इसराइल ने गज़ा पर फिर किया हमला, हमास ने भी दागे रॉकेट

गज़ा पर हमला

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फ़लस्तीनी चरमपंथियों और इसराइली सेना के बीच संघर्ष एक सप्ताह बाद भी जारी है. सोमवार सुबह इसराइली सेना ने गज़ा के कई इलाकों पर 80 हवाई हमले किए हैं. इससे थोड़ी देर पहले फ़लस्तीनी चरमपंथी संगठन हमास ने दक्षिणी इसराइल में रॉकेट हमले किए.

गज़ा के कई इलाक़ों में पौ फटने से पहले हुए ये हमले लड़ाई छिड़ने के बाद से सबसे ज़बरदस्त हमले थे.

इसराइल ने कहा है कि उसने चरमपंथी गुट हमास और उसके कई कमांडरों के घरों को निशाना बनाया है, मगर मुख्य सड़कों और बिजली लाइनों को भी नुक़सान हुआ है.

इससे पहले गज़ा स्थित फ़लस्तीनी अधिकारियों ने एक सप्ताह से जारी संघर्ष में रविवार को हुई हिंसा को सबसे "ख़ूनी दिन" बताया. उन्होंने कहा कि रविवार को इसराइली हवाई हमले में 42 लोगों की मौत हो गई है जिनमें 16 महिलाएं और 10 बच्चे शामिल हैं.

उधर इसराइल के राष्ट्रपति बिन्यामिन नेतन्याहू ने कहा है कि गज़ा में फ़लस्तीनी चरमपंथी गुट हमास के ख़िलाफ़ इसराइली सैन्य अभियान ‘पूरी ताकत’ के साथ जारी रहेगा.

नेतन्याहू ने चेतावनी भरे लहज़े में कहा, “जब तक ज़रूरी होगा, हम सैन्य कार्यवाई जारी रखेंगे...शांति क़ायम होने में अभी वक़्त लगेगा.”

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेश ने चेतावनी दी है कि संघर्ष नहीं थमा तो ये पूरा क्षेत्र एक "बेक़ाबू संकट" में घिर जाएगा.

संयुक्त राष्ट्र ने गज़ा में ईंधन की कमी होने की भी चेतावनी दी है और कहा है कि इससे अस्पतालों और अन्य ज़रूरी सेवाओं पर असर पड़ सकता है.

इसराइली सेना का कहना है कि फ़लस्तीनी चरमपंथियों ने पिछले एक सप्ताह में इसराइल पर 3,000 से ज़्यादा रॉकेट दागे हैं. उनका कहना है कि पिछले एक सप्ताह से जारी हमलों में इसराइल में दो बच्चों समेत 10 लोगों की मौत हुई है.

इसराइल और फ़लस्तीनियों के बीच संघर्ष में गज़ा में अब तक कुल 197 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 58 बच्चे और 34 महिलाएं शामिल हैं.

हमले में कुल 1,235 लोग घायल भी हुए हैं. यह जानकारी हमास नियंत्रित स्वास्थ्य मंत्रालय ने दी है. इसराइल का कहना है कि मरने वालों में हमास के कई चरमपंथी भी हैं.

गज़ा में हमला

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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक

इस बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने गज़ा में सीज़फ़ायर (युद्धविराम) लागू करवाने के लिए अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों के साथ एक बैठक की.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने इस बैठक की शुरुआत में कहा, “गज़ा में हो रही हिंसा बेहद भयानक है और यह संघर्ष तुरंत रुकना चाहिए.”

भारत ने भी यरुशलम और ग़ज़ा में जारी हिंसा को लेकर चिंता जताई है.

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी दूत टीएस तिरूमूर्ति ने सुरक्षा परिषद की बैठक के बाद कहा,"भारत हर तरह की हिंसा की निंदा करता है, तत्काल तनाव ख़त्म करने की अपील करता है."

"भारत फ़लस्तीनियों की जायज़ माँग का समर्थन करता है और दो-राष्ट्र की नीति के ज़रिए समाधान को लेकर वचनबद्ध है."

"भारत ग़ज़ा पट्टी से होने वाले रॉकेट हमलों की निंदा करता है, साथ ही इसराइली बदले की कार्रवाई में भी बहुत बड़ी संख्या में आम नागरिक मारे गए हैं जिनमें औरतें और बच्चे भी शामिल हैं जो बहुत दुखद है."

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गज़ा से होते आते रॉकेट हमलों को रोकते इसराइली इंटरसेप्टर

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हिंसा की शुरुआत के बाद सबसे 'ख़ूनी रविवार'

फ़लस्तीनी अधिकारियों का कहना है कि हिंसा की शुरुआत से अब तक गज़ा के लिए रविवार सबसे भयानक रहा.

रविवार को आधी रात के तुरंत बाद गज़ा की एक व्यस्त गली में इसराइली हवाई हमला हुआ, जिसमें कम से कम तीन इमारतें नष्ट हो गईं और दर्जनों लोगों की जान गई.

इधर, हमास ने भी रविवार दोपहर और रात में दक्षिणी इसराइल की तरफ़ धड़ाधड़ रॉकेट दागे.

इन हमलों के बाद चेतावनी वाले सायरन बजने लगे और लाखों इसराइलियों ने सुरक्षित ठिकानों में शरण ली.

हमलों के बीच फ़लस्तीनियों ने भी ख़ुद को बचाने की कोशिश की लेकिन घनी आबादी और कम संसाधनों वाले गज़ा में उनके लिए सुरक्षित ठिकाना ढ़ूँढने का विकल्प न के बराबर था.

गज़ा में मलबों के बीच लोग

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'धड़ाधड़ हमले हुए, मैं मलबों के बीच था'

रियाद एश्कुंताना ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि उन्होंने अपनी बेटियों को एक अलग कमरे में सुलाया था. इस धमाके में उनकी चार बेटियों में से सिर्फ़ एक ही बच पाई. बाकी की तीन बेटियों और उनकी पत्नी की हमले में मौत हो गई.

उन्होंने बताया, “जैसे ही धमाका हुआ, मैं दौड़कर अपनी बेटियों को देखने गया. मेरी पत्नी भी बेटियों को गले लगाकर कमरे से बाहर निकलने के दौड़ी लेकिन तभी दूसरा हवाई हमला हुआ. तब तक हमारे कमरे की छत नष्ट हो चुकी थी और मैं मलबे में खड़ा था.”

बाद में इसराइली सेना ने कहा कि उसने उस इलाके में एक चरमपंथी सुरंग पर हमला किया था.

सेना ने कहा, “हमले में सुरंग तो नष्ट हो गई लेकिन इसके ऊपर बने घर भी नष्ट हो गए और इसकी वजह से नागरिकों की जान गई, जिन्हें नुक़सान पहुँचाने का इरादा नहीं था.”

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हमास के ठिकानों को निशाना बना रहे हैं: इसराइली सेना

इसराइली सेना का कहना है कि वो हमास के नेताओं और उन ठिकानों को निशाना बना रही है जो हमास से जुड़े हैं.

सेना ने कहा कि उसने हमास नेता याह्या सिन्वर और उनके भाई मुहम्मद सिन्वर के घरों को भी नष्ट कर दिया है.

सेना के मुताबिक़ ये दोनों भाई इस संघर्ष के लिए लॉजिस्टिक और लोगों के प्रबंध का ज़िम्मा संभाले हुए थे.

समाचार एजेंसी एपी के अनुसार, हमले के वक़्त दोनों भाई घर में रहे हों, इसकी संभावना न के बराबर है.

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गज़ा में पूरा दिन मलबों के बीच

इधर, गज़ा में बचाव दलों ने हमलों के बाद पूरा रविवार लोगों को मलबों से निकालते हुए और उनकी जान बचाते हुए बिताया.

फ़लस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक़ इन हमलों में डॉक्टर अमन अबू अल-औफ़ की भी मौत हो गई. वो शिफ़ा हॉस्पिटल में इंटरनल मेडिसिन के प्रमुख और कोरोना वायरस टीम के सदस्य थे.

हमास ने भी एश्कलोन, एश्दाद और नेतिनवात समेत मध्य और दक्षिणी इसराइल के अन्य हिस्सों पर रॉकेट बरसाए. इन हमलों में किसी मौत की ख़बर नहीं है.

इसराइली सेना का कहना है कि पिछले हफ़्ते इन इलाकों में सबसे ज़्यादा रॉकेट बरसाए गए हैं.

गज़ा में लोग

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यहूदियों के पूजा स्थल पर हमला

इसराइल के आयरन डोम डिफ़ेंस सिस्टम ने इनमें से कई रॉकेटों को नष्ट कर दिया लेकिन कइयों ने कारों और इमारतों को नुक़सान पहुँचाया.

इन हमलों में एश्कलोन सिस्त याद माइकल सिनेगॉग (यहूदियों का पूजास्थल) को भी नुक़सान पहुँचा है.

इसराइली अख़बार ‘टाइम्स ऑफ़ इसराइल’ के मुताबिक़ सिनेगॉग पर हुए हमले में कोई घायल नहीं हुआ और स्थानीय लोगों ने जल्दी ही हमले से हुए नुक़सान को ठीक कर दिया.

इसके अलावा, रविवार शाम को पूर्वी यरुशलम के शेख़ जर्रा इलाके में एक कार ने लोगों को रौंदने की कोशिश की.

इसराइली पुलिस के प्रवक्ता ने बताया कि इस कार के ड्राइवर को गोली मार दी गई लेकिन इस घटना में चार इसराइली अधिकारी घायल हो गए.

इसराइल में 11 मई 2021 को एक शॉपिंग सेंटर पर हमले के बाद एक महिला की मदद करते चिकित्साकर्मी

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एक महीने से जारी थी अशांति

संघर्ष का ये सिलसिला यरुशलम में पिछले लगभग एक महीने से जारी अशांति के बाद शुरू हुआ है.

इसकी शुरुआत पूर्वी यरुशलम के शेख़ जर्रा इलाक़े से फ़लस्तीनी परिवारों को निकालने की धमकी के बाद शुरू हुईं जिन्हें यहूदी अपनी ज़मीन बताते हैं और वहाँ बसना चाहते हैं. इस वजह से वहाँ अरब आबादी वाले इलाक़ों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हो रही थीं.

7 मई को यरुशलम की अल-अक़्सा मस्जिद के पास प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच कई बार झड़प हुई.

अल-अक़्सा मस्जिद के पास पहले भी दोनों पक्षों के बीच झड़प होती रही है मगर 7 मई को हुई हिंसा पिछले कई सालों में सबसे गंभीर थी.

इसके बाद तनाव बढ़ता गया और पिछले सोमवार से ही यहूदियों और मुसलमानों दोनों के लिए पवित्र माने जाने वाले यरुशलम में भीषण हिंसा शुरू हो गई.

हमास ने इसराइल को यहाँ से हटने की चेतावनी देते हुए रॉकेट दागे और फिर इसराइल ने भी जवाब में हवाई हमले किए. इससे पैदा हुई हिंसा एक हफ़्ते के बाद अब भी जारी है.

हालाँकि अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसराइल और फ़लस्तीनियों के बीच समझौता कराने की कोशिशें तेज़ हो गई हैं.

इसराइल

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क्या है यरुशलम का विवाद?

1967 के मध्य पूर्व युद्ध के बाद इसराइल ने पूर्वी यरुशलम को नियंत्रण में ले लिया था और वो पूरे शहर को अपनी राजधानी मानता है.

हालांकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इसका समर्थन नहीं करता. फ़लस्तीनी पूर्वी यरुशलम को भविष्य के एक आज़ाद मुल्क़ की राजधानी के तौर पर देखते हैं.

पिछले कुछ दिनों से इलाक़े में तनाव बढ़ा है. आरोप है कि ज़मीन के इस हिस्से पर हक़ जताने वाले यहूदी फलस्तीनियों को बेदख़ल करने की कोशिश कर रहे हैं जिसे लेकर विवाद है.

अक्तूबर 2016 में संयुक्त राष्ट्र की सांस्कृतिक शाखा यूनेस्को की कार्यकारी बोर्ड ने एक विवादित प्रस्ताव को पारित करते हुए कहा था कि यरुशलम में मौजूद ऐतिहासिक अल-अक्सा मस्जिद पर यहूदियों का कोई दावा नहीं है.

वीडियो कैप्शन, इसराइल-फ़लस्तीन विवाद की जड़ क्या है?

यूनेस्को की कार्यकारी समिति ने यह प्रस्ताव पास किया था.

इस प्रस्ताव में कहा गया था कि अल-अक्सा मस्जिद पर मुसलमानों का अधिकार है और यहूदियों से उसका कोई ऐतिहासिक संबंध नहीं है.

जबकि यहूदी उसे टेंपल माउंट कहते रहे हैं और यहूदियों के लिए यह एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल माना जाता रहा है.

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