व्हाइट हाउस में हिजाब पहनने वाली कश्मीरी मूल की महिला, समीरा फ़ाज़ली

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- Author, बीबीसी उर्दू सेवा
- पदनाम, इस्लामाबाद, पाकिस्तान
इस साल जनवरी की शुरुआत में, नव-निर्वाचित अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने भारतीय मूल के कई अमेरिकी लोगों को अपने प्रशासन में विभिन्न पदों पर नियुक्त करने की घोषणा की थी.
इनमें कश्मीरी मूल की एक अमेरिकी महिला का नाम भी शामिल था जिन्होंने अपने सपनों को साकार करने के लिए मेडिकल की पढ़ाई छोड़कर सोशल वर्क की पढ़ाई करने का निर्णय लिया था.
समीरा फ़ाज़ली वर्तमान में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन में राष्ट्रीय आर्थिक परिषद की उप-निदेशक हैं. इससे पहले वे राष्ट्रपति बराक ओबामा के शासनकाल में वरिष्ठ आर्थिक सलाहकार के रूप में काम कर चुकी हैं.
समीरा तीन बच्चों की माँ हैं और अमेरिका के जॉर्जिया राज्य में रहती हैं.

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करियर की शुरुआत
समीरा का जन्म अमेरिकी राज्य न्यूयार्क के शहर बफ़लो के एक क़स्बे फ़्लेम्ज़ोवायल में हुआ था. उनके माता-पिता उस समय अस्पताल में काम करते थे.
समीरा बाद में अपने पति और तीन बच्चों के साथ जॉर्जिया चली गई थीं. उन्होंने वहां रिज़र्व बैंक ऑफ़ अटलांटा में निदेशक के पद पर काम किया. अब व्हाइट हाउस में उनकी नियुक्ति के बाद से वे अस्थायी अवकाश पर हैं.
अपनी रुचि के कारण, वे कम आय वाले वर्गों की बेहतरी में बहुत सक्रिय रही हैं. यही वजह है कि उन्होंने कम्युनिटी डवलपमेंट फ़ाइनेंशियल इंस्टीटूशन्स (सीडीएफ़आई) में हाउसिंग फ़ाइनेंस से लेकर बिज़नेस फ़ाइनेंस जैसे छोटे स्तर के मुद्दों पर काम किया है.
विभाग के उप-निदेशक के रूप में, उन्हें कम आय वाले अमेरिकी नागरिकों की स्थिति में सुधार करने के लिए आर्थिक मुद्दों पर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन को सलाह देने का काम सौंपा गया है.

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शिक्षा
इन ज़िम्मेदारियों और नौकरियों से पहले, समीरा फ़ाज़ली अमेरिका की एक प्रमुख शैक्षणिक संस्था - येल यूनिवर्सिटी में लेक्चरर भी रहीं, जहाँ से उन्होंने वक़ालत की डिग्री भी हासिल की थी.
इससे पहले उन्होंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से बीए की डिग्री ली थी और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी का 'वुमन लीडरशिप आवार्ड' जीता था.
पढ़ाई पूरी करने के बाद, समीरा ने कम आय वाले वर्ग की वित्तीय सहायता की प्रणाली को समझने के लिए, ग्रामीण बैंक बांग्लादेश में एक साल तक काम किया.
हालांकि, समीरा के मामा रउफ़ फ़ाज़ली रहते थे. वो अब श्रीनगर में रहते हैं. वो बताते हैं कि समीरा के माता-पिता उन्हें डॉक्टर बनाना चाहते थे. समीरा को एक मेडिकल कॉलेज में एडमिशन भी मिल गया था, जहाँ उन्होंने दो साल तक पढ़ाई की.
वे कहते हैं, "पर मेडिकल स्कूल में दो साल तक पढ़ने के बाद, उन्होंने येल विश्वविद्यालय जाने का निर्णय किया."
समीरा फ़ाज़ली ने साल 2006 में येल लॉ स्कूल से क़ानून में स्नातक की उपाधि प्राप्त की थी और बाद में शोरे बैंक में फ़ेलो (रिसर्चर) के रूप में काम किया. यह एक कम्युनिटी डेवलपमेंट बैंक है, जो अमेरिका और विदेशों में आर्थिक समानता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है.

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अन्य गतिविधियाँ
येल विश्विद्यालय में उन्होंने मध्य-र्व के मामलों के क़ानूनी अध्ययन पर सेमिनार की अध्यक्षता की थी. साथ ही उन्होंने 'क्रिटिकल इस्लामिक रिफ़्लेक्शन कॉन्फ़्रेंस' के बोर्ड में भी अपनी सेवाएं दी.
लॉ स्कूल से पहले समीरा अन्य सामाजिक गतिविधियों में भाग लेती रहीं, जिनमें 'करामा' नामक मुस्लिम वुमन लॉयर्स फ़ॉर ह्यूमन राइट्स संगठन शामिल है.
करामा के साथ उन्होंने पश्चिमी-यूरोप में मुसलमानों की धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी कांग्रेस में, अपने शोध के आधार पर बयान दिए.
अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार और विकास के उनके अनुभव में विश्व स्वास्थ्य संगठन और शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र के उच्चायोग में किये गए काम भी शामिल है.
समीरा फ़ाज़ली को उनके काम की वजह से फ़लस्तीन, कश्मीर और पाकिस्तान जैसे क्षेत्रों की यात्रा करने का अवसर मिला.
समीरा के माता-पिता डॉक्टर हैं जिन्होंने श्रीनगर के एक सरकारी कॉलेज से मेडिकल की पढ़ाई की.
उनके माता-पिता, डॉक्टर मोहम्मद यूसुफ़ फ़ाज़ली सर्जन हैं और उनकी माँ डॉक्टर रफ़ीक़ा फ़ाज़ली पैथोलॉजिस्ट हैं. दोनों साल 1971 में अमेरिका चले गये थे. समीरा फ़ाज़ली ने पढ़ाई के दौरान हिजाब पहनना शुरू किया था और वे अभी भी हिजाब पहनती हैं. हालांकि उनकी माँ हिजाब नहीं पहनतीं.

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कश्मीर की राजनीति का कनेक्शन
रऊफ़ फ़ाज़ली, भारत प्रशासित कश्मीर के एक बैंक में वरिष्ठ पद पर हैं. उन्होंने कश्मीर के एक समाचार-पत्र 'कश्मीर लाइफ़' से बात करते हुए कहा कि "समीरा चार बहनों में से दूसरे नंबर की हैं. उनकी दो बहनें डॉक्टर हैं और एक बहन वकील हैं."
समीरा फ़ाज़ली के रिश्तेदार अभी भी कश्मीर में रहते हैं, लेकिन उनका कश्मीर के साथ एक और अलग संबंध भी है.
इंडियन एक्सप्रेस अख़बार के अनुसार, समीरा की बुआ के लड़के, मुबीन शाह एक व्यापारी हैं. मुबीन शाह उन लोगों में से एक हैं जिन्हें भारत सरकार ने 2019 में उत्पन्न हुई स्थिति के बाद, पब्लिक सेफ़्टी एक्ट के तहत गिरफ़्तार किया था.
मुबीन की इस नज़दीकी के कारण, फ़ाज़ली परिवार ने उनकी रिहाई के लिए वॉशिंगटन में अपने प्रभाव का इस्तेमाल किया था.
समीरा की बहन, युसरा फ़ाज़ली, जो एक मानवाधिकार वकील भी हैं, उन्होंने 2019 में अमेरिकी कांग्रेस के सामने पेश होकर कश्मीर की स्थिति के बारे में बयान दिए थे.
उन्होंने अपने भाई मुबीन शाह की गिरफ़्तारी का विवरण दिया था और बताया था कि "कैसे उनके रिश्तेदार उनकी तलाश में एक जेल से दूसरी जेल में भटकते रहे."
अमेरिकी कांग्रेस के सामने दिये अपने बयान में युसरा फ़ाज़ली ने कहा था कि उन्होंने "8 अगस्त, 2019 को मुबीन शाह की गिरफ़्तारी के बारे में जानकारी मिलने पर, अमेरिकी विदेश विभाग में अपने दोस्तों से बात की थी और अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा भारत के साथ इस मुद्दे को उठाये जाने से केवल यह पुष्टि हुई थी कि उन्हें आगरा जेल में रखा गया था."
युसरा ने अपने बयान में कहा था कि "मेरे कज़िन मुबीन को एक उदाहरण बनाया गया है. पुलिस रात में घर पर छापा मारकर उन्हें गिरफ़्तार कर रही थी. उनकी गिरफ़्तारी से कश्मीरी लोगों को एक मज़बूत संकेत मिलता है कि क़ाबिलियत, पैसा और पारिवारिक स्थिति भारतीय सत्ता के लिए कोई मायने नहीं रखती है."
इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, युसरा फ़ाज़ली ने यह भी कहा कि "उनका कज़िन राजनेता नहीं था और ना ही उनका संबंध विपक्ष से था. वो कोई स्वतंत्रता माँगने वाला या गली का पत्थर फेंकने वाला बच्चा नहीं था. वो सिर्फ़ एक व्यापारी है. उन्होंने अब तक हमेशा अपने काम के ज़रिये कश्मीर में आर्थिक समृद्धि लाने पर ध्यान दिया."
मुबीन शाह, जो मलेशिया में रहते हैं और हस्तकला का कारोबार करते हैं, उन्हें अपनी पत्नी के साथ कश्मीर का दौरा करते समय गिरफ़्तार किया गया था.
शाह कई बार कश्मीर चैंबर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री, जम्मू और कश्मीर संयुक्त चैंबर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के पदाधिकारी रह चुके हैं. वे भारत प्रशासित कश्मीर और पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के बीच व्यापार को बढ़ावा देने के लिए सीमा के दोनों ओर सक्रिय रहे हैं.
विशेष रूप से ऐसे समय में जब नियंत्रण रेखा साल 2008 में व्यापार के लिए खोली गई थी. फ़िलहाल नियंत्रण रेखा पर बढ़ते तनाव के कारण काम रुका हुआ है.

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कश्मीर के साथ सांस्कृतिक संबंध
समीरा फ़ाज़ली का जन्म तो अमेरिका में हुआ, लेकिन उन्होंने अपनी पैतृक भूमि कश्मीर के साथ अपना संबंध बनाये रखा है.
रऊफ़ फ़ाज़ली के अनुसार, वे कश्मीर आती रही हैं. आख़िरी बार वे अपने एक ख़ास दोस्त की शादी में शामिल होने के लिए श्रीनगर आई थीं. समीरा की शादी भी एक कश्मीरी व्यक्ति के साथ हुई.
अमेरिका में उनकी नियुक्ति के अवसर पर श्रीनगर में उनके रिश्तेदारों ने जश्न मनाया था.
वर्तमान अमेरिकी प्रशासन में वे दूसरी कश्मीरी मूल की अमेरिकी महिला हैं जिन्हें एक महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त किया गया है.
दूसरी महिला भी कश्मीरी मूल की हैं जिनका नाम आयशा शाह है जो डिजिटल रणनीति से जुड़ी हुई हैं.

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