ब्राज़ील और भारत का विवादित सौदा आख़िरकार ख़त्म ही हो गया

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ब्राज़ील सरकार ने हैदराबाद स्थित वैक्सीन निर्माता कंपनी 'भारत बायोटेक' के कोविड-19 रोधी टीके 'कोवैक्सीन' का क्लीनिकल ट्रायल निलंबित कर दिया है.

ब्राज़ील के स्वास्थ्य नियामक ने बताया है कि वहाँ उसके साझेदार के साथ कंपनी का समझौता समाप्त किये जाने के बाद यह क़दम उठाया गया है.

भारत बायोटेक कंपनी ने ब्राज़ील के बाज़ार के लिए कोविड-19 रोधी टीके कोवैक्सीन को लेकर प्रेसिसा मेडिकामेंटोस एंड एन्विक्सिया फ़ार्मास्युटिकल्स एलएलसी के साथ हुए समझौते के रद्द होने की घोषणा शुक्रवार, 23 जुलाई को की थी.

बताया गया है कि ब्राज़ील सरकार के साथ टीकों की दो करोड़ खुराक की आपूर्ति के सौदे के विवादों में आने और ब्राज़ील में प्राधिकारियों द्वारा जाँच शुरू करने के बाद यह समझौता ख़त्म किया गया.

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ब्राज़ील के स्वास्थ्य नियामक 'एन्विसा' ने शुक्रवार को कहा, ''एन्विसा में क्लीनिकल रिसर्च के समन्वय के साथ शुक्रवार को ब्राज़ील में कोवैक्सीन टीके के क्लीनिकल अध्ययन को एहतियातन निलंबित किया गया है. भारतीय कंपनी भारत बायोटेक लिमिटेड इंटरनेशनल द्वारा शुक्रवार को एन्विसा को भेजे एक बयान के बाद यह निलंबन किया गया है.''

प्रेसिसा मेडिकामेंटोस एंड एन्विक्सिया फ़ार्मास्युटिकल्स ब्राज़ील में लाइसेंस, वितरण, बीमा और तीसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल में मदद एवं मार्गदर्शन के लिए भारत बायोटेक की साझेदार कंपनी थी.

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ब्राज़ील के स्वास्थ्य नियामक 'एन्विसा' के अनुसार, एन्विसा को भारत बायोटेक से ईमेल के ज़रिए शुक्रवार को एक बयान मिला था जिसमें यह सूचना दी गई कि प्रेसिसा कंपनी ब्राज़ील में 'भारत' का प्रतिनिधित्व करने के लिए अधिकृत नहीं रही है.

बताया गया है कि भारत बायोटेक से मिली सूचना के आधार पर एन्विसा एजेंसी में चल रही प्रक्रियाओं का पुन: मूल्यांकन करेगी और संबंधित क़दमों को अपनायेगी.

भारत बायोटेक ने 26 फ़रवरी को कहा था कि उसने 2021 की दूसरी और तीसरी तिमाही के दौरान कोवैक्सीन की दो करोड़ खुराकों की आपूर्ति करने के लिए ब्राज़ील की सरकार के साथ एक समझौता किया है.

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भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद ब्राज़ील सरकार ने कोवैक्सीन का ऑर्डर अस्थायी तौर पर निलंबित कर दिया है.

भारत बायोटेक ने अपने ब्राज़ीलियाई साझेदारों के साथ समझौता समाप्त किये जाने की घोषणा करते हुए शुक्रवार को कहा कि भारत बायोटेक कोवैक्सीन के लिए नियामक संबंधी मंज़ूरी की प्रक्रिया पूरी करने के लिए ब्राज़ीलियाई दवा नियामक संस्था एन्विसा के साथ काम करती रहेगी.

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भारत की वैक्सीन को लेकर विवाद क्यों?

ब्राज़ील में भारत बायोटेक की कोविड-19 वैक्सीन कोवैक्सीन को लेकर घमासान मचा हुआ था.

आरोप है कि ब्राज़ील की जायर बोलसोनारो सरकार ऊंची क़ीमत पर भी भारत की वैक्सीन ख़रीदने के सौदे पर आगे बढ़ रही थी.

ब्राज़ील के स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा था कि उन पर दबाव था कि ऊंची क़ीमत पर भी भारत की वैक्सीन का सौदा किया जाए.

इस पूरे विवाद में ब्राज़ील के राष्ट्रपति पर सवाल उठ रहे हैं. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार ब्राज़ील के राष्ट्रपति ने कहा था कि ब्राज़ील में न तो भारत बायोटेक की वैक्सीन आई है और न ही कोई भुगतान किया गया है.

ब्राज़ील में भारत बायोटेक से वैक्सीन के सौदे की जाँच चल रही है. ब्राज़ील के संघीय अभियोजकों ने भारत बायोटेक की कोवैक्सीन की दो करोड़ डोज़ के लिए 32 करोड़ डॉलर के सौदे की जाँच शुरू कर दी थी. कहा जा रहा है कि फ़ाइज़र ने ब्राज़ील को पिछले साल कोवैक्सीन से कम क़ीमत में वैक्सीन ऑफर किया था, लेकिन वहाँ की सरकार ने इसके प्रति उदासीनता दिखाई थी.

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पिछले महीने ब्राज़ील के राष्ट्रपति ने कहा था, ''हमने कोवैक्सीन पर न तो एक पैसा ख़र्च किया है और न ही हमें कोवैक्सीन की एक भी डोज़ मिली है. इसमें भ्रष्टाचार कहाँ से आ गया?''

बोलसोनारो ने कहा था कि उनकी सरकार में कोई भी भ्रष्टाचार की बात सामने आएगी तो वे कार्रवाई करेंगे. ब्राज़ील के राष्ट्रपति ने कहा था कि भारत बायोटेक वैक्सीन की क़ीमत दूसरे देशों की तरह ही ब्राज़ील में है.

राष्ट्रपति ने कहा था, ''सरकार वैक्सीन का सौदा तभी करती है जब फेडरल हेल्थ अथॉरिटी से उस वैक्सीन के इस्तेमाल की मंज़ूरी मिलती है. कोवैक्सीन के इस्तेमाल की मंज़ूरी अभी नहीं मिली है. हालांकि तीसरे चरण के क्लिनिकल ट्रायल के लिए ब्राज़ील की पार्टनर कंपनी ज़रिए मंज़ूरी मिली है.''

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