कोरोना महामारी की मुश्किल घड़ी में अमेरिका ने क्या मोदी सरकार को निराश किया है?

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भारत इन दिनों कोरोना महामारी के सबसे भयानक दौर से गुज़र रहा है. रोजाना आने वाले रिकॉर्ड मामले, बड़ी संख्या में मौतें और अस्पतालों में ऑक्सीजन का संकट लोगों का दिल दहला रहा है.
इस संकट पर दुनिया भर की नज़र है और दुनिया के कई देश भारत की मदद के लिए आगे आए हैं.
फिर चाहे सिंगापुर का भारत को मेडिकल ऑक्सीजन भेजना हो या सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों का मदद के लिए आगे आना.
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हालाँकि इन सबके बीच अमेरिका ने भारत को लेकर जैसा रुख अपनाया है, उसे कुछ लोग ‘अप्रत्याशित’ मान रहे हैं.
आख़िर कब मदद करेगा अमेरिका?
पहले तो अमेरिका ने वैक्सीन और दवाओं से जुड़े कच्चे माल के आयात पर लगी रोक हटाने से इनकार कर दिया और व्हाइट हाउस की प्रवक्ता जेन साकी ने कहा कि, "अमेरिका फ़र्स्ट यानी अमेरिका पहले अपने नागरिकों की ज़रूरतें पूरी करेगा."
फिर भारतीय विदेश मंत्री एस जशयंकर ने जब अंतरराष्ट्रीय मदद की अपील की तो अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने एक ट्वीट कर कहा कि अमेरिका भारत को अतिरिक्त मदद भेजेगा.
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हालाँकि ब्लिंकन ने यह स्पष्ट नहीं किया कि अमेरिका भारत को किस तरह की मदद मुहैया कराएगा और कब.
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अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने भी ब्लिंकन से मिलता-जुलता अस्पष्ट सा ट्वीट ही किया.
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अंतरराष्ट्रीय सम्बन्धों पर नज़र रखने वाले अमेरिका के इस रवैये पर हैरानी जता रहे हैं.
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भारत ने मदद की तो अमेरिका पीछे क्यों?
आम लोग भी यह पूछ रहे हैं कि जब अमेरिका महामारी के सबसे बुरे दौर से गुज़र रहा था तब भारत ने उसकी मदद की थी तो अब अमेरिका अपने हाथ पीछे क्यों खींच रहा है?
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पिछले साल ट्रंप प्रशासन के दौरान अमेरिका दुनिया में कोरोना से सबसे ज़्यादा प्रभावित देश था. वहाँ संक्रमण के लाखों मामले आ रहे थे और बड़ी संख्या में लोगों की मौत हो रही थी.
ऐसे में जब हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन की माँग बढ़ी तब भारत ने अमेरिका को यह दवा भेजी थी.
तब तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्विटर पर भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शुक्रिया अदा किया था और बदले में पीएम मोदी ने लिखा था कि महामारी के समय में भारत-अमेरिका के रिश्ते और मज़बूत हो गए हैं.
अब ये दोनों ही ट्वीट एक बार फिर सोशल मीडिया में सर्कुलेट हो रहे हैं और भारतीय लिख रहे हैं कि वो कैसे ट्रंप को ‘याद’ कर रहे हैं.
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हालाँकि इससे पहले भारत ने हाइड्रोक्सिक्लोरोक्विन के निर्यात पर पाबंदी लगाई थी और ट्रंप ने पलटवार करने की चेतावनी दे डाली थी. तब मोदी सरकार ने निर्यात पर लगा प्रतिबंध हटा दिया था.
लेकिन अब अमेरिका कोविड वैक्सीन बनाने वाली ज़रूरी चीज़ों के निर्यात पर से बैन नहीं हटा रहा है जबकि भारत को इसकी सख़्त ज़रूरत है.
भारतीयों में गहरी नाराज़गी
अमेरिका के इस रवैये के कारण वहाँ बसे भारतीयों में गहरी नाराज़गी है.
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इस साल जब भारतीय मूल की कमला हैरिस अमेरिकी उप राष्ट्रपति बनी थीं तो लोगों ने उम्मीद की थी कि वो भारतीय हितों को ध्यान में रखेंगी लेकिन संकट के इस दौर में उनकी ओर से कोई पहल न देखकर भारतीय निराश हैं.
इस बीच शुक्रवार को अमेरिकी चेम्बर ऑफ़ कॉमर्स ने बाइडन प्रशासन से अपील की थी कि वो स्टोर कर रखे गए ऑक्सफ़र्ड एस्ट्राज़ेनेका की वैक्सीन के लाखों डोज़ भारत, ब्राज़ील और कोरोना महामारी के असर से जूझ रहे दूसरे देशों को भेजें.
बीते कई दिनों से भारत लगातार कोरोना संक्रमण के मामलों के नए रिकॉर्ड बना रहा है. इधर भारत में संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच यहाँ के कई अस्पताल ऑक्सीजन की भारी किल्लत का सामना कर रहे हैं.
भारत सरकार ने सिंगापुर समेत दूसरे देशों से ऑक्सीजन आयात कर, राजधानी दिल्ली और दूसरी जगहों के अस्पतालों में ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए सेना के विमानों को काम पर लगाया हैं और ऑक्सीजन ट्रेनें शुरू की हैं.
निर्यात से पाबंदी हटाने का वक़्त
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार ब्राउन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ़ पब्लिक हेल्थ के डीन आशीष झा ने शनिवार को वॉशिंगटन पोस्ट में छपे एक लेख में चेतावनी दी कि 1.3 अरब की आबादी वाला ये देश मानवीय तबाही की कग़ार पर पहुंच चुका है.
आशीष झा ने अमेरिकी सरकार से अपील की है कि वो भारत के लोगों की मदद के लिए ऑक्सीजन, कोरोना टेस्टिंग किट, उन्नत दर्जे के पीपीई किट, मास्क और कोविड-19 के इलाज में लगने वाली रेमडेसिविर जैसी दवाएं भेजें.
झा ने अपने लेख में ये भी कहा है कि अमेरिका के पास ऐस्ट्राज़ेनेका की 300 लाख डोज़ बिना इस्तेमाल हुई रखी हुई हैं, जो संकट से जूझ रहे दूसरे देशों के काम आ सकती हैं.
अमेरिकी नियामकों ने ऐस्ट्राज़ेनेका वैक्सीन के इस्तेमाल को हरी झंडी नहीं दी है जबकि कई और देशों में ये इस्तेमाल को मंज़ूरी दे दी गई है.
उन्होंने लिखा है कि अब वो वक़्त आ गया है जब अमेरिका को इस साल फ़रवरी में डिफ़ेंस प्रोडक्शन एक्ट के तहत कच्चे माल पर के निर्यात पर लगाए बैन को हटा लेना चाहिए.
अमेरिका पर बढ़ रहा है दबाव
वॉशिंगटन में मौजूद भारतीय दूतावास के एक प्रवक्ता ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि भारत में कोरोना वैक्सीन के उत्पादन के लिए अमेरिकी कंपनियों से इनपुट और ज़रूरी सामान की सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए दोनों देशों के अधिकारी विभिन्न स्तरों पर बातचीत कर रहे हैं.
उन्होंने कहा कि ये ज़रूरी है कि टीकाकरण अभियान मे तेज़ी लाने और मेडिकल सप्लाई सुचारू रूप से जारी रखने के लिए दोनों देश मिलकर काम करें.

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व्हाइट हाउस की एक प्रवक्ता ने शनिवार को समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि, "कोरोना महामारी के गंभीर प्रकोप से लड़ रहे भारत सरकार और वहां के स्वास्थ्यकर्मियों को जल्द से जल्द मदद मुहैया कराने की योजना के लिए हम उच्चस्तरीय बातचीत कर रहे हैं. जल्द ही हम इसके बारे में और जानकारी देंगे."
ज़ाहिर है, अमेरिकी सरकार पर राष्ट्रपति जो बाइडन की चीन के बढ़ते प्रभाव से निबटने की नीति में रणनीतिक तौर पर अहम साझेदार और विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत की मदद करने के लिए दवाब बढ़ रहा है.
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