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पाकिस्तान में तहरीक-ए-लब्बैक और इमरान सरकार के बीच समझौते का एलान :उर्दू प्रेस रिव्यू
- Author, इक़बाल अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) का लाहौर से इस्लामाबाद लॉन्ग मार्च को लेकर पाकिस्तान सरकार के साथ समझौता हो गया है. हालांकि समझौते की शर्तों को अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है.
पाकिस्तान के धर्मगुरु मुफ्ती मुनीबउर्रहमान ने समझौते की घोषणा करते हुए बताया कि शर्ते तय समय में निर्धारित की जाएंगी. रविवार को आयोजित प्रेसवार्ता में उन्होंने समझौते के बारे में अधिक जानकारी नहीं दी.
इस प्रेसवार्ता के दौरान पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी, संसदीय कार्यमंत्री अली मोहम्मद ख़ान और नेशनल असेंबली के अध्यक्ष असद कैसर भी मौजूद थे.
टीएलपी अपने नेता साद हुसैन रिज़वी की रिहाई और फ़्रांस के राजदूतो को पाकिस्तान से बाहर निकालने की मांग को लेकर लाहौर से इस्लामबाद तक मार्च कर रही थी.
इस मार्च ने शुक्रवार को गुजरांवाला को पार कर लिया था और यहां से आगे वज़ीराबाद में पाकिस्तान रेंजरों और टीएलपी कार्यकर्ताओं के बीच झड़प की आशंका पैदा हो गई थी. धरना समाप्त करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि इस समझौते के प्रभाव जल्द ही सबको पता चल जाएंगे.
वहीं वज़ीराबाद में टीएलपी के धरने में मौजूद पत्रकार आसिफ़ बट के मुताबिक धरने के दौरान स्पीकर से एलान किए जा रहे हैं कि जब तक केंद्र सरकार समझौते की शर्तें जारी नहीं करेगे और नेतृत्व से आदेश मिलने तक मार्च समाप्त नहीं करेंगे.
रविवार सुबह तक टीएलपी के कार्यकर्ता वज़ीराबाद में मौजूद थे. बीबीसी संवाददाता शहज़ाद मलिक के मुताबिक इनकी संख्या कई हज़ार है. मुफ़्ती मुनीब ने कहा कि सरकार के साथ जो समझौता हुआ है उस पर टीएलपी के नेता साद रिज़वी सहमत है.
उन्होंने कहा कि ये समझौता किसी पक्ष की जीत या हार नहीं है बल्कि इंसानी ज़िंदगी की पवित्रता की जीत है. इससे पहले टीएलपी के प्रवक्ता अमज़द रिज़वी ने कहा था कि सरकार और टीएलपी के बीच हुई बैठक में सरकार ने लचीलापन दिखाया है, जिसमें फ्रांस के राजदूत के निर्वासन का मामला भी शामिल है.
टीएलपी की मजलिस-ए-शूरा के सदस्य पीर इनायत उल हक़ शाह ने कहा था कि नेशनल असेंबली ने फ्रांस के राजदूत को निकालने के लिए जो समिति बनाई है उसके नाम सार्वजनिक किए जाएं और वो जो भी फ़ैसला लेगी उसे माना जाएगा.
वहीं, शुक्रवार को पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति की बैठक में ये फ़ैसला किया गया था कि टीएलपी के साथ वार्ता क़ानून के दायरे में ही की जाएगी और क़ानून का शासन बाधित करने वालों को किसी तरह की रियायत नहीं दी जाएगी.
इससे पहले राजधानी इस्लामाबाद तक 'लॉन्ग मार्च' करने पर अड़े हुए प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) और सरकार के बीच बातचीत के सकारात्मक नतीजे की उम्मीद की जा रही थी.
अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार पाकिस्तान सरकार की तरफ़ से बात करने वाली कमेटी में विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी, संसद के स्पीकर असद क़ैसर और संसदीय कार्य मंत्री अली मोहम्मद ख़ान शामिल थे.
टीएलपी ने एक बयान जारी कर कहा कि टीएलपी प्रमुख साद हुसैन रिज़वी के नेतृत्व में उनके नेताओं की सरकारी प्रतिनिधिमंडल से रावलपिंडी में बातचीत हुई है.
बयान में यह भी कहा गया है कि टीएलपी ने अपनी माँगे सरकार के सामने रख दी हैं और यह टीम अब प्रधानमंत्री इमरान ख़ान से मिलकर उनको स्थिति से अवगत कराएगी. लेकिन सरकार की तरफ़ से इस बारे में कोई बयान नहीं आया है.
केंद्रीय गृहमंत्री शेख़ रशीद अहमद ने गुरुवार को साद हुसैन रिज़वी से मुलाक़ात की पुष्टि की थी और यह भी कहा था कि वो शुक्रवार और शनिवार को भी उनसे मुलाक़ात करेंगे.
पाकिस्तान पर असर
इससे पहले 12 धार्मिक नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को प्रधानमंत्री इमरान ख़ान से मुलाक़ात की.
पाकिस्तान में धार्मिक मामलों के मंत्री नूरुल हक़ क़ादरी ने कहा कि धार्मिक नेताओं ने साद रिज़वी को रिहा किए जाने की सिफ़ारिश की थी लेकिन प्रधानमंत्री ने साफ़ कह दिया है कि सरकार साद हुसैन रिज़वी को रिहा करने का फ़ैसला नहीं कर सकती है.
उनके अनुसार अगर अदालत उन्हें रिहा करती है तो सरकार को इस पर कोई आपत्ति नहीं होगी.
मंत्री के अनुसार इमरान ख़ान ने धार्मिक नेताओं के प्रतिनिधिमंडल से कहा कि फ़्रांस के राजदूत को निकालने से मसला हल नहीं होगा और अगर पाकिस्तान ऐसा करता है तो पाकिस्तान पर इसका ग़लत असर होगा. इमरान ख़ान ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान अलग-थलग हो जाएगा.
इमरान ख़ान ने इस मामले पर बातचीत करने के लिए दो नवंबर को केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक बुलाई है.
इमरान ख़ान ने मंत्री को मीटिंग से हटने के लिए कहा
अख़बार जंग के अनुसार धार्मिक नेताओं ने दो मंत्रियों की मौजूदगी में इमरान ख़ान से मिलने से इनकार कर दिया था.
अख़बार के मुताबिक धार्मिक नेताओं ने केंद्रीय सूचना एंव प्रसारण मंत्री फ़व्वाद चौधरी और धार्मिक मामलों में प्रधानमंत्री के विशेष सहायक ताहिर अशरफ़ी की मौजूदगी में बातचीत करने से इनकार कर दिया था.
धार्मिक नेताओं ने कहा था कि प्रधानमंत्री को स्थिति की सही जानकारी नहीं दी जा रही है और इन दो लोगों के बयान के कारण हालात और ख़राब हो रहे हैं.
नेताओं के विरोध पर इमरान ख़ान ने मंत्रियों को बैठक में शामिल नहीं होने के लिए कह दिया था.
हालांकि, बाद में फ़व्वाद चौधरी ने इन बातों को ख़ारिज कर दिया. फ़व्वाद चौधरी ने कहा कि वो ख़ुद ही इस तरह की बैठकों में शामिल होना पसंद नहीं करते हैं.
वज़ीराबाद में जमें हैं प्रदर्शनकारी
हज़ारों की संख्या में टीएलपी कार्यकर्ता राजधानी इस्लामाबाद से सटे वज़ीराबाद में रुके हुए हैं और अपने नेताओं की सरकार से बातचीत के नतीजे का इंतज़ार कर रहे हैं. मार्च को रोकने के लिए सरकार ने रेंजर्स को तैनात कर दिया है.
प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए सड़कें खोद दी गई हैं और जगह-जगह कंटेनर खड़े किए गए हैं.
टीएलपी अपने नेता साद हुसैन रिज़वी की रिहाई और फ़्रांस के राजदूत को देश से निकालने की माँग को लेकर लाहौर से इस्लामाबाद का लॉन्ग मार्च कर रही है.
टीएलपी ने पिछले शुक्रवार को लाहौर से मार्च शुरू किया था. शनिवार की रात उनके हज़ारों कार्यकर्ता वज़ीराबाद में रुके रहे.
इस मार्च के दौरान हुई हिंसा में अब तक पाँच पुलिसकर्मियों समेत आठ लोग मारे जा चुके हैं.
'भारत-पाकमैच के दिन बाबर आज़म की मां वेंटिलेटर पर थीं'
संयुक्त अरब अमीरात और ओमान में चल रहे टी-20 क्रिकेट विश्व कप में भारत अपने पहले मुक़ाबले में पाकिस्तान से दस विकेट से हार गया था.
पाकिस्तान की जीत में उनके कप्तान बाबर आज़म की शानदार बल्लेबाज़ी की अहम भूमिका थी. भारत को हराने के बाद पाकिस्तान ने न्यूज़ीलैंड और अफ़ग़ानिस्तान को हराकर सेमी-फ़ाइनल में अपनी जगह लगभग तय कर ली है.
लेकिन जिस दिन भारत और पाकिस्तान का मैच चल रहा था उस दिन पाकिस्तानी कप्तान बाबर आज़म की मां की तबीयत बहुत ख़राब थी और वो वेंटिलेटर पर थीं.
यह जानकारी ख़ुद बाबर आज़म के पिता आज़म सिद्दीक़ी ने दी है. अख़बार जंग के अनुसार आज़म सिद्दीक़ी ने पाकिस्तानी की तीसरी जीत पर मुबारकबाद देते हुए कहा कि कुछ सच्चाई लोगों को मालूम होनी चाहिए.
उन्होंने कहा कि भारत-पाक मैच के दिन बाबर की मां का ऑपरेशन हुआ और वो वेंटिलेटर पर थीं. आज़म सिद्दीक़ी ने कहा कि बाबर आज़म ने तीनों मैच बहुत ही परेशानी में खेले थे.
बाबर के पिता ने कहा कि बाबर की मां की हालत को देखते हुए उन्हें मैच देखने के लिए स्टेडियम में नहीं आना चाहिए था लेकिन वो इसलिए स्टेडियम आए थे ताकि बाबर आज़म मैच के दौरान कमज़ोर ना पड़ जाएं.
भारत से जीत के बाद बाबर आज़म के पिता का एक भावुक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था. इससे पहले भारत और पाकिस्तान के बीच आईसीसी के किसी भी विश्व कप मुक़ाबले में हर बार भारत की जीत हुई थी लेकिन इस बार टी-20 विश्व कप में पाकिस्तान ने भारत को हराकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की.
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