तालिबान ने काबुल की दीवारों पर लिखवाया क़तर समझौता -उर्दू प्रेस रिव्यू

तालिबान, काबुल

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    • Author, इक़बाल अहमद
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

अख़बार 'एक्सप्रेस' के अनुसार क़तर की राजधानी दोहा में हुए समझौते के बारे में आम जनता को जानकारी देने के लिए तालिबान ने समझौते के मसौदे को अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल की दीवारों पर पेंट कर दिया है.

तालिबान ने जनता से अपील की है कि वो इस मामले में किए जा रहे नकारात्मक प्रोपेगैंडा पर भरोसा ना करें.

29 फ़रवरी, 2020 को अमेरिका और तालिबान के बीच दोहा में समझौता हुआ था जिसके अनुसार अमेरिकी सेना को अफ़ग़ानिस्तान से एक साल के अंदर हटना था और इस दौरान तालिबान ने उन पर हमला नहीं करने का वादा किया था.

यह समझौता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में हुआ था और जब जो बाइडन अमेरिका के राष्ट्रपति बने तो उन्होंने घोषणा कर दी थी कि 31 अगस्त तक सभी अमेरिकी सैनिक अफ़ग़ानिस्तान से लौट जाएंगे.

दोहा समझौते के तहत सत्ता के हस्तांतरण को लेकर अफ़ग़ानिस्तान के विभिन्न गुटों के बीच बातचीत की शुरुआत हुई थी लेकिन 10 महीनों तक चली बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकला था और बातचीत बंद कर दी गई थी.

तालिबान, काबुल

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जुलाई में दोनों पक्षों के बीच दोबारा बातचीत शुरू हुई लेकिन फिर भी कोई समझौता नहीं हो सका और आख़िरकार 15 अगस्त को तालिबान ने राजधानी काबुल पर क़ब्ज़ा कर लिया. तत्कालीन राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी अचानक देश छोड़कर भाग गए और दुबई में शरण ले ली. अफ़ग़ान सेना ने बग़ैर लड़े काबुल को तालिबान के हवाले कर दिया.

सत्ता में आने के बाद तालिबान ने अब तक आधिकारिक रूप से सरकार गठन नहीं किया है लेकिन उनके नेता बार-बार कहते हैं कि वो दोहा समझौते की सभी शर्तों का पालन करेंगे.

तालिबान का कहना है कि दोहा समझौते के अनुसार अफ़ग़निस्तान की धरती का इस्तेमाल किसी भी मुल्क के ख़िलाफ़ नहीं होने दिया जाएगा, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और उनकी धार्मिक आज़ादी सुनिश्चित की जाएगी और महिलाओं को शरिया (इस्लामी क़ानून) के दायरे में सारे अधिकार दिए जाएंगे.

लेकिन ज़मीन से जो ख़बरें आ रही हैं कि उनके अनुसार कई महिलाएं देश छोड़कर चली गईं हैं और जो रह रही हैं वो भी बहुत डरी हुईं हैं. उसी तरह सैकड़ों हिंदू और सिख नागरिकों ने भी अफ़ग़ानिस्तान छोड़ दिया है. कई लोग भारत आए हैं और कई लोग दूसरे देश चले गए हैं.

दोहा स्थित तालिबान के सियासी दफ़्तर के उप-प्रमुख शेर मोहम्मद अब्बास स्तनिकज़ई

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तालिबान के नेताओं की दोहा में पाकिस्तानी राजदूत से मुलाक़ात

क़तर की राजधानी दोहा में तालिबान नेताओं ने पाकिस्तान के राजदूत से मुलाक़ात की.

अख़बार 'जंग' के अनुसार दोहा स्थित तालिबान के सियासी दफ़्तर के उप-प्रमुख शेर मोहम्मद अब्बास स्तनिकज़ई के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने क़तर में पाकिस्तानी राजदूत सैय्यद अहसन रज़ा शाह से मुलाक़ात की.

तालिबान के प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने एक बयान जारी कर इस मुलाक़ात के बारे में जानकारी दी. तालिबान के प्रवक्ता ने कहा कि बातचीत के दौरान अफ़ग़ानिस्तान को नए सिरे से बनाने, तोरख़म और स्पिन बोल्डक में पाकिस्तान-अफ़ग़ानिस्तान सीमा पर लोगों के आने जाने को और आसान बनाने के मुद्दे पर चर्चा हुई.

सुहैल शाहीन के अनुसार अफ़ग़ानिस्तान की ताज़ा स्थिति, मानवीय सहायता और द्विपक्षीय संबंधों पर भी बातचीत हई. इस बीच पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई के प्रमुख लेफ़्टिनेंट जनरल फ़ैज़ हमीद शनिवार को काबुल पहुँचे.

अख़बार 'जंग' के अनुसार अपने एक दिवसीय दौरे पर जनरल फ़ैज़ हमीद तालिबान के नेताओं से सुरक्षा और शरणार्थियों के मुद्दे पर बातचीत करेंगे.

तालिबान के प्रवक्ता ज़बीहउल्लाह मुजाहिद

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अफ़ग़ानिस्तान की धरती से पाकिस्तान को कोई ख़तरा नहीं होगा: तालिबान

अख़बार 'एक्सप्रेस' के अनुसार इस्लामाबाद में आयोजित पाक-अफ़ग़ान यूथ फ़ोरम की अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ़्रेंस को वीडियो लिंक के ज़रिए संबोधित करते हुए अफ़ग़ान तालिबान के प्रवक्ता ज़बीहउल्लाह मुजाहिद ने पाकिस्तान को विश्वास दिलाते हुए कहा, "अफ़ग़ानिस्तान की धरती से पाकिस्तान को कोई ख़तरा नहीं होगा. हम अफ़ग़ानिस्तान की जनता के लिए पाकिस्तान के रोल को सराहते हैं और उम्मीद करते हैं कि पाकिस्तान से अफ़ग़ानिस्तान की जनता को मदद, शांति और द्विपक्षीय व्यापार के लिए कोशिशें जारी रहेंगी."

ज़बीहउल्लाह मुजाहिद ने यह भी कहा कि तालिबान सीपेक (चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर) को बढ़ाकर उसे अफ़ग़ानिस्तान से जोड़ना चाहते हैं.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस

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इमरान ख़ान और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के बीच बातचीत

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के बीच टेलिफ़ोन पर बातचीत हई है.

अख़बार 'जंग' के अनुसार शनिवार शाम को हुई बातचीत में दोनों ने अफ़ग़ानिस्तान के मुद्दे पर अपनी राय रखी.

अख़बार के अनुसार इमरान ख़ान ने अफ़ग़ानिस्तान में शांति और स्थिरता के लिए समस्या के सियासी हल पर ज़ोर दिया.

इमरान ख़ान ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में पिछले 40 साल से जारी विवाद की समाप्ति के मौक़े से फ़ायदा उठाया जाना चाहिए.

इमरान ने अफ़ग़ानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र के काम की सराहना की.

एफ़एटीएफ़ के अध्यक्ष मार्कस प्लेयर

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प्रतिबंधित संगठनों के लिए पाकिस्तान में संपत्ति ख़रीदना मुश्किल

अख़बार 'दुनिया' के अनुसार पाकिस्तान का कहना है कि उसने फाइनेंशियल एक्शन टास्क फ़ोर्स (एफ़एटीएफ़) की एक अहम शर्त पूरी कर ली है. अख़बार के अनुसार पाकिस्तान ने एक ऐसा ऐप तैयार कर लिया है जिसके बाद किसी भी चरमपंथी या प्रतिबंधित संगठन और उनके सदस्यों के लिए पाकिस्तान में संपत्ति ख़रीदना लगभग असंभव हो जाएगा.

एफ़एटीएफ़ दुनिया भर में मनी लॉन्ड्रिंग से निपटने के लिए नीति बनाने वाली संस्था है. जून में हुई एफ़एटीएफ़ की बैठक के बाद पाकिस्तान को एक बार फिर ग्रे लिस्ट में बनाए रखने का फ़ैसला किया गया था.

उस समय एफ़एटीएफ़ के अध्यक्ष मार्कस प्लेयर का कहना था कि "पाकिस्तान को जो सुझाव दिए गए थे उनमें उसने काफ़ी प्रगति की है और 27 में से 26 शर्तों को पूरा किया है. लेकिन अभी उसे आतंकवादियों को ज़िम्मेदार ठहराने और उन्हें सज़ा देने की दिशा में काम करना बाक़ी है."

अब पाकिस्तान का दावा है कि उसने इस शर्त को भी पूरी कर दी है. रियल स्टेट कन्सलटेंट एसोसिएशन के महासचिव अहसन मलिक ने 'दुनिया' अख़बार के संवाददाता से बात करते हुए कहा कि इस ऐप में संयुक्त राष्ट्र की लिस्ट में प्रतिबंधित सभी संगठनों और उनके अधिकारियों का पूरा डाटा मौजूद है जिससे अब उनका संपत्ति ख़रीदना नामुमकिन है.

इसी साल अक्तूबर में एफ़एटीएफ़ की बैठक में पाकिस्तान की स्थिति की एक बार फिर समीक्षा होगी.

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