अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव 2020: ट्रंप और बाइडन को जीत के लिए अब क्या चाहिए?

अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव 2020

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    • Author, एंथनी ज़र्चर
    • पदनाम, बीबीसी नॉर्थ अमेरिका संवाददाता

अमेरिका की चुनावी रात फ़िलहाल चुनावी हफ़्ते में बदलती दिख रही है. आपको बताते हैं कि इस वक़्त उम्मीदवार क्या होने की उम्मीद लेकर बैठे हैं कि उनकी एंट्री जल्द से जल्द व्हाइट हाउस में हो जाए.

इलेक्शन के दिन से पहले वाले वोटिंग यानी शुरूआती वोटिंग (अर्ली पोल्स) से मिले रूझानों से तो लग रहा था कि जो बाइडन आसानी से जीत रहे हैं या फिर ऐसा हो सकता है कि डोनाल्ड ट्रंप को बहुत कम अंतर से जीत मिल जाए जहां वे नेशनल पॉप्युलर वोट के मामले में तो हार जाएं लेकिन वो इतने बैटलग्राउंड या स्विंग राज्यों को जीतने में सफल हो जाएं कि उन्हें इलेक्टोरल कॉलेज में पर्याप्त वोट मिल जाए.

लेकिन वोटों की गिनती शाम से शुरू होकर सुबह तक चलने के बाद एक बात तो पक्की हो गई कि बाइडन को लैंडस्लाइड जीत तो नहीं मिल रही है.

हार-जीत का फ़ैसला बहुत कम अंतर से होगा. अब सिर्फ़ यह जानना है कि किसकी और कैसे जीत होगी और यह भी कि हमें कब तक पता चल जाएगा.

डोनाल्ड ट्रंप ने तो पहले ही अपनी जीत की घोषणा कर दी है और अपने प्रतिद्वंद्वी पर वोटिंग में धोखाधड़ी का आरोप भी लगा दिया है. लेकिन फ़िलहाल अभी ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है. अभी तो लाखों वैध वोटों को गिना जाना बाक़ी है.

पूरे देश की लड़ाई अब कुछ राज्यों में सिमट कर रह गई है.

ये राज्य हैं- एरिज़ोना, जॉर्जिया, विसकॉन्सिन, मिशिगन और पेंसिलवेनिया.

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कौन जीतेगा बैटलग्राउंड राज्यों में?

एरिज़ोना में रूझान बाइडन के पक्ष में दिख रहा है जिसका मतलब है कि बाइडन को अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए तीन (विस्कॉन्सिन, मिशिगन, पेंसिलवेनिया) में से दो राज्यों में जीत हासिल करनी होगी.

यह तीनों 2016 वाले 'ब्लू वॉल' राज्य कहलाते हैं क्योंकि ये वे राज्य हैं जो वैसे तो डेमोक्रैटिक पार्टी के गढ़ रहे हैं लेकिन दशकों बाद 2016 के चुनाव में ट्रंप ने इन्हें ध्वस्त कर इन राज्यों में जीत हासिल की थी.

बाइडन इन तीनों में फ़िलहाल पीछे चल रहे हैं लेकिन बचे हुए वोट उनके पक्ष में जा सकते हैं और शायद उन्हें इन तीनों राज्यों में जीत दिला सकते हैं.

पेंसिलवेनिया में डाक से आए 14 लाख से ज़्यादा वोट अभी गिनती के लिए बचे हुए हैं. इन्हें गिनने में अभी कई दिन लग सकते हैं.

बड़े शहर जैसे मिशिगन के डेट्रॉयट और विस्कॉन्सिन में मिलवौकी में अब भी पूरे नतीजे नहीं आए हैं और वहां के नतीजे डेमोक्रेटिक पार्टी के पक्ष में हो सकते हैं.

जॉर्जिया एक 'वाइल्ड कार्ड' है. जहां पहले ट्रंप के लिए आसान जीत नज़र आ रही थी, अब वहां मुक़ाबला काफ़ी कड़ा हो गया है. बाइडन के रूझान वाले अटलांटा राज्य में वोट काउंटिंग की जगह एक पानी की पाइप टूटने से गिनती में देरी हो गई है.

जॉर्जिया में अगर डेमोक्रैटिक जीत हो जाती है तो इसका मतलब है कि बाइडन को मिडवेस्ट राज्यों में से बस किसी एक को जीतने की ज़रूरत पड़ेगी.

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चुनाव फंस सकता है क़ानूनी पेंच में

एक समय में जिस बात की आशंका जताई जा रही थी, वो अब हक़ीक़त में होता नज़र आ रहा है. बाइडन अपनी जीत का दावा कर रहे हैं और ट्रंप चुनाव में धोखाधड़ी और वोट चोरी के निराधार आरोप लगा रहे हैं.

इससे दोनों पक्षों में कटुता बढ़ेगी और लंबी क़ानूनी लड़ाई को दावत देगी जिसमें हारने वाले के समर्थक ग़ुस्से में होंगे और ख़ुद को ठगा हुआ महसूस करेंगे.

हालांकि अभी अंतिम नतीजे नहीं आए हैं लेकिन इस चुनावी रात ने ये साफ़ कर दिया है कि अमेरिका एक बंटा हुआ देश है. अमेरिकी वोटरों ने ना ही ट्रंप को पूरी तरह ख़ारिज कर दिया और ना ही वोटरों ने ट्रंप को उतना समर्थन दिया जैसा कि ट्रंप ने उम्मीद की थी.

बल्कि वोटरों ने जंग की लाइन खींच दी है और ये राजनीतिक लड़ाई चलती रहेगी, चाहे इस बार का चुनाव कोई भी जीते.

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