इसराइल के विरोध में पाकिस्तान के पीएम इमरान ख़ान ने की ये ग़लती

इमरान ख़ान

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इसराइल और फ़लस्तीनियों के बीच छिड़े ख़ूनी संघर्ष को लेकर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान लगातार बयान दे रहे हैं.

पाकिस्तानी पीएम खुलकर इसराइल का विरोध कर रहे हैं और फ़लस्तीनियों का समर्थन. इमरान ख़ान ने कहा था कि रमज़ान के पवित्र महीने में अल अक़्शा मस्जिद पर हमला मानवता और अंतरराष्ट्रीय क़ानून के ख़िलाफ़ है.

पाकिस्तान और इसराइल के बीच राजनयिक संबंध नहीं हैं. पाकिस्तान में आम लोगों और वहाँ के इस्लामिक संगठनों के बीच फ़लस्तीनियों को लेकर सहानुभूति होने की बात कही जाती है.

जब भी इसराइल और फ़लस्तीनियों के बीच टकराव होता है तो पाकिस्तान में फ़लस्तीनियों के समर्थन में बड़ी भीड़ सड़कों पर उतरती है. इमरान ख़ान के अलावा देश के पहले के प्रधानमंत्रियों ने भी इसराइल से औपचारिक रिश्ते कायम करने की कोशिश नहीं की.

इमरान ख़ान भी सऊदी अरब वाली बात ही दोहराते हैं कि जब तक 1967 की सीमा के तहत फ़लस्तीन एक स्वतंत्र मुल्क नहीं बन जाता है तब तक इसराइल से राजनयिक रिश्ते कायम नहीं होंगे.

वीडियो कैप्शन, इसराइल-फ़लस्तीन विवाद की जड़ क्या है?

इमरान ख़ान का ट्वीट

इमरान ख़ान ने बुधवार को भी इसराइल के ख़िलाफ़ एक ट्वीट किया और जिसे लेकर वे विवादों में घिर गए हैं.

इमरान ने अपने ट्वीट में लिखा था, "मैं पाकिस्तान का प्रधानमंत्री हूँ और फ़लस्तीनियों के साथ खड़ा हूँ."

इस ट्वीट के साथ इमरान ख़ान ने एक फ़ोटो भी पोस्ट की थी, जिस पर अमेरिका के जाने-माने बुद्धिजीवी नोआम चोम्स्की की फ़ोटो थी और उनके नाम का हवाला देते हुए एक कोट (उद्धरण) था.

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इस कोट में लिखा था, "तुम मेरा पानी ले लो, मेरे पेड़ों को जला दो, मेरे घरों को तबाह कर दो, नौकरियां छीन लो, माँ की हत्या कर दो, मेरे देश में धमाके करो, हमें भूखा रखो, अपमानित करो लेकिन हमें इन सबके बदले एक रॉकेट दाग़ने के लिए दोषी ठहराओ."

लेकिन क्या ये नोआम चोम्स्की का कोट है?

नोआम चोम्स्की ने ख़ुद ही साल 2012 में इस कोट का इस्तेमाल अपने एक लेख में किया था और उन्होंने इस कोट को गज़ा के किसी बुज़ुर्ग व्यक्ति का बताया था.

वीडियो कैप्शन, ‘फलस्तीनियों और इसराइल में छिड़ सकती है जंग’

नोआम चोम्स्की की बात

ट्रूथआउट पर चार दिसंबर, 2012 में छपे अपने लेख में नोआम चोम्स्की ने लिखा था, "गज़ा में एक बुज़ुर्ग व्यक्ति के हाथ में एक प्लेकार्ड था और उसी पर ये लाइनें लिखी हुई थीं."

मतलब इमरान ख़ान जिस उद्धरण को नोआम चोम्स्की का बता रहे थे, उसे नोआम चोम्स्की ने ख़ुद ही गज़ा के किसी बुज़ुर्ग व्यक्ति का बताया है.

नोआम चोम्स्की ने लिखा था कि उस बुज़ुर्ग व्यक्ति के प्लेकार्ड पर जो कुछ लिखा था, उसे फ़लस्तीनियों के संकट को समझा जा सकता है. नोआम चोम्स्की ने लिखा था, "इसराइल बनने के बाद से ही लाखों फ़लस्तीनियों को अपना घर-बार छोड़ना पड़ा है."

एक और वेबसाइट पर नोआम चोम्स्की का यह आलेख छपा है और उसमें भी इस उद्धरण को गज़ा के किसी बुज़ुर्ग व्यक्ति के प्लेकार्ड पर लिखा हुआ बताया है.

साल 2012 में ब्रिटिश प्रकाशन द इंडिपेंडेंट पर भी फ़लस्तीनियों को लेकर एक लेख छपा है और उसमें भी इस उद्धरण को गज़ा के उसी बुज़ुर्ग व्यक्ति का बताया गया है. लेकिन इमरान ख़ान ने इसे नोआम चोम्स्की का बता दिया है.

वीडियो कैप्शन, तुर्की और इसराइल क्या फिर एक दूसरे के क़रीब आ रहे हैं?

पाकिस्तान में फ़लस्तीन के लिए समर्थन

लेकिन प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के इस ट्वीट को पाकिस्तान में हाथोंहाथ लिया गया और फ़लस्तीनियों के समर्थन में इसे जमकर रीट्वीट किया गया.

पाकिस्तानी क्रिकेटर मोहम्मद हाफ़िज़ ने इमरान ख़ान के ट्वीट को रीट्वीट करते हुए लिखा, "मैं मोहम्मद हाफ़िज़ एक मुसलमान देशभक्त पाकिस्तानी हूँ और फ़लस्तीनियों के साथ खड़ा हूँ."

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पाकिस्तान में केवल सत्ता पक्ष के ही लोग नहीं बल्कि विपक्षी पार्टी के नेता भी खुलकर फ़लस्तीनियों का समर्थन कर रहे हैं.

पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में नेता प्रतिपक्ष शहबाज़ शरीफ़ ने भी इसराइल की आलोचना करते हुए ट्वीट किया.

शहबाज़ शरीफ़ ने अपने ट्वीट में पूछा है कि इसराइली आक्रामकता को संयुक्त राष्ट्र, ओआईसी और सभ्य दुनिया रोकने में क्यों नाकाम हो रहे हैं?

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