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वो अमेरिकी राष्ट्रपति जिन पर महाभियोग शुरू हुआ, लेकिन आगे क्या हुआ?
डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकी इतिहास के ऐसे पहले राष्ट्रपति बन गए हैं जिन्हें एक ही कार्यकाल में दो बार महाभियोग का सामना करना पड़ रहा है.
महभियोग वो प्रक्रिया है जिसके तहत अमेरिका में राष्ट्रपति को पद से हटाया जा सकता है.
आइए एक नज़र अमेरिका के उन राष्ट्रपतियों पर, जिन्होंने महाभियोग का सामना किया.
एंड्रयू जॉनसन
अमेरिकी गृह युद्ध के बाद डेमोक्रेट पार्टी के राष्ट्रपति एंड्रयू जॉनसन रिपब्लिकन पार्टी के नेतृत्व वाली कांग्रेस के साथ हार चुके दक्षिणी राज्यों के विकास के मुद्दे को लेकर तकरार में रहते थे.
उस दौर के 'क्रांतिकारी रिपब्लिकन' पूर्व कांफ़ेड्रेट नेताओं को दंडित करने और आज़ाद हुए ग़ुलामों के अधिकारों की रक्षा के लिए क़ानून लाने पर ज़ोर दे रहे थे. जॉनसन हर बार राष्ट्रपति की वीटो की शक्ति का इस्तेमाल कर उनके क़दम रोक रहे थे.
मार्च में कांग्रेस ने टेन्यूर ऑफ़ ऑफ़िस एक्ट पारित किया था जो राष्ट्रपति की बिना सीनेट की मंज़ूरी के अपनी कैबिनेट के सदस्यों की सदस्यता समाप्त करने के अधिकार को सीमित करता था. पलटवार करते हुए जॉनसन ने अपने राजनीतिक प्रतिद्वंदी और कैबिनेट सदस्य एडविन स्टेंटन को निलंबित कर दिया. ऐसा उन्होंने कांग्रेस के अवकाश में रहते हुए किया.
अगर आज जो हो रहा है वो बहुत नाटकीय लग रहा है तो ये कहा जा सकता है कि अमेरिकी राजनीति में महाभियोग की परंपरा ही निभाई जा रही है.
स्टेंटन ने अपने निलंबन के बाद स्वयं को दफ़्तर में ही बंद कर लिया था और बाहर जाने से इनकार कर दिया था.
स्टेंटन को पद से हटाए जाने के बाद सदन के रिपब्लिकन नेता महाभियोग का प्रस्ताव ले आए जिसमें जॉनसन पर 11 आरोप लगाए गए.
सदन में प्रस्ताव पर पार्टियों के आधार पर वोट के बाद महाभियोग को सीनेट में पेश किया गया जहां जैसे-तैसे जॉनसन बरी हो गए. महाभियोग के समर्थन में दो-तिहाई बहुमत से सिर्फ़ एक वोट कम पड़ा.
महाभियोग के बाद क्या हुआ?
कुछ रिपोर्टों के मुताबिक़ बरी होने के बाद राष्ट्रपति जॉनसन रोए थे और अपनी साख़ को सुधारने का वादा किया था.
लेकिन बहुत कुछ बदला नहीं. अपने कार्यकाल के अंतिम समय तक वो सत्ता संघर्ष का सामना करते रहे.
और फिर 1869 में डेमोक्रेट पार्टी चुनाव हार गई और रिपब्लिकन उम्मीदवार जनरल यूलीसिस एस ग्रांट राष्ट्रपति बनें. उन्होंने अपनी पार्टी की योजना पर ही काम किया.
जॉनसन किसलिए याद किए जाते हैं?
जॉनसन महाभियोग का सामना करने के लिए और सिर्फ़ 72 लाख डॉलर में अलास्का को ख़रीदने के लिए जाना जाता है.
अमेरिका ने साल 1867 में अलास्का को ख़रीदा था.
जॉनसन सबसे ग़रीब राष्ट्रपतियों में भी शामिल थे. वो कभी स्कूल भी नहीं गए थे.
रिचर्ड निक्सन
रिचर्ड निक्सन पर चले महाभियोग की जड़ें 1972 में वॉटरगेट ऑफ़िस कॉम्प्लेक्स में डेमोक्रेटिक पार्टी के मुख्यालय में हुई लूट से जुड़ी हैं.
आगे जांच में पता चला कि चोरों को निक्सन के चुनाव अभियान से पैसा दिया गया था. वॉटरगेट स्कैंडल लूट से बहुत आगे की बात हो गई थी. इसमें व्हाइट हाऊस के शीर्ष अधिकारियों को आरोपों का सामना करना पड़ा.
दो साल तक निक्सन इस षड्यंत्र में अपनी भूमिका को छिपाने की कोशिशें करते रहे.
लेकिन रिपब्लिकन राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन के प्रयास बेकार ही गए. अगस्त 1974 में उन्हें ओवल ऑफ़िस की रिकॉर्डिंग रिलीज़ करने के लिए मजबूर होना पड़ा. इसमें वो सीआईए को ये कहते हुए सुने गए कि वॉटरगेट लूट मामले में एफ़बीआई की जांच को रोका जाए.
इस बदनाम रिकॉर्डिंग को अब स्मोकिंग गन टेप कहा जाता है. ये निक्सन का मामला रफ़ा-दफ़ा करने का आख़िरी प्रयास साबित हुआ.
27 जुलाई को सदन की न्यायिक समिति ने महाभियोग के तीन आरोप पारित करने का प्रस्ताव पास किया. निक्सन पर न्याय में बाधा डालने, पद का दुरुपयोग और कांग्रेस की अवमानना के आरोप लगाए गए.
इन्हें सीनेट के सामने वोट के लिए भेजा गया था. लेकिन इन पर कभी मतदान नहीं हुआ.
8 अगस्त 1974 को राष्ट्रपति निक्सन ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया. वो अमेरिका के अकेले राष्ट्रपति रहे जिन्होंने ऐसा किया.
इस्तीफा देने के मौके पर अपने भाषण में उन्होंने कहा, "मैंने कभी मैदान नहीं छोड़ा है, अपना कार्यकाल समाप्त होने से पहले पद छोड़ना मेरे शरीर के हर अंश की आत्मा के ख़िलाफ़ हैं, लेकिन एक राष्ट्रपति के तौर पर मैं अपने हितों के ऊपर अमेरिका के हित रख रहा हूं."
आगे क्या हुआ?
उपराष्ट्रपति जेराल्ड फ़ोर्ड को छह सप्ताह बाद राष्ट्रपति पद की शपथ दिला दी गई. उन्होंने निक्सन के सभी अपराध माफ़ कर दिए.
दो साल बाद जब चुनाव हुए तो डेमोक्रेटिक पार्टी के जिमी कार्टर ने फ़ोर्ड को हरा दिया.
उन्हें कैसे याद किया जाता है?
इसमें कोई विवाद नहीं है कि ये वॉटरगेट स्कैंडल था. उन्होंने कभी भी अपराध स्वीकार नहीं किया लेकिन उन्होंने जो किया उसे पद के दुरुपयोग के सबक़ के तौर पर याद किया जाता है.
इस्तीफा देने के 20 साल बाद अप्रैल 1994 में निक्सन का निधन हो गया. उनके अंतिम संस्कार में बोलते हुए राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने विदेश नीति पर किए गए उनके कामों का ज़िक्र किया.
बिल क्लिंटन
राष्ट्रपति बनने के एक साल बाद ही राष्ट्रपति बिल क्लिंटन पर न्याय विभाग के विशेष अभियोजक की जांच शुरू हो गई थी.
विशेष अभियोजक केनेथ स्टार के नेतृत्व में चल रही इस जांच में उनके रियल एस्टेट के सौदों की जांच की जा रही थी लेकिन बाद में जनवरी 1998 में व्हाइट हाऊस में इंटर्न मोनिका लेविंस्की के साथ उनके अफ़ेयर को भी जांच में शामिल कर लिया गया.
राष्ट्रपति क्लिंटन के ख़िलाफ़ दायर किए गए पौला जोंस के यौन शोषण के मामले में क्लिंटन से लेविंस्की से उनके संबंधों के बारे में भी पूछा गया था.
17 जनवरी को क्लिंटन ने शपथ लेते हुए ये कहा कि उनका लेविंस्की के साथ कोई अफ़ेयर नहीं था.
कुछ दिन बाद क्लिंटन ने फिर दोहराया कि उनका लेविंस्की के साथ अफेयर नहीं था.
उन्होंने कहा, "मैं चाहता हूं कि आप मेरी बात सुनें. मैंने उस महिला मोनिका लेविंस्की के साथ सेक्स नहीं किया है. मैंने कभी किसी भी व्यक्ति से झूठ बोलने के लिए नहीं कहा है. कभी भी नहीं. एक बार भी नहीं."
फिर सितंबर 1998 में स्टार ने अपनी जांच रिपोर्ट कांग्रेस के समक्ष पेश की. 445 पन्ने की रिपोर्ट में लेविंस्की का बयान प्रकाशित था. लेविंस्की ने अपने सहयोग के बदले आरोप मुक्त होने का समझौता कर लिया था.
रिपोर्ट में महाभियोग के 11 संभावित कारण भी शामिल किए गए थे. 1998 में हाउस ऑफ़ रिप्रेज़ेंटेटिव ने पार्टी की लाइन के आधार पर राष्ट्रपति क्लिंटन पर महाभियोग चलाने के समर्थन में वोट किया.
उन पर झूठ बोलने और कांग्रेस के काम में दखल देने के आरोप तय किए गए.
लेकिन फ़रवरी में क्लिंटन को रिपब्लिकन पार्टी के नियंत्रण वाली सीनेट ने बरी कर दिया.
इसके परिणाम क्या रहे?
उस साल अमेरिका की मीडिया में क्लिंटन-लेविंस्की का प्रकरण हावी रहा. क्लिंटन पर इस्तीफ़ा देने का दबाव बढ़ता गया लेकिन उन्होंने इस्तीफ़ा नहीं दिया.
लेकिन इसी दौरान क्लिंटन ने अपने करियर की सबसे बेहतरीन रेटिंग हासिल की. जनवरी 1998 में सीएनएन-गैलअप के एक सर्वे में 67 फ़ीसदी अमेरिकी नागरिकों ने राष्ट्रपति के तौर पर क्लिंटन का समर्थन किया.
लेकिन अंत में इस महाभियोग के बाद सिर्फ़ रिपब्लिकन नेताओं को ही पद गंवाना पड़ा.
रिपब्लिकन पार्टी का इस स्कैंडल के दम पर मध्यावधि चुनावों में जीत हासिल करने का प्रयास भी उल्टा पड़ गया. डेमोक्रेट पार्टी ने हाऊस ऑफ़ रिप्रेज़ेंटेटिव और सीनेट दोनों में बढ़त हासिल की.
क्लिंटन ने साल 2001 में 65 प्रतिशत अप्रूवल रेटिंग के साथ पद छोड़ दिया.
लेकिन फ्लोरिडा में दोबारा हुई गिनती के बाद जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने अल गोर को हरा दिया और व्हाइट हाऊस एक पार फिर रिपब्लिकन पार्टी के पास चला गया.
उन्हें कैसे याद किया जाता है?
ये इस बात पर निर्भर करता है कि आप किससे पूछ रहे हैं. लेकिन जब भी क्लिंटन का नाम आता है, मोनिका लेविंस्की स्कैंडल अपने आप ज़ेहन में आ जाता है. और फिर उसके बाद चले महाभियोग को शायद इतना याद नहीं किया जाता.
उनकी लोकप्रियता इस बात का संकेत ज़रूर रही कि महाभियोग ने उनकी छवि को शायद इतना धूमिल नहीं किया जितना उनसे पहले महाभियोग का सामना करने वाले दो राष्ट्रपतियों को.
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