पाकिस्तान में अफ़ग़ान राजदूत की बेटी को अगवा कर पीटा गया

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पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में पुलिस का कहना है कि पाकिस्तान में अफ़ग़ानिस्तान के राजदूत को अज्ञात हथियारबंद हमलावरों ने अग़वा करने की कोशिश की है.
पुलिस का कहना है कि हमलावर ऐसा करने में कामयाब नहीं हो सके हैं. पुलिस का कहना है कि अज्ञात हमलावर राजदूत की बेटी के साथ हिंसा करने के बाद फ़रार हो गए हैं.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने इस घटना का संज्ञान लेते हुए गृह मंत्रालय, पुलिस और संबंधित एजेंसियों से इस घटना की प्राथमिकता से तहक़ीक़ात करने के लिए कहा है.
प्रधानमंत्री ने एजेंसियों से 48 घंटे के भीतर घटना पर रिपोर्ट मांगी है.
अफ़ग़ानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने ट्वीट कर इस घटना की भर्त्सना की है. करज़ई ने अपने ट्वीट में लिखा है, ''पाकिस्तान में अफ़ग़ानिस्तान के राजदूत की बेटी को अगवा कर प्रताड़ित करना बहुत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है. मैं पाकिस्तान की सरकार से अपील करता हूँ कि पूरे मामले की जाँच करे और दोषियों को सज़ा दे.''
पाकिस्तान में अफ़ग़ानिस्तान के राजदूत नजिबुल्लाह अलीखिल ने ट्वीट कर कहा है, ''इस्लामाबाद से शनिवार को मेरी बेटी को अगवा किया गया और उसे बुरी तरह से पीटा गया है. लेकिन अल्लाह के करम से वो वहाँ से भागने में कामयाब रही. अभी वो ठीक है. यह अमानवीय कृत्य है. इस मामले की पर दोनों देशों के संबंधित अधिकारियों की नज़र है.''
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नजिबुल्लाह ने आधी रात बाद अपनी बेटी की एक तस्वीर पोस्ट करते हुए ट्वीट में लिखा है, ''मुझे अपनी बेटी की तस्वीर पोस्ट करने पर मजबूर होना पड़ा क्योंकि सोशल मीडिया पर उसके नाम पर किसी और की तस्वीर पोस्ट की जा रही थी.''
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इमरान ख़ान की तरफ़ से जारी बयान में कहा गया है कि पाकिस्तान की सरकार राजदूत और उनके परिवार के संपर्क में है.
पाकिस्तान के गृह मंत्री सैयद रशीद का कहना है कि उन्होंने पुलिस को इस घटना में शामिल लोगों को जल्द से जल्द गिरफ़्तार करने के लिए कहा है.

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घटना कैसे हुई?
पुलिस के मुताबिक़ पाकिस्तान में अफ़ग़ानिस्तान के राजदूत नजिबुल्लाह अलीखिल की बेटी सिलसिला अलीखेल बाज़ार में ख़रीदारी करने गईं थीं, जब उन्हें हथियारबंद हमलावर अग़वा करके अज्ञात जगह पर ले गए.
ये घटना इस्लामाबाद के थाना कोहसार के बिलौर एरिया बाज़ार की है. पुलिस के मुताबिक़ इस घटना के बारे में जानकारी एक ख़ुफ़िया संस्थान ने दी थी कि राजदूत की बेटी अपने भाई के लिए गिफ़्ट लेने बिलौर इलाक़े गईं थीं और वापस लौटने के लिए उन्होंने एक टैक्सी को रोका.
पुलिस के मुताबिक़ जब वो गाड़ी में बैठ रहीं थीं तब एक अज्ञात व्यक्ति भी गाड़ी में बैठ गया. सिलसिला अली ने इसका विरोध किया.
पुलिस का कहना है कि अज्ञात व्यक्ति ने सिलसिला का मुँह ज़बरदस्ती बंद किया और उनके साथ हिंसा की जिसमें वो बेहोश हो गईं.
इस रिपोर्ट के मुताबिक़ अफ़ग़ान राजदूत की बेटी को जब होश आया तो उन्होंने ख़ुद को एक जंगल में पाया और जब उन्होंने एक राहगीर से इस जगह के बारे में पूछा तो उन्हें बताया कि ये सेक्टर एफ़-सेवन का इलाक़ा है.
पुलिस को मिली जानकारी के मुताबिक़ सिलसिला अली ने वहाँ से एक और टैक्सी किराए पर ली और फिर एफ़ 9 पार्क में जाकर अपने एक परिचित को फ़ोन किया और फिर वहाँ से एक सरकारी गाड़ी में अपने घर पहुँचीं. पुलिस के मुताबिक सिलसिला अली ने हिकमत नाम के व्यक्ति को फ़ोन किया था.

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अफ़ग़ानिस्तान ने की घटना की आलोचना
अफ़ग़ानिस्तान के विदेश मंत्रालय की तरफ़ से जारी बयान में कहा गया है कि पाकिस्तान में अफ़ग़ानिस्तान के राजदूत की बेटी को कई घंटों तक अग़वा किया गया और अज्ञात लोगों ने उन्हें हिंसा का शिकार बनाया था. अग़वा करने वालों की गिरफ़्त से छूटने के बाद वो अस्पताल में इलाज करा रही हैं.
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अफ़ग़ानिस्तान की तरफ़ से जारी बयान में कहा गया है कि विदेश मंत्रालय इस घिनौने काम की सख़्त आलोचना करता है पाकिस्तानी में राजनयिकों, उनके परिवारजनों और एंबेसी के कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर अपनी चिंता भी जाहिर की है.
पाकिस्तान सरकार से अफ़ग़ानिस्तान के मिशन और राजनयिकों की सुरक्षा के लिए तुरंत क़दम उठाने की अपील भी की गई है.
अफ़ग़ानिस्तान ने पाकिस्तान से कहा है कि अभियुक्तों की जल्द से जल्द पहचान कर उन्हें गिरफ़्तार किया जाए.

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पुलिस का क्या कहना है?
इस्लामाबाद पुलिस के प्रवक्ता नईम इक़बाल ने कहा है कि अभी तक इस घटना के संबंध में मुक़दमा दर्ज नहीं हुआ है और पुलिस हर पहलू की जांच कर रही है.
इस्लामाबाद पुलिस के शीर्ष अधिकारियों ने राजदूत और उनकी बेटी से संपर्क किया है और सुरक्षा का भरोसा दिया है.
जांच दल का हिस्सा पुलिस अधिकारियों ने नाम न ज़ाहिर करने की शर्त पर बीबीसी को बताया है कि सिलसिला अलीखेल का बयान दर्ज कर लिया गया है और उनके बयान और घटनाक्रम से पैदा हुए सवालों की तहक़ीक़ात की जा रही है.
पुलिस का कहना है कि जब सिलसिला अलीखेल को होश आया तो वो एफ़-7 सेक्टर में थी. इसके बाद वो एफ़-9 गईं जबकि उनका घर एफ़-7 में ही है.
पुलिस के मुताबिक़ सिलसिला अली के दुपट्टे पर एक पचास रुपए का नोट बंधा था जिस पर लिखा था कि अगली बारी तुम्हारी है. इस नोट की जाँच भी की जा रही है.
पुलिस के मुताबिक़ राजदूत की बेटी के मोबाइल का डेटा भी ले लिया गया है.
पुलिस का कहना है कि राजधानी में रह रहे सभी राजनयिकों से कहा गया है कि यदि वो शहर में बाहर निकलते हैं तो इसकी जानकारी पुलिस को दें ताकि उनकी सुरक्षा का ख्याल रखा जा सके.
पुलिस का कहना है कि ऐसे हालात में जब तालिबान अफ़ग़ानिस्तान के इलाक़ों पर क़ब्ज़ा कर रहा है, अफ़ग़ानिस्तान के राजदूत की बेटी का अकेले बाहर निकलना और घर आने के लिए टैक्सी का इस्तेमाल करना चिंता का विषय है.
पुलिस के मुताबिक़ ये घटना शुक्रवार दोपहर डेढ़ बजे की है जबकि मेडिकल रात में 9 बजे के बाद पिम्स अस्पताल में कराया गया है.
पुलिस को जानकारी मिली हैं कि सिलसिला अलीखेल एक निजी अस्पताल में भी मेडिकल टेस्ट कराने पहुँची थीं लेकिन वहाँ इनकार कर दिया गया.

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पाकिस्तान-अफ़ग़ानिस्तान के बीच बढ़ता तनाव
ये घटना ऐसे समय हुई है जब पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के नेताओं में तनाव बढ़ रहा है. अफ़ग़ानिस्तान ने पाकिस्तान पर तालिबान की मदद करने के आरोप लगाए हैं. दोनों देशों के नेताओं में ज़ुबानी जंग भी हुई है.
अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिकी सैन्य बलों के वापस लौटने के बाद सुरक्षा हालात अस्थिर हुए हैं. तालिबान हर बीतते दिन के साथ नए इलाक़ों पर क़ब्ज़ा कर रहा है.
इसी बीच शुक्रवार को मध्य और दक्षिण एशिया संपर्क सम्मेलन में अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी अपने पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान से महज़ कुछ फ़ीट की दूरी पर ही बैठे हुए थे.पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति ने कहा था कि पाकिस्तान ने चरमपंथी समूहों से अपने संबंध नहीं तोड़े हैं.
खुफ़िया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी ने अपने संबोधन में कठोर शब्दों में कहा था कि पिछले महीने 10,000 से अधिक 'जिहादी' लड़ाके अफ़ग़ानिस्तान आए हैं जबकि पाकिस्तान सरकार तालिबान को शांति वार्ता में "गंभीरता से" भाग लेने के लिए मनाने में असफल रही है.
अशरफ़ ग़नी के इस बयान के कुछ मिनट बाद अपने ऊपर लगे इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए पाकिस्तान के पीएम इमरान ख़ान ने कहा कि इन आरोपों से वह "निराश" हुए. उन्होंने कहा कि उन्हें यह सुनकर निराशा हुई कि संघर्ष में पाकिस्तान की "नकारात्मक भूमिका" थी.
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