अफ़ग़ानिस्तान: काबुल की हिफ़ाज़त करेगी तालिबान की ये नई 'फ़तेह फ़ोर्स'

तालिबान का नया सुरक्षा बल

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    • Author, बीबीसी मॉनिटरिंग
    • पदनाम, ख़बरों की रिपोर्टिंग और विश्लेषण

अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान ने काबुल शहर के हाई-प्रोफ़ाइल इलाक़े की हिफ़ाज़त के लिए एक नया सुरक्षा बल बनाया है. हाल ही में कई चरमपंथियों ने शहर की क़ानून व्यवस्था को चुनौती देने जैसे संदेश शेयर किए थे.

24 अगस्त को एक ट्विटर पोस्ट में तालिबान के अरबी भाषा के अकाउंट (@alemara_ar) ने इस बारे में जानकारी दी. ट्वीट में तस्वीरों के साथ लिखा है कि ये 'फ़तेह वॉक' यानी विजेता फ़ोर्स है और इसने काबुल शहर में गश्त लगाना शुरू कर दिया है.

पोस्ट की गई चार तस्वीरों में हथियारबंद सैनिक अपने सुरक्षा वाहनों के साथ देखे जा सकते हैं.

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एक तस्वीर में तालिबान के सफेद झंडे के साथ सैन्य वाहनों की एक कतार दिखाई गई है. दूसरी तस्वीर में इन गाड़ियों पर नई फ़ोर्स का पश्तो और अंग्रेज़ी में नाम दिखाई दे रहा है.

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अहम स्थानों की सुरक्षा

तालिबान के अरबी भाषा के ट्विटर अकाउंट ने इससे अधिक जानकारी साझा नहीं की है. लेकिन इस्लामिक अमीरात की मल्टीमीडिया शाखा के बताए जाने वाले एक अकाउंट ने दावा किया कि नई फ़ोर्स सराय शहज़ादा सहित काबुल में प्रमुख स्थानों की रखवाली कर रही है.

15 अगस्त को तालिबान के काबुल पर क़ब्ज़ा करने के बाद, उनके अरबी-भाषा के ट्विटर अकाउंट ने बद्री 313 नाम की एक यूनिट को स्पेशल फ़ोर्सेज़ के नाम से प्रचारित किया था.

15 और 17 अगस्त के ट्वीट्स में तालिबान ने कहा था कि बद्री 313 यूनिट को राष्ट्रपति भवन के साथ-साथ राजधानी के "रणनीतिक और संवेदनशील" हिस्सों को सुरक्षित करने के लिए तैनात किया गया है.

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जुलाई में तालिबान के प्रवक्ता ज़बीउल्लाह मुजाहिद ने बद्री 313 की पासिंग आउट के बारे में ट्वीट किया था. इससे पहले ज़बीउल्लाह ने नंवबर 2018 में भी इस फ़ोर्स का ज़िक्र किया था.

बीते कुछ दिनों में तालिबान ने ऐसे छवि पेश करने की कोशिश की है, जिससे लगे कि अफ़ग़ानिस्तान में ज़िंदगी पटरी पर लौट रही है.

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वांग यी के साथ मुल्ला अब्दुल ग़नी बरादर

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चीन ने दिया मदद का प्रस्ताव

इस बीच चीन ने कहा है कि वो अफ़ग़ानिस्तान में शांति और पुनर्निर्माण प्रक्रिया में मदद करने को तैयार है. चीन ने अफ़ग़ान तालिबान के एक प्रतिनिधिमंडल की चीनी राजदूत के साथ मुलाक़ात के दौरान मदद की ये पेशकश की है.

चीन में सरकार समर्थित न्यूज़ वेबसाइट 'द पेपर' ने चीनी अधिकारियों के हवाले से इस मुलाक़ात को 'सहज और प्रभावी' बताया है.

रूस और पाकिस्तान के अलावा चीन ही वो देश है, जिसने अफ़ग़ानिस्तान पर तालिबान के क़ब्ज़े के बाद उसके लिए गर्मजोशी दिखाई है. काबुल पर नियंत्रण से पहले भी तालिबान का प्रतिनिधिमंडल चीन गया था और तब चीन ने तमाम दूसरी बातों के साथ कहा था कि वो अफ़ग़ानिस्तान के 'अंदरूनी मामलों में दख़ल नहीं देगा.'

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तब तालिबान ने भरोसा दिलाया था कि वो अपनी (अफ़ग़ानिस्तान की) ज़मीन को चीन के ख़िलाफ़ इस्तेमाल नहीं होने देगा.

चीन ने विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने बताया कि अफ़ग़ानिस्तान में चीन के राजदूत वांग यू की मंगलवार 24 अगस्त को काबुल में तालिबान के अब्दुल सलाम हनफ़ी से मुलाक़ात हुई. अब्दुल सलाम तालिबान के क़तर स्थित राजनीतिक दफ़्तर के उप प्रमुख हैं.

वांग ने बुधवार को मीडिया को बताया, "अफ़ग़ान तालिबान के साथ चीन की बातचीत सहज और प्रभावी रही. दोनों पक्षों के बीच तमाम अहम मुद्दों पर चर्चा के लिए काबुल स्वाभाविक रूप से एक अहम जगह है "

हालांकि, उन्होंने ये नहीं बताया कि मीटिंग के दौरान किन मुद्दों पर चर्चा की गई.

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उन्होंने कहा, "अफ़ग़ानिस्तान के लिए चीन की नीति एक सी और बिल्कुल स्पष्ट रही है. हम हमेशा अफ़ग़ानिस्तान की संप्रभु स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करत हैं. हम अफ़ग़ानिस्तान के अंदरूनी मामलों में दख़ल नहीं करने की नीति पर चलते हैं और अफ़ग़ानिस्तान के सभी लोगों के लिए दोस्ताना रुख़ रखते हैं."

वांग ने ये भी कहा, "चीन अफ़ग़ान लोगों के अपना भविष्य और तकदीर तय करने की स्वायत्ता का सम्मान करता है. चीन अफ़ग़ान की अगुवाई वाले अफ़ग़ानों के अधिकार वाले सिद्धांत का समर्थन करता है."

उन्होंने आगे कहा, "चीन अफ़ग़ानिस्तान के साथ पड़ोसी के रूप में दोस्ताना और सहयोग वाले रिश्ते बरकरार रखना चाहता और शांति और पुनर्निर्माण में रचनात्मक भूमिका निभाना चाहता है."

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