा देता है.
*अफ़ग़ान महिलाएं और लड़कियां डरी हुई हैं और वर्तमान स्थिति निराशाजनक लगती है, लेकिन हमेशा कोई न कोई रास्ता ज़रूर होता है. जैसा कि बॉब मार्ले ने कहा है, "आप कभी नहीं जानते कि आप कितने मजबूत हैं जब तक कि मजबूत होना ही आपके पास एकमात्र विकल्प नहीं रह जाता."
मोमेना इब्राहिमी
अफ़ग़ानिस्तानमहिला पुलिसकर्मी
पुलिस सेवा ज्वाइन करने के तीन साल के बाद मोमेना इब्राहिमी के वरिष्ठों ने उनका यौन शोषण किया. मोमेना कर्बालायी के तौर पर जाने जानी वाली मोमेना ने अपने अनुभव और अफ़ग़ानी पुलिस सेवा में शोषण-दुर्व्यवहार के मामलों पर बोलने का फ़ैसला किया.
इसके बाद उन्होंने लगातार धमकियों के बीच अपने साथ बलात्कार और यौन शोषण की दूसरी पीड़िताओं के लिए न्याय की लड़ाई शुरू की. उन्होंने बीबीसी से बताया, "मेरा मानना था कि किसी ना किसी को तो बोलना चाहिए. फिर मैंने सोचा कि वह मैं हो सकती हूं चाहे इसके लिए जान क्यों ना गंवानी पड़े."
बीते अगस्त महीने में तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद हज़ारों लोगों को ब्रिटेन पहुंचाया गया है, उनमें इब्राहिमी एक हैं.
*मैं चाहती हूं कि जिन महिलाओं ने सालों तक संघर्ष किया है, अध्ययन करके अपना करियर बनाया है उन्हें काम पर लौटना चाहिए और उन्हें आम लोगों पर अपनी ताक़त का इस्तेमाल कर रही पुलिसबल से स्वतंत्र होना चाहिए.
मुग्धा कालरा
भारतसह संस्थापिका- नॉट दैट डिफ़रैंट
ऑटिज़्म-अधिकार कार्यकर्ता और ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम पीड़ित 12 वर्षीय बच्चे की मां मुग्धा कालरा ने बच्चे के नेतृत्व वाले अभियान 'नॉट दैट डिफ़रेंट' की सह-स्थापना की, जो "न्यूरोडायवर्सिटी" या स्नायुविविधता को को समावेशी बनाने और उसे समझने पर केंद्रित है. बच्चों को ऑटिज़्म को बेहतर ढंग से समझाने और उन्हें अपने न्यूरोडाइवर्स या स्नायु विविधता वाले दोस्तों का साथी बनाने में मदद करने के उद्देश्य से एक कॉमिक सिरीज 'वन आफ़ अ काइंड कॉमिक स्ट्रिप' तैयार करने में भी उनकी भूमिका रही है.
कालरा को टीवी प्रसारण इंडस्ट्री में दो दशकों से अधिक का अनुभव है और वह एक टीवी प्रस्तोता, वृत्तचित्र फ़िल्म लेखिका हैं. इसके अलावा वह डायवर्सिटी और समावेशी समझ बनाने के लिए कोचिंग भी देती हैं.
वह एक इंटरैक्टिव लाइव पॉडकास्टिंग ऐप, बैकस्टेज में मुख्य सामग्री रणनीतिकार भी हैं.
*महामारी ने सात अरब लोगों को एक सामान्य वास्तविकता में, अपनी दुनिया में अकेला, लेकिन समान पीड़ा के माध्यम से एक-दूसरे से जुड़ना, जीना सिखा दिया है. मैं चाहती हूं कि यह साझा अनुभव लोगों में अपने साथ के लोगों के प्रति अधिक सहानुभूति पैदा करे.
बसों को घुमंतू लाइब्रेरी में तब्दील कर काबुल स्थित एनजीओ चारमाग्ज़ ने शहर के आसपास के इलाकों का दौरा कर सैकड़ों बच्चों तक किताबें और कला गतिविधियां पहुंचाई हैं.
बाल अधिकार एक्टिविस्ट फ़रिश्ता क़रीम ने 2018 में चारमाग्ज़ की स्थापना की थी. उन्होंने ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी से पब्लिक पॉलिसी में मास्टर्स किया है.
12 साल की उम्र से वो बच्चों का टीवी कार्यक्रम होस्ट करती रही हैं और अफ़ग़ानिस्तान में बाल अधिकारों की दशा के बारे में रिपोर्टें तैयार करती आई हैं. तब से वो इस क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं.
*मैं बच्चों के लिए इसलिए काम करती हूं क्योंकि मैं उन्हें अफ़ग़ानिस्तान के लिए दुष्चक्र को तोड़ने वालों की तरह देखती हूं. वे दमन और हिंसा के दुष्चक्र में खलल डालते हैं और जख़्म भरने के साथ साथ नये आख्यानों और नई राजनीति के लिए स्पेस बनाते हैं.
अमेना करीम्यान
अफ़ग़ानिस्तान खगोल विज्ञानी
हेरात तकनीकी संस्थान में सिविल इंजीनियर और प्रशिक्षक अमेना करीम्यान अफ़ग़ानिस्तान में खगोल विज्ञान के विकास पर ध्यान केंद्रित करने वाली शुरूआती दौर की महिलाओं में से एक हैं.
वह 2018 में शुरू किए गए केहाना एस्ट्रोनॉमिकल ग्रुप की मुख्य कार्यकारी अधिकारी और संस्थापिका हैं. यह संगठन युवाओं को खगोल विज्ञान के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए प्रोत्साहित करता है.
जुलाई 2021 में करीम्यान और उनके खगोल विज्ञान समूह, जिसमें सभी लड़कियां थी, ने इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉमी एडं एस्ट्रोफिजिक्स प्रतियोगिता में वर्ल्ड एस्ट्रोनॉमी यूनियन से एक पुरस्कार जीता.
*चूंकि तालिबान लड़कियों को शिक्षा के अधिकार से वंचित करता है, इसलिए हमें पहले से कहीं अधिक एकजुट रहना होगा - केहाना एस्ट्रोनॉमिकल ग्रुप की हर रात ऑनलाइन बैठक होती है. मेरी एकमात्र उम्मीद यही है कि मेरी मातृभूमि के युवाओं के लिए रास्ता खुले.
काबुल पर तालिबान की सत्ता स्थापित होने से पहले आलिया काज़मी शिक्षा और मानवाधिकार के क्षेत्र में सक्रिय थीं. उन्होंने रेडक्रॉस में स्वयंसेवी के तौर पर तीन साल तक काम करने के बाद महिलाओं के लिए चॉकलेट और बेकरी का व्यवसाय शुरू किया. 2020 में उन्होंने बिज़नेस मैनेजमेंट में मास्टर की डिग्री हासिल की. वह यूनिवर्सिटी में पढ़ाती थीं और लेक्चरर बनना चाहती थीं.
तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद वह अमेरिका चली गईं और वहां पीएचडी करने की योजना बना रही हैं.
उन्होंने बीबीसी को एक पत्र लिखकर महिलाओं को अपनी पसंद के मुताबिक चीज़ों को ख़ासकर पहनावे को चुनने की पुरजोर वकालत की थी.
*अफ़ग़ानिस्तान में शांति की उम्मीद इकलौती उम्मीद है क्योंकि हमें इसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत है.
ब्रिटेनइंटरनेशनल बार एसोसिएशन की ह्मयूमन राइट्स इनिशिएटिव की निदेशक
महिलाओं और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा के लिए पहचानी जाने वाली स्कॉटलैंड की बैरिस्टर बैरोनेस हेलेना केनेडी क्यूसी ने 40 वर्षों तक आपराधिक क़ानून के क्षेत्र में वकालत की है. वह इंटरनेशनल बार एसोसिएशन के मानवाधिकार संस्थान की निदेशक हैं, जो हाल ही में अफ़ग़ानिस्तान में संकट में पड़ी महिलाओं की सहायता कर रहा है.
वह अनेक वर्षों तक ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय में मैन्सफ़ील्ड कॉलेज की प्रिंसीपल थीं और वहां बोनावेरो इंस्टीट्यूट ऑफ़ ह्यूमन राइट्स की स्थापना में अहम भूमिका निभायी है.
बैरोनेस कैनेडी ने महिलाओं पर न्याय प्रणाली के प्रभाव पर विभिन्न पुस्तकें प्रकाशित की हैं और 1997 में उन्हें हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स में लेबर पीयर बनाया गया था.
*हमारे मानवाधिकार तब तक निरर्थक हैं जब तक कि ऐसे मामलों में बहस करने के लिये वकील और उन पर सुनवाई के लिये स्वतंत्र न्यायाधीश न हों - महिलाएं और पुरुष दोनों.
महिला अधिकार कार्यकर्ता होदा ख़ामूश ने पीरियड या मासिक धर्म के बारे में खुली बातचीत को बढ़ावा देने के लिए अफ़ग़ान स्कूलों में "मासिक धर्म कोई टैबू नहीं है" के नाम से ज़ागरूकता कार्यक्रम चलाया था.
विस्थापित अफ़ग़ान माता-पिता से ईरान में जन्मी, हुदा एक बच्चे के रूप में अफ़ग़ानिस्तान लौट आईं और उन्हें पढ़ने लिखने के लिए अपनी मां का समर्थन मिला था, हालांकि उनके अनेक रूढिवादी परिजन इसके ख़िलाफ़ थे. कवि और पत्रकार, ख़ामूश 2015 में महिलाओं के ख़िलाफ़ अन्याय को उजागर करने और अपने गांव में महिलाओं के लिए साक्षरता कार्यक्रम शुरू करने के लिए रेडियो प्रस्तोता बन गईं.
तालिबान के अधिग्रहण के बाद से, वह सातवीं कक्षा और उससे ऊपर की लड़कियों के लिए शैक्षिक सत्र चलाती हैं. तालिबान ने लड़कियों के स्कूल जाकर पढ़ाई करने पर प्रतिबंध लगा दिया है.
*हर तरफ अंधेरे के बावजूद, 2021 वह वर्ष है जब महिलाएं चाबुकों और गोलियों के ख़िलाफ़ उठ खड़ी हुईं और सीधे उन लोगों से अपने अधिकारों का दावा किया है जिन्होंने उनसे वे अधिकार छीने हैं. मैं इस वर्ष को आशा वर्ष का नाम देती हूं.
मिया कृष्णा प्रतिवि
इंडोनेशियापर्यावरण कार्यकर्ता
पर्यावरण कार्यकर्ता कृष्णा प्रतिवि गैर-लाभकारी संगठन ग्रियालुहू के माध्यम से बाली द्वीप पर प्लास्टिक कचरे के संकट को हल करने के लिए काम कर रही हैं. स्थानीय समुदाय के साथ मिलकर उनके संगठन ने एक "डिजिटलवेस्ट बैंक" विकसित किया है, जो एक ऐप-आधारित प्रणाली है जिसमें कचरे को बेहतर तरीके से इकट्ठा करने और संसाधित करने और कचरा प्रबंधन में और बदलाव का समर्थन करने के लिए डेटा एकत्र करने की व्यवस्था है.
इंस्टिट्यूट टेक्नोलॉजी बांडुंग से पर्यावरण इंजीनियरिंग में डिग्री प्राप्त मिया कृष्णा प्रतिवि स्थानीय कचरा बैंक की दिन-प्रतिदिन की गतिविधि की देखरेख के लिए संचालन प्रबंधक के रूप में काम करती हैं.
वह इंडोनेशिया में देनपसार शहर की पर्यावरण एजेंसी में पर्यावरण विश्लेषक भी हैं.
*बाली के त्रिहित कारण दर्शन की भावना के अनुरूप आइए हम अपनी धरती माता में संतुलन और सद्भाव वापस लाएं. हो सकता है कि हम प्रदूषण की समस्या का कारण हों, लेकिन इसका समाधान भी हम ही हो सकते हैं.
वह एक ऐन्थ्रपॉलजिस्ट यानी मानवविज्ञानी हैं और लंदन स्कूल ऑफ़ हाईजीन ऐंड ट्रॉपिकल मेडिसिन में द वैक्सीन कॉन्फिडेंस प्रोजेक्ट की निदेशक हैं. प्रोफेसर लार्सन, स्वास्थ्य हस्तक्षेपों को प्रभावित करने वाले सामाजिक और राजनीतिक कारकों पर केंद्रित शोध की अगुआ हैं. उनका ताज़ा काम जोख़िम और अफ़वाह के प्रबंधन के इर्दगिर्द है और टीकों के प्रति लोगो में विश्वास निर्मित करने के तरीकों को भी देख रही हैं.
वह “स्टकः हाउ वैक्सीन रुमर्स स्टार्ट- ऐंड व्हाई दे डोन्ट गो अवे” की लेखिका हैं. गर्भावस्था में टीकाकरण की स्वीकार्यता पर एक वैश्विक अध्ययन की प्रमुख अन्वेषक भी हैं.
ग़लत और भ्रामक सूचना के संक्रमण पर उनके वैज्ञानिक कार्य को चिन्हित करते हुए डॉ लार्सन को 2021 के एडिनबरा मेडल से सम्मानित किया गया है
*वैश्विक महामारी ने पहले से ध्रुवीकृत दुनिया में पांव पसारे थे. हमें बांटने वाले गहरे मुद्दों से कोई भी टीका नहीं बचा सकता है. सिर्फ व्यक्ति और समुदाय के तौर पर हमारा काम, छोटे स्तर पर हो या बड़े स्तर पर- वही हमें दुनिया को बदलने में मदद कर सकता है.
इमान ले कैयर
मिस्रसंस्थापक- ट्रांस एसालियस
काहिरा ओपेरा हाउस में नृत्यांगना और कोरियोग्राफ़र रहीं, इमान ले कैयर को एलजीबीटीक्यू प्लस व्यक्ति के रूप में पुलिस के उत्पीड़न के कारण मिस्र से भागना पड़ा. वह 2008 में अमेरिका चली गईं, वहां उन्हें शरण मिल गई और अब वह एक कलाकार, नृत्यांगना, अभिनेत्री और एलजीबीटीक्यू प्लस कार्यकर्ता के रूप में न्यूयॉर्क में रहती है.
ले कैरे ट्रांसएमिग्रेट की अरबी संपर्क प्रबंधक और बोर्ड सदस्य हैं. ट्रांसएमिग्रेट एक यूरोपीय संगठन है जो ट्रांसजेंडर लोगों को सुरक्षित देशों में स्थानांतरित होने में मदद करता है.
मार्च 2021 में, उन्होंने अपने संगठन, ट्रांस असिलियास की शुरूआत की, जिसका उद्देश्य "शरण चाहने वाले ट्रांसजेंडरों को उनके लिए सुरक्षित क्षेत्रों तक पहुंचाना" और भावनात्मक समर्थन प्रदान करना है.
*महामारी ने ट्रांसजेंडर लोगों को, जो पहले से ही पृथ्वी पर सबसे कमजोर हैं, और भी अधिक ख़तरे में डाल दिया, कभी-कभी उन्हें दुर्व्यवहार करने परिवारों में अलग थलग रहने के लिये मजबूर होना पड़ा. जैसे ही दुनिया बंद हुई, मदद के लिए उनकी चीखें दिल दहला देने वाली हो गईं. अब दुनिया को उन्हें बचाना है और उनके घाव भरने में मदद करनी है.
सेविद्जम एरनेस्टीन लाइकेकी का संगठन जंगल की आग को क़ाबू में करने के लिए मधुमक्खी पालन को एक रणनीति की तरह इस्तेमाल करता है. उनके संगठन ने 2000 से ज़्यादा किसानों को शहद उत्पादन, गुणवत्ता नियंत्रण और मोम निकालने में प्रशिक्षित किया है. निर्वनीकरण से लड़ने के लिए, मधुमक्खियों के पसंदीदा 86,000 पेड़ भी लगाए गए हैं.
लाइकेकी, कैमरून जेंडर ऐंड एनवायरेनमेंट वॉच की संस्थापक सदस्य हैं. ये संगठन देश के पर्यावरणीय मुद्दों का एक जेंडर नज़रिए से समाधान निकालने की कोशिश करता है. जलवायु एक्टिविस्ट के रूप में लाइकेकी का काम महिलाओं का सशक्तीकरण और उन्हें प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन से जोड़ने को लेकर है.
वह मानती हैं कि 20,000 हेक्टेयर वाले किलुम-जिम वन क्षेत्र की तरह दूसरे जंगलों को भी सामुदायिक कोशिशों के ज़रिए संरक्षित किया जा सकता है.
*मैं ऐसी दुनिया चाहती हूं जहां वन संरक्षण और आजीविका अभियानों में महिलाओं के पारिस्थितिकीय और सामाजिक-आर्थिक अधिकारों को पूरी पूरी तवज्जो मिले.
एलिसा लंकन अनातेलियो
चिलीसंविधान सभा की अध्यक्ष
चिली का नया संविधान लिखने के लिए 2021 में मूलनिवासियों के 17 प्रतिनिधियों में से एक के रूप में चुनी गईं एलिसा भाषाविद्, अध्यापिका और अकादमिक हैं. वो संवैधानिक सभा की प्रमुख हैं, पहली बार चिली के मूलनिवासी समुदायों के प्रतिनिधियों ने सरकारी व्यवस्था में अपनी राष्ट्रीयताओं के प्रतिनिधि के रूप में भागीदारी की है.
लंकन का संबंध चिली के सबसे बड़ी आदिवासी समुदाय मापुचे से है, वो “बहुलराष्ट्रीयता वाले राज्य” की वकालत करती हैं जिसमें स्थानीय और मूलनिवासी समुदायों को स्वायत्तता और अधिकार हासिल हैं और उनकी संस्कृति और भाषाओं की हिफ़ाज़त की व्यवस्था है.
ग़रीबी में पलते-बढ़ते और जातीय भेदभाव झेलते हुए उन्होंने मानविकी में पीएचडी की और इस समय सांटियागो यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं.
*महामारी के दौरान अपने आसपास हर रोज़ मौत देखने के बाद समान अधिकार की गारंटी अनिवार्य है- इंसानों और गैर-इंसानों सबके लिए. हमारी ज़िंदगियां धरती माता के संसाधनों पर निर्भर हैं- पानी और जंगल स लेकर मधुमक्खियों और चींटियों तक.
क्लो लोपेस गोम्स
फ्रांसबैले डांसर
किसी कंपनी में नियुक्त पहली काली बैले नर्तकी क्लो लोपेस गोमेस, 2018 में प्रतिष्ठित श्टाट्सबैले बर्लिन से जुड़ गई थीं. लेकिन मॉस्को की बोल्शोई अकाडमी की पूर्व छात्रा, गोमेस को बैले की दुनिया में नस्ली भेदभाव और पक्षपातपूर्ण रवैयों का सामना करना पड़ा जो उनके मुताबिक संकीर्ण और अभिजात्य थे.
अपने आरोपों को सार्वजनिक करने के बाद, काले और मिलीजुली विरासत वाले बैले नृत्य समुदाय से उन्हें समर्थन मिला.
2020 में श्टाट्सबैले ने उनका कॉन्ट्रेक्ट रिन्यू नहीं किया तो लोपेस गोमेस ने क़ानूनी कार्रवाई शुरू कर दी. नतीजतन कंपनी को अपने स्टाफ़ के बीच नस्लवाद को लेकर आंतरिक जांच बैठानी पड़ी, उसने गोमेस से माफ़ी मांगी और अदालत से बाहर मामला निपटाते हुएस उन्हें मुआवजा भी चुकाया.
*दुर्भाग्यवश इस दुनिया में हम सब लोग एक समान नहीं पैदा हुए हैं और सफलता के हमारे मौके हमारी जातीयता और सामाजिक दर्जे पर निर्भर होते हैं. मैं ऐसी दुनिया में रहना चाहती हूं कि जहां हर किसी को अपनी क्षमता का भरपूर उपयोग कर सकने का अवसर मिले.
माहेरा
अफ़ग़ानिस्तानचिकित्सक
डॉ. माहेरा अभी भी स्त्री रोग अस्पताल में मरीजों को देखने में व्यस्त हैं जहां वह काम करती हैं.
उन्हें अब उन ज़िलों की यात्रा करनी होती है जहां तालिबान के अधिग्रहण के बाद से स्वास्थ्य सेवाएं ठप्प हो गई हैं, वे वहां रोगियों को शुरूआती चिकित्सा और ज़रूरतमंद रोगियों को परामर्श देती हैं.
उन्होंने पहले जेंडर आधारित हिंसा से पीड़ित लोगों के बीच काम किया था, लेकिन तालिबान के सत्ता में आने के बाद यह काम भी बंद हो गया.
*हालांकि अब उम्मीद कम हो सकती है, लेकिन अफ़ग़ानिस्तान की महिलाएं अब वह नहीं हैं जो वे 20 साल पहले थीं और वे एक हद तक अपने अधिकारों की रक्षा कर सकती हैं. मेरी मुख्य चिंता यह है कि स्कूल हमेशा के लिए लड़कियों के लिए बंद कर दिए गए हैं.
मराल
अफ़ग़ानिस्तान कैंपेनर
मराल का परिवार नहीं चाहता था कि वह नागरिक संगठनों का हिस्सा बनकर महिला अधिकारों को लेकर सक्रिय हों. परिवार वालों को लगता था कि महिला होने के चलते उन्हें काम नहीं करना चाहिए. लेकिन इन सबके बाद भी उन्होंने यह काम किया.
2004 से मराल स्थानीय स्तर सक्रिय हो गई थीं. वह महिलाओं को उनके अधिकार मसलन काम करने का अधिकार, वित्तीय आत्म निर्भरता हासिल करने का अधिकार जैसे मुद्दों पर ज़ागरुक करने लगी थीं.
ग्रामीण इलाके में घरेलू हिंसा का सामना करने वाली महिलाओं के बीच भी मराल ने काम किया. उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि इन महिलाओं को आश्रय मिले और न्याय दिलाने में भी मदद की.
*मुझे लगा कि हमने सबकुछ खो दिया है और मैं काफ़ी निराश थी. लेकिन हमलोगों ने जो सब किया है, उसे याद करने से, कोशिशों को जारी रखने का संबल मिला. मैं हार नहीं मानूंगी और भविष्य निश्चित तौर शांति और मानवता चाहने वालों का है.
मासूमा
अफ़ग़ानिस्तानलोक अभियोजक
अफ़ग़ानिस्तान में एक महिला लोक अभियोजक के रूप में मासूमा ने न्यायपालिका में काम किया है, सबूत जमा किए हैं और क़ानूनी मामलों को मजबूती से खड़ा किया है. क़ानून स्नातक मासूमा उन महिलाओं में से है जो बीते 20 साल में शिक्षित हुई हैं. उन्हें पांच साल तक अटॉर्नी जनरल के कार्यालय में काम करते हुए अपने लोगों की सेवा करने पर गर्व था.
अगस्त में जब देश पर तालिबान का नियंत्रण स्थापित हुआ तो उन्होंने हज़ारों खूंखार अपराधियों और इस्लामी चरमपंथियों को रिहा कर दिया. तालिबान ने सरकारी अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं करने की घोषणा की थी, इसके बावजूद अंतरारष्ट्रीय मानवाधिकार समूहों ने न्यायिक प्रक्रिया से इतर लोगों की हत्याएं और बंधक बनाए जाने की सूचना दी है.
मासूमा इन दिनों छिपकर जीवन व्यतीत कर रही हैं और उन्हें भविष्य के बारे में कुछ नहीं मालूम है.
*महिलाएं और लड़कियां दुनिया की आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करती हैं. अगर उन्हें अवसर दिया जाए तो महिलाएं पुरुषों की तरह ही अपने लोगों और देश की सेवा कर सकती हैं.
समोआ की पहली महिला प्रधानमंत्री और फाटुआटुआ इ ले अटुवा समोआ उआ टासी (फास्ट) पार्टी की नेता फ़ियामे नाओमी माताफा ने 27 साल की उम्र में राजनीति में क़दम रख दिया था. वो उप प्रधानमंत्री और महिला, समुदाय और सामाजिक विकास मंत्री के अलावा न्याय मंत्री भी रह चुकी हैं.
वह एक महत्वपूर्ण कबीलाई प्रमुख यानी मताई भी हैं और राजनीति में आने के लिए समोआ की महिलाओं के लिए एक प्रेरणा भी बनी हैं.
उनके एजेंडा के केंद्र में है एक मजबूत पर्यावरण. पूरी दुनिया मे ग्लोबल वॉर्मिंग से सबसे ज्यादा असहाय इलाकों में से एक- समोआ में जलवायु आपातकाल के ख़िलाफ़ लड़ाई में वो अग्रणी हैं.
*जहां एकता होगी वहीं हमारी भावी पीढ़ियों के लिए उम्मीद भी होगी.
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अफ़ग़ानिस्तान की तीन महिला ज़िला गवर्नरों में शामिल सलीमा मज़ारी पिछले साल उस समय सुर्ख़ियों में आयी थीं जब उन्होंने तालिबान के ख़िलाफ़ फ्रंटलाइन की लड़ाई में सरकार की सेना की ओर से हिस्सा ले रही थीं.
अफ़ग़ानिस्तान लौटने से पहले एक शरणार्थी के तौर पर सलीमा ने अपनी डिग्री ईरान में हासिल की थी. 2018 में वह बल्ख़ प्रांत के चरकिंट ज़िले की गवर्नर बनीं. वहां उन्होंने बातचीत के ज़रिए 100 से ज़्यादा तालिबान लड़ाकों का आत्मसमर्पण कराया. काबुल में तालिबान के नियंत्रण हासिल करने तक उनके ज़िले ने तालिबान का पूरा विरोध किया और वहां तालिबान का नियंत्रण नहीं हो पाया था.
पहले माना गया था कि उन्हें बंधक बना लिया गया है लेकिन वह अमेरिका भागने में कामयाबर रहीं, जहां वह पुनर्वास की प्रतीक्षा कर रही हैं.
*मुझे उम्मीद है कि वह दिन आएगा जब मेरी मातृभूमि में मेरी पहचान यानी एक महिला, एक हाज़रा, एक शिया और एक फ़ारसी भाषी होना अपराध नहीं होगा.
डेपेल्सा टॉमस मैकग्रुडर
अमेरिकासंस्थापिका- मॉम्स ऑफ़ ब्लैक ब्वॉयज यूनाइटेड
उनका गठबंधन पूरे अमेरिका से‘काली संतानों की चिंतित मांओं’को एकजुट करता है. डेपेल्शा टॉमस मैकग्रुडर मॉम्स ऑफ ब्लैक ब्वॉयज (मॉब्ब) यूनाईटेड और मॉब यूनाइटेड फॉर सोशल चेंज के राष्ट्रव्यापी संगठन की संस्थापक और अध्यक्ष हैं. संगठन उन नीतियों और नजरियों को बदलने पर ध्यान केंद्रित करता है जो काले लड़कों और आदमियों के प्रति क़ानून और समाज के पेश आने के ढंग पर असर डालते हैं.
वह फ़िलहाल फ़ोर्ड फाउंडेशन में चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर और ट्रेजरर हैं. और वैश्विक ऑपरेशन और वित्त का काम संभालती है.
पहले मैकग्रुडेर ने 20 साल मीडिया और मनोरंजन उद्योग में बिताए हैं, वो प्रसारण पत्रकार थीं और एमटीवी और ब्लैक एंटरटेन्मेंट टेलीविजन (बीईटी) में प्रमुख पदों पर कार्यरत थीं.
*मेरी उम्मीद यह है कि महामारी से निकलने के बाद दुनिया और उदार और सहिष्णु हो जाएगी, लोग ये महसूस कर पाएंगे कि एक दूसरे पर वे कितने निर्भर हैं और दूसरे लोगों के कष्टों और खास किस्म की चुनौतियों के प्रति और अधिक संवेदनशील होने की जरूरत भी वे समझेंगें.
मुलु मेफ़सीन
इथोपियानर्स
मुलु मेफ़सिन 10 वर्ष से अधिक समय से नर्स के रूप में काम कर रही हैं. वह वर्तमान में इथियोपिया के युद्धग्रस्त टाइग्रे क्षेत्र की क्षेत्रीय राजधानी मेकेले में वन स्टॉप सेंटर में काम करती हैं. यह केंद्र यौन शोषण और हिंसा पीड़ितों को चिकित्सा सुविधा, मनोवैज्ञानिक और क़ानूनी सहायता प्रदान करता है.
तीन साल पहले, मेफ़सिन ने टाइग्रे में युवा लड़कियों और महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा को समाप्त करने के लिए अभियान शुरू किया था, यह एक ऐसा मुद्दा है जो 2020 के अंत की तरफ गृहयुद्ध शुरू होने के बाद से और अधिक प्रासंगिक हो गया है.
खुद आघात सहने के बावजूद, नर्स मेफ़सिन इस उम्मीद में अपना काम जारी रखना चाहती हैं कि एक दिन शांति ज़रूर बहाल होगी.
*मैं दुनिया को इस तरह बना देना चाहती हूं कि इसके सभी संघर्ष समाप्त हो जाएं, देशों को हथियारों की बिक्री पर बातचीत करने के बजाय शांति के लिए काम करने को प्रेरित किया जा सके और युवा लड़कियों और महिलाओं के बलात्कारियों और दुर्व्यवहारियों को दंडित करने वाले क़ानूनों को लागू किया जा सके.
मोहदीजे मीरज़ाई
अफ़ग़ानिस्तान पायलट
मोहदीजे अफ़ग़ानिस्तान की पहली महिला कमर्शियल पायलट हैं. इस साल की शुरुआत में उन्होंने सभी महिलाकर्मियों वाली काम एयर बोइंग 737 विमान की ऐतिहासिक उड़ान का नियंत्रित किया था. सितंबर, 2020 में वह कामर्शियल पायलट बनीं.
जब तालिबान ने काबुल में प्रवेश किया तब मीरज़ाई काबुल एयरपोर्ट पर उस उड़ान की तैयारी कर रही थीं, जिसने कभी उड़ान नहीं भरी. इसके बदले उन्होंने एक यात्री के तौर पर देश छोड़ने के लिए उड़ान भरी. मीरज़ाई कहती हैं कि वह एक ऐसा समाज चाहती हैं जहां महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर सकें.
उन्हें जल्दी ही फिर से उड़ान भरने की उम्मीद है.
*इंतज़ार मत करो! यदि आप मजबूती से खड़े नहीं होंगे तो कोई आकर आपको उड़ने के लिए पंख नहीं देगा. मैंने अपनी लड़ाई लड़ी है, आपको अपनी लड़ाई लड़नी होगी. एकसाथ होने पर हमें कोई बाधा रोक नहीं सकती
फ़ाहिमा मीरज़ई
फ़ाहिमा अफ़ग़ानिस्तान की पहली और अकेली, नाचती दरवेश हैं. ये नृत्य इस्लामी सूफ़ी समा समारोह का एक हिस्सा है जिसका वो अभ्यास करती आई हैं. फ़ाहिमा ने मिश्रित जेंडर वाले सूफी नृत्य और प्रदर्शनकारी कलाओं के लिए शुहूद तहजीबी और रहस्यवादी संगठन नाम से एक समूह का गठन किया.
वो नृत्य को गहरी पारंपरिक और धार्मिक समाज में अपनी जगह बनाने के एक ज़रिए के रूप में देखती हैं. जहां मिश्रित समूह गतिविधियों को अब भी वर्जना माना जाता है. देश भर में गतिविधियों के आयोजन से उन्हें अफ़ग़ानिस्तान में सहिष्णुता को प्रोत्साहित करने की उम्मीद थी.
2021 में उन्हें देश छोड़ना पड़ा क्योंकि तालिबान सूफ़ी नाचते दरवेशों को विधर्मी और इस्लामी क़ानून के ख़िलाफ़ मानता है.
*मैं अपनी आध्यात्मिकता को सबसे पहले रखने में यक़ीन करती हूं. हमें अपने भीतर शांति को तलाश करने की कोशिश कनरी चाहिए, तभी ये अंदरूनी शांति पूरी दुनिया में फैलेगी.
उन्हें प्यार से डॉक्टर टी बुलाया जाता है, वो चिकित्सक हैं और महिलाओं की यौनिक और प्रजनन स्वास्थ्य को लेकर मानवाधिकार कार्यकर्ता भी हैं. वो सार्वभौम स्वास्थ्य, एचआईवी देखरेख और परिवार नियोजन सेवाओं की मांग करती हैं.
डॉ ट्लालेंग मोफोकेंग शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर इस समय संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत हैं. और इस पद पर आने वाली पहली महिला, पहली अफ्रीकी व्यक्ति और सबसे युवा लोगों मे से हैं. वो बेस्टसेलर किताब ‘डॉ टीः अ गाइड टू सेक्सुअल हेल्थ ऐंड प्लेज़र’ की लेखिका हैं.
मोफोकेंग परिवार नियोजन के युवा चैम्पियनों को दिये जाने वाले ‘120 अंडर 40’ अवार्ड की 2016 की विजेता हैं. ये पुरस्कार जनसंख्या और प्रजनन स्वास्थ्य के बिल और मेलिंडा गेट्स संस्थान की ओर से दिया जाता है.
*मैं दुनिया को फिर से सामान्य कैसे बनाऊंगी? सामुदायिक प्रेम के रूप में सेल्फ केयर का अभ्यास कर.
तान्या म्यूज़िंदा
ज़िम्बाम्वेमोटोक्रॉस एथलीट
मोटोक्रॉस की पुरुष प्रभुत्व वाली दुनिया में या ऑफ़ रोड मोटरसाइकिल रेसिंग में नाम कमाकर तान्या अपने देश की ऑफ़ रोड सर्किटों की चैंपियन बनी हैं. 1957 में जब से ये मुक़ाबला शुरू हुआ है तबसे मोटोक्रॉस चैंपियनशिप जीतने वाली वो ज़िम्बाम्वे की पहली महिला हैं.
पूर्व बाइकर अपने पिता से प्रेरित होकर उन्होंने पांच साल की उम्र में ट्रेनिंग शुरू की थी. मुज़िन्दा इस समय 17 साल की हैं. उन्हें उम्मीद है कि वो महिलाओं की मोटरक्रॉस की विश्व मुक़ाबला जीतने वाली वो पहली काली अफ्रीकी व्यक्ति होंगी. 2018 में उन्हें अफ्रीकी संघ ने जूनियर स्पोर्ट्सवुमन ऑफ़ द ईयर का खिताब दिया था.
मोटरक्रॉस से हुई आय से वो परोपकारी काम में व्यस्त रहती हैं, हरारे में स्कूल जाने वाले क़रीब 100 विद्यार्थियों की फीस वो देती हैं.
*मैं दुनिया को बदलना नहीं चाहती हूं. ये कभी भी मुकम्मल संपूर्ण नहीं थी. कुछ अच्छा था तो कुछ बुरा भी था. आज के हालात ठीक कर लें तो भविष्य की पीढ़ियों को उन्हीं चीज़ों के लिए नहीं लड़ना पड़ेगा जिनके लिए हम लड़ते हैं.
नाईजीरिया की जानीमानी लेखिका और फेमेनिस्ट आइकन हैं. उनकी रचनाएं दुनिया की तीस से ज्यादा भाषाओं में अनूदित हैं. संचार और राजनीतिशास्त्र में डिग्री हासिल करने के लिए चिमामांदा न्गोजी अदीची 19 साल की उम्र में अमेरिका जा बसी थीं.
उनके पहले उपन्यास ‘पर्पल हिबिस्कस’ (2003) को कॉमनवेल्थ राइटर्स प्राइज मिला था. 2013 में आया उनका उपन्यास ‘अमेरिकाना’, द न्यू यार्क टाइम्स की टॉप टेन किताबों की सूची में शामिल था.
अदीची ने अपना ऐतिहासिक टेडटॉक भाषण, ‘हम सबको नारीवादी होना चाहिए’ 2012 में दिया था. उसने नाऱीवाद पर दुनिया भर में एक संवाद की शुरुआत की थी. और 2014 में वो भाषण किताब के रूप में प्रकाशित किया गया था. अपने पिता के आकस्मिक निधन के बाद हाल में एक निजी श्रद्धांजलि के रूप में उन्होंने एक किताब लिखी थी, ‘नोट्स ऑन ग्रीफ’ (2021).
*हम इसी पल से ये सोचना शुरू कर दें कि स्वास्थ्य देखरेख, पूरी दुनिया में हर कहीं एक मानवाधिकार की तरह है. एक व्यक्ति को जिंदा रहने के नाते इसकी जरूरत है, ना कि इसलिए कि वो उसे खरीदने में समर्थ है या नहीं.
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लिन न्गूगी
कीनियापत्रकार
पुरस्कार विजेता पत्रकार और कंटेंट निर्माता लिन न्गूगी, टूको डिज़िटल समाचार प्लेटफ़ॉर्म में अपने काम के लिए जानी जाती हैं. उन्होंने बड़े पैमाने पर जन रुचि वाली प्रेरणास्पद रिपोर्टे की हैं.
पहले उन्होने कैंसर मरीजों की देखरेख के लिए वॉलंटियर के रूप में काम किया था. 2011 में किवो फ़िल्म्स से उन्होंने मीडिया में करियर शुरू किया, उसके बाद वो क़तर फाउंडेशन से जुड़ गईं. न्गूगी सोशल मीडिया की प्रभावकारी व्यक्ति हैं और अपने देश की जानीमानी मीडिया शख़्सियत हैं.
2020 में उन्होंने ‘ह्युमैनिटेरियन जर्नलिस्ट ऑफ़ द इयर अवार्ड’ जीता है. और इस साल उन्हें ‘चेंज़ नेशन्स कम्युनिटी अम्बेसडर अवार्ड’ मिला है.
*मैं दुनिया में कुछ इस तरह का बदलाव चाहती हूं कि हरेक व्यक्ति खुद को सुरक्षित महसूस करे.
अमांडा न्गूयेन
अमेरिकासामाजिक उद्यमी
यौन हमलों और बलात्कार से उबर आए व्यक्तियों के अधिकारों की हिफाजत करने वाले संगठन राइज़ की सीईओ हैं- अमांडा न्गूयेन.
नागरिक अधिकार एक्टिविस्ट और सामाजिक उद्यमी, अमांडा एन न्गूयेन के साथ 2013 में बलात्कार हुआ था. उस समय वो हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ती थीं. इस वारदात के बाद ही उन्होंने राइज़ संगठन की स्थापना की. उन्हें बताया गया था कि साक्ष्य मिटने से पहले उनके पास आरोप दर्ज कराने के लिए सिर्फ छह महीने की मियाद है. उन्होंने यौन हमलों से उबर आए व्यक्तियों के अधिकारों के कानून का ड्राफ्ट तैयार करने में मदद की. ये कानून सबूत को संरक्षित रखने के रेप पीड़ित के अधिकारों की हिफ़ाज़त करता है.
2021 में एशियाई लोगों के खिलाफ नफरत और अपराध के विरोध मेंजारी उनका वीडियो वायरल हो गया था. स्टॉप एशियन हेट मूवमेंट के लिए वो एक निर्णायक पल बन गया था.
*हम सब एक साथ आ जाएं तो कोई भी शक्तिविहीन नहीं रह जाता. जब हम मांग करते हैं कि लोग हमें देखें तो कोई भी अदृश्य नहीं रह जाता.
बासिरा पैगहम
अफ़ग़ानिस्तानजेंडर अल्पसंख्यक कार्यकर्ता
अफ़ग़ानिस्तान में एलजीबीटीक्यू प्लस अधिकारों के लिए काम करना बेहद चुनौतीपूर्ण है लेकिन चुनौतियों के बाद भी बासिरा पैगहम पिछले आठ सालों से लैंगिक समानता और जेंडर अल्पसंख्यक कार्यकर्ता रही हैं.
वह जेंडर और सेक्सुअलिटी संबंधी ज़ागरुकता के मुद्दे पर वर्कशॉप चलाती हैं. इसके अलावा वह उत्पीड़ित एलजीबीटीक्यू प्लस के लोगों के इलाज के लिए सलाह और वित्तीय मदद मुहैया कराती हैं. आत्महत्या के बारे में सोचने वाले एलजीबीटीक्यू प्लस लोगों को वह उपयुक्त परामर्श भी मुहैया कराती हैं.
अब आयरलैंड में रह रहीं बासिरा अभी भी अफ़ग़ानिस्तान के एलजीबीटीक्यू प्लस समुदाय के लोगों की स्वतंत्रता और उनके मानवाधिकारों के लिए अभियान चला रही हैं.
*अफ़ग़ानिस्तान का दम घुट रहा है, उसे सांस लेने दें. वह तभी सांस ले पाएगा जब विभिन्न धर्म, जेंडर और क़बीले के सभी लोग स्वतंत्र हो कर ख़ुशी ख़ुशी सांस ले पाएंगे.
नतालिया पास्तरनाक ताश्नर
ब्राज़ीलमाइक्रोबायोलजिस्ट एवं साइंस कम्यूनिकेटर
नतालिया ने अपने प्रेस स्तंभों, रेडियो और टीवी प्रस्तुतियों के ज़रिए कोविड-19 महामारी के दौरान ब्राज़ील में लाखों लोगों को जीवन बचाने वाली, गंभीर वैज्ञानिक सूचना मुहैया कराई थी.
वो एक विज्ञान लेखक और माइक्रोबायोल़जिस्ट हैं. साओ पाउलो यूनिवर्सिटी से बैक्टीरियल जेनेटिक्स में उनकी पीएचडी है. उनके काम की मौलिकता को देखते हुए जानेमाने न्यूरोवैज्ञानिक और विज्ञान लेखक स्टुआर्ट फाइरेश्टाइन ने उन्हें कोलम्बिया यूनिवर्सिटी में भी बुलाया है.
पास्तरनाक क्वेश्चन्स ऑफ़ साइंस इन्स्टीट्यूट की संस्थापक और मौजूदा अध्यक्ष भी हैं. ये स्वयंसेवी संगठन सार्वजनिक नीतियों में वैज्ञानिक साक्ष्य को प्रोत्साहित करने के लिए काम करता है.
*होलोकॉस्ट की नातिन होने के नाते, मैं जानती हूं सर्वसत्तावादी सरकारें जनता के साथ क्या कर सकती हैं. ब्राज़ील में महामारी के दौरान विज्ञान के पक्ष में बोलना ही “नेवर फॉर्गेट” यानी “कभी नहीं भूलना” के तथ्य को ज़िंदा रखने में मेरा योगदान था.
मोनिका पाउलस
पापुआ न्यू गिनीजादू-टोने वाली हिंसा के ख़िलाफ़ कैंपेनर
मानवाधिकार कार्यकर्ता मोनिका पाउलस, हाइलैंड्स वीमन ह्युमन राइट्स डिफेंडर्स नेटवर्क की सह-संस्थापक हैं. ये संगठन जादू-टोने के आरोपों और उनसे जुड़ी हिंसा (एसएआरवी) के पीड़ितों की मदद के लिए काम करता है. संगठन जादू-टोने के आरोप झेल रही महिलाओं को शरण और कानूनी सलाह मुहैया कराता है और उनके मामलों की रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र और दूसरे अंतरराष्ट्रीय संगठनों में करता है.
उनकी कोशिशों की बदौलत पापुआ की सरकार ने जादू-टोने से जुड़ी हिंसा पर कमेटियां गठित की हैं.
2015 में पाउलस को संयुक्त राष्ट्र का वीमन ऑफ अचीवमेंट पुरस्कार मिला. पापुआ न्यू गीनिया की साहसी महिला का खिताब भी उन्हें मिला है. एमनेस्टी इंटरनेशनल ऑस्ट्रेलिया ने उन्हें दुनिया की सबसे बहादुर महिलाओं में से एक बताया है.
*हमें बदलाव की जरूरत है और ध्यान रखने की जरूरत है कि हम सब लोग इंसानी नस्ल का हिस्सा हैं और लैंगिक आधार पर न हमें रोका जा सकता है और ना ही हमारा नुकसान किया जा सकता है.
इमिग्रेशन और नागरिक-क़ानून विशेषज्ञ, रेहाना पोपल वर्तमान में अफ़ग़ानिस्तान से नैटो की वापसी के बाद पीछे रह गए अफ़ग़ान दुभाषियों, अनुवादकों और अन्य लोगों की सहायता करने का काम कर रही हैं.
पोपल इंग्लैंड और वेल्स में वकील के रूप में काम करने वाली पहली अफ़ग़ान महिला थीं. वह पांच साल की उम्र में एक शरणार्थी बच्चे के रूप में ब्रिटेन आ गई थीं. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय राजनीति और क़ानून की शिक्षा प्राप्त की और अब मानवाधिकार वकील के रूप में काम करती हैं.
उन्हें 2019 में इंस्पिरेशनल वुमन इन लॉ अवार्ड्स में बैरिस्टर ऑफ़ द ईयर चुना गया.
*मुझे उम्मीद है कि भविष्य में अफ़ग़ानिस्तान में महिलाओं और लड़कियों को शिक्षित होने, नौकरी करने और बिना किसी डर के जीवन जीने की आज़ादी प्राप्त होगी.
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मंजुला प्रदीप
भारतमानवाधिकार कार्यकर्ता
भारत में सबसे वंचित तबकों के अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाली वकील और एक्टिविस्ट मंजुला प्रदीप गुजरात के एक दलित परिवार से आती हैं. वो जातिगत और लैंगिक भेदभाव के खिलाफ अपने काम के लिए जानी जाती हैं. भारत में दलित अधिकारों के सबसे बड़े संगठन नवसर्जन ट्रस्ट (पूर्व नाम अनटचैबल्स) की वो कार्यकारी निदेशक रही हैं.
इस साल उन्होंने नेशनल काउंसिल ऑफ वीमन लीडर्स की स्थापना की थी. उन्होंने ‘वाइज़ एक्ट ऑफ यूथ विजनिंग ऐंड इन्गेजमेंट’ की स्थापना भी की. ये संगठन वंचित तबकों के युवाओं के सशक्तीकरण के लिए काम करता है.
मंजुला अंतरराष्ट्रीय दलित एकजुटता नेटवर्क की सदस्य भी हैं. नस्लवाद के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र के विश्व सम्मेलन में उन्होंने दलित अधिकारों का मुद्दा उठाया है.
*मैं दुनिया को करुणा, प्यार और सहानुभूति की खातिर बदलना चाहती हूं. जहां वंचित तबकों की औरतें शांतिपूर्ण और न्यायपूर्ण समाज का रास्ता बनाने में आगे रहें.
राज़मा
अफ़ग़ानिस्तान संगीतकार
संगीत की एक फ़ारसी देवी के नाम वाला आर्केस्ट्रा ज़ोहरा पारंपरिक अफ़ग़ान और पश्चिमी शास्त्रीय संगीत का मिश्रण है.यह समूह 2014 से ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कार्यक्रम पेश कर रहा है.
संगीत की एक फ़ारसी देवी के नाम वाला आर्केस्ट्रा ज़ोहरा पारंपरिक अफ़ग़ान और पश्चिमी शास्त्रीय संगीत का मिश्रण है.यह समूह 2014 से ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कार्यक्रम पेश कर रहा है.
संगीत की एक फ़ारसी देवी के नाम वाला आर्केस्ट्रा ज़ोहरा पारंपरिक अफ़ग़ान और पश्चिमी शास्त्रीय संगीत का मिश्रण है.यह समूह 2014 से ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कार्यक्रम पेश कर रहा है.
*संगीत और गीतों के बिना समाज के बारे में सोचना मुझे पहले से कहीं ज़्यादा उदास कर देता है. मुझे उम्मीद है कि महिलाओं की शांत आवाज़ बाहर निकलेंगी.
रोहिला
अफ़ग़ानिस्तानस्कूली छात्रा
तालिबान की वापसी के बाद से अफ़ग़ानिस्तान के माध्यमिक स्कूलों से लड़कियों को हटा दिए जाने से स्कूली छात्रा रोहिला प्रभावित हुई हैं. उनके पसंदीदा विषय विज्ञान और अंग्रेजी हैं और वह हर सुबह अपने भाइयों के साथ स्कूल जाने की इच्छा रखती हैं.
रोहिला का कहना है कि उसकी सहेलियों में से बहुत कम लड़कियों की इंटरनेट तक पहुंच है और वह बिना शिक्षक के पढ़ाई करने के लिए संघर्ष कर रही हैं.
उनका सपना मनोविज्ञान की पढ़ाई करना और विदेश में पढ़ने के लिए स्कॉलरशिप प्राप्त करना है.
*अफ़ग़ानिस्तान अब दुनिया से कटा हुआ है और मेरा आगे पढ़ने का सपना निरर्थक लगता है. मुझे उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय हमें नहीं भूलेगा और हमारी सालों की मेहनत बेकार नहीं जाएगी.
अर्जेंटीना में वरिष्ठ सरकारी पद पर काम करने वाली पहली ट्रांस व्यक्ति, अल्बा रुएदा- महिला, जेंडर और विविधता मंत्रालय में विविधता नीतियों की अंडर-सेकेट्री हैं.
आल्बा एक्टिविस्ट और अकादमिक हैं और ट्रांस वीमन अर्जेंटीना का चेहरा हैं, ये वो संगठन है जिसने ट्रांस लेबर कोटो बिल के लिए मुहिम चलाई थी. इस बिल के तहत सरकारी नौकरियों में ट्रांसजेंडरो के लिए एक प्रतिशत सीटे आरक्षित रखने का प्रावधान किया गया है. इस ऐतिहासिक बिल को कांग्रेस में जोरदार समर्थन मिला और जून 2021 में ये क़ानून बन गया.
2019 में रुएदा ने एक कैथलिक पादरी के ख़िलाफ़ मुक़दमा दायर किया था. उस पादरी ने राष्ट्रीय पहचान दस्तावेज में दर्ज रुएदा के नाम और जेंडर से मिलान के लिए उनके चर्च में दर्ज रिकॉर्ड को बदलने से इंकार कर दिया था.
*2021 ने असमानताओं के पुनःउत्पादन पर आर्थिक नीतियों के व्यापक असर की झलक दिखाई है. हमें ट्रांसफेमेनिस्ट नज़रिए वाली नीतियों को प्रोत्साहित करना चाहिए जिनके ज़रिए हम दूसरी तरह के संबंध निर्मित कर पाते हैं और सामूहिक और सामुदायिक देखभाल विकसित कर पाते हैं.
रुख़साना
अफ़ग़ानिस्तानसर्जन
डॉ. रुख़साना एक सर्जन और असिस्टेंट प्रोफ़ेसर हैं. संघर्ष के चलते दूसरे अफ़गानी सूबों से विस्थापित होने वाले मरीज़ों की बुनियादी स्वास्थ्य देखभाल मुहैया कराने वाले संगठन की संस्थापक हैं.
लड़ाई की विभिन्न अवधियों के दौरान उन्होंने विपरीत और दुष्कर हालातों में काम किया है. सबसे ज़्यादा ज़रूरतमंदों और असहाय लोगों को चिकित्सा सहायता पहुंचाई है. वो राष्ट्रीय कैंसर नियंत्रण कार्यक्रम में वॉलन्टियर की हैसियत से काम करती हैं और इन दिनों स्तन कैंसर पर ज़ागरूकता अभियान चला रही हैं.
सर्जरी में अपने काम से उन्हें गहरा लगाव है और उन्हें उम्मीद है कि वो अफ़ग़ानिस्तान के चिकित्सा छात्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेंगी.
*हर बड़ा बदलाव एक लीडर की प्रतिबद्धता और समर्पण का नतीजा होता है. मैं कोई लीडर नहीं हूं लेकिन मैं अफ़ग़ानिस्तान में रहकर ही यहां के चरमराए हुए और भ्रष्ट स्वास्थ्य-तंत्र में बदलाव लाऊंगी.
उत्तरी जोज़्जान प्रांत से अफ़ग़ान संसद की पूर्व सदस्य, हलीमा सदफ़ क़रीमी एक राजनेता हैं जिन्हें राजनीति में वर्षों का अनुभव है.
वह अपने देश की लगभग 70 महिला सांसदों में से एक थीं और संसद में उज़्बेक अल्पसंख्यकों की एकमात्र महिला प्रतिनिधि थीं. उन्होंने अपने समुदाय के अधिकारों को व्यापक बनाने के लिए संसद में काफ़ी प्रयास किया. उनके पास राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र में डिग्री है. महिलाओं के अधिकारों के लिए एक प्रमुख प्रचारक, सदफ़ क़रीमी को तालिबान से बार-बार धमकियां मिलीं और उन्हें कई बार घर बदलना पड़ा.
2020 में उनके छोटे भाई, जो एक विश्वविद्यालय के छात्र थे, की तालिबान लड़ाकों ने हत्या कर दी थी.
*स्वार्थी शासनों को हमेशा जल्दी ही विफलताओं का सामना करना पड़ा है. मुझे उम्मीद है कि अफ़ग़ान महिलाएं राजनीतिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और सामाजिक भागीदारी के माध्यम से अपने मानवाधिकार प्राप्त करेंगी और ऐसा करने से मानवीय संकट को रोका जा सकेगा.
अफ़ग़ानिस्तान के तालिबान दौर मे उभर कर आईं वो पहली महिला निर्देशक हैं. दो दशकों से उनकी फ़िल्में अफ़ग़ानी औरतों की आवाज़ें, उनकी ज़िंदगियां और उनपर लगे प्रतिबंधों के बारे में बताती रही हैं.
2017 की उनकी फ़िल्म, अ लेटर टू द प्रेसिडेंट अफ़ग़ानिस्तान की ओर से 90वें एकेडमी अवार्ड के लिए बेस्ट फ़ॉरेन लैंग्वेज फ़िल्म की कैटगरी में भेजी गई थी.
सदात एक स्वतंत्र फ़िल्म कंपनी रोया फ़िल्म हाउस की अध्यक्ष और सह-संस्थापिका हैं और अफ़ग़ानिस्तान में अंतरराष्ट्रीय महिला फिल्म महोत्सव की स्थापना का श्रेय उन्हें दिया जाता है. इस फ़िल्मोत्सव की वो अध्यक्ष भी हैं.
*तालिबान की हुकूमत के पहले पांच साल के दौरान मुझे उम्मीद थी कि ये ख़त्म होगा और मेरे स्कूल के दरवाजे मेरे लिए खुल जाएंगें. आज भी मुझे यक़ीन है कि आज़ादी की और लोगों की आवाज़ ही आख़िरकार जीतेगी.
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शोगूफ़ा सफ़ी
अफ़ग़ानिस्तान आर्केस्ट्रा कंडक्टर
अफ़ग़ानिस्तान की पहली सभी महिला सदस्यों वाली आर्केस्ट्रा के संचालन का ज़िम्मा शोगूफ़ा पर है. वह 13 से 20 साल की लड़कियों के समूह का नेतृत्व करती हैं, इनमें से कई अनाथ हैं या फिर बेहद ग़रीब परिवारों से आती हैं.
संगीत की एक फ़ारसी देवी के नाम वाला आर्केस्ट्रा ज़ोहरा पारंपरिक अफ़ग़ान और पश्चिमी शास्त्रीय संगीत का मिश्रण है.यह समूह 2014 से ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कार्यक्रम पेश कर रहा है.
तालिबान के अफ़ग़ानिस्तान पर क़ब्ज़े के बाद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ म्यूज़िक को बंद कर दिया गया है, जहां कभी सफ़ी अपना अभ्यास किया करती थीं. दोहा पहुंचने के बाद वह और उनके कुछ साथी- जिन्हें अपने वाद्य यंत्रों को भी अफ़ग़ानिस्तान में छोड़ना पड़ा- फिर से कार्यक्रम पेश करने में सक्षम हो गए हैं.
*उम्मीद कभी नाकाम नहीं होती. एकदम अंधकार में भी मुझे विश्वास है कि मेरी छड़ी अफ़ग़ानिस्तान में उम्मीद की रोशनी साबित होगी.
सहर
अफ़ग़ानिस्तानफ़ुटबॉलर
अफ़ग़ानिस्तान में फ़ुटबॉल खेलने की इच्छा रखने वाली कई युवा महिलाओं में एक हैं सहर, लेकिन वह ऐसा तालिबान के शासन में नहीं कर सकतीं. सहर पिछले कुछ सालों में स्थानीय फ़ुटबॉल की टीम की ओर से खेलती रही हैं और खेल के माध्यम से कई दोस्तों से मिलीं.
जब तालिबान ने इस साल देश पर क़ब्ज़ा किया तो वह देश छोड़ने से पहले उन्हें अपने परिवार के साथ छिपना पड़ा था.
उन्हें अब भी अपने देश में मौजूद महिला खिलाड़ियों की चिंता है लेकिन उन्हें उम्मीद है कि वे एक बार फिर से फ़ुटबॉल खेलने के अपने सपनों को साकार कर सकती हैं.
*मैं अपनी पढ़ाई जारी रखना चाहती हूं और अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए कड़ी मेहनत करना चाहती हूं ताकि परिवार और खुद अपनी उपलब्धियों पर गर्व कर सकूं. मैं कामयाबी चाहती हूं ताकि कोई यह नहीं कह सके कि लड़कियां फ़ुटबॉल नहीं खेल सकतीं.
सोमा सारा
ब्रिटेनएवरीवन इनवाइटेड की संस्थापिका
सोमा सारा ने जून 2020 में एक लोकप्रिय इंस्टाग्राम अकाउंट और वेबसाइट ‘एवरीवन इज़ इनवाइटेड’ की स्थापना की थी. ये यौन उत्पीड़न के सरवाइवरों का प्लेटफॉर्म है. इस स्पेस का इस्तेमाल पीड़ित, यौन हमले की घटनाओं को अज्ञात रूप से शेयर करने के लिए करते हैं. इसका लक्ष्य है लैंगिक भेदभाव का विरोध करना और ब्रिटिश स्कूलों और विश्वविद्यालयो में ‘रेप संस्कृति’ को ख़त्म करना.
इस प्रोजेक्ट के तहत 50 हज़ार से ज़्यादा दास्तानें जुटाई गई हैं. सारा एवरार्ड की हत्या के बाद इसकी ओर सबका ध्यान गया. मार्च 2021 में लंदन की एक सड़क से सारा का अपहरण कर लिया गया था.
स्त्री-द्वेष की बढ़ती हुई संस्कृति से लड़ने के लिए, सोमा को, अकादमिक संस्थानों के दायरों से बाहर भी, अपनी मुहिम के फैलने की उम्मीद है.
*मैं चाहती हूं कि दुनिया यौन हिंसा से उबरे व्यक्तियों को सुने, उनका समर्थन करे और उन पर भरोसा करे.
मेहबूबा सेराज
अफ़ग़ानिस्तान महिला अधिकार कार्यकर्ता
अमेरिका में 26 साल के निर्वासन झेलने के बाद मेहबूबा सेराज 2003 में अपने वतन अफ़ग़ानिस्तान लौटीं. इसके बाद उन्होंने महिला और बाल अधिकार पर काम करने वाली कई संस्थाएं बनायीं और उनका नेतृत्व किया है. इनमें देश भर में महिला आंदोलन को नयी दिशा देने वाली अफ़ग़ान वीमेंस नेटवर्क शामिल है.
मेहबूबा ने अपना जीवन घरेलू हिंसा का सामना करने वाली महिलाओं को सशक्त बनाने, बच्चों के स्वास्थ्य एवं शिक्षा के लिए संघर्ष करने और भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ लड़ने में समर्पित किया है. जब तालिबान अगस्त, 2021 में सत्ता में लौटे तब भी मेहबूबा अपने लोगों के साथ रहीं और स्थानीय एवं अंतरराष्ट्रीय मीडिया में महिलाओं की चिंता को साहसपूर्ण ढंग से रखा.
टाइम पत्रिका ने उन्हें 2021 के सौ सबसे प्रभावशाली लोगों की सूची में शामिल किया है.
*मेरी सबसे बड़ी इच्छा देश में शांति की है. मैं अपनी बहनों और बेटियों की आंखों में अनिश्चित भविष्य का आतंक नहीं देखना चाहती. अब इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता.
अलिफ़ शफ़ाक़ तुर्क-ब्रिटिश लेखक हैं और स्त्री और एलजीबीटीक्यू प्लस समुदाय के अधिकारों की वकालत करने वाली एक्टिविस्ट हैं.
उनकी 19 किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं. ‘टेन मिनट्स 38 सेकंड्स इन दिस स्ट्रेंज वर्ल्ड’ नाम की किताब बुकर पुरस्कार के लिए शॉर्टलिस्ट भी हुई थी. ‘द फोर्टी रूल्स ऑफ लव’ को बीबीसी के ‘दुनिया को आकार देने वाले 100 उपन्यासों’ की सूची के लिए चुना गया था. दुनिया की 50 से अधिक भाषाओं में उनकी रचनाओं के अनुवाद हो चुके हैं.
शफ़ाक़, राजनीति शास्त्र में पीएचडी हैं और तुर्की, अमेरिका और ब्रिटेन के विश्वविद्यालयों में पढ़ा चुकी हैं. ‘दास्तानगोई की कला को पुनर्जीवित’ करने में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें 2021 का हॉलडोर लैक्सनेस अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक पुरस्कार दिया गया है.
*पूरब और पश्चिम- हर कहीं हम चौराहे पर हैं. पुरानी दुनिया रही नहीं- वापस लौटने के बजाय हम लोग एक बेहतर और साफ़ दुनिया बना सकते हैं जहां कोई भी पीछे न छूटा रहे.
अनीसा शहीद
अफ़ग़ानिस्तानपत्रकार
अफ़ग़ानिस्तान के कुछ जाने माने पत्रकारों में से एक अनीसा शहीद ने एक दशक से अधिक समय तक मानवाधिकारों के हनन, राजनीति और भ्रष्टाचार के बारे में रिपोर्टिंग की. उन्होंने टोलो न्यूज़ के लिए काम किया, जो देश के सबसे प्रभावशाली टेलीविजन समाचार चैनलों में से एक है. वह मौके पर जाकर ब्रेकिंग न्यूज़ कवर करती थीं.
शहीद को एक पत्रकार और एक महिला होने के कारण धमकियां मिलीं और 15 अगस्त को तालिबान के अधिग्रहण के बाद उन्हें देश छोड़ना पड़ा. 2020 में मीडिया की स्वतंत्रता की रक्षा करने वाली संस्था रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स ने कोरोनो संक्रमण प्रकोप के दौरान उनकी "साहसपूर्ण" रिपोर्टिंग को सराहा.
अफ़ग़ानिस्तान के फ्री स्पीच हब नेटवर्क ने 2021 में उन्हें वर्ष की पत्रकार और "अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का चेहरा" नामित किया.
*विस्थापन और निराशा के चरम पर, मैं अफ़ग़ानिस्तान में शांति कायम होते देखने की आशा करती हूं. मैं महिलाओं और लड़कियों को मुस्कुराते हुए देखने की उम्मीद करती हूं. और मैं उम्मीद करती हूं कि मैं अपने वतन, अपने घर और अपने काम पर वापस लौट सकूंगी.
मीना स्मॉलमैन
ब्रिटेनपादरी और शिक्षाविद
काले या जातीय-अल्पसंख्यक समुदाय की पृष्ठभूमि से वह 2013 में चर्च ऑफ़ इंग्लैंड की पहली महिला पादरी बनी थीं. चर्च से रिटायर होकर मीना स्मॉलमैन स्कूल अध्यापिका हैं. वो ब्रिटेन की सड़कों को ज्यादा सुरक्षित बनाने और पुलिस सुधारों के लिए मुहिम चलाती आ रही हैं.
2020 में उनकी दो बेटियों की हत्या कर दी गई थीः निकोल स्मॉलमैन और बीबा हेनरी की लंदन पार्क में 19 साल के एक लड़के ने चाकू मारकर हत्या कर दी थी. स्मॉलमैन ने प्रारंभिक गुमशुदा लोगों से जुड़ी कॉल को ठीक से हैंडल न करने के लिए पुलिस की आलोचना की और कहा कि उनकी दोनों बेटियां “नस्ली नफ़रत” और “वर्गवाद” की शिकार हुई हो सकती हैं.
वह कहती हैं कि उन्होंने अपनी बेटियों के क़ातिल को माफ़ कर दिया हैः “जब हम किसी से नफ़रत करते हैं तो उसकी चपेट में सिर्फ़ वही लोग नहीं आते. आप भी आते हैं क्योंकि आपका ज़ेहन बदले की भावना से भर जाता है. मैं उस हत्यारे को वो ताकत देने से इंकार करती हूं.”
*एक शिक्षक और एक पादरी होने के नाते मैंने अपनी तमाम जिंदगी उन लड़कों और लड़कियों कों बड़ा करने में लगा दी जिन्हें बाकी लोगों ने दरकिनार कर दिया था. मैं सबसे कहना चाहती हूं कि भेदभाव के खिलाफ बोलें. हम बदलाव ला सकते हैं.
बारबारा स्मोलिंस्का
पोलैंडरीबर्न सुगर बेबीज़ की संस्थापिका
एकदम बच्ची जैसी दिखने वाली गुड़िया कुछ महिलाओं को गर्भपात या बच्चे के नुकसान की प्रक्रिया से उबरने में मदद करती हैं और कुछ को वे चिंता, अवसाद और प्रजनन संबंधी मुद्दों से निपटने में सहायता करती हैं. पोलैंड की कलाकार बारबरा स्मोलिंस्का गुड़िया डिजाइनर और निर्माता हैं, जो बिल्कुल जीवंत बच्चों की तरह की गुड़िया बनाती हैं जिनका उपयोग चिकित्सीय सहायता के रूप में किया जा सकता है.
पूर्व संगीतकार स्मोलिंस्का ने कॉस्मेटोलॉजी में पेशेवर प्रशिक्षण प्राप्त किया है और वह अपनी कंपनी, रीबॉर्न शुगर बेबीज़ की संस्थापक हैं. उनकी हस्तनिर्मित गुड़िया का उपयोग फ़िल्मों में और चिकित्सा संस्थानों में डॉक्टरों, नर्सों और दाइयों को प्रशिक्षित करने के लिए किया जाता है.
स्मोलिंस्का में अपनी कला के प्रति उत्साह हैं और उनका मानना है कि उनकी कृतियां महिलाओं में आशा का संचार करती हैं और उनके मानसिक स्वास्थ्य में सुधार लाती हैं.
*मैं चाहूंगी कि जो कुछ सामान्य से हट कर है, लोग उसके प्रति अधिक सहानुभूतिपूर्ण, अधिक खुले विचार के और सहिष्णु बनें, जैसा कि पुनर्जन्म गुड़िया चिकित्सा के मामले में होती है, जो बहुत सारी महिलाओं की मदद कर सकती है
ऐन सो मे
म्यांमारलोकतांत्रिक कार्यकर्ता
म्यांमार सैन्य जुंटा द्वारा गिरफ़्तार किए जाने के बाद ऐन सो मे (उनका वास्तविक नाम नहीं) छह महीने तक सलाखों के पीछे रहीं, उन्हें हाल में माफ़ी के बाद रिहा किया गया. कई सैन्य पूछताछ केंद्रों में से एक और कुख़्यात इनसेन जेल में रखा गया. उन्होंने हिरासत में अपने समय को मुश्किलों भरा बताया और आरोप लगाया कि उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया.
अपने छात्र जीवन से ही युवा कार्यकर्ता कई अभियानों और ज़मीनी स्तर की गतिविधियों में शामिल रही हैं. एक फरवरी को सैन्य तख़्तापलट के बाद, सो मे देश की सेना का खुल कर विरोध करने वाले आंदोलन का हिस्सा बन गयीं, जिनमें फरवरी में "पॉट्स एडं पैन्स" विरोध और मार्च के अंत में "साइलेंस स्ट्राइक" शामिल था.
अपनी रिहाई के बाद उन्होंने अपनी राजनीतिक गतिविधियां फिर से शुरू कर दी हैं.
*यदि दुनिया को फिर से बनाया जा सके ... तो हम महामारी पर सफलतापूर्वक विजय प्राप्त करना और एक शांतिपूर्ण समाज का निर्माण करना चाहते हैं. हम आशा करते हैं कि पूरी दुनिया से तानाशाही को उखाड़ फेंका जाएगा और सच्चे और शांतिपूर्ण लोकतंत्र की स्थापना की जाएगी.
टेक्सास के ऑस्टिन में 'द सेफ़ एलायंस' में मुख्य लोक रणनीति अधिकारी पाइपर स्टीज नेल्सन बाल शोषण, यौन उत्पीड़न, घरेलू हिंसा और यौन तस्करी को रोकने के लिए समाज के साथ मिलकर काम करती हैं.
संगठन बलात्कार पीड़िता उन युवाओं को परामर्श देता है जो गर्भपात सुविधाओं का अब इस्तेमाल नहीं कर सकतीं, क्योंकि देश का नया क़ानून गर्भ धारण के छह सप्ताह के बाद गर्भपात की अनुमति नहीं देता.
स्टीज नेल्सन ने अपना जीवन महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों को सशक्त बनाने के लिए काम करने में समर्पित कर दिया है. उन्होंने मिशेल ओबामा की लेट गर्ल्स लर्न पहल के साथ और राजनीति में महिलाओं की संख्या और सफलता बढ़ाने के लिए समर्पित राजनीतिक कार्य समिति एनीज लिस्ट के साथ काम किया है.
*कोविड -19 ने पहले ही सामाजिक-परिवर्तन कर दिया है — जो कुछ महत्वपूर्ण है, उसके बारे में बात करने के लिए लोग अपने को सशक्त महसूस कर रहे हैं. अब चुनौती है प्रत्येक पुरुष, महिला और बच्चे को उनके जीवन और भविष्य और सहमति के महत्व के बारे में शिक्षित करना.
फ़ातिमा सुल्तानी
अफ़ग़ानिस्तानपर्वातारोही
फ़ातिमा सुल्तानी ने 2019 में एक शौक के रूप में पर्वतारोहण शुरू करने के बाद, अफ़ग़ान लड़कियों में इसके प्रति रुचि को बढ़ावा देने को अपना मिशन बना लिया.
महज 18 साल की उम्र में वह 7,492 मीटर (24,580 फीट) की ऊंचाई पर अफ़ग़ानिस्तान की सबसे ऊंची चोटी नोशाख पर चढ़ने वाली सबसे कम उम्र की महिला बन गईं. वह नौ युवा अफ़ग़ान पर्वतारोहियों की एक टीम का हिस्सा थीं, जिनमें तीन महिलाएं थीं.
सुल्तानी जोश से भरपूर खिलाड़ी हैं और पिछले सात वर्षों से मुक्केबाज़ी, ताइक्वांडो और जिउ जित्सु की राष्ट्रीय टीम की सदस्य हैं.
*अफ़ग़ान महिलाओं ने 20 साल तक अपनी आज़ादी और अधिकारों की लड़ाई लड़ी है. उन्होंने ऊंचे पर्वतों पर चढ़ाई की और नाम कमाया. मैं उम्मीद करती हूं कि वे देश के अंदर और बाहर फिर से ऊंचे पहाड़ों पर चढ़ने को स्वतंत्र हो सकेंगी.
एडीलेड लाला एक कलाकार और फूड डिज़ाइनर हैं. जीवनशैली के तमाम विकल्पों को खंगालने का उनका काम है, ख़ासकर भोजन के साथ हमारे आधुनिक संबंध के लिहाज से.
चीन में पैदा हुई एडीलेड लाला टैम बाद में हाँन्गकाँन्ग की स्थायी निवासी बन गई और इन दिनों नीदरलैंड्स में रहतीं और काम करती हैं. उनकी कला औद्योगिक खाद् उत्पादन का आलोचनात्मक विश्लेषण करती है और उपभोक्ताओं से अपील करती है कि वे जो खाते हैं उसका फिर से आकलन करें और उस चीज़ के उत्पादन में अपनी ज़िम्मेदारी को भी देखें.
2018 में उन्हें फ्यूचर फूड डिज़ाइन अवार्ड्स में जूरी और पब्लिक दोनों के पुरस्कार मिले थे. उन्होंने एक मिक्स मीडिया इन्स्टालेशन पेश किया था जिसमें गाय काटने की प्रक्रिया दिखाई गई थी. उद्योग जगत की 2021 की “नेक्स्ट 50” की सूची में उनका नाम भी शामिल है. इस सूची के तहत उन लोगों को रेखांकित किया जाता है जो गेस्ट्रोनमी के भविष्य को आकार दे रहे हैं.
*2021 में दुनिया काफ़ी बदल चुकी है. अब मैं चाहती हूं कि दुनिया में खाने के प्रति और वो खाना हम तक कैसे पहुंचता है इसके प्रति ज्यादा समझ और समानुभूति पैदा हो सके.
सिस्टर ऐन रोज़ नू त्वांग
म्यांमारकैथोलिक नॉन
म्यांमार में सैन्य कब्ज़े के बाद ये कैथोलिक नन विरोध प्रदर्शनों का प्रतीक बन गई जब अपने चर्च में शरण ले रहे प्रदर्शनकारियों को बचाने के लिए वो पुलिस के सामने घुटनों के बल बैठ गईं.
हथियारबंद पुलिस के सामने हाथ फैलाए उनकी तस्वीर सोशल मीडिया पर मार्च 2021 में वायरल हुई थी. अपने साहस के लिए उन्हें चौतरफ़ा तारीफ़े मिलीं.
सिस्टर ऐन रोज़ नू त्वांग नागरिकों खासकर बच्चों की हिफाजत पर खुलकर बोलती हैं. उन्होंने दाई की ट्रेनिंग ली है और पिछले 20 साल से अपना जीवन सेवा को अर्पित कर चुकी हैं. हाल में म्यामांर के काछिन राज्य में कोविड के मरीजों की सेवा कर रही थीं.
*म्यांमार में जो हुआ, वो सब मैंने टूटे दिल से देखा है. अगर मैं कुछ करने में समर्थ होती तो जेल में भरे गए तमाम लोगों को बिना किसी दलील के रिहा कर देती और लोगों के बीच भेदभाव मिटाकर बराबरी ले आती.
एम्मा थियोफ़ेलस
नामीबियासांसद एवं मंत्री
एम्मा पिछले साल 23 साल की उम्र में अफ्रीका की सबसे युवा कैबिनेट मंत्री बनीं थीं. एम्मा इनामुतिला थियोफ़ेलस सांसद हैं और सूचना और संचार प्रौद्योगिकी की उपमंत्री हैं. देश में कोविड 19 से निपटने के सरकारी प्रयासों के संचार का ज़िम्मा उनके पास ही है.
उससे पहले, वो एक युवा एक्टिविस्ट थीं. लैंगिक बराबरी, बाल अधिकार और टिकाऊ विकास के लिए मुहिम चलाने के अलावा युवा संसद में वक्ता और अपनी पैदाइश के शहर विंडहोएक में जूनियर मेयर भी थीं.
थियोफ़ेलस ने नामीबिया यूनिवर्सिटी से क़ानून की डिग्री ली है और दक्षिण अफ्रीका यूनिवर्सिटी से अफ्रीकी नारीवाद और लैंगिक अध्ययनों पर डिप्लोमा किया है.
*दुनिया को एक त्वरित गति से बदला जा सकता हैः वर्षों से अटकी पड़ीं तमाम योजनाओं को त्वरित गति से लागू करने की ज़रूरत है. देरी के लिए वक़्त नहीं है. वास्तव में वक़्त बचा ही नहीं है.
सारा वहेदी
अफ़ग़ानिस्तानमुख्य कार्यकारी- एहतेसाब
सारा अफ़ग़ान टेक्नोलजी स्टार्ट-अप एहतेसाब की संस्थापिका हैं. स्टार्टअप का पहला उत्पाद एक ऐप है जो काबुल के निवासियों को रियल टाइम सुरक्षा, बिजली और ट्रैफ़िक के अलर्ट भेजता है. अपने आसपास के ख़तरों की प्रकृति और स्तर के बारे में जानकारी हासिल करने में ये ऐप महत्त्वपूर्ण साबित हुआ है. वो बारूदी विस्फोटों, सार्वजनिक पिटाइयों और घरों पर पड़ने वाले छापे के बारे में विश्वसनीय सूचना शेयर करता है.
2022 में सारा वहेदी को एक एसएमस अलर्ट फ़ंक्शन को लॉन्च करने की उम्मीद है, जिससे ग्रामीण इलाकों के लोग इस सेवा का लाभ उठा सकें.
टेक उद्यमी सारा टाइम पत्रिका के 2021 के नेक्स्ट जनरेशन लीडर्स की सूची में शामिल हैं और इस वक्त कोलम्बिया यूनिवर्सिटी से मानवाधिकार और डाटा विज्ञान की पढ़ाई कर रही हैं.
*अफ़ग़ानियों का एकसाथ खड़े हो जाना लाज़िमी है. देश को फिर से बनाने के लिए वे निष्पक्ष और साफ़ चुनावों की मांग करेंगे. वहां तक पहुंचने के लिए सभी के लिए सार्वभौम शिक्षा और स्वास्थ्य की लड़ाई अपरिहार्य है.
वेरा वांग
अमेरिकाफ़ैशन डिज़ाइनर
शादी के कपड़ों की प्रतिष्ठित डिज़ाइनर 1970 के दशक फैशन की दुनिया में अग्रणी रही हैं. वेरा एलन वांग ने अपना व्यापार अब इत्र, प्रकाशन, होम डिज़ाइन जैसी तमाम चीज़ों तक फैला दिया है.
वो चीनी मातापिता की संतान हैं और न्यू यार्क में पैदा हुई थीं. वोग में सीनियर फैशन डिज़ाइनर रही हैं और राल्फ लॉरें में डिज़ाइन डायरेक्टर भी रही हैं. वो प्रतिभाशाली फिगर स्केटर भी हैं. किशोरावस्था में पेशेवर रूप से प्रतिस्पर्धाओं में हिस्सा भी उन्होंने लिया था.
वो अमेरिका की प्रतिष्ठित फैशन डिजाइनर काउंसिल की सदस्य भी हैं. 2005 में उन्हें वीमन्सवीयर डिज़ाइनर ऑफ द ईयर अवार्ड से सम्मानित किया गया था.
*हम लोग बिल्कुल एक जैसी चीज़ों के लिहाज से असहाय हैं. धरती को बचाने की कोशिश में हम लोग जितना जल्दी और ज्यादा समझदारी और अस्तित्वपूर्ण ढंग से, साथ मिलकर काम करेंगे उतना ही हमारे लिए अच्छा होगा.
नानफ़ू वांग
चीन फ़िल्म मेकर
मूल रूप से चीन के एक सुदूर गांव की रहने वाली, पुरस्कार विजेता फ़िल्म निर्माता नानफ़ू वांग वर्तमान में अमेरिका में रहती हैं और वहीं काम करती हैं.
उनकी 2016 की पहली फिल्म, हूलिगन स्पैरो को "सर्वश्रेष्ठ वृत्तचित्र फीचर" अकादमी पुरस्कार के लिए चुना गया था. उन्होंने वन चाइल्ड नेशन (2019) और इन द सेम ब्रीथ (2021) का भी निर्देशन किया, जो दर्शाती हैं कि चीनी और अमेरिकी सरकारों ने कोविड -19 के प्रकोप का कैसे मुक़ाबला किया.
वांग ग़रीबी में पली-बढ़ी लेकिन उनके पास शंघाई, ओहियो और न्यूयॉर्क विश्वविद्यालयों से तीन मास्टर डिग्री हैं. उन्हें 2020 में "गहन चरित्र अध्ययन जो निरंकुश शासन, भ्रष्टाचार और जवाबदेही की कमी के प्रभाव की जांच करता है," तैयार करने के लिए मैकआर्थर जीनियस ग्रांट से सम्मानित किया गया था.
*पूरी दुनिया सामान्य की भावना में लौटने को उत्सुक लगती है, लेकिन जिन परिस्थितियों को हमने सामान्य माना था, वास्तव में उन्होंने ही वह संकट पैदा किया जिसमें हम अभी जी रहे हैं.
रोशनाक वर्दाक
अफ़ग़ानिस्तानप्रसूतिरोग विशेषज्ञ
पूर्व संसद सदस्य और स्त्री रोग विशेषज्ञ, डॉ रोशनाक वर्दाक ने 25 वर्षों से अधिक समय से महिलाओं के लिए चिकित्सा सेवा प्रदान की हैं, यहां तक कि तालिबान के पहले कार्यकाल के दौरान भी अपने गृह प्रांत मैदान वर्दाक में एकमात्र महिला डॉक्टर के रूप में उन्होंने अपना काम जारी रखा था.
2001 में उनके पतन के बाद वह संसद की सदस्य बनीं. उनका ज़िला लगभग 15 वर्षों तक तालिबान के नियंत्रण में रहा और अन्य अनेक ग्रामीण क्षेत्रों की तरह, नाटो बलों से भारी लड़ाई का साक्षी बना.
उन्होंने बीबीसी से कहा कि तालिबान का अधिग्रहण और युद्ध का अंत एक सपने जैसा महसूस हुआ था. उन्होंने कहा, "मैं इन भ्रष्ट लोगों को सत्ता से हटाने के लिए इस दिन का इंतज़ार कर रही थी." लेकिन हाल ही में उन्होंने स्कूलों को फिर से खोलने की कोशिश पर ध्यान केंद्रित किया है, और तालिबान के अपने वादे पूरे नहीं करने के कारण वह लड़कियों की शिक्षा की मुखर हिमायती बन गई हैं.
*मेरी एकमात्र उम्मीद यह है कि बीते 40 सालों से शासन में रहे नेताओं को देश के ख़िलाफ़ उनके कामों के लिए जवाबदेह बनाया जाए.
मिंग-ना वेन
मकाऊअभिनेत्री
एनीमेटड फ़ीचर फिल्म मुलान (1998) और मुलान दो (2004) में फ़ा मुलान किरदार को आवाज़ देने वाली मिंग-ना वेन ने लोकप्रिय अमेरिकी मेडिकल ड्रामा ईआर और इनकन्सीवेबल में भी मुख्य किरदार निभाए हैं. एशियाई-अमेरिकी मुख्य किरदार के साथ काम करने वाले ये चुनिंदा अमेरिकी टीवी प्रोडक्शन्स में से एक है.
इन दिनों वो डिज़्नी प्लस सिरीज़ द मैंडालोरियिन में फेनेक शांड का किरदार निभा रही हैं. और आने वाली सीरीज़ द बुक ऑफ बोबा फेट में भी वो नजर आएंगी. 2019 में मिंग-ना को “डिज़्नी लीजेंड”के रूप में सम्मानित किया गया.
2022 में उन्हें हॉलीवुड के वॉक ऑफ़ फ़ेम में स्टार दिया जाएगा.
*चीज़ों को फिर से बनाना एक वास्तविक विकल्प नहीं है, लिहाज़ा पीछे जाने की क्या ज़रूरत है? हर दिन नया है. आज के लिए जियो और आभारी रहो.
रेबेल विल्सन
ऑस्ट्रेलियाअभिनेत्री, लेखिका और निर्मात्री
हॉलीवुड की मेगास्टारः अभिनेत्री, निर्माता और निर्देशक- और कानून की स्नातक भी. उनका अभिनय करियर सिडनी के नाट्य मंचों से शुरू हुआ था जहां वो अक्सर अपने नाटक खुद लिखा करती थीं और 2010 में अमेरिका का रुख़ करने से पहले उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई कॉमेडी जगत में अपनी जगह बना ली थी.
हॉलीवुड मे उनकी शुरुआत ब्राइड्समेड नाम की हास्य फ़िल्म से हुई जिसमें सभी किरदार औरते थीं. ऑस्कर पुरस्कार जीतने वाली जोजो रैबिट में भी उनकी भूमिका थी लेकिन उन्हें शायद सबसे ज़्यादा प्रसिद्धि मिली अपने फैट एमी किरदार से जो उन्होंने बॉक्स ऑफ़िस पर हिट फ़िल्म पिच परफेक्ट त्रयी में निभाया था.
2022 में विल्सन अपनी पहली फ़ीचर फ़िल्म का निर्देशन करेंगी.
*विविधता, आदर और समावेशिकता- इन पर जिंदगी के तमाम क्षेत्रों में किसी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता है.
याक़ूबी और उनके पति जन्मजात अंधे हैं. दोनों ने मिलकर रहयाब संगठन की स्थापना की जो अफ़ग़ानिस्तान में अंधे लोगों को शिक्षा और पुनर्वास मुहैया कराता है. मानवाधिकार कार्यकर्ता बेनाफ़्शा याक़ूबी ने देश के आज़ाद मानवाधिकार आयोग में बतौर आयुक्त भी काम किया है. उन्होंने नेत्रहीन बच्चों की शिक्षा पर ध्यान केंद्रित किया.
तालिबान के हमले के बाद उन्हें देश छोड़ने को मजबूर होना पड़ा लेकिन वो विकलांग लोगों के अधिकारों की मुखर वक्ता अभी भी बनी हुई हैं. उन्हें डर है कि विकलांग लोगों को तालिबानी हुकूमत में भेदभाव का सामना करना पड़ेगा.
उपलब्धतता और भेदभाव अफ़ग़ानिस्तान में गंभीर मुद्दे बने हुए हैं. वो विकलांग लोगों की प्रतिव्यक्ति सबसे ज़्यादा आबादी वाले देशों में एक है. इसकी एक वजह दशकों से चला आ रहा संघर्ष है.
*अगर कुछ उम्मीद है तो वो अपने मुल्क को दोबारा देखने की होगी जहां ज़्यादा आज़ादी हो, देश के विकास के लिए जहां सभी अफ़ग़ानियों के लिए ज़्यादा जगह हो.
मलाला यूसुफ़ज़ई
पाकिस्तानसह-संस्थापिका, मलाला फंड
सबसे कम उम्र की नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफ़ज़ई पाकिस्तानी लड़कियों की शिक्षा के लिए काम करने वाली कार्यकर्ता और संयुक्त राष्ट्र की शांति दूत हैं. उन्होंने 11 साल की उम्र से ही महिलाओं के शिक्षा के अधिकार के लिए आवाज़ उठाई.
मलाला ने पाकिस्तान में तालिबान के शासन के अंतर्गत रहने और लड़कियों के स्कूल जाने पर प्रतिबंध के बारे में बीबीसी के लिए ब्लॉगिंग करते हुए सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में शुरूआत की. अक्टूबर 2012 में, एक बंदूक़धारी उनकी तलाश में स्कूल बस में चढ़ा और उनके सिर पर गोली मार दी.
स्वस्थ होने के बाद, उन्होंने गैर-लाभकारी संगठन मलाला फंड के सह-संस्थापक के रूप में अपना काम जारी रखा, और एक ऐसी दुनिया का निर्माण करने के लिए काम किया जहां हर लड़की बिना किसी डर के पढ़ सके और नेतृत्व कर सके.
*आज लाखों लड़कियां स्कूल से बाहर हैं. मैं एक ऐसी दुनिया देखना चाहती हूं जहां हर लड़की 12 साल तक की मुफ़्त, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर सके. जहां सभी लड़कियां पढ़ लिख सकें और नेतृत्व कर सकें.
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युमा
तुर्कमेनिस्तानमनोचिकित्सक
गत अगस्त में समलैंगिकों के समारोह गे प्राइड में अपने परिवार को प्रदर्शित करने वाले सुपरमार्केट के एक विज्ञापन में उनकी भागीदारी को लेकर हुई तीखी प्रतिक्रिया के बाद उन्हें रूस छोड़ने को मजबूर होना पड़ा था. मनोचिकित्सक और एलजीबीटी प्लस कार्यकर्ता, युमा वर्तमान में स्पेन में रह रही हैं.
रूस में 2013 में "नाबालिगों के लिए गैर-पारंपरिक यौन संबंधों को बढ़ावा देने" पर प्रतिबंध लगाने वाला "समलैंगिक प्रचार" क़ानून पारित होने के बाद युमा (जिन्होंने अपना उपनाम गुप्त रखने के लिये कहा है) समलैंगिकों के लिए काम करने वाली कार्यकर्ता बन गई थीं.
वह चेचन्या के एलजीबीटी लोगों को मनोवैज्ञानिक सहायता प्रदान करती हैं, जो कहते हैं कि उन्हें 2017-2018 में रूस की पुलिस द्वारा प्रताड़ित किया गया था. वह रूस के भीतर एलजीबीटी समारोहों और कार्यक्रमों का भी समर्थन करती हैं.
*जबरन अलगाव ने दिखा दिया है कि घनिष्ठ संबंध होना कितना ज़रूरी होता है. इस दुनिया में हम अपने प्रियजनों के लिए जो कुछ करना चाहते हैं, उस दिशा में हम क्या कर रहे हैं, इसका विश्लेषण करना चाहिए.
ज़ाला ज़ज़ाई
अफ़ग़ानिस्तानपुलिस अधिकारी
ज़ाला अफ़ग़ानिस्तान के खोस्त सूबे में पुलिस के अपराध जांच विभाग में पहली महिला डिप्टी चीफ़ रही हैं. ये इलाका घुसपैठियों की हरकतों से लगातार अस्थिर रहा है. सेकंड लेफ़्टिनेन्ट ज़ाला ज़ज़ाई देश की 4000 महिला पुलिस अधिकारियों में से एक थीं, उनकी पेशेवर ट्रेनिंग तुर्की की पुलिस अकादमी में हुई थी.
नौकरी के दौरान उन्हें अपने पुरुष सहयोगियों की धमकियां और ताने सहने पड़े थे. उपद्रवियों की ओर से मौत की धमकियां अलग मिलीं.
2021 में अफ़ग़ानिस्तान पर तालिबान के क़ब्ज़े के बाद, ज़ज़ाई को देश छोड़कर भागना पड़ा. तबसे वो अफ़ग़ानिस्तान में ही छिपने को मजबूर अन्य महिला पुलिस अधिकारियों की सलामती की फ़िक्र में आवाज़ उठाती रही हैं.
*भविष्य के लिए मेरा ख़्वाब है कि मैं अपनी यूनिफ़ॉर्म दोबारा पहनूं और पारंपरिक और पितृसत्तात्मक समाज को चुनौती दूं. मैं दूरदराज के इलाक़ो में दोबारा अफ़ग़ान औरतों के लिए काम करना चाहती हूं जहां महिलाओं को काम का अधिकार नहीं है.
100 वीमेन का चयन कैसे होता है?
बीबीसी 100 वीमेन टीम ने बीबीसी की वैश्विक भाषाई सेवाओं से मिली जानकारी और सुझाव के मुताबिक इन महिलाओं को शार्टलिस्ट किया. हमने यह देखा कि जिन महिलाओं को शामिल कर रहे हैं, उन्होंने पिछले 12 महीनों के अंदर सुर्ख़ियां बटोरी हों या फिर प्रभावी भूमिका निभाई हो. ऐसी महिलाएं जो दूसरे लोगों के लिए प्रेरक हों, जिन्होंने कुछ उपलब्धि हासिल की हो. ऐसी महिलाएं जो भले सुर्खियां नहीं बना पाई हों लेकिन जिन्होंने समाज को प्रभावित किया हो.
इसके बाद इन महिलाओं को इस साल की थीम- जो महिलाएं रीसेट का बटन दबा रही हैं, जो वैश्विक महामारी के दौर में दुनिया को नए सिरे से तलाशने में अपनी भूमिका निभा रही हैं. हमने इस दौरान क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व भी देखा और अंतिम सूची तय करने से पहले पूरी तरह की निष्पक्षता रखी.
इस साल बीबीसी 100 वीमेन ने अभूतपूर्व फ़ैसला लेते हुए आधी संख्या में अफ़ग़ानिस्तान की महिलाओं को जगह देने का फ़ैसला किया. हाल की घटनाओं के चलते अफ़ग़ानिस्तान सुर्ख़ियों में रहा है और यहां की लाखों महिलाओं के भविष्य पर सवालिया निशान लग गया है. मानवधिकार संस्थाओं ने आशंका जताई है कि तालिबान के शासन के अधीन महिलाओं की आज़ादी छिन जाएगी.
हमने आधी सूची में अफ़ग़ानिस्तान की उन महिलाओं को दी है जो या तो अफ़ग़ानिस्तान की हैं या वहां काम करती हैं, ताकि यह बता सकें कि अफ़ग़ानिस्तान के सार्वजनिक जीवन से किस तरह ये महिलाएं ग़ायब होने को मज़बूर हो चुकी हैं. जिन लोगों की आवाज़ को दबाया जा रहा है, उन्हें भी हमने आवाज़ देने की कोशिश की है.
तीन दिसंबर को तालिबान ने अपने सर्वोच्च नेता की ओर से एक फ़रमान जारी किया जिसमें कहा कि उन्होंने संबंधित मंत्रालयों को महिला अधिकारों पर गंभीर कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया था. इस फ़रमान में महिलाओं की विवाह और संपत्ति को नियंत्रित करने वाले नियमों को निर्धारित किया गया है, कहा गया है कि महिलाओं को विवाह के लिए मज़बूर नहीं किया जा सकता और उन्हें संपत्ति की तरह नहीं देखा जाना चाहिए. लेकिन इस फ़रमान की बेहद आलोचना हो रही है क्योंकि इसमें लड़कियों की माध्यमिक शिक्षा और महिलाओं के काम के अधिकार में कटौती की बात शामिल नहीं है.
कुछ महिलाओं और उनके परिवार की सुरक्षा के चलते उनकी पहचान ज़ाहिर नहीं की जा रही है, यह उनकी सहमति और बीबीसी की संपादकीय नीतियों के तहत किया गया है.
बीबीसी 100 वीमेन हर साल दुनिया भर की 100 प्रभावशाली और प्रेरक महिलाओं की सूची है. हम इन महिलाओं के जीवन पर डॉक्यूमेंट्री और फ़ीचर बनाते हैं, इंटरव्यू करते हैं- ऐसी कहानियां करते हैं जिनमें महिलाएं केंद्र में होती हैं.
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