दक्षिण एशिया में जंगली जीवों के मांस की खपत बढ़ी, कोविड से क्या है कोई रिश्ता

चीन में बिकती बिल्लियां

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इमेज कैप्शन, वन्यजीव कार्यकर्ताओं का कहना है कि दक्षिण एशिया में अब बहुत से लोग जानवरों और कोविड महामारी के बीच संभावित संबंध के ख़तरे पर बात नहीं करते हैं
    • Author, नवीन सिंह खड़का
    • पदनाम, पर्यावरण संवाददाता, बीबीसी वर्ल्ड सर्विस

वन्यजीव कार्यकर्ताओं और जांचकर्ताओं ने बीबीसी को बताया कि कोविड महामारी की शुरुआत को लेकर असमंजस की स्थिति की वजह से दक्षिण-पूर्व एशिया में फिर से वन्यजीव उत्पादों की खपत बढ़ रही है.

इस क्षेत्र में कोविड महामारी की शुरुआत के बाद लोगों में वन्यजीव उत्पादों की खपत को लेकर झिझक पैदा हुई थी लेकिन अब विशेषज्ञों का मानना है कि ये झिझक ख़त्म हो रही है.

दक्षिण-पूर्व एशिया में वर्ल्ड वाइल्डलाइफ़ फंड के क्षेत्रीय वन्यजीव व्यापार कार्यक्रम प्रबंधक जेडसाडा तावीकान कहते हैं, ''हम देख रहे हैं कि लोग कोरोना संक्रमण और वन्यजीवों के बीच उस संभावित संबंध को भूल रहे हैं, अब वो उसके बारे में बात नहीं करते और हम इसे लेकर चिंतित हैं.''

वीडियो कैप्शन, एक नई रिपोर्ट के मुताबिक 1970 के बाद से जानवरों की संख्या करीब साठ फीसदी कम हो गई है.

"एक तरफ़ तो वो संक्रमण होने का डर नहीं है जो हमने पिछले साल देखा था और दूसरी तरफ़ महामारी के बावजूद वन्यजीवों के वैध और अवैध बाज़ार चल रहे हैं."

वन्यजीवों के अवैध कारोबार पर नज़र रखने वाली संस्था ट्रैफकि के जांचकर्ता भी ऐसी ही चिंताएं ज़ाहिर करते हैं.

वियतनाम में ट्रैफ़िक से जुड़े बुई थुई गा कहते हैं, "कोरोना संक्रमण की शुरुआत को लेकर कोई ठोस सबूत नहीं हैं और इस वजह से लोग अब वन्यजीवों की खपत (मांस खाने) को लेकर चिंतित नहीं है."

वियतनाम के कई प्रांतों में चल रहे टाइगर फार्मों से टाइगर और लेपर्ड के शावकों को बचाया गया है.

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कोविड महामारी की शुरुआत को लेकर असमंजस की वजह से लोगों के खानपान पर हुए प्रभाव को लेकर कोई ठोस शोध नहीं किया गया है.

अमेरिकी ख़ुफ़िया अधिकारियों की राय भी इस बात को लेकर बंटी हुई है कि कोरोना संक्रमण प्राकृतिक रूप से जानवरों से इंसान में पहुंचा है या फिर ये किसी लैब में हुई दुर्घटना का नतीजा है.

बहुत से वैज्ञानिक ये मानते हैं कि कई सालों के शोध के बाद ही किसी ठोस नतीजे पर पहुंचा जा सकता है.

इसी बीच कार्यकर्ताओं और जांचकर्ताओं का कहना है कि महामारी के बावजूद वन्यजीव उत्पादों जिनमें वैध और अवैध दोनों तरह के उत्पाद शामिल हैं का कारोबार चलते रहने के सबूत मौजूद हैं.

ट्रैफ़िक ने एक बयान में कहा है, '9 सितंबर को मलेशिया के अधिकारियों ने कुआलालंपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से गैंडे के 50 सींग बरामद किए और दो लोगों को गिरफ़्तार किया. ये साल 2018 के बाद से देश में गैंडे के सींगों की सबसे बड़ी ज़ब्ती है.'

ट्रैफ़िक दक्षिण-पूर्व एशिया की कम्यूनिकेशन मैनेजर एलिज़ाबेथ जॉन कहती हैं, 'हालांकि खपत को लेकर कोई शोध नहीं हुआ है लेकिन महामारी के बावजूद वन्यजीव उत्पादों की तस्करी नहीं रुकी है.'

वन्यजीव उत्पादों पर छूट

विशेषज्ञों का मानना है कि कोविड महामारी की वजह से चीन, वियतनाम और लाओस जैसे देशों की सीमाओं पर लगे प्रतिबंधों के कारण वन्यजीव उत्पादों का स्टॉक इकट्ठा हो रहा है.

ये देश कई सालों से वन्यजीव उत्पादों के अवैध कारोबार के अड्डे बने हुए हैं.

चीन के बाज़ार में बिकती विशाल उड़ने वाली गिलहरी

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वन्यजीवों के ख़िलाफ़ अंतरराष्ट्रीय अपराधों की रोकथाम के लिए काम करने वाली गैर सरकारी संस्था वाइल्ड लाइफ़ जस्टिस कमिशन ने 2020 में प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा था, ''कुछ तस्कर स्टॉक को ख़त्म करने के लिए बेचैन है और वो अवैध उत्पादों पर डिस्काउंट तक दे रहे हैं.''

संस्था के जांचकर्ताओं का कहना है कि दक्षिण-पूर्व एशिया में देशों के बीच सीमाओं पर प्रतिबंध लागू हैं और इसकी वजह से इस साल भी वन्यजीव उत्पादों का भंडारण जारी है.

वाइल्ड लाइफ़ जस्टिस कमिशन की वरिष्ठ जांचकर्ता सारा स्टोनर कहती हैं, "तस्कर बढ़ी तादाद में उत्पादों का भंडार करने से झिझक रहे हैं क्योंकि इससे पकड़े जाने और अधिक जुर्माना लगने का ख़तरा है. इसी वजह से वन्यजीव उत्पादों के दाम गिर रहे हैं."

संस्था का कहना है कि बीते साल जुलाई में उसकी तरफ़ से दी गई ख़ुफ़िया जानकारी के आधार पर नाईजीरिया में अधिकारियों ने सात हज़ार किलो से अधिक पेंगोलिन स्केल और 900 किलों से अधिक हाथी दांत बरामद किए थे. ये माल लागोस से दक्षिण-पूर्व एशिया की तरफ़ तस्करी किया जा रहा था.

इसी साल प्रकाशित ट्रैफ़िक की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2019-20 के बीच लोवर मेकोंग क्षेत्र के पांच देशों कंबोडिया, लाओस, वियतनाम, म्यांमार और थाईलैंड के बाज़ारों में एक हज़ार से अधिक दुकानों पर 78 हज़ार के क़रीब अवैध वन्यजीव उत्पाद पाए गए थे.

रिपोर्ट में कहा गया, "विभिन्न प्रजातियों के वन्यजीवों के अंग और उत्पाद पाए गए थे. इनमें भालू, बड़ी बिल्लियां, हेलमेटेड होर्नबिल, पेंगोलिन, गैंडे और हाथियों के अंग थे. हाथी दांत सबसे ज़्यादा थे."

वियतनाम में बाघों का अवैध कारोबार

वियतनाम में अधिकारियों ने एक फार्म से 17 बाघों को बचाया था

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वियतनाम में पुलिस ने बीते महीने 17 बाघों को एक रिहायशी इलाक़े के बेसमेंट से छुड़ाया था. इन्हें यहां अवैध रूप से रखा गया था.

पुलिस ने ये बचाव अभियान ने आन प्रांत में चलाया था. इससे कुछ दिन पहले ही पुलिस ने जब हा तिन प्रांत की तरफ़ से ने आन प्रांत की तरफ़ आ रहे एक वाहन को रोका तो उसमें बाघ के सात शावक मिले थे.

वन्यजीव कार्यकर्ताओं का कहना है कि ये इस बात का सबूत है कि वियतनाम में महामारी के दौरान भी वन्यजीवों की तस्करी हो रही है.

उन्हें डर है कि पुलिस की ताज़ा कार्रवाइयों के बाद अवैध रूप से वन्यजीवों का कारोबार करने वाले लोग बंधक बना कर रखे गए बाघों और भालुओं और दूसरे जानवरों को मार कर उनके मांस को फ़्रीज़ में रख सकते हैं और फिर इसे देश के भीतर बेचने की कोशिश कर सकते हैं.

सेव वियतनाम वाइल्डलाइफ़ के निदेशक ग्वेन वान थाई कहते हैं, "महामारी से पहले वो ज़िंदा जानवरों की तस्करी करते थे लेकिन महामारी के बाद लगे प्रतिबंधों की वजह से वो ऐसा नहीं कर पा रहे हैं. ऐसे में वो निश्चित तौर पर देश के भीतर मौजूद ख़रीदारों की ज़रूरत पूरा करने की कोशिश करेंगे."

सेव वियतनाम वाइल्डलाइफ़ एक ग़ैर सरकारी संस्था है जो वियतनाम में जानवरों और वन्यजीवों के अधिकारों के लिए काम करती है.

ग्वेन थाई कहते हैं, "इस सबके बीच, कोविड-19 की शुरुआत को लेकर जो असमंजस की स्थिति है उससे भी कोई मदद नहीं मिली है. जो लोग इस तरह के उत्पादों की खपत करना चाहते हैं वो अब वन्यजीवों से संक्रमण के ख़तरे को लेकर कम चिंतित है."

थाईलैंड में बाघ शावकों की तस्करी

थाइलैंड में शावकों का सैंपल लेते अधिकारी

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इमेज कैप्शन, थाई अधिकारियों के मुताबिक एक फार्म से तस्करी करके लाए गए शावक बरामद किए गए. वहीं फार्म संचालकों का दावा था कि इनका जन्म फार्म पर ही हुआ था

मार्च में थाईलैंड के अधिकारियों ने मुकदा टाइगर पार्क में डीएनए टेस्ट किए और पाया कि यहां दो शावकों को तस्करी करके लाया गया था. ये शावक यहां पैदा नहीं हुए थे.

पार्क के संचालक ने दावा किया था कि इनका जन्म पार्क में ही हुआ है. हालांकि डीएनए टेस्ट से पता चला कि इन शावकों को कहीं और से तस्करी करके लाया गया था.

पुलिस अधिकारी तावीकान कहते हैं, "ऐसे पार्कों में क़रीब 1500 बाघ हैं. यहां दसियों लाख चीनी पर्यटक आते थे और उनसे ही इन पार्कों की कमाई होती थी. लेकिन महामारी की वजह से चीन से पर्यटक नहीं आ रहे हैं."

वे कहते हैं, "अब चिंता ये है कि कहीं ये बाघ अवैध व्यापारियों के हाथों में न पड़ जाएं जो मांस के लिए इन्हें मार भी सकते हैं. ये चिंताएं और भी बढ़ गई हैं क्योंकि ग्राहक भी अब कोरोना संक्रमण और वन्यजीव उत्पादों के बीच संभावित संबंध को भूल रहे हैं."

चीन में बिकती गोह

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इमेज कैप्शन, चीन और वियतनाम ने स्थलीय जीवों के उत्पादों पर रोक लगा दी है.

वन्यजीव उत्पादों पर रोक

महामारी की शुरुआत के बाद से ही चीन और वियतनाम ने कई ऐसे खाद्य उत्पादों पर रोक लगा दी थी जो वन्यजीवों से बनाए जाते थे हालांकि पारंपरिक दवाइयों और आभूषणों में इनके इस्तेमाल पर रोक नहीं लगाई गई थी.

कोविड महामारी की शुरुआत में ये माना गया था कि इसकी शुरुआत चीन के वुहान के एक मांस बाज़ार से हुई हो सकती है. इसके बाद हुए कई सर्वे में ये पाया गया था कि चीन के अधिकतर लोग वन्यजीवों को खाद्य उत्पाद के रूप में छोड़ने को तैयार हैं.

अंतरराष्ट्रीय गैर सरकारी संगठन एक्टएशिया के निदेशक पीई सू कहते हैं, "कोरोना संक्रमण और वन्यजीवों के बीच इस संभावित संबंध के बारे में चीन में अब बमुश्किल ही बात होती है क्योंकि चीन के लोग सरकार की थ्योरी पर ही चलते हैं जिसके अनुसार कोरोना संक्रमण की शुरुआत चीन से नहीं हुई है."

"प्रतिबंध की वजह से वन्यजीवों के मांस और उत्पादों की खपत महामारी से पहले के स्तर को तो पार नहीं करेगी लेकिन चीन एक बड़ा देश है और वन्यजीवों से जुड़े क़ानूनों को लागू करने वाले अधिकारियों की संख्या सीमित है, ऐसे में देश के कई हिस्से में वन्यजीवों का वैध और अवैध कारोबार चल ही रहा होगा."

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