अफ़ग़ानिस्तानः 22 देशों ने मिलकर तालिबान को दी चेतावनी

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अमेरिका और सहयोगी राष्ट्रों ने तालिबान से कहा है कि वह पूर्व अफ़ग़ान सुरक्षाबलों को निशाना ना बनाए.
22 देशों ने एक साझा बयान में कहा है कि तालिबान की इस्लामी सरकार पूर्व सरकार के कर्मचारियों और सुरक्षाबलों को निशाना न बनाने के अपने वादे पर क़ायम रहे.
बयान में कहा गया है, "हम निरंकुश हत्याओं और लोगों के लापता होने की रिपोर्टों से बेहद चिंतित हैं."
इससे पहले ह्यूमन राइट्स वॉच की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि कि तालिबान शासन के दौरान अब तक सौ से अधिक पूर्व सुरक्षाकर्मियों की निरंकुश हत्याएं की जा चुकी है. तालिबान ने चार महीने पहले अफ़ग़ानिस्तान पर नियंत्रण किया था.
ह्यूमन राइट्स वॉच ने ऐसे 47 पूर्व सुरक्षाबलों का डेटा भी जुटाया है जिन्होंने 15 अगस्त से 31 अक्तूबर के बीच या तो तालिबान के समक्ष आत्मसमर्पण किया था या तालिबान ने उन्हें पकड़ा था. बाद में उनकी हत्या कर दी गई.
तालिबान ने अफ़ग़ानिस्तान में शासन संभालने के बाद भरोसा दिया था कि पूर्व सरकार के कर्मचारियों और सैनिकों को किसी तरह का नुक़सान नहीं पहुंचाया जाएगा.
अमेरिका ने एक संक्षिप्त साझा बयान जारी किया है जिस पर ब्रिटेन समेत यूरोपीय संघ और 19 अन्य देशों ने हस्ताक्षर किए हैं.
इन देशों ने अफ़ग़ानिस्तान में हो रही हत्याओं और लोगों के लापता होने के मामलों पर चिंता ज़ाहिर की है और गंभीरता से इसकी जांच की मांग की है.
बयान में कहा गया है, "हम तालिबान को उसके उठाए गए कदमों के आधार पर ही आंकना जारी रखेंगे."
इससे पहले आई मानवाधिकार रिपोर्टों में भी तालिबान पर निरंकुश हत्याएं करने के आरोप लगाए हैं. ऐसी कई घटनाओं हुई जिनमें तालिबान ने अपने वादे के ख़िलाफ़ कार्रवाइयां की हैं.
इस साल अगस्त में एमनेस्टी इंटरनेशनल ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी. एमनेस्टी को पता चला था कि 30 अगस्त को तालिबान के क़रीब तीन सौ लड़ाके तीस अगस्त को दहानी क़ुल गांव के पास पहुंचे. यहां कई पूर्व सैनिकों के परिवार रह रहे थे.
इस रिपोर्ट में कहा गया था कि तालिबान के समक्ष आत्मसमर्पण करने वाले नौ सैनिकों को गोलियों से मार दिया गया. दो अन्य सैनिकों की मौत गोलीबारी में हो गई और इस घटना के बाद हुई झड़प में दो आम नागरिक भी मारे गए. मारे जाने वालों में 17 साल की एक लड़की भी शामिल थी.
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