इस्लाम पर मैक्रों की टिप्पणी के ख़िलाफ़ ईरान और पाकिस्तान की संसद में प्रस्ताव

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फ़्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल मैक्रों के ख़िलाफ़ कई देशों में ग़ुस्सा बढ़ता जा रहा है. पैग़ंबर मोहम्मद के विवादित कार्टून दिखाने के फ़ैसले का बचाव करने के कारण कई अरब देशों ने मैक्रों की खुलकर निंदा की है.
सोमवार को पाकिस्तान और ईरान की संसद ने भी एक प्रस्ताव पारित कर मैक्रों की आलोचना की. पाकिस्तान की संसद ने तो फ़्रांस से अपना राजदूत वापस बुलाने की माँग की है.
जबकि ईरान की संसद का कहना है कि अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर पैग़ंबर मोहम्मद का अपमान फ़्रांसीसी सरकार के रुख़ पर सवाल उठाता है.
पिछले दिनों फ़्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल मैक्रों ने पैग़ंबर मोहम्मद के कार्टून दिखाने के एक फ़्रांसीसी शिक्षक के फ़ैसले का समर्थन किया था. सैमुएल पैटी नाम के इस शिक्षक की हत्या कर दी गई थी. इसके बाद फ़्रांस में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन भी हुए थे.
उस दौरान मैक्रों ने इसे 'इस्लामिक आतंकवादी' हमला कहा था और ये भी कहा था कि इस्लाम संकट में है. मैक्रों ने इस्लामिक कट्टरपंथी संगठनों पर कार्रवाई का भी ऐलान किया था.
उसके बाद से कई संगठन सरकार के निशाने पर हैं और उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई भी हुई है.

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लेकिन इस्लाम पर मैक्रों के बयान को लेकर कई मुस्लिम देश नाराज़ हैं और कई देशों में फ़्रांस के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन भी हुए हैं.
मंगलवार को बांग्लादेश की राजधानी ढाका में भी हज़ारों की संख्या में लोग सड़कों पर निकले.
समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार हज़ारों लोगों ने फ़्रांस के सामान के बहिष्कार की माँग की और फ़्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों का पुतला जलाया.
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कई देशों ने फ़्रांसीसी सामान के बहिष्कार की भी अपील की है. तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने भी इसका समर्थन किया है और फ़्रांसीसी सामान के बहिष्कार की अपील की है.
टीवी पर दिए भाषण में उन्होंने कहा, "अगर फ़्रांस में मुसलमानों का दमन होता है तो' दुनिया के नेता मुसलमानों की सुरक्षा के लिए आगे आएँ. फ़्रांसीसी लेबल वाले सामान ना ख़रीदें, उन्हें भाव ना दें."
उन्होंने कहा कि फ़्रांस में मुसलमानों के ख़िलाफ़ ऐसा ही अभियान चलाया जा रहा है, जैसा दूसरे विश्व युद्ध से पहले यहूदियों के ख़िलाफ़ चलाया गया था.
अर्दोआन ने कहा कि यूरोपीय देशों के नेताओं को फ़्रांस के राष्ट्रपति से कहना चाहिए कि वो अपना नफ़रत भरा अभियान बंद करें.
ईरान और पाकिस्तान की संसद ने क्या कहा
वहीं ईरानी संसद की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि फ़्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों की कोशिश एक बड़ी योजना का हिस्सा है और मैक्रों फ़्रांस के लोगों में इस्लाम के प्रति बढ़ते आकर्षण को रोकना चाहते हैं.
बयान में ये भी कहा गया है कि मैक्रों अपनी इस कोशिश में कामयाब नहीं होंगे और मुस्लिम देश इस्लाम और पैग़ंबर मोहम्मद के अपमान के ख़िलाफ़ खड़े होंगे.
ईरान के विदेश मंत्रालय ने भी फ़्रांसीसी राजयनिक को बुलाकर मैक्रों के बयान के प्रति अपना विरोध दर्ज कराया है.
दूसरी ओर पाकिस्तान की संसद ने भी एक प्रस्ताव पारित करके माँग की है कि सरकार फ़्रांस में मौजूद अपने राजदूत को वापस बुला ले. हालाँकि फ़िलहाल फ़्रांस में पाकिस्तान को कोई राजदूत है ही नहीं.
संसद ने पैग़ंबर मोहम्मद के कार्टून को लेकर राष्ट्रपति मैक्रों की आलोचना की और उन पर इस्लाम के प्रति नफ़रत फैलाने का आरोप भी लगाया.
इस बीच पाकिस्तान ने इस्लामाबाद स्थित फ़्रांसीसी राजदूत को बुलाकर सरकार की तरफ़ से अपना विरोध भी दर्ज किया है.

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पाकिस्तान का प्रस्ताव
पाकिस्तान की नेशनल असेंबली ने अपने प्रस्ताव में सरकार से ये भी अपील की है कि वो अन्य मुस्लिम देशों से फ़्रांसीसी सामान के बहिष्कार के लिए कहे.
एक दिन पहले ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने मैक्रों पर आरोप लगाया था कि वो इस्लाम की किसी स्पष्ट समझ के बिना ही इस्लाम पर हमला कर रहे हैं.
उन्होंने एक ट्वीट में लिखा था, "राष्ट्रपति मैक्रों ने यूरोप और दुनिया भर के लाखों मुसलमानों की भावनाओं पर हमला किया है और उन्हें चोट पहुँचाई है."
इमरान ख़ान ने फ़ेसबुक के प्रमुख मार्क ज़करबर्ग को पत्र लिखकर अपने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म से इस्लाम विरोधी सामग्री हटाने और इस तरह की सामग्री की पोस्टिंग पर प्रतिबंध लगाने की अपील भी की थी.
फ़्रांस के सामान के बहिष्कार की अपील जिन देशों में हो रही है, उनमें जॉर्डन, क़तर और कुवैत भी शामिल हैं. इन देशों में इसका असर भी देखने को मिल रहा है.
लीबिया, ग़ज़ा और उत्तरी सीरिया में फ़्रांस के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन हुए हैं. लीबिया के विदेश मंत्रालय ने माँग की है कि फ़्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल मैक्रों को माफ़ी माँगनी चाहिए.
मामला क्या है

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फ़्रांस की व्यंग्य पत्रिका शार्ली एब्डो ने 2006 से कई बार पैग़ंबर मोहम्मद के कार्टून छापे. हर बार इसे लेकर काफ़ी विवाद हुआ. वर्ष 2015 में बंदूक़धारियों ने शार्ली एब्डो के कार्यालय पर हमला कर दिया और 12 लोगों की हत्या कर दी.
इस मामले में अब भी मुक़दमा चल रहा है. इस साल सितंबर में शार्ली एब्डो ने एक बार फिर पैग़ंबर मोहम्मद के कार्टून छापने का निर्णय लिया.
सितंबर में ही शार्ली एब्डो के पूर्व मुख्यालय के पास चाक़ू से हुए हमले में दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे.
जबकि 16 अक्तूबर को सैमुएल पैटी नाम के एक शिक्षक की हत्या कर दी गई. सैमुएल पैटी कक्षा में पैग़ंबर मोहम्मद का विवादित कार्टून दिखा रहे थे.
सैमुएल पैटी की हत्या के बाद राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा था कि वो कट्टरवादी इस्लाम से सख़्ती से निपटेंगे और देश की धर्मनिरपेक्षता की रक्षा करेंगे.
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