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पाकिस्तान UNSC की बैठक में नहीं बुलाए जाने से भारत पर भड़का
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की अध्यक्षता में अफ़गानिस्तान के मुद्दे पर हुई बैठक में पाकिस्तान को ना बुलाए जाने पर पाकिस्तान ने नाराज़गी ज़ाहिर की है.
संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थायी दूत मुनीर अकरम ने कहा कि बैठक में पाकिस्तान को ना बुलाया जाना परिषद के नियमों का उल्लंघन है.
भारत अगस्त के महीने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अध्यक्ष है.
15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद की बैठक में ना बुलाए जाने पर मुनीर अकरम ने कहा कि पाकिस्तान अफ़ग़ानिस्तान का अहम पड़ोसी देश है और उसे सुरक्षा परिषद बैठक में बुलाया जाना चाहिए था.
उन्होंने कहा, ''हमने बैठक में शामिल होने की औपचारिक गुज़ारिश की थी लेकिन इसे ख़ारिज कर दिया गया. ज़ाहिर तौर पर हम भारत की अध्यक्षता में पाकिस्तान के साथ तटस्थता की उम्मीद नहीं रख रहे थे.''
सुरक्षा परिषद की बैठक में अफ़गानिस्तान के प्रतिनिधि ने कहा था कि पाकिस्तान तालिबान के लिए सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध करवा रहा है.
इसके जवाब में मुनीर अकरम ने कहा कि वज़ीरिस्तान में पाकिस्तानी सेना के प्रभावी अभियान के बाद कोई आतंकवादी ठिकाना नहीं बचा है.
उन्होंने ये भी कहा कि अफ़गानिस्तान और पाकिस्तान की सीमा पर 97 प्रतिशत तारबंदी कर दी गई है, जिसके बाद सीमा के आर-पार आवागमन रुक गया है.
मुनीर अकरम ने कहा कि कुछ क्षेत्रीय ताक़तें अफ़ग़ानिस्तान शांति प्रक्रिया को पटरी से उतारने की कोशिश कर रही हैं.
मुनीर अकरम ने ये भी कहा कि पाकिस्तान को अफ़ग़ानिस्तान से सक्रिय तहरीक-ए-पाकिस्तान और इस्लामिक स्टेट के हमलों का भी सामना करना पड़ रहा है.
मुनीर अकरम ने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने बार-बार ये दोहराया है कि अफ़ग़ानिस्तान के संकट का सिर्फ़ राजनीतिक समाधान ही हो सकता है और बातचीत के ज़रिए ही अफ़ग़ानिस्तान में स्थायी शांति और सुरक्षा लाई जा सकती है.
वहीं संयुक्त राष्ट्र में अफ़ग़ानिस्तान के दूत ग़ुलाम मोहम्मद इसकाज़ाई ने कहा कि पाकिस्तान को युद्ध ग्रस्त अफ़ग़ानिस्तान में शांति लाने के लिए तालिबान को ख़त्म करने में अफ़ग़ानिस्तान की मदद करनी चाहिए.
शुक्रवार को अफ़ग़ानिस्तान की स्थिति पर हुई सुरक्षा परिषद की बैठक में भारत ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान का अतीत उसका भविष्य नहीं हो सकता है.
भारत ने कहा कि क्षेत्र में आतंकवादियों के सुरक्षित ठिकानों को तुरंत बंद किया जाए और आतंकवादियों की सप्लाई चेन को तोड़ा जाए.
भारत ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के अफ़ग़ानिस्तान में हिंसा रोकने के लिए क़दम उठाने का समय आ गया है.
संयुक्त राष्ट्र में भारत के प्रतिनिधी टीएस कृष्णामूर्ति ने कहा कि 'अफ़ग़ानिस्तान में हिंसा के रुकने का कोई संकेत नहीं मिल रहा है, हम अफ़ग़ानिस्तान के पड़ोसी हैं और वहाँ के हालात से चिंतित हैं.'
पाकिस्तान की तरफ़ इशारा करते हुए कृष्णामूर्ति ने कहा कि आंतकवादियों के सुरक्षित ठिकानों और उनकी सप्लाई चेन टूटनी चाहिए ताकि अफ़ग़ानिस्तान में स्थायी शांति लाई जा सके.
उन्होंने ये भी कहा कि ये सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि अफ़ग़ानिस्तान की ज़मीन का इस्तेमाल कोई आतंकवादी संगठन किसी देश पर हमला करने के लिए ना कर पाए.
भारत ने कहा कि आतंकवादी संगठनों को मदद और सहयोग मुहैया कराने वालों की ज़िम्मेदारी तय की जानी चाहिए.
वहीं पाकिस्तानी टिप्पणीकारों का मानना है कि अफ़ग़ानिस्तान के मौजूदा हालात से अफ़ग़ानिस्तान प्रशासन और भारत परेशान नज़र आ रहे हैं.
भारत में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत अब्दुल बासित ने एक टिप्पणी में कहा कि अफ़ग़ानिस्तान ने मौजूदा हालात पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक बुलाने की मांग की थी और चूंकि इस समय एक महीने के लिए भारत सुरक्षा परिषद का अध्यक्ष है, ऐसे में भारत ने इसे तुरंत मानते हुए 6 अगस्त को बैठक बुला ली.
बासित ने कहा, 'अफ़ग़ानिस्तान के प्रतिनिधि ने अपने भाषण में पाकिस्तान पर आरोप लगाए और एक और चालाकी ये की कि तालिबान के साथ लश्कर-ए-तैयबा और इटीआईएम (ईस्ट तुर्किस्तान मुजाहिदीन) का नाम भी जोड़ दिया. उन्होंने कहा कि तालिबान के साथ लश्कर, उज़बेकिस्तान इस्लामी मूवमेंट और ईटीआईएम के मुजाहीदीन भी लड़ रहे हैं. ऐसा अफ़गानिस्तान ने तालिबान और चीन के बीच चल रही बातचीत को प्रभावित करने के लिए किया.'
पाकिस्तान को इस बैठक में शामिल न किए जाने पर अब्दुल बासित ने कहा कि, 'चूंकि इस समय अध्यक्ष भारत है इसलिए उसने पाकिस्तान की गुज़ारिश को रद्द कर दिया. हालांकि चीन और रूस ने ज़रूर अपने भाषण में ये कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में हालात ख़राब होने के लिए अमेरिका ज़िम्मेदार है.'
अफ़ग़ानिस्तान के हालात को लेकर अब क़तर की राजधानी दोहा में 11 अगस्त को एक अहम बैठक होगी जिसमें चीन, रूस और अमेरिका शामिल होंगे. इस बैठक में शामिल होने के लिए भारत को न्यौता नहीं दिया गया है.
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