बेलारूस प्लेन अरेस्ट: कब-कब किसी को पकड़ने के लिए जबरन उतारे गए विमान

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- Author, क्लाउडिया एलन
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
रविवार को रायनएयर के यात्री विमान को रोककर जबरन बेलारूस की राजधानी मिंस्क में उतारने और इस पर सवार सरकार की आलोचना करने वाले पत्रकार की गिरफ़्तारी को लेकर पूरे यूरोप में भारी नाराज़गी है.
यह नागरिक विमान बेलारूस के हवाई क्षेत्र से होते हुए यूनान से लिथुएनिया जा रहा था. इसी दौरान बेलारूस ने अपना फ़ाइटर जेट भेजकर इस विमान को रोक लिया.
बम होने की आशंका का दावा करते हुए बेलारूस के फ़ाइटर जेट ने रायनएयर के विमान के पायलट को अपने आदेश मानने के लिए मजबूर कर दिया.
यूरोपीय संघ और अमेरिका ने इस घटना की निंदा की है. लेकिन क्या पहले भी इस तरह से किसी विमान को हवा में इंटरसेप्ट किया गया है?
रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़खारोवा ने पश्चिमी देशों पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया.
उन्होंने कहा, "दूसरे देशों में हुई इसी तरह की घटनाओं को लेकर इन देशों (अमेरिका और यूरोपीय देशों) की प्रतिक्रिया बहुत अलग रही है."
उन्होंने आठ साल पहले की एक घटना का ज़िक्र किया जो बोलीविया के तत्कालीन राष्ट्रपति इवो मोरालेस के साथ हुई थी.
नज़र डालते हैं पहले के ऐसे ही कुछ घटनाक्रमों पर जब विमानों को हवा में ही घेरा गया और कुछ मौक़ों पर उन्हें उतरने के लिए मजबूर किया गया.
2013: वियना में उतरा बोलीविया के राष्ट्रपति का विमान
जुलाई 2013 को इवो मोरालेस मॉस्को में एक सम्मेलन में हिस्सा लेकर अपने देश बोलीविया लौट रहे थे. मगर उनके विमान को वियना एयरपोर्ट जाना पड़ा क्योंकि कई सारे यूरोपीय देशों ने उनके विमान को अपने हवाई क्षेत्र में दाख़िल होने की इजाज़त नहीं दी.
बोलीविया ने कहा कि इस बात को लेकर 'बड़ा झूठ' कहा गया कि राष्ट्रपति के इस विमान पर अमेरिका की ख़ुफ़िया जानकारियां लीक करने वाले एडवर्ड स्नोडन भी सवार थे, जो उन दिनों मॉस्को के एयरपोर्ट पर फँसे हुए थे.
बाद में फ्रांस ने बोलीविया की सरकार से यह कहते हुए खेद प्रकट किया था कि 'विरोधाभासी सूचनाएं' मिलने के कारण उन्हें इजाज़त देने में देर हो गई थी.

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हालांकि, यह घटना रविवार को बेलारूस में हुई घटना से अलग थी क्योंकि राष्ट्रपति मोरालेस के विमान को न तो लड़ाकू विमानों से घेरा गया था और न ही उन्हें कहीं लैंड करने के लिए मजबूर किया गया था. बल्कि उनके विमान को बाक़ी देशों ने अपने एयरस्पेस में दाख़िल ही नहीं होने दिया था.
साथ ही, बोलीविया के राष्ट्रपति सरकारी विमान से यात्रा कर रहे थे न कि किसी कमर्शियल या नागरिक विमान से.
बेलारूस के मामले में सिविल एविएशन के लिए संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी आईसीएओ ने कहा है कि वह "लैंडिंग के लिए मजबूर किए जाने की घटना को लेकर काफ़ी फ़िक्रमंद है."
एजेंसी ने कहा है कि हो सकता है यह घटना 'शिकागो संधि' का उल्लंघन हो जिसके तहत विमानों की सुरक्षा और हवाई क्षेत्र से जुड़े नियम तय किए गए थे.
1944 की शिकागो संधि रायनएयर की फ़्लाइट जैसे ही अन्य नागरिक विमानों को लेकर भी लागू होती है मगर यह राष्ट्राध्यक्षों के सरकारी विमानों या सैन्य विमानों पर लागू नहीं होती.
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2010: ईरान ने सुन्नी चरमपंथी को किया था गिरफ़्तार
फ़रवरी 2010 में ईरान ने एक हिंसक सुन्नी बाग़ी संगठन जुंदुल्लाह के प्रमुख अब्दुलमलिक रीगी को गिरफ़्तार किया था.
उस समय ईरान की सरकारी एजेंसी इरना ने जानकारी दी थी कि गिरफ़्तारी से पहले रीगी एक अरब देश से पाकिस्तान की ओर जा रहे थे.
ईरानी सांसद मोहम्मद देहगन के हवाले से समाचार एजेंसी एएफ़पी ने लिखा था, "रीगी के प्लेन को उतरने के लिए कहा गया और तलाशी लेने के बाद रीगी को गिरफ़्तार कर लिया गया."

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उस समय आई अन्य ख़बरों के मुताबिक़, रीगी दुबई से किर्गिस्तान जा रही एक कमर्शियल फ़्लाइट में मौजूद थे जो कुछ समय के लिए ईरान में उतरी हुई थी. इसी दौरान उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया.
लेकिन उस समय आई मीडिया की रिपोर्टों में अलग-अलग बातें कही गईं. ख़ासकर अमेरिकी मीडिया ने दावा किया कि रीगी को गिरफ़्तार करने में पाकिस्तान ने भी मदद की थी.
रीगी को ईरान ने कैसे गिरफ़्तार किया, बीबीसी इसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर पाया है. मगर ईरान का यह दावा ग़लत हो सकता है कि उसके लड़ाकू विमानों ने एक कमर्शिलयल विमान को उतरने पर मजबूर किया था.

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1985: अमेरिका ने पकड़े समुद्री जहाज़ हाइजैक करके भागने वाले
अक्तूबर 1985 में संदिग्ध फ़लस्तीनी चरमपंथियों को लेकर जा रहे मिस्र के एक विमान को अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने इटली के एक अमेरिकी ठिकाने पर उतरने को मजबूर किया.
इन चरमपंथियों ने कुछ समय पहले भूमध्यसागर में इटली का एक समुद्री जहाज़ हाइजैक कर लिया गया था जिस पर सैकड़ों लोग सवार थे. इस दौरान एक बुज़ुर्ग अमेरिकी यहूदी को मार डाला गया था.
इस जहाज़ को मिस्र ले जाने के बाद फ़लस्तीनी लिबरेशन फ्रंट के चार लड़ाके भागने में सफल रहे. उन्होंने इजिप्टएयर के एक चार्टर्ड विमान के ज़रिये ट्यूनिस भागने की कोशिश की. मगर इस विमान को अमेरिका के F-16 विमानों ने भूमध्यसागर के ऊपर अंतरराष्ट्रीय हवाई क्षेत्र में घेर लिया.
उस समय लॉस एंजिल्स टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक़, इसके बाद इसे सिसली में अमेरिका के ठिकाने पर ले जाया गया. चारों हाइजैकर पर इटली में मुक़दमा चला जिसके बाद उन्हें जेल की सज़ा हो गई.
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1956: अल्जीरियाई स्वतंत्रता आंदोलन के नेताओं की गिरफ़्तारी
22 अक्तूबर, 1956 को अल्जीरियाई स्वतंत्रता आंदोलन के पाँच नेता एक नागरिक विमान पर मोरक्को के रबात से ट्यूनिस जा रहे थे.
बीबीसी अरबी सेवा के अहमद रौआबा की रिपोर्ट के मुताबिक़, वे लोग 'मग़रिब क्षेत्र के भविष्य' पर ट्यूनिशिया की ओर से आयोजित एक सम्मेलन में हिस्सा लेने जा रहे थे.
अल्जीरिया उस समय फ्रांस का उपनिवेश था. फ्रांस की सीक्रेट सर्विस ने फ़ाइटर जेट भेजकर उनके इस यात्री विमान को घेरा और अल्जीरिया में उतरने को मजबूर किया.
इस घटना के बाद मोरक्को और ट्यूनिशिया में ग़ुस्सा उबल पड़ा.
इस घटना में गिरफ़्तार किए गए लोगों में अहमद बिन बेला भी थे जो फ्रांस से आज़ादी मिलने के बाद अल्जीरिया के पहले राष्ट्रपति बने. साल 2012 में 95 साल की उम्र में उनका निधन हुआ.
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