अफ़ग़ानिस्तान को पश्चिमी देशों की मौजूदगी से क्या हासिल हुआ

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    • Author, रियलिटी चेक टीम
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़

ब्रिटेन के डिफेंस स्टाफ़ जनरल निक कार्टर ने हाल ही में बीबीसी से कहा था कि "अफ़ग़ानिस्तान में बड़े बदलाव" आए हैं. उन्होंने देश में महिलाओं और शिक्षा व्यवस्था में हुए सुधारों की ओर इशारा किया.

हमने इन 'बदलावों' को डेटा के माध्यम से परखने की कोशिश की

अफ़ग़ानिस्तान में हिंसा का क्या हाल है?

एक शांति वार्ता तक पहुँचने की और विदेशी फ़ौजों को वापस लाने की तमाम कोशिशों के बावजूद अफ़ग़ानिस्तान में हाल के सालों में हिंसा होती रही है.

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक़ इस साल की पहली तिमाही में मरने वाले नागरिकों की संख्या पिछले साल इसी दौरान हुई मौतों से अधिक है. इसमें महिलाओं और बच्चों के मरने की संख्या में भी इज़ाफ़ा हुआ है.

इनमें से ज़्यादातर के लिए तालिबान को ज़िम्मेदार बताया गया है. साल 2020 में 3000 से अधिक नागरिकों की मौत हुई थी- लगातार सातवें साल ऐसा हुआ.

इन हमलों में आम लोगों, पत्रकारों और सरकारी अधिकारियों को ख़ासतौर पर निशाना बनाया गया.

हिंसा के शिकार लोग. 2009-2020. .

साल 2019 में बीबीसी ने हिंसा को ट्रैक करते हुए पाया था कि हर दिन यहां 74 पुरुष, महिलाएं और बच्चों को मार दिया जाता था.

इससे एक साल पहले मरने वालों की संख्या 3,800 थी और 7,180 लोग घायल हो गए थे.

अमेरिका ने कहा कि उसके सैनिक 11 सितंबर तक अफ़ग़ानिस्तान छोड़ देंगे. 20 साल पहले अमेरिका ने अफ़ग़ानिस्तान पर हमला कर वहां से तालिबानी हुकूमत को हटा दिया था.

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महिलाओं की क्या हालत है?

90 के दशक में तालिबान के शासन के दौरान महिलाओं को नौकरी करने की इजाज़त नहीं थी और उन्हें स्कूल नहीं जाने की हिदायत दी जाती थी.

2001 में इसमें बदलाव आया, आँकड़ों के मुताबिक़ ज़्यादातर सरकारी नौकरियों में पुरुषों की संख्या ही ज़्यादा थी लेकिन महिलाओं की संख्या में बीते दो दशकों में से इज़ाफ़ा हुआ था.

आँकड़ों के मुताबिक़ साल 2004 में इन क्षेत्रों में सिर्फ 51,200 महिलाएं काम कर रही थीं. 2018 तक ये आँकड़ा 87,000 पहुँच गया. इसके बाद के आँकड़ें अभी उपलब्ध नहीं हैं.

सरकारी संस्थाओं में नौकरी. . .

इसके अलावा नौकरी करने वाले पुरुषों की संख्या में भी इज़ाफ़ा हुआ. लेकिन महिलाओं का प्रतिशत अधिक था. (महिलाओं का 69 प्रतिशत और पुरुषों का 41 प्रतिशत)

हमें इस बात की जानकारी नहीं है कि वो किन पदों पर काम कर रही हैं और उनकी सैलेरी पुरुषों के मुक़ाबले कितनी है. इसके अलावा ग़ैर-सरकारी क्षेत्र में काम कर लोगों का आँकड़ा उपलब्ध नहीं है.

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अमेरिका की लैंगिक समानता से जुड़ी एक आधिकारिक रिपोर्ट में कहा गया कि सरकारी विभागों में नौकरी करने वाली महिलाओं की संख्या पहले से बहुत अधिक है. इसके अलावा संसद में, राज्यों में और ज़िला स्तर पर उनके लिए एक कोटा भी तय किया गया है.

महिलाओं की शिक्षा पर कितना असर?

मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच के मुताबिक़, स्कूल जाने वाले बच्चों की संख्या बढ़ी है. 2001 में 9 लाख बच्चे स्कूल जाते थे, 2017 में ये संख्या बढ़कर 90 लाख के अधिक हो गई. स्कूल जाने वालीं लड़कियों की संख्या में 39 प्रतिशत इज़ाफ़ा हुआ.

संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी यूनीसेफ़ की साल 2019 की रिपोर्ट के मुताबिक़ "हर उम्र की स्कूल जाने वाली लड़कियों की संख्या लड़कों के मुक़ाबले कम थी लेकिन ये फ़ासला 10 से 14 की उम्र में सबसे अधिक था."

क़रीब 37 लाख बच्चे स्कूल नहीं जाते थे. 60 प्रतिशत लड़कियां स्कूल नहीं जाती थीं. अफ़ग़ानिस्तान के नेशनल एजुकेशन के स्ट्रैटिजिक प्लान (2017-2021) में ये माना गया है कि लड़कियों को पढ़ाई में समानता देने के लिए इस क्षेत्र नें निवेश बहुत ज़रूरी है.

शिक्षा के क्षेत्र में अब पहले से अधिक महिलाएं काम कर रही हैं. साल 2018 तक अफ़ग़ानिस्तान की एक तिहाई शिक्षक महिलाएं थीं. इसके अलावा लड़कियों की शिक्षा दर भी बढ़ी है. सरकारी आँकड़ों के मुताबिक़ 2002 से 2018 के बीच कॉलेज जाने वाली लड़कियों की संख्या क़रीब सात गुना बढ़ी है.

हालांकि इस पर नज़र रखने वाले अमेरिका के कुछ अधिकारियों का कहा कि कई कारणों से आँकड़े बढ़े हुए भी हो सकते हैं.

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ग़रीबों की हालत?

अफ़ग़ानिस्तान दुनिया के सबसे ग़रीब मुल्कों में से एक है लेकिन 2001 में अमेरिका के दखल के बाद आर्थिक मोर्चे पर विकास हुआ है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफ़ी मदद मिली है.

लेकिन जब से बाहरी मदद कम हुई है, विकास की दर भी गिरी है. इसके अलावा सुरक्षा के मोर्चे पर भी हालात बिगड़े हैं. विदेश गए अफ़ग़ानी भी बड़ी संख्या में अपने देश लौटे हैं, जिससे आबादी बढ़ी है.

अफ़ग़ानिस्तान में जीडीपी ग्रोथ. %. .

एक सरकारी सर्वे के मुताबिक 2016-17 में 54 प्रतिशत से ज़्यादा लोग ग़रीबी रेखा के नीचे रह रहे थे. ये आँकड़ा 2011 और 2012 के आंकड़ों से अधिक है जब 38 प्रतिशत लोग ग़रीबी रेखा के नीचे थे.

हाल की 2019 में किए गए गैलप के एक सर्वे के अनुसार सूखे के कारण खाद्य सुरक्षा पर भी बुरा असर पड़ा है.

अफ़ग़ानिस्तान में ग़रीबी दर बढ़ी है. %. .

सर्वे के मुताबिक़ 10 में से 6 अफ़ग़ानियों ने बताया कि पिछले 6 सालों में उन्हें खाने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ी.

कोरोना महामारी के कारण मुमकिन है कि हालात ख़राब ही हुए होंगे क्योंकि अफ़ग़ानिस्तान का स्वास्थ्य और सामाजिक ढ़ाचा कमज़ोर है.

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