वुहान लैब लीक थ्योरीः एंथनी फ़ाउची के मेल पर व्हाइट हाउस से क्या मिला जवाब?

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अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यालय ने कोरोना वायरस को लेकर राष्ट्रपति के शीर्ष सलाहकार डॉक्टर एंथनी फ़ाउची का बचाव किया है. हाल ही में फ़्रीडम ऑफ़ इन्फ़ॉर्मेशऩ एक्ट के तहत काम संबंधी उनके तमाम मेल सामने आए, जिनकी समीक्षा की जा रही है.
डॉक्टर फ़ाउची कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ अमेरिका की लड़ाई का मुख्य चेहरा रहे हैं. अपने काम के बूते उन्होंने तालियों के साथ-साथ आलोचनाएं भी बटोरी हैं.
व्हाइट हाउस की प्रवक्ता जेन साकी ने कहा है कि इसमें कोई शक़ नहीं कि डॉक्टर फ़ाउची हमारे लिए अनमोल हैं.

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हालांकि, डॉक्टर फ़ाउची के मेल से ये सवाल उठ रहा है कि क्या उन्होंने तब चीन का समर्थन किया था, जब वुहान की एक लैब से करोना वायरस के लीक होने की आशंका को चीन ख़ारिज कर रहा था.
द वॉशिंगटन पोस्ट अख़बार, बज़फ़ीड न्यूज़ और अमेरिकी प्रसारक सीएनएन ने फ़्रीडम ऑफ़ इन्फ़ॉर्मेशऩ एक्ट के तहत जनवरी से जून 2000 के बीच डॉक्टर एंथनी फ़ाउची के हज़ारों निजी ईमेल प्राप्त किए हैं. ये मेल कोरोना वायरस को लेकर हुई उनकी बातचीत पर हैं.
पिछले साल अप्रैल में स्वास्थ्य मामलों से जुड़ी एक संस्था के अधिकारी ने सार्वजनिक रूप से वैज्ञानिक आधार पर लैब-लीक थ्योरी को ख़ारिज करने के लिए ईमेल भेजकर डॉक्टर फ़ाउची का शुक्रिया अदा किया था.
सीएनएन के साथ एक इंटरव्यू में डॉक्टर फ़ाउची ने कहा कि आलोचक इस मेल के किसी दूसरे संदर्भ में देख रहे हैं. उन्होंने कहा कि वायरस की उत्पत्ति को लेकर वो खुले दिमाग से सोच रहे थे.
डॉक्टर फ़ाउची के बचाव में जेन साकी ने गुरुवार को अपनी दैनिक प्रेस वार्ता में कहा, "राष्ट्रपति और प्रशासन मानते हैं कि महामारी को नियंत्रण में लाने और महामारी काल में जनता की आवाज़ बनने में डॉक्टर फ़ाउची ने शानदार तरीक़े से अपनी भूमिका निभाई है."
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कोविड-19 के किसी लैब से आने का कोई सुबूत नहीं है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने इस मामले में जांच के आदेश दिए हैं. उनके इस क़दम से चीन काफ़ी नाराज़ है, जो अभी तक इस थ्योरी को नकारता आया है.
चीनी अधिकारियों ने कोविड-19 के शुरुआती मामलों को वुहान के समुद्री जीवों के बाज़ार से जोड़ा था. इसी आधार पर वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया कि ये वायरस इस बाज़ार में जानवरों के ज़रिए इंसानों में फ़ैला है.
लेकिन, हाल ही में सामने आईं अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में इशारा किया गया है कि इस वायरस के वुहान की लैब से निकलने की थ्योरी के पक्ष में सुबूत मिल रहे हैं. इनके मुताबिक़ ये लीक संभवत: एक हादसा था.
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सीएनएन से क्या बोले फ़ाउची?
गुरुवार को डॉक्टर फ़ाउची ने कहा है कि वुहान स्थित डिज़ीज़ इंस्टिट्यूट में शोध के लिए पैसा मुहैया कराने वाले स्वास्थ्य क्षेत्र के ग़ैर-लाभकारी संगठन के अधिकारी और उनके बीच ईमेल पर बातचीत करने में कुछ भी ग़लत नहीं है. चीन का वुहान वही शहर है, जहां कोरोना वायरस के संक्रमण का पहला मामला सामने आया था.
अमेरिका की सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसी NIH ने 2014 से 2019 के बीच न्यूयॉर्क स्थित ग़ैर-लाभकारी संगठ ईको-हेल्थ अलायंस के ज़रिए वुहान इंस्टिट्यूट ऑफ़ वायरॉलजी को 6 लाख डॉलर का अनुदान दिया था. इसका मक़सद चमगादड़ के कोरोना वायरस पर शोध करना था.
ईको-हेल्थ अलायंस के प्रमुख पीटर डैसज़ैक ने अप्रैल 2020 में डॉक्टर फ़ाउकी को ईमेल भेजा था. इसमें उन्होंने लैब-लीक थ्योरी को ख़ारिज करने के लिए डॉक्टर फ़ाउची की तारीफ़ करते हुए उन्हें 'बहादुर' बताया था.
इसके जवाब में डॉक्टर फ़ाउची ने लिखा था, "आपके इन उदार शब्दों के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया."
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गुरुवार को सीएनएन से बात करते हुए डॉक्टर फ़ाउची ने कहा कि इस ईमेल के आधार पर उनके वुहान लैब रीसर्च के अधिकारी के बीच किसी क़िस्म के संबंधों के तार खोजना 'बेवकूफ़ाना' है.
उन्होंने कहा, "आप इसका जैसा चाहें, वैसा ग़लत अंदाज़ा लगा सकते हैं. उस ईमेल में एक व्यक्ति मेरी बातों को अपने हिसाब से समझकर मेरा शुक्रिया अदा कर रहा है और मैंने कहा था कि ये वायरस एक से दूसरी प्रजाति में फ़ैला हो सकता है. मैं आज भी यही मानता हूं, पर ये मानते समय मैं इस वायरस के लैब से लीक होने थ्योरी को लेकर खुले दिमाग से सोच रहा हूं."
डॉक्टर फ़ाउची ने कहा, "मुझे ये आइडिया बहुत अतिश्योक्ति भरा लगता है कि चीनियों ने जानबूझकर ऐसा वायरस बनाया, जो बाक़ी लोगों के साथ-साथ उनके अपने लोगों को भी मार सके. मुझे लगता है कि ये कुछ ज़्यादा ही है."
अमेरिकी राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान के सहायक और संक्रामक बीमारियों के विशेषज्ञ कहते हैं कि डॉक्टर फ़ाउची के मेसेज यही दर्शाते हैं कि जनता के प्रति समर्पित एक व्यक्ति सदी में एक बार आने वाली महामारी के दौरान कैसे अपने काम में जुटा हुआ था.
हालांकि, रूढ़िवादी आलोचक मानते हैं कि हो सकता है डॉक्टर फ़ाउची लीपापोती में जुटे हों. उनका यहां तक दावा है कि कांग्रेस के सामने बयान देते समय डॉक्टर फ़ाउची ने झूठी कसम खाई थी.

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लैब-लीक थ्योरी ने कैसे पकड़ा ज़ोर?
गुरुवार को वैनिटी फ़ेयर मैग्ज़ीन में छपी एक जांच रिपोर्ट के मुताबिक़ 9 दिसंबर 2020 को स्टेट डिपार्टमेंट के अधिकारियों ने कोरोना वायरस की उत्पत्ति को लेकर चर्चा की थी.
वैनिटी फ़ेयर की रिपोर्ट के मुताबिक़ इन अधिकारियों को वुहान लैब में गेन-ऑफ़-फ़ंक्शन शोध के दावों को खंगालने से मना किया गया था, ताकि इस शोध को मिले अमेरिकी अनुदान पर गैर-ज़रूरी ध्यान न जाए.
गेन-ऑफ़-फ़ंक्शन शोध में रोगजनकों में ऐसे बदलाव किए जाते हैं, जिनसे वो ज़्यादा संक्रामक हो जाते हैं. इसका मक़सद ये पता लगाना होता है कि ये किस तरह म्यूटेट हो सकते हैं.
पिछले महीने प्रकाशित वॉल स्ट्रीट जरनल की रिपोर्ट के मुताबिक़ नवंबर 2019 में वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ़ वायरोलॉजी के तीन कर्मचारी बीमार पड़े थे, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था. इसके ठीक बाद कोरोना संक्रमण का पहला मामला सामने आया था.
इसके कुछ दिनों बाद राष्ट्रपति बाइडन ने अमेरिकी जासूसी एजेंसियों को 90 दिनों की जांच में ये पता लगाने को कहा कि क्या ये वायरस चीन की लैब से निकला है.

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लैब-लीक के बारे में पहले क्या बोले थे फ़ाउची?
12 मई को कांग्रेस के सामने अपने बयान में डॉक्टर फ़ाउची ने इस बात का ज़ोरदार खंडन किया था कि अमेरिका ने चीन में विवादित 'गेन ऑफ़ फ़ंक्शन शोध' के लिए अनुदान दिया है.
26 मई को अगली सुनवाई में लुईसियाना से रिब्लिकन सांसद जॉन केनेडी ने डॉक्टर फ़ाउची से पूछा था कि उन्हें इस बात की सटीक जानकारी कैसे हो सकती है कि वुहान के वैज्ञानिकों ने पैसों का इस्तेमाल गेन-ऑफ़-फ़ंक्शन शोध के लिए नहीं किया है.
इसके जवाब में डॉक्टर फ़ाउची ने कहा, 'हम नहीं जान सकते', लेकिन साथ में उन्होंने ये भी कहा कि उन्होंने चीनी शोधकर्ताओं को 'भरोसेमंद' माना था.
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क्या हैं राजनीतिक प्रतिक्रियाएं?
मंगलवार को पूर्व राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा कि डॉक्टर फ़ाउची को अभी बहुत सारे सवालों के जवाब देने हैं. अपने कार्यकाल में जब ट्रंप ने कोविड-19 के वुहान की लैब से निकलने की आशंका जताई थी, जो उनकी ज़ोरदार आलोचना हुई थी.
ट्रंप ने अपने बयान में लिखा है, "डॉक्टर फ़ाउची 'गेन ऑफ़ फ़ंक्शन शोध' के बारे में क्या जानते हैं और उन्हें इसके बारे में कब पता चला?"
उन्होंने लिखा, "कोरोना वायरस की वजह से जो मौतें और तबाही हुई है, उसके बदले चीन को अमेरिका और बाक़ी दुनिया को 10 ट्रिलियन डॉलर देने चाहिए."
चीनी विदेश मंत्रालय ने पिछले हफ़्ते वुहान लैब-लीक थ्योरी को ख़ारिज करते हुए इसे 'बिल्कुल असंभव' क़रार दिया था.
इस बीच अमेरिकी संसद में डेप्युटी रिपब्लिकन नेता स्टीव स्केलीज़ ने एक लेटर में डॉक्टर फ़ाउची से कांग्रेस के सामने गवाही देने की मांग की है, जिसमें फ़ाउची बचाएं कि उस शोध को अनुदान देने में अमेरिका की क्या भूमिका थी, जिस शोध की वजह से कोरोना वायरस की उत्पत्ति होने की आशंका है.
कोरोना वायरस से अब तक 17 करोड़ से ज़्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं और 35 लाख से ज़्यादा जानें जा चुकी हैं.
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