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चीन और भारत की एकजुटता से बदलना पड़ा फ़ैसला
दो हफ़्तों के मंथन के बाद 200 देश आख़िरकार एक डील पर राज़ी हुए. ये जलवायु समझौता, अपनी तरह का पहला समझौता है, जिसमें कोयले के इस्तेमाल में कटौती की योजना है. तो विकासशील देशों के लिए ज़्यादा आर्थिक मदद का वादा भी किया गया है.
इससे इन देशों को जलवायु परिवर्तन के असर से निपटने में मदद मिलेगी, लेकिन आलोचकों का कहना है कि ये डील, काफ़ी नहीं है और इससे, दुनिया के बढ़ते तापमान को रोकने में मदद नहीं मिलेगी.
तमाम देश फेज़ आउट की जगह "फेज़ डाउन" पर राज़ी हुए हैं. शब्दों में ये बदलाव सम्मेलन के आख़िरी पलों में चीन और भारत के दबाव की वजह से किया गया.
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