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सोलोमन आइलैंड्स - ऑस्ट्रेलिया के बाद अब फ़िजी ने भी भेजी इस देश में अपनी सेना
सोलोमन आइलैंड्स में तनाव को कम करने के लिए अंतरराष्ट्रीय शांति सेना के तहत फ़िजी ने भी अपनी सेना को सोमवार को इस देश में भेज दिया. वहीं रेड क्रॉस ने चेतावनी दी है कि इसकी राजधानी में खाने की कमी हो गई है.
रॉयटर्स समाचार एजेंसी के अनुसार, फ़िजी के प्रधानमंत्री फ़्रैंक बैनिमरामा ने 50 फ़िज़ी सैनिकों को क़ानून-व्यवस्था क़ायम करने के लिए तैनात किया है.
सोलोमन आइलैंड्स की राजधानी होनियारा में सरकार के ख़िलाफ़ जानलेवा हिंसक प्रदर्शन हुए हैं और वहां पर शांति स्थापित करने के लिए 200 सुरक्षाबल तैनात हैं जिनमें अधिकतर ऑस्ट्रेलियाई हैं और कम से कम 34 सैनिक पापुआ न्यू गिनी के हैं.
बैनिमरामा ने बताया है कि अतिरिक्त 120 सैनिकों को स्टैंडबाय में रखा गया है अगर होनियारा में सुरक्षा व्यवस्था बिगड़ती है तो उन्हें तैनात किया जाएगा वहीं राजधानी में अभी सफ़ाई अभियान जारी है. संघर्ष के दौरान होनियारा में हुई हिंसा में कम से कम तीन लोगों की मौतें हुई थीं.
फ़िजी के प्रधानमंत्री ने कहा, "इस मौक़े पर मैं सोलोमन आइलैंड्स में मौजूद मेरे भाइयों और बहनों के लिए प्रार्थना करना चाहता हूं जो वर्तमान में उथल-पुथल का सामना कर रहे हैं."
सोलोमन आइलैंड्स में कैसे दंगे भड़के
बीते बुधवार को सोलोमन आइलैंड्स में सरकारी नीतियों के ख़िलाफ़ प्रदर्शन हिंसक हो गए. 8 लाख की आबादी वाले राष्ट्र में लोग ग़रीबी, बेरोज़गारी और अंतर-द्वीप प्रतिद्वंद्विता के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे थे.
संसद पर चढ़ाई की कोशिशों के बाद दंगाई भीड़ ने तीन दिनों तक हिंसा की. चाइनाटाउन इलाक़े का अधिकतर हिस्सा मलबे में तब्दील हो गया और भीड़ ने प्रधानमंत्री मनासेह सोगवारे के आवास को भी जलाने की कोशिश की.
सोगवारे की मदद की अपील के बाद ऑस्ट्रेलिया को अपने सुरक्षाबलों को राजधानी होनियारा भेजना पड़ा तब जाकर राजधानी में शांति बहाल हो पाई.
खाने की होती कमी
सोलोमन आइलैंड्स में रेड क्रॉस के महासचिव जनरल क्लेमेंट मनूरी कहते हैं कि राजधानी होनियारा में खाने की कमी हो रही है और सहायता एजेंसियां आंकलन कर रही हैं कि कहां पर आपातकालीन सप्लाई बांटने की ज़रूरत है.
समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार, मनूरी का कहना है कि वो नेशनल डिज़ास्टर मैनेजमेंट ऑफ़िस (NDMO) के साथ बैठक करने जा रहे हैं.
"यह अभी तक साफ़ नहीं है लेकिन जल्द ही भीड़भाड़ वाली जगहों पर खाना ख़त्म हो जाएगा."
दंगाइयों ने तनाव के दौरान अधिकतर चीनी व्यापार प्रतिष्ठानों को लूट लिया था और मनूरी कहते हैं कि जहां से लोग अधिकतर खाने का सामान ख़रीदते थे वो तबाह हो चुके हैं.
उनका कहना है कि चीनी समुदाय निशाना बनाए जाने के बाद सार्वजनिक रूप से नज़र नहीं आ रहे हैं और उनकी तुरंत अपनी दुकानें खोलने की कोई योजना नहीं है.
वो कहते हैं, "वे इधर-उधर जा चुके हैं और अपने दोस्तों के साथ हैं. वे सदमे में हैं और उनकी प्राथमिकता अपने लिए एक घर देखने की है."
चीनी समुदाय को तब शुरुआत में थोड़ा निशाना बनाया गया था जब सोलोमन की सरकार ने 2019 में अपनी राजनयिक नीति को बदल दिया था और ताइवान की जगह उसने चीन से रिश्ते कायम किए थे. अंतरराष्ट्रीय मदद पर चल रहे देश में इस नीति ने कुछ समुदायों को ग़ुस्से से भर दिया था.
द सोलोमन आइलैंड्स चाइनीज़ एसोसिएशन (SICA) ने अपने बयान में कहा कि जिसे स्थानीय मीडिया में प्रकाशित किया गया है कि उसके 70 सालों से इस द्वीप के साथ रिश्ते हैं.
इसमें कहा गया है कि 'कई चीनी लोगों और उनके परिवारों ने सबकुछ खो दिया है और बेघर हैं.' उन्होंने इस 'मूर्खतापूर्ण' हिंसा की निंदा की है.
वित्त मंत्री हैरी कुमा ने कहा है कि हिंसा के कारण होनियारा के बाज़ार में खाने के दाम आसमान छू रहे हैं और सार्वजनिक एवं निजी संपत्ति को बड़े पैमाने पर नुक़सान पहुंचाया गया है.
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