अमेरिकी चुनाव 2020: ट्रंप ने पहले कहा- बाइडन विजयी, फिर किया अपनी 'जीत का एलान'

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार सुबह अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से अपनी जीत का एलान किया है.
हालांकि, ट्रंप इससे पहले एक मौक़े पर डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार जो बाइडन की जीत स्वीकार करते हुए दिख चुके हैं.
उन्होंने चुनाव में धांधली होने के अपुष्ट दावे करते हुए ट्विटर पर लिखा था, "वह (जो बाइडन) जीत गए क्योंकि चुनाव में धांधली हुई."
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ये बात कहने के एक घंटे बाद ट्रंप ने कहा कि वह तीन नवंबर को हुए वोट को स्वीकार नहीं कर रहे हैं. ट्रंप की टीम की ओर से कुछ अहम राज्यों में मुक़दमे दायर करवाए गए हैं लेकिन अपने दावों को सिद्ध करने के लिए कोई सबूत पेश नहीं किए हैं. अब तक दाखिल किए गए सभी मुक़दमे असफल रहे हैं.
वहीं, चुनाव अधिकारियों ने बीते शुक्रवार कहा है, "ये 'अमरीकी इतिहास में सबसे ज़्यादा सुरक्षित' चुनाव रहे हैं और 'ऐसे कोई सबूत नहीं थे जिनसे पता चले कि वोटिंग प्रक्रिया में मतों को मिटाने, खोने, बदलने की कोशिश या उनसे किसी तरह की छेड़छाड़ की गई हो."
इस सबके बीच जो बाइडन प्रेसिडेंट इलेक्ट बने हुए हैं.
डेमोक्रेटिक पार्टी के पास इलेक्टोरल कॉलेज में 306 वोट हैं जबकि चुनाव जीतने के लिए 270 वोटों की ज़रूरत होती है. ऐसे में चाहें वोटों की गिनती दोबारा कर ली जाए या कोई क़ानूनी मुश्किल सामने आए लेकिन चुनाव के मूल नतीजे में बदलाव की संभावना नहीं दिखती.
पॉपुलर वोट में भी बाइडन की लीड पचास लाख से ज़्यादा हो चुकी है. इसके बावजूद ट्रंप अब तक बाइडन की जीत स्वीकार नहीं कर रहे हैं.

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ट्रंप का इनकार
बीते शुक्रवार को ट्रंप ने कहा है कि कौन जानता है कि भविष्य में सत्ता पर कौन सा प्रशासन काबिज़ हो.
ट्रंप के इस रुख की वजह से उन चिंताओं को बल मिला है जो कोविड 19 के बढ़ते मामलों पर रोक लगाने की अमेरिकी सरकार की क्षमताओं को लेकर उठाई जा रही हैं.
ट्विटर ने ट्रंप के चुनावों में धोखाधड़ी होने के दावों पर एक टिप्पणी जोड़ दी है कि "चुनाव में फर्ज़ीवाड़ा होने का दावा विवादास्पद है."
रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप के प्रचार का काम संभालने वाली टीम ने उन अमेरिकी प्रांतों में चुनावी मुक़दमे दाख़िल किए हैं जहां मुकाबला काफ़ी कड़ा था.
इन मुक़दमों में दावा किया गया है कि रिपब्लिकन पार्टी की ओर से तय किए मतगणना सर्वेक्षकों को मतगणना प्रक्रिया देखने से रोका गया.
हालांकि, चुनाव अधिकारियों ने इससे इनकार करते हुए दावा किया है कि नियमों को पूरा किया गया था. ज़्यादातर मुकदमों को सबूतों के अभाव में ख़ारिज किया जा चुका है.
लेकिन इसके बावजूद ट्रंप के हज़ारों समर्थकों ने शनिवार को अपनी माँगों के साथ वाशिंगटन डीसी में इकट्ठा होकर विरोध प्रदर्शन किया है.

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हिंसक झड़पें
रिपब्लिकन पार्टी के समर्थकों के हुजूम में झंडे लेकर चल रहे समर्थकों के साथ अति-दक्षिणपंथी संगठनों जैसे प्राउड बॉएज़ के सदस्य भी शामिल थे. इनमें से कुछ सदस्य हेलमेट और बुलेट प्रूफ़ वेस्ट्स पहने हुए थे.
इस विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसक झड़पें सामने आईं जब ट्रंप के समर्थक और विरोधी आमने सामने आए.
अधिकारियों के मुताबिक़, बीस लोगों को अलग-अलग मामलों में गिरफ़्तार किया गया है. एक चाकू मारे जाने की घटना सामने आई है. वहीं, दो पुलिसकर्मी भी चोटिल हुए हैं.
हार स्वीकार नहीं करने से दिक़्क़तें बढ़ीं
राष्ट्रपति ट्रंप के हार स्वीकार नहीं करने की वजह से नई सरकार के गठन से जुड़ी सामान्य हैंडओवर प्रक्रिया बाधित हो गई है. जबकि आगामी 20 जनवरी को नई सरकार के शपथ ग्रहण की तारीख़ तय की गई है.
ये प्रक्रिया संभालने वाली संस्था जनरल सर्विस एडमिनिस्ट्रेशन ने अब तक जो बाइडन और उनकी रनिंग मेट कमला हैरिस को विजेताओं के रूप में स्वीकार नहीं किया है.
बाइडन की टीम को क्लासीफाइड सिक्योरिटी ब्रीफिंग, फेडेरल एजेंसी और कोष आदि उपलब्ध नहीं कराए गए हैं जो कि सत्ता के सहज हस्तांतरण के लिए आवश्यक हैं.
बाइडन के चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ रॉन क्लेन ने कहा है कि इस हफ़्ते ये प्रक्रिया शुरू होनी थी ताकि देश कोरोना वायरस महामारी से निपटने की तैयारियों में लग सके.
अमेरिका अपने सबसे बुरे कोविड 19 संक्रमण के दौर से गुज़र रहा है. बीते शुक्रवार अमरीका में एक लाख अस्सी हज़ार नए मामले सामने आए हैं और 1400 लोगों की मौत हुई है.
अमरीका में कोविड से संक्रमित होने और संक्रमित होकर मरने वालों की संख्या दुनिया में सबसे ज़्यादा है.
क्लेन ने कहा, "जो बाइडन एक संघर्ष भरे दौर में अमरीका के राष्ट्रपति बनने जा रहे हैं. ऐसे में सत्ता का हस्तांतरण सहज होना चाहिए."
वहीं, अमेरिका में कोरोना का बचाव करने वाली टीम के प्रमुख डॉ. एंथनी फाउची ने सहज सत्ता हस्तांतरण को सार्वजनिक स्वास्थ्य के नज़रिए से ज़रूरी बताया है.
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