पाकिस्तान में बलात्कारियों को नपुंसक बनाने का बिल पास, विरोधी बोले- ये इस्लाम-विरोधी

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पाकिस्त्तान में कई बार बलात्कार करने के दोषी पाए जाने पर अब नपुंसक बनाए जाने की सज़ा दी जा सकती है. पाकिस्तान की संसद ने बलात्कार से जुड़ा एक नया विधेयक पारित कर दिया है.
पाकिस्तान में पिछले कुछ वर्षों में रेप के बढ़ते मामलों को लेकर उपजे जनाक्रोश को देखते हुए नया सख़्त क़ानून बनाने का फ़ैसला किया गया था.
पाकिस्तान में पिछले साल बलात्कार के दोषियों को नपुंसक बनाने के बारे में एक अध्यादेश भी लाया गया था. लगभग एक साल बाद इन्हीं प्रावधानों को एक बिल में पेश किया गया जिसे बुधवार को संसद के संयुक्त सत्र में पारित कर दिया गया.
बिल में कहा गया है - "केमिकल कैस्ट्रेशन (रासायनिक नपुंसकीकरण) एक प्रक्रिया है जिसे प्रधानमंत्री के बनाए नियमों के तहत मंज़ूर किया गया है, जिसमें एक व्यक्ति को आजीवन सेक्स करने के नाक़ाबिल बनाया जाता है, इसके लिए अदालत दवाओं के इस्तेमाल का आदेश देगी जिसे एक मेडिकल बोर्ड मंज़ूर करेगा."
मगर बलात्कारियों को नपुंसक बनाने के प्रावधान का कट्टर इस्लामी गुट विरोध कर रहे हैं.
जमात-ए-इस्लामी पार्टी के सेनेटर मुश्ताक़ अहमद ने बिल को इस्लाम-विरोधी और शरिया के विरुद्ध बताया.
उन्होंने कहा कि एक बलात्कारी को सरेआम फांसी पर लटका दिया जाना चाहिए. मगर शरिया में नपुंसक बनाने को लेकर कोई ज़िक्र नहीं है.
केमिकल कैस्ट्रेशन
केमिकल कैस्ट्रेशन एक ऐसी प्रक्रिया होती है जिसमें दवा देकर किसी व्यक्ति की सेक्स सक्रियता को कम कर दिया जाता है. ये दवा शरीर में टेस्टोस्टेरोन हॉर्मोन को कम कर देती है.
दुनिया के कुछ देशों में केमिकल कैस्ट्रेशन यानी दवा देकर नपुंसक बनाए जाने का प्रावधान है.
2016 में इंडोनेशिया ने बच्चों के ख़िलाफ़ यौन अपराध करने वालों के लिए केमिकल कैस्ट्रेशन का प्रावधान किया था.
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2009 में पोलैंड ने बच्चों का रेप करने वाले व्यस्कों के लिए इसे अनिवार्य रूप से लागू किया था.
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक़ दक्षिण कोरिया और चेक गणराज्य के अलावा अमेरिका के कुछ राज्यों में भी ऐसा क़ानून लागू है.
पाकिस्तान में हाल के सालों में यौन हिंसा के बढ़ते मामलों को लेकर सख़्ती की माँग बढ़ी है.
आलोचक बताते हैं कि वहाँ रेप या यौन हमलों के मामलों में 4 फ़ीसदी से भी कम मामलों में दोषी को सज़ा हो पाती है.

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लाहौर की घटना के बाद बना क़ानून
पाकिस्तान में पिछले वर्ष राष्ट्रपति के अध्यादेश के ज़रिए बलात्कार के मामलों से निपटने के लिए एक नया क़ानून लाया गया था.
तब देश में लाहौर में हुई गैंग रेप की एक घटना को लेकर ज़बरदस्त असंतोष प्रकट हुआ था.
ये घटना 8 सितंबर की है जब लाहौर के बाहर हाईवे पर दो लोगों ने कथित तौर पर रास्ते में फंसी एक महिला के साथ रेप किया था.
पाकिस्तानी मूल की फ़्रेंच नागरिकता वाली ये महिला अपने बच्चों के साथ हाईवे से लाहौर आ रही थी जब उनकी कार ख़राब हो गई.
महिला अपनी कार में सड़क किनारे मदद के लिए खड़ी थी जब दो लोगों ने उनी कार पर हमला कर दिया. उन्होंने उनके साथ लूट-पाट की और बच्चों के सामने माँ के साथ ज़बरदस्ती की.
इस घटना के सामने आने के बाद काफ़ी आक्रोश हुआ. हंगामा तब और बड़ा हो गया जब लाहौर के सबसे बड़े पुलिस अधिकारी ने ये कहा कि पीड़िता भी अपने गैंग रेप के लिए एक हद तक ज़िम्मेदार है.
मगर उस अधिकारी ने इसके बाद भी टीवी पर आकर अपनी बात दोहराई. अधिकारी ने यहाँ तक कहा कि उस महिला को शायद ऐसा लग रहा था कि पाकिस्तान भी फ़्रांस की तरह सुरक्षित है.
इसके बाद पूरे पाकिस्तान में विरोध प्रदर्शन होने लगे और लोगों ने सड़कों पर उतरकर इंसाफ़ और महिलाओं की सुरक्षा और बेहतर किए जाने की माँग की.
इसके बाद सरकार को कड़े कदम उठाने का वादा करना पड़ा. इसके बाद ही पिछले दिसंबर में पाकिस्तान में अध्यादेश लाकर एक नया रेप क़ानून बनाया गया जिसमें ऐसे मामलों की जल्द सुनवाई और कड़ी सज़ा का प्रावधान था.
लाहौर रेप मामले में बाद में पुलिस ने लगभग एक महीने के भीतर दोनों अभियुक्तों को गिरफ़्तार कर लिया.
उनके ख़िलाफ़ मुक़दमा चला और इस वर्ष मार्च में दोनों को मौत की सज़ा सुनाई गई.
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