सऊदी अरब-यूएई में जनरल नरवणे के जाने से पाकिस्तान में हलचल

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भारत के सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे पिछले एक हफ़्ते से यूएई और सऊदी अरब के दौरे पर हैं. 14 दिसबंर उनके दौरे का आख़िरी दिन है.
भारतीय सेना के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से जनरल नरवणे और सऊदी अरब के सेना प्रमुख जनरल फ़याद बिन हामिद की मुलाक़ात की तस्वीरें पोस्ट की गई हैं.
जनरल नरवणे पहले भारतीय सेना प्रमुख हैं जिन्होंने सऊदी अरब और यूएई का दौरा किया है. पाकिस्तानी सेना प्रमुख के लिए सऊदी जाना अब तक आम बात थी.
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जनरल नरवणे की इन तस्वीरों की चर्चा पाकिस्तानी मीडिया में ख़ूब हो रही है. वहां के मीडिया में कहा जा रहा है कि अब सऊदी अरब भी पाकिस्तान के साथ नहीं है.
भारत और सऊदी अरब के बीच गहारते रिश्ते से पाकिस्तान में काफ़ी हलचल है.
पाकिस्तान के भीतर लोग कह रहे हैं कि प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की ग़लत विदेश नीति के कारण सऊदी अरब और यूएई से भारत की क़रीबी बढ़ी है. दोनों मुल्क पाकिस्तान के पारंपरिक दोस्त रहे हैं लेकिन हाल के दिनों में भारत से इन दोनों देशों की नज़दीकी बढ़ी है.

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इमरान ख़ान की नाकामी?
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री शाहिद ख़ाक़ान अब्बासी से पाकिस्तानी टीवी एआरवाई के एक एंकर ने पूछा, "एक तरफ़ यूएई हमारे नागरिकों को वर्क वीज़ा देना बंद कर चुका है, दूसरी तरफ़ भारत के सेना प्रमुख सऊदी और यूएई का दौरा कर रहे हैं. पाकिस्तान की विदेश नीति कहाँ जा रही है?"
इस सवाल के जवाब में ख़ाक़ान अब्बासी ने कहा, "हम दूसरे मुल्क की विदेश नीति तय नहीं कर सकते. लेकिन हमें अपनी विदेश नीति के बारे में सोचना चाहिए. हमें ये आकलन करना चाहिए कि जो मुल्क हमारी मुश्किल घड़ी में साथ खड़े रहे हैं, उनसे ताल्लुक़ात बने हैं या बिगड़े हैं. भारत से सऊदी अरब ताल्लुक़ात रखे या ना रखे, ये उसका फ़ैसला है. हम इसे तय नहीं कर सकते. लेकिन हमें अपने संबंधों के बारे में सोचना है कि बेहतर हुए हैं या नहीं. सच यही है कि सऊदी अरब से हमारे संबंध पटरी पर नहीं हैं. तनाव की स्थिति है. हमें इसे ठीक करना होगा. हमारे सबसे क़रीब के रिश्ते तो सऊदी अरब और यूएई से ही रहे हैं."

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एआरवाई टीवी के उस एंकर ने बहुत दुख जताते हुए कहा कि जिस सऊदी अरब से पाकिस्तान का रक्षा सहयोग संबंध है और पाकिस्तान की फ़ौज वहां मक्का मदीना की सुरक्षा में लगी रही है लेकिन अब भारत के सेना प्रमुख का सऊदी अरब स्वागत कर रहा है.
भारत की आक्रामक रणनीति
भारत में पाकिस्तान के राजदूत रहे अब्दुल बासित ने एक वीडियो पोस्ट किया और इसमें उन्होंने जनरल नरवणे के सऊदी दौरे को काफ़ी अहम बताया है.
अब्दुल बासित का कहना है कि हाल ही में भारत के विदेश मंत्री ने यूएई और बहरीन का दौरा किया था और फिर से वो कुवैत और क़तर जाने वाले हैं.
बासित का कहना है, "विदेश मंत्री के बाद भारत के सेना प्रमुख का यूएई और सऊदी अरब जाना बताता है कि खाड़ी के देशों को लेकर भारत की विदेश नीति बहुत आक्रामक है. संभव है कि आने वाले दिनों में सऊदी अरब, यूएई और भारत सैन्य अभ्यास भी करें. भारत ने बेहतरीन तरीक़े से खाड़ी के देशों में अपनी विदेश नीति को आगे बढ़ाया है. इस वक़्त ख़ाड़ी के देशों में क़रीब 90 लाख भारतीय काम कर रहे हैं. हर साल भारत को इन देशों से कामगार 48 अरब डॉलर भेजते हैं."
अब्दुल बासित कहते हैं, "ये कोई छोटी रक़म नहीं है. पाकिस्तान का जो पूरा निर्यात है वो महज़ 20-21 अरब डॉलर का है. भारत ने खाड़ी के देशों के लेकर बहुत ही रणनीतिक तरीक़े से काम किया है. हमें इस पर अब सोचने की ज़रूरत है कि हम क्या कर रहे हैं. अगर यही हालत रही तो हम फिर इन देशों से दफा हो जाएंगे. हमारे रिश्ते सऊदी अरब और यूएई से कितने गहरे रहे हैं. यूएई ने तो पाकिस्तानियों के लिए वीज़ा देना बंद कर दिया. पिछले चार महीने से यूएई में हमारा कोई राजदूत नहीं हैं. इसी से पता चलता है कि हम कितने बेफ़िक्र हैं."

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अब्दुल बासित को लगता है कि पाकिस्तान ने भारत को खाड़ी के देशों में एकदम से छोड़ दिया है कि उसे जो करना है, वो करे.
बासित कहते हैं कि पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय में तब्दीली की ज़रूरत है ताकि भारत से मुक़ाबला किया जा सके. बासित का कहना है कि इमरान ख़ान ने अच्छी शुरुआत की थी लेकिन उसे कायम नहीं रख पाए.
पाकिस्तान के जाने-माने पत्रकार नजम सेठी को भी लगता है कि मध्य-पूर्व और ख़ास करके खाड़ी के देशों में इमरान ख़ान की विदेश नीति औंधे मुँह गिरी है.
नजम सेठी ने लिखा है, "हाल के दिनों में खाड़ी के देशों से पाकिस्तान के जो संबंध पटरी से उतरे हैं, उससे बहुत नुकसान हुआ है. महज़ दो साल पहले ही सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन-सलमान पाकिस्तान आए थे और उन्होंने ग्वादर में 10 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की थी. लेकिन इमरान ख़ान की नीति के कारण सब कुछ मिट्टी में मिल गया. इमरान ख़ान की सरकार ने गुस्ताख़ी करते हुए इस्लामी देशों के संगठन ओआईसी के समानांतर तुर्की, मलेशिया और ईरान के साथ मिलकर एक संगठन खड़ा करने की कोशिश की. इस सराकर को पता होना चाहिए था कि पाकिस्तान के हित सऊदी अरब और यूएई से हैं न कि ईरान, मलेशिया और तुर्की से."

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पाकिस्तान को नुक़सान
नजम सेठी को आशंका है कि खाड़ी के देशों में जो पाकिस्तानी काम करते हैं उनकी जगह भारतीय कामगार ले लेंगे और इससे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित होगी.
पाकिस्तान के पूर्व रक्षा मंत्री जनरल नईम लोधी ने भी पाकिस्तानी मीडिया में कहा है कि भारत के सेना प्रमुख का सऊदी दौरा पाकिस्तान के लिए झटका है.
एक्सप्रेस न्यूज़ से जनरल नईम लोधी ने कहा, "सऊदी अरब और यूएई जिस खेमे में जा रहे हैं उस खेमे में भारत पहले से ही है. अब तो सऊदी अरब ने इसराइल के लिए अपना हवाई क्षेत्र भी खोल दिया है. ये तो एक दिन होना ही था लेकिन ये थोड़ी जल्दी हो गया. हमने उनके लिए बहुत काम किए हैं. हमने उनकी सेना को ट्रेनिंग दी है लेकिन यह तब्दीली दुखद है."
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पाकिस्तानी मीडिया में रविवार को एक और ख़बर छाई रही कि पाकिस्तान सऊदी अरब के दो डॉलर का क़र्ज़ वापस करने जा रहा है.
एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक इस क़र्ज़ को वापस करने के लिए पाकिस्तान ने अपने सदाबहार दोस्त चीन से पैसे लिए हैं.
भारत के पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने तीन दिसंबर को भारतीय आर्मी प्रमुख के सऊदी और यूएई दौरे को ट्वीट कर काफ़ी अहम बताया था.
उन्होंने अपने ट्वीट में कहा था, "यह बहुत ही अहम है. यह दर्शाता है कि पाकिस्तान से यूएई और सऊदी के रिश्ते कमज़ोर पड़ रहे हैं और हमारे मज़बूत हो रहे हैं. ऐसा तब है जब सऊदी अरब में 'इस्लामिक काउंटरटेररिजम कोअलिशन' के हेड पाकिस्तान के पूर्व आर्मी प्रमुख राहील शरीफ़ हैं."
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