चीन ने दुनिया के सबसे बड़े सम्मेलन COP26 पर कहा- ‘खाली नारों’ से कुछ नहीं होगा

शी जिनपिंग

इमेज स्रोत, Reuters

चीन ने जलवायु परिवर्तन को लेकर कहा है कि इस वैश्विक समस्या से निपटने के लिए 'खाली नारों' और किसी बड़े दल से अधिक कुछ करने की ज़रूरत है. यह बात संयुक्त राष्ट्र में चीन के वरिष्ठ दूत चांग चिन ने कही है.

यह बात उन्होंने ऐसे समय पर बोली है जब ग्लासगो में संयुक्त राष्ट्र का सबसे बड़ा पर्यावरण कार्यक्रम COP26 चल रहा है उसमें चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने शिरकत नहीं की है.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़, संयुक्त राष्ट्र में चीन के स्थाई प्रतिनिधि ने ट्विटर पर लिखा है, "जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए दृढ़ संकल्प और निरंतर कार्रवाई की ज़रूरत है न कि ख़ाली नारों, अपरिवर्तनाकारी नीतियों, लग्ज़री गाड़ियों के क़ाफ़िले और भीड़ भाड़ वाले दलों की. इसके साथ ही यह भी ज़रूरी है कि ग़ैर-ज़िम्मेदाराना तरीके से लोगों को संक्रमित होने न देना."

शी जिनपिंग

इमेज स्रोत, Reuters

चीन ने की अमेरिका की आलोचना

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग व्यक्तिगत रूप से COP26 में नहीं शामिल हुए हैं लेकिन सोमवार को उनका लिखा बयान पढ़ा गया.

जिनपिंग के इस कार्यक्रम में शामिल न होने की ख़ासी आलोचना भी हो रही है क्योंकि चीन दुनिया का सबसे बड़े कार्बन उत्सर्जक देशों में से एक है.

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने ग्लासगो में पत्रकारों से कहा कि जिनपिंग की ग़ैर-मौजूदगी एक 'बड़ी ग़लती' है.

वीडियो कैप्शन, अर्दोआन COP26 में भाग लेने के लिए ग्लासगो क्यों नहीं गए?

चांग चिन ने ट्विटर पर लिखा कि चीन ने COP26 के मद्देनज़र अपनी नई योजना की घोषणा की है और उसका प्रतिनिधिमंडल ग्राउंड पर मौजूद है.

इसके साथ ही उन्होंने अमेरिका के पर्यावरण पर रिकॉर्ड की भी निंदा की. उन्होंने कहा कि चीन 'कभी भी पेरिस समझौते से बाहर नहीं निकला है.'

उन्होंने कहा, "अमेरिकी सरकार को अपनी ज़िम्मेदारियों को गंभीरता से पूरा करना चाहिए और कार्बन उत्सर्जन कम करने के ख़ास तरीक़ों के साथ सामने आना चाहिए और उसे कोशिश करनी चाहिए कि वो मुद्दों को कहीं ओर न मोड़े और दूसरों पर आरोप न मढ़े."

बाइडन

इमेज स्रोत, Getty Images

बाइडन ने क्या कहा था

अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने मंगलवार को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के इस कार्यक्रम में शामिल न होने को लेकर उनकी आलोचना की थी.

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा था कि इस सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति का शामिल न होना एक 'बड़ी ग़लती' है जहां पर 120 से अधिक वैश्विक नेता बीते दो दिनों से दुनिया का तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक न बढ़ने देने पर चर्चा कर रहे हैं.

बाइडन ने कहा, "वास्तविकता यह है कि चीन जो स्पष्ट तौर पर वर्ल्ड लीडर के रूप में ख़ुद की एक नई भूमिका पर ज़ोर देने की कोशिश करता है- वो दिखाई नहीं दे रहा."

वीडियो कैप्शन, COP26: जंगलों को बचाने की पहल

प्रेस कॉन्फ़्रेंस में बाइडन ने कहा कि 'हमने दिखाया लेकिन वे नहीं दिखा पाए. यह एक बड़ा मुद्दा है और वे सिर्फ़ यहां से चलते बने.'

बाइडन ने रूस और उसके राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भी आलोचना की है जो इस सम्मेलन में नहीं पहुंचे हैं.

उन्होंने कहा कि जिनपिंग ने नहीं आकर 'एक बड़ी ग़लती की है.'

पुतिन के बारे में बाइडन ने कहा कि रूस के जंगलों में लगी आग पर राष्ट्रपति 'ख़ामोश रहे.'

चीन, रूस और सऊदी अरब सहित अन्य देशों ने अब तक बातचीत में क्या भूमिका निभाई है, ये पूछे जाने पर अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपनी ये नाराज़गी ज़ाहिर की.

अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह बात वैश्विक नेताओं के ग्लासगो से जाने के दौरान कहीं क्योंकि अब अगले दो सप्ताह तक अलग-अलग देशों के मंत्री और उनके अफ़सर पर्यावरण के मुद्दों पर गंभीर चर्चा करने वाले हैं.

पुतिन और जिनपिंग दोनों ही इस कार्यक्रम में नहीं गए हैं

इमेज स्रोत, Reuters

इमेज कैप्शन, पुतिन और जिनपिंग दोनों ही इस कार्यक्रम में नहीं गए हैं

चीन और रूस हैं बड़े कार्बन उत्सर्जक देश

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग दोनों ही COP26 की इस बैठक में शामिल नहीं हुए हैं.

हालांकि स्कॉटलैंड के सबसे बड़े शहर ग्लासगो में 120 से अधिक नेताओं की 14 नवंबर तक हो रही इस बैठक में दोनों ही देशों ने अपने-अपने प्रतिनिधिमंडल भेजे हैं.

चीन दुनिया का सबसे बड़ा कार्बन उत्सर्जक देश है जबकि अमेरिका, भारत और यूरोपीय संघ के बाद रूस पांचवें स्थान पर है.

बैठक में शामिल देशों ने 2030 तक मीथेन के स्तर को कम करने के साथ-साथ जंगलों की कटाई को रोकने पर भी अपनी प्रतिबद्धता जताई है. और जिन देशों ने यह प्रतिबद्धता जताई है उसमें चीन और रूस भी शामिल हैं.

वीडियो कैप्शन, नाइजीरिया: आग, गैस और धुएं में घुटती जि़ंदगियां

चीन ने कॉन्फ़्रेंस की शाम को अपना कार्बन उत्सर्जन घटाने की योजना को सार्वजनिक किया था, जिसको कई विश्लेषक काफ़ी निराशाजनक मान रहे हैं. इस योजना के तहत चीन का कहना है कि उसका कार्बन उत्सर्जन 2030 तक अपने चरम स्तर पर होगा और 2060 तक वो नेट ज़ीरो का लक्ष्य हासिल कर लेगा.

हालांकि, चीन ने इस लक्ष्य को एक साल पहले ही सार्वजनिक कर दिया था और विश्लेषकों का मानना है कि इसको और बेहतर करना होगा वरना दुनिया को 1.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान बढ़ने को रोकने में काफ़ी दिक़्क़तों का सामना करना होगा.

वीडियो कैप्शन, Cover Story: क्या पर्यावरण बचा सकता है चीन का एक वादा?

इससे पहले मंगलवार को दिन में बाइडन ने टिप्पणी की थी कि अमेरिका विकसित और विकासशील देशों के 'उच्च महत्वाकांक्षा वाले गठबंधन' में शामिल हो सकता है जो 2015 के पेरिस जलवायु समझौते के तहत तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस सीमित रखने पर राज़ी हैं. साथ ही उन्होंने बड़े कार्बन उत्सर्जकों से अपील की कि वे इस दशक में अधिक कार्बन कम करने के तरीक़े अपनाएं.

बाइडन ने साथ में यह भी कहा कि वो चीन के साथ कोई तनाव नहीं चाहते हैं और उन्होंने संकेत दिए कि चीन अगर पर्यावरण को लेकर अधिक क़दम उठाता है तो वो उसको लेकर नरम रुख़ अपनाएंगे.

उन्होंने कहा, "यह प्रतियोगिता है, न कि संघर्ष. यह एक आर्थिक अवसर है."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)