गाड़ियों से लेकर खिलौनों तक, आख़िर दुनिया भर में क्यों हो रही है ज़रूरी चीज़ों की किल्लत?

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    • Author, रॉस एटकिंस
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़

वैश्विक सप्लाई चेन पहले की तरह अब काम नहीं कर रहा है. बच्चों के लिए स्पाइडरमैन के खिलौने से लेकर गाड़ियों के सेमीकंडक्टर तक, डिमांड और सप्लाई में एक बड़ा अंतर है.

अमेरिका में कई मालवाहक जहाज़ों को कई दिनों तक समुद्र में ही इंतज़ार करना पड़ रहा है. सामानों की मांग ज़्यादा है लेकिन पोर्ट इसके लिए तैयार नहीं हैं

पोर्ट ऑफ़ लॉस एंजलेंस के एग्ज़ेक्यूटिव डायरेक्टर जेन सेरोका के मुताबिक, "अमेरिका में लोगों के ख़रीदने की ताक़त ज़्यादा है, डिमांड अधिक है लेकिन हम पोर्ट पर आने वाले सभी जहाज़ों को जगह नहीं दे पा रहे हैं."

इसके असर को इस बात से समझा जा सकता है कि वॉल स्ट्रीट जनरल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, "नाईकी के पास बेचने के लिए पर्याप्त जूते नहीं हैं. कॉस्टो होलसेल कॉरपोरेशन पेपर टावल की बिक्री पर लिमिट लगा रहा है. कृत्रिम क्रिसमस ट्री के दाम में 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है."

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क्या है वजह?

सामानों की किल्लत के पीछे कई कारण है, सबसे पहले कारण है कोविड - 19.

ब्रिटेन के फाइनैनशियल टाइम्स क्लेयर जोन्स ने अप्रैल महीने में, जब ब्रिटेन में लॉकडाउन ख़त्म हो रहा था, कहा था, "हम सब घर पर बैठे हैं, और किसी इवेंट या बाहर खाने पर खर्च नहीं कर रहे हैं. इन्हीं कामों में हम अपने बचे हुए पैसों को खर्च करते थे. अब ये पैसा सामान ख़रीदने पर खर्च हो रहा है."

कोविड के कारण मांग बढ़ी है लेकिन साथ ही मज़दूरों की कमी देखी गई है और कई फ़ैक्ट्रियां बंद हुई हैं. लेकिन किल्लत के और कारण भी है - जैसे कि शिपिंग.

इंटरनेशनल मेरिटाइम ऑर्गनाइज़ेशन के मुताबिक, दुनिया भर का 90 प्रतिशत माल समुद्र के रास्ते से एक देश से दूसरे देश जाता है."

स्वेज़ नहर (फ़ाइल फोटो)

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समुद्री रास्तों पर परेशानी

इस साल हमने समुद्र के रास्ते में कई परेशानियां देखी हैं. स्वेज़ नहर मालवाहक जहाजों के लिए एशिया से यूरोप जाने का एक शॉर्टकट है. जब एक जहाज़ वहां फंस गया, तो काफ़ी परेशानियां हुईं.

बीबीसी के अंतरराष्ट्रीय बिज़नेस संवाददाता थियो लेगर्ट कहते हैं, "ये बताता है कि सिर्फ़ एक बड़े जहाज़ के फंस जाने की घटना का विश्व के सप्लाई चेन पर कितना व्यापक असर होता है."

एवर गिवन नाम के उस जहाज़ के फंसने और कोविड महामारी के कारण कई जहाज़ों को उन जगहों पर जाना पड़ा जहां के लिए वो नहीं निकले नहीं थे.

गेम बनाने वाली कंपनी हैप्पी पज़ल गेमिंग के सीईओ केविन उको कहते हैं, "हमने कभी भी चीन से आने वाले एक 40 फ़ीट के कंटेनर के लिए 2700 पाउंड के अधिक नहीं दिया था. आज मुझे एक ऐसे ही कंटेनर के लिए 15000 पाउंड का बिल भेजा गया. दाम तेज़ी से बड़े हैं और अब काम करना मुश्किल हो रहा है."

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सप्लाई चेन नेटवर्क

इन बढ़ते हुई कीमतों के कारण कई समस्याएं पैदा हो रही हैं.

आर्किटेक्ट विल्फ़ मेलिन बताते हैं, "लकड़ी के बाज़ार में कीमतें बहुत तेज़ी से बढ़ी हैं, सप्लाई चेन नेटवर्क पहले जैसे भरोसेमंद नहीं रहे. डिलीवरी के लिए ड्राइवर नहीं मिल रहे, सबकुछ मुश्किल हो गया है."

ब्रिटेन और अमेरिका समेत कई देशों में मजदूरों की कमी हो गई है.

8 जुलाई की फ़ोर्ब्स की एक रिपोर्ट मुताबिक अमेरिकी कंपनियों को मज़दूर मिलने में दिक्कतें हो रही हैं.

स्टाफ़ की कमी बंदरगाहों पर जहाज़ों को जगह नहीं मिलने का भी एक कारण है.

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राजनीति

एक और कारण है - राजनीति. अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन चीन पर निर्भरता कम कर अमेरिकी सप्लाई चेन को फिर से मज़बूत करना चाहते हैं.

ये नीति उस समय भी देखी गई जब देशों में पीपीई किट और ज़रूरी सामानों कमी थी.

राष्ट्रपति बाइडन ने इसी साल फ़रवरी में कहा था, "हम एक राष्ट्रीय आपदा के समय, अपने लोगों की रक्षा और ज़रूरतों को के लिए किसी दूसरे देश पर निर्भर नहीं रहना चाहते, ख़ासतौर पर तब जब वो हमारे जो हमारे मूल्यों और ज़रूरतों को नहीं समझते."

बाइडन अपने लोगों की चिंता कर रहे हैं लेकिन कई बार वैश्विक सप्लाई की दिक्कतें ऐसी नीतियों पर असर डालती हैं.

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जटिल प्रक्रिया

अब बात करते हैं कि ये सप्लाई चेन कितनी जटिल चीज़ है.

ग्लोबलाइज़ेशन के साथ प्रोडक्शन का एक नया कॉन्सेप्ट सामने आया जिसे 'जस्ट इन टाइम' कहते हैं.

इस सिस्टम के तहत कंपनियों को माल की डिलीवरी तभी की जाती है, जब उन्हें ज़रूरत हो. इससे पैसे बचाने में मदद मिलती है.

ये बहुत अच्छा सिस्टम है, लेकिन तभी तक जब डिलीवरी समय पर हो रही है.

उदाहरण के लिए ऑटो इंडस्ट्री सेमिकंडक्टर चिप का इस्तेमाल करती है.

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गाड़ियों और कई बिजली के दूसरे उपकरणों के लिए ये चिप बहुत ज़रूरी हैं.

लेकिन लैपटॉप और दूसरे बिजली के सामानों की बढ़ी बिक्री के कारण, चिप की डिमांड बढ़ी है और अब बाज़ार में पर्याप्त चिप उपलब्ध नहीं हैं.

इसका असर ये हुआ है कि टोयोटा को अपना प्रोडक्शन 40 प्रतिशत तक कम करना पड़ा है.

गाड़ियां बनाने वाली कंपनी वॉक्सहॉल, ब्रिटेन के एमडी पॉल विलकॉक्स कहते हैं, "इसका असर पूरी इंडस्ट्री पर हो रहा है और उत्पादन क्षमता पर हो रहा है."

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ये इस बात दर्शाता है कि चाहे ये सब सुनने में दूर की चीज़े लगें जैसे कि चीन या अमेरिका का कोई पोर्ट, लेकिन ये सबकुछ हमसे सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है.

इन कारणों ने कुछ समय के लिए सप्लाई चेन के लिए परेशानियां खड़ी की हैं, लेकिन ये इस ओर भी इशारा करता है कि दुनिया कैसे काम कर रही है.

ग्लोबलाइज़ेशन से चीज़े सस्ती हुई हैं, इनकी उपलब्धता बढ़ी है. और ये सिर्फ इस बारे में नहीं है कि त्योहारों के समय चीज़े उपलब्ध हैं या नहीं, या फिर गाड़ियां समय पर बन रही हैं या नहीं.

ये गंभीर सवाल उठा रहा है हम कितनी मात्रा चीज़ो को बनाते और उपयोग करते हैं और उन्हें हम कैसे और कहां बना रहे हैं.

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