जर्मनी: एंगेला मर्केल की पार्टी की कमान आर्मिन लाशेट को मिली, चांसलर की रेस में हुए शामिल

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मध्यमार्गी आर्मिन लाशेट को जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्केल की पार्टी क्रिश्चन डेमोक्रेटिक यूनियन (सीडीयू) का नया नेता चुना गया है.
लाशेट जर्मनी के नॉर्थ राइन वेस्टफेलिया राज्य के मुख्यमंत्री हैं. इन्होंने एक वर्चुअल कॉन्फ़्रेंस में अपने दो प्रतिद्वंद्वियों को मात दी.
इस जीत के साथ ही लाशेट एंगेला मर्केल के बाद जर्मनी के चांसलर बनने की दौड़ में सबसे आगे हो गए हैं. मर्केल 16 सालों बाद इस साल सितंबर में अपने पद से मुक्त होने वाली हैं.
हालाँकि कोविड महामारी के कारण लाशेट के लिए भी जर्मनी में राजनीतिक परिस्थितियाँ इतना आसान नहीं है.
59 साल के लाशेट ने कन्जर्वेटिव कारोबारी फ्रेडरिक मैर्त्स को को 466 के मुक़ाबले 521 वोटों से हराया. तीसरे नंबर पर नॉर्बर्ट रोएटगेन रहे जो पहले ही चरण में दौड़ से बाहर हो गए थे.

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लाशेट सीडीयू की वर्तमान नेता आनेग्रेट क्राम्प-कारेनबावर की जगह लेंगे. जर्मनी में सितंबर महीने में चुनाव होने जा रहा है लेकिन सीडीयू नेता चांसलर की उम्मीदवारी को लेकर अभी स्पष्ट नहीं हैं.
स्वास्थ्य मंत्री येंस श्पान और मार्कुस जोएडर को लाशेट का डेप्युटी चुना गया है. ये दोनों सीडीयू की सहोदर पार्टी बवेरिया के क्रिश्चियन सोशल यूनियन (सीएसयू) से हैं. इन दोनों को भी चांसलर की रेस में बताया जा रहा है लेकिन अभी तक इन्होंने कुछ भी कहा नहीं है. अंतिम फ़ैसला वसंत ऋतु में होगा.
लाशेट को मर्केल का वफ़ादार कहा जाता है. वो पार्टी को मर्केल के हिसाब से ही चलाने के पक्षधर रहे हैं. अपनी जीत के बाद लाशेट ने कहा, ''मैं बहुत कुछ करना चाहता हूं, इसलिए इस साल हमें साथ मिलकर रहना है. संघीय चुनाव में हमें यह निश्चित करना होगा कि अगला चांसलर सीडीयू या सीसीयू से हो.''
आर्मिन लाशेट एक हँसमुख व्यक्ति हैं. वो जर्मनी के सबसे ज़्यादा आबादी वाले राज्य नॉर्थ राइन वेस्टफेलिया के लोकप्रिय मुख्यमंत्री हैं. पारंपरिक कार्निवाल उत्सव में इनकी रुचि काफ़ी रहती है.
उनकी राजनीति में एक किस्म की निरंतरता है. ऐसा कहा जाता है कि वो एंगेला मर्केल के पसंदीदा उम्मीदवार हैं. 2015 में शरणार्थियों को लेकर एंगेला मर्केल जब अपनी पार्टी में निशाने पर आईं तो लाशेट ने उनका जमकर बचाव किया था.

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लाशेट अपनी उदार राजनीति के लिए जाने जाते हैं. वो प्रवासियों लेकर उदार रहे हैं और ईयू के भी समर्थक हैं.
लेकिन पिछली वसंत में कोविड-19 महामारी को लेकर लगी पाबंदियों में जल्दी ढील देने के मामले में निशाने पर आ गए थे. कहा जाता है कि इस मामले में एंगेला मर्केल भी उनसे ख़फ़ा थीं.
बाद में उन्हें अपने रुख़ से पीछे हटना पड़ा था लेकिन इससे उनकी राजनीतिक विश्वसनीयता पर असर पड़ा था. अब बड़ा सवाल यह है कि क्या सीडीयू की तरफ़ से उन्हें चासंलर उम्मीदवार बनाया जाएगा.
जर्मनी के स्वास्थ्य मंत्री येंस श्पान ने सीडूयू के नेता बनने में लाशेट का समर्थन किया है. कहा जा रहा है कि येंस श्पान के मन में भी चांसलर बनने की तमन्ना है. और हाल के पोल के मुताबिक़ बावेरियन मुख्यमंत्री मार्कुस जोएडर भी लोकप्रिय पंसद हो सकते हैं.
मार्कुस जोएडर ने ट्वीट कर लाशेट को बधाई दी है. उन्होंने अपने ट्वीट में कहा, "मैं आपके साथ काम करने के लिए उत्साहित हूँ. साथ मिलकर हम यूनियन पार्टियों की कामयाबी जारी रखेंगे."
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