ईरान ने पंजशीर को लेकर पाकिस्तान पर क्यों साधा निशाना?

पंजशीर में तालिबान लड़ाके

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अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के क़ब्ज़े के बाद पंजशीर की लड़ाई को लेकर ईरान ने सख़्त टिप्पणी की है.

ईरान ने पाकिस्तान का सीधे तौर पर नाम न लेते हुए उस पर विदेशी ज़मीन पर दख़ल देने का आरोप लगाया है.

दरअसल इसकी शुरुआत पंजशीर में तालिबान और नेशनल रेसिस्टेंस फ़्रंट (NRF) के बीच जंग के कारण हुई है.

तालिबान के अफ़ग़ानिस्तान पर क़ब्ज़े के बाद सिर्फ़ पंजशीर ही एक ऐसा प्रांत था, जो अब तक तालिबान के क़ब्ज़े से बाहर था. लेकिन अब तालिबान का दावा है कि उसने पंजशीर पर क़ब्ज़ा कर लिया है जबकि NRF का कहना है कि वो अभी भी प्रमुख मोर्चों पर डटा हुआ है.

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NRF के नेता अहमद मसूद ने 'राष्ट्रीय विद्रोह' का आह्वान किया है.

लेकिन इसी बीच पाकिस्तान पर आरोप लग रहे हैं कि उसने पंजशीर की जंग में तालिबान की मदद की है.

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और कई रिपोर्टों में ये दावा किया जा रहा है कि रविवार की देर रात में पंजशीर पर हवाई हमले हुए थे, जिसमें पाकिस्तान के ड्रोन शामिल थे.

इन आरोपों के सामने आने के बाद ईरान ने इस पर चुप्पी तोड़ते हुए कड़े शब्दों मे पाकिस्तान का नाम लिए बग़ैर कहा है कि वो इसकी 'जाँच कर रहा है.'

ईरान ने क्या कहा

ईरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सईद ख़तीबज़ादेह

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सोमवार को हुई ईरानी विदेश मंत्रालय की साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में प्रवक्ता सईद ख़तीबज़ादेह ने कथित ड्रोन हमलों की निंदा की.

उन्होंने एक पत्रकार के सवाल के जवाब में कहा, "बीती रात हुए हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की जाती है और जैसा कि आपने हवाला दिया विदेशी दख़ल की ज़रूर जाँच होनी चाहिए."

इसके बाद ख़तीबज़ादेह ने कहा- हम इसकी जाँच कर रहे हैं.

उन्होंने इंट्रा-अफ़ग़ान वार्ता की मांग करते हुए निवेदन किया कि तालिबान को अंतरराष्ट्रीय क़ानून के तहत अपने दायित्वों का पालन करना चाहिए.

इसके साथ ही उन्होंने इस बात को लेकर भी चिंता जताई थी कि 'पंजशीर के लोगों को भूखा मारा जा रहा है, उनका बिजली और पानी का कनेक्शन काट दिया गया है और उनकी घेराबंदी की जा रही है.'

पाकिस्तान ने दिया स्पष्टीकरण

पाकिस्तान की सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल बाबर इफ़्तिख़ार

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ड्रोन हमले करने के आरोपों पर सोमवार शाम को पाकिस्तान की सेना ने कहा कि उसका अफ़ग़ानिस्तान के अंदरूनी मामलों से कुछ भी लेना देना नहीं है.

पाकिस्तान की सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल बाबर इफ़्तिख़ार ने कहा कि 'अफ़ग़ानिस्तान के अंदर जो भी हो रहा है उससे पाकिस्तान का कोई संबंध नहीं है, चाहे वो पंजशीर हो या कहीं ओर.'

बाबर इफ़्तिख़ार से पूछा गया था कि सोशल मीडिया पर पंजशीर में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर बहुत सी अफ़वाहें चल रही हैं इस पर उनका क्या कहना है? जिसके बाद उनका यह जवाब आया है.

हालाँकि पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता ने इसे अफ़वाह क़रार देते हुए कहा कि 'यह पूरी तरह झूठ और भारत का तर्कहीन प्रोपेगैंडा' है.

साथ ही उन्होंने ये भी बताया कि पाकिस्तान के पास लंबी दूरी तक मार करने वाली ड्रोन टेक्नोलॉजी नहीं है.

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ईरान ने क्यों पाकिस्तान पर साधा निशाना

अफ़ग़ानिस्तान में बदलते हालात पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं और ख़ासकर उन देशों की ज़्यादा क़रीबी नज़रें हैं जिससे उसकी सीमाएँ लगती हैं.

तालिबान के अफ़ग़ानिस्तान में वापस जड़ें जमा लेने के बाद यह माना जा रहा है कि पाकिस्तान के उससे गहरे संबंध रहने वाले हैं और पाकिस्तान लगातार उसके लिए कोशिशें कर रहा है.

हाल ही में पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी के प्रमुख फ़ैज़ हमीद काबुल पहुँचे थे और उन्होंने तालिबान के राजनीतिक प्रमुख मुल्ला बरादर से मुलाक़ात की थी.

दूसरी ओर ईरान भी तालिबान के आने के बाद अपनी पकड़ अफ़ग़ानिस्तान पर बनाना चाहता है.

दोनों देशों के व्यापारिक रिश्ते काफ़ी अच्छे रहे हैं. अफ़ग़ानिस्तान गैस और तेल ईरान से लेता रहा है और तालिबान के सत्ता में आने के बाद अभी भी ईरान तेल और गैस अफ़ग़ानिस्तान को दे रहा है.

इसी वजह से तालिबान के अफ़ग़ानिस्तान पर क़ब्ज़े के बाद उसने सीधे-सीधे कभी तालिबान पर कुछ नहीं कहा है.

हाल ही में भी पंजशीर की घटना के बाद उसने तालिबान को निशाना न बनाते हुए पाकिस्तान को निशाना बनाया.

NRF के प्रमुख नेता अहमद मसूद

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इमेज कैप्शन, NRF के प्रमुख नेता अहमद मसूद ताजिक समुदाय से संबंध रखते हैं

जातीय समुदाय है वजह?

ईरानी विदेश मंत्रालय की वेबसाइट के अनुसार, शनिवार को ईरान के विदेश मंत्री हुसैन आमिर-अब्दुल्लाहियान ने अफ़ग़ानिस्तान के पूर्व सीईओ अब्दुल्लाह अब्दुल्लाह से बात की थी और 'समावेशी सरकार के गठन पर चर्चा की थी जिसमें सभी अफ़ग़ान जातीय समूह और गुट शामिल हों.'

ईरान जातीय समूहों पर लगातार इसलिए ज़ोर दे रहा है क्योंकि अफ़ग़ानिस्तान की चार करोड़ की आबादी में दूसरा सबसे बड़ा जातीय समूह ताजिक है जिनकी आबादी एक चौथाई से अधिक है.

ताजिक लोग ईरानी मूल के हैं और उनकी भाषा दरी है जो फ़ारसी की ही एक बोली है.

पंजशीर, हेरात और कुछ अन्य उत्तरी प्रांतों को ताजिक समुदाय का गढ़ कहा जाता है.

विद्रोही

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विश्लेषकों का मानना है कि पंजशीर के ताजिक समुदाय के गढ़ होने के कारण ईरान ने पाकिस्तान पर ऐसी तल्ख़ टिप्पणी की है.

वहीं, दूसरी ओर विश्लेषक यह भी मानते हैं कि ईरान की अफ़ग़ानिस्तान को लेकर नीति में कोई तब्दीली नहीं आई है.

अल जज़ीरा के सेंटर फ़ॉर स्टडीज़ के विश्लेषक अली अकबर दारैनी का मानना है कि ईरान की पंजशीर घाटी में तालिबान के हमले को लेकर 'बड़ी चिंताएँ' ज़रूर हैं लेकिन ईरान की अफ़ग़ानिस्तान को लेकर नीति 'स्थिर' है.

दारैनी ने कहा, "ईरान अब आगे क्या करेगा यह इस बात पर निर्भर करता है कि तालिबान क्या करता है और वो अपने वादों को कितना निभाता है."

वो कहते हैं कि अगर ईरान की सुरक्षा और राजनीतिक हित ख़तरे में पड़ते हैं, तो ईरान 'बहुत अलग तरीक़े से' और 'मज़बूती' से इसका जवाब देगा.

"लेकिन जब तक तालिबान अपने वादे पर क़ायम रहते हैं तो ईरान राजनीतिक बातचीत को अहमियत देगा न कि सैन्य संघर्ष को."

हालाँकि, पाकिस्तान के मुक़ाबले ईरान किस तरह से अफ़ग़ानिस्तान के क़रीब आने के प्रयास करता है, यह देखना बेहद दिलचस्प होगा.

(कॉपी - मोहम्मद शाहिद)

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