पाकिस्तान: क्या प्रधानमंत्री का आवास किराए के लिए उपलब्ध है?-फ़ैक्ट चेक

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- Author, शुमाइला जाफ़री
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़, इस्लामाबाद
भारतीय मीडिया की कुछ रिपोर्टों के मुताबिक पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का सरकारी आवास किराए पर दिया जा रहा है. इन रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि देश की ख़स्ताहाल अर्थव्यवस्था को देखते हुए यह क़दम उठाया गया है.
क्या रिपोर्ट किया जा रहा है:
भारत में छपने वाली रिपोर्टों का आधार पाकिस्तान की अंग्रेज़ी वेबसाइट समा न्यूज़ में छपी एक ख़बर है. भारतीय मीडिया में इस ख़बर के साथ दावा किया गया है कि आर्थिक तंगी से जूझते हुए पाकिस्तान ने प्रधानमंत्री का आवास किराए पर देने का फ़ैसला किया है.
इस रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि कंसर्ट, फेस्टिवल, फैशन एंड कल्चरल इवेंट्स के आयोजन के लिए पीएम आवास को कम्युनिटी सेंटर के तौर पर इस्तेमाल करने को कैबिनेट की मंजूरी भी मिल चुकी है.
इतना ही नहीं रिपोर्टों के मुताबिक इन आयोजनों के दौरान अनुशासन और शिष्टाचार सुनिश्चित करने के लिए दो समितियों का भी गठन किया गया है.
एक अन्य वेबसाइट ने कहा है कि प्रधानमंत्री के तौर पर अब तक इमरान ख़ान का कार्यकाल शर्मिंदगी से भरा रहा है, यह सबसे बड़ी शर्मिंदगी है.
दूसरी रिपोर्टों में चटखारे वाली सुर्खियां लगायी गयी हैं, मसलन
'आर्थिक संकट के चलते प्रधानमंत्री आवास चढ़ेगा किराए पर''
'भैंसों की बिक्री के बाद आर्थिक तंगी से बचने के लिए पाकिस्तान सरकार, प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के आवास को किराए पर चढ़ाएगी.'
'आर्थिक तंगी झेल रहे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान का आवास किराए के लिए उपलब्ध''

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सच क्या है?
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री सचिवालय के सूत्रों ने बीबीसी को बताया कि हाल की एक बैठक में इस तरह का प्रस्ताव सामने आया था लेकिन उसे ना तो मंज़ूरी मिली है और ना ही उस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के लिए किसी कमेटी का गठन हुआ है.
सूत्र के मुताबिक इस प्रस्ताव में लोगों की राय बंटी हुई थी. प्रधानमंत्री इमरान ख़ान सहित कुछ लोग इस प्रस्ताव को स्वीकार करने के पक्ष में थे क्योंकि सरकारी आवास एक तरह से खाली पड़ा हुआ है. इमरान ख़ान प्रधानमंत्री बनने के कुछ ही सप्ताह बाद से ही इस्लामाबाद के बानी गाला स्थित अपने आवास में रह रहे हैं.
लेकिन, प्रस्ताव का विरोध कर रहे लोगों के मुताबिक यह सरकारी संपत्ति है और इसका एक सांकेतिक महत्व है. इन लोगों का मानना था कि इसे किराए पर देने से प्रधानामंत्री कार्यालय की गरिमा और महत्व कम होगा.
प्रस्ताव पर कोई सहमति नहीं बन पाने के चलते इस पर कोई फ़ैसला नहीं हो पाया.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का सरकारी आवास इस्लामाबाद के सबसे पॉश इलाके रेड ज़ोन में स्थित है. यह 1096 कनाल यानी 137 एकड़ में बना है.

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क्या हुआ था पहले
पिछले कुछ समय में इमरान ख़ान पाकिस्तान में सादगी और किफ़ायती तौर-तरीकों के सबसे बड़े पैरोकार के तौर पर उभरे हैं.
चुनावी अभियान के दौरान उन्होंने वादा किया था कि वे प्रधानमंत्री आवास को एक पब्लिक यूनिवर्सिटी में बदल देंगे. इस आवास को उन्होंने इसे सरकारी पैसों का दुरुपयोग और औपनिवेशिक काल का बोझ बताते हुए कहा था कि राजनीतिक इलीट सरकारी संसाधनों का दोहन करते हैं.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की शपथ लेने के कुछ ही दिनों बाद अगस्त 2019 में उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के आलीशान आवास को खाली करने का फ़ैसला लिया था.
उन्होंने वादा किया था, "मैं सादगी से रहूंगा और आपके पैसे बचाऊंगा."
प्रधानमंत्री चुने जाने के बाद अपने पहले भाषण में इमरान ख़ान ने घोषणा की थी कि वे प्रधानमंत्री आवास के बदले तीन बेडरूम वाले घर में रहेंगे जो एक तरह से सैन्य सचिव स्तर के अधिकारियों को मुहैया कराया जाता है.
उन्होंने तब कहा था, "मेरी इच्छा है कि प्रधानमंत्री आवास को एक यूनिवर्सिटी में तब्दील किया जाए. यह एक शानदार जगह पर स्थित है." इसके बाद वे अपने घर में शिफ्ट में हो गए थे.
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प्रधानमंत्री की घोषणा के कुछ सप्ताह बाद पाकिस्तान के एक कैबिनेट मंत्री ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया था कि प्रधानमंत्री आवास की देखरेख में सालाना 47 करोड़ रुपये ख़र्च होते हैं.
कैबिनेट मंत्री ने यह भी बताया कि सरकारी आवास के पिछले हिस्से में निर्माण कार्य चल रहा है और जल्द ही इसे उच्च गुणवत्ता वाली यूनिवर्सिटी में तब्दील किया जाएगा जो बेहद ख़ास होगा.
जुलाई, 2019 में पाकिस्तान की सरकार ने इस्लामाबाद के मास्टर प्लान में बदलाव लाते हुए पीएम आवास में यूनिवर्सिटी निर्माण को मंजूरी दी.
पहले मास्टर प्लान के मुताबिक प्रधानमंत्री आवास वाले इस्लामाबाद के जी-5 सेक्टर में किसी तरह का शैक्षणिक संस्थान खोलने की अनुमति नहीं थी. यह सेक्टर पूरी तरह से सरकारी और प्रशासनिक इमारतों के लिए आरक्षित है.
इन सबके बाद भी यूनिवर्सिटी प्रोजेक्ट पर काम पूरा नहीं हो पाया. इस लिहाज से देखें तो प्रधानमंत्री आवास के सार्वजनिक तौर पर इस्तेमाल का प्रस्ताव कोई पहली बार सामने नहीं आया है.

कार, भैंस और इमारतें
इमरान ख़ान 'सादगी अभियान' के तहत प्रधानमंत्री कार्यालय की बुलेटप्रूफ कारों के बेड़े का इस्तेमाल बंद कर चुके हैं. बाद में इन कारों की बाद में नीलामी हुई है. 61 लग्जरी कारों की नीलामी से सरकारी ख़जाने में 20 करोड़ रुपये जमा हुए थे.
इतना ही नहीं इमरान ख़ान ने यह भी कहा कि वे महज दो सहायकों से अपना काम चलाएंगे. हालांकि, प्रधानमंत्री आवास के लिए 524 कर्मचारियों की स्वीकृति है.
इसके अलावा उनहोंने प्रधानमंत्री कार्यालय की आठ भैंसों की नीलामी भी करवायी, जिससे 25 लाख रुपये जमा हुए.
इमरान ख़ान ने सादगी अभियान के लिए एक टास्क फोर्स के गठन की घोषणा भी की. प्रधानमंत्री आवास के अलावा सरकारी इमारतों की एक सूची तैयार की गई जिन्हें सार्वजनिक संस्थानों में तब्दील किया जाना है. इनमें रावलपिंडी और मरी स्थित पंजाब हाउस, लाहौर और कराची स्थित गवर्नर हाउस और सभी प्रांतों के मुख्यमंत्रियों का आवास शामिल है. हालांकि, इस योजना पर भी काम नहीं हो पाया है.
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आर्थिक संकट का हल या लुभावने वादे
इमरान ख़ान की सादगी भरी जीवनशैली के चलते प्रधानमंत्री आवास के ख़र्चे कम हुए हैं. विश्लेषकों के मुताबिक यह प्रशंसनीय क़दम ज़रूर है लेकिन यह देश की ख़स्ताहाल अर्थव्यवस्था का हल नहीं हो सकता.
आलोचकों का कहना है कि देश की आर्थिक स्थिति को पटरी पर लाने वाला विजन इमरान ख़ान के पास नहीं है और सरकार की अक्षमता को छिपाने के लिए सादगी भरे अभियानों का सहारा ले रहे हैं. कुछ तो उन पर लोक लुभावनी शैली के ज़रिए लोगों को भरमाने का आरोप भी लगा रहे हैं.
वहीं, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ पार्टी इन पहलों को संपन्न और साधारण तबके के बीच की खाई को कम करने की इमरान ख़ान की कोशिशों के तौर पर प्रोजेक्ट कर रही है. पार्टी के मुताबिक इमरान ख़ान की प्रतिबद्धता समाज की आर्थिक असमानता दूर करने में है और उनमें आम लोगों के टैक्स से जमा हुए सरकारी पैसों के प्रति सम्मान का भाव भी है.
वैसे यह पहली बार नहीं है कि जब पाकिस्तान के किसी प्रधानमंत्री ने किफ़ायत और सादगी अपनाने पर ज़ोर दिया है. जनरल ज़िया उल हक और पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ के कार्यकाल के दौरान भी सादगी और किफ़ायत को बढ़ावा दिया गया था लेकिन उन अभियानों का ना तो महत्वपूर्ण प्रभाव दिखा और ना ही वे लंबे समय तक चल पाए.
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