कोरोना की वजह से डोनाल्ड ट्रंप ज़्यादा बीमार हुए तो क्या होगा?

Trump and Pence

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इमेज कैप्शन, राष्ट्रपति ट्रंप और उप-राष्ट्रपति माइक पेंस को रिपब्लिकन पार्टी ने आधिकारिक तौर पर अगस्त में नामांकित किया था
    • Author, रिएलिटी चैक टीम
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़

अमरीका का राष्ट्रपति चुनाव अब सिर्फ़ कुछ ही सप्ताह दूर है और रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार, मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कोरोना वायरस से संक्रमित पाये गए हैं.

ऐसे में यह सवाल उठ खड़े हुए हैं कि आगे क्या होने वाला है? राष्ट्रपति चुनाव पर इसका किस तरह असर पड़ेगा?

संक्रमण के कारण डोनाल्ड ट्रंप किन चुनावी सभाओं में शामिल नहीं हो पायेंगे?

ट्रंप की एक युवा सहयोगी होप हिक्स के कोरोना संक्रमित पाये जाने के बाद, एक अक्तूबर को राष्ट्रपति ट्रंप का कोविड सैंपल लिया गया था.

इस जाँच में उन्हें कोरोना से संक्रमित पाया गया जिसके बाद उन्हें कम से कम दस दिनों के लिए क्वारंटीन में रहना होगा. शनिवार सुबह ख़बर आयी कि उन्हें एहतियात के तौर पर अस्पताल ले जाया गया है जहाँ वे डॉक्टरों की निगरानी में रहेंगे.

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ट्रंप के तय कार्यक्रम की क्या चीज़ें छूट जायेंगी?

अगर राष्ट्रपति ट्रंप को दस दिन के लिए ही क्वारंटीन में रहना पड़ता है, तो वे अगली प्रेसिडेंशियल डिबेट यानी राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों के बीच दूसरे चरण की बहस में हिस्सा ले पायेंगे जो 15 अक्तूबर को होनी है.

शुक्रवार शाम को अमरीका के फ़्लोरिडा शहर में रिपब्लिकन पार्टी की एक चुनावी सभा होने वाली थी, जिसे डोनाल्ड ट्रंप के कोरोना संक्रमित पाये जाने के बाद रद्द करना पड़ा.

व्हाइट हाउस ने सूचना दी कि 'राष्ट्रपति ट्रंप उस समय कोविड सपोर्ट सेंटर के लोगों से फ़ोन पर बात कर रहे थे और यह समझने की कोशिश कर रहे थे कि उम्रदराज़ लोगों को विशेष रूप से किस तरह की सावधानियाँ रखने की ज़रूरत होती है.'

राष्ट्रपति ट्रंप का चुनावी अभियान संभालने वाली टीम ने बताया है कि 'फ़िलहाल अगले दस दिनों की चुनावी सभाओं को या तो रद्द कर दिया गया है, या फ़िर अगली तारीख़ों के लिए तय कर लिया गया है.'

President Trump at first debate

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इमेज कैप्शन, पहली डिबेट के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप हाथ में मास्क लेकर तो आये थे, पर किसी तस्वीर में उन्हें मास्क पहने हुए नहीं देखा गया

किन परिस्थितियों में चुनाव टल सकता है?

यह साफ़ है कि राष्ट्रपति ट्रंप के क्वारंटीन में जाने का सीधा असर उनके चुनावी अभियान पर पड़ेगा. इससे उनकी क्षमता कम होगी. इसलिए यह सवाल भी उठा है कि क्या चुनाव को टाला जा सकता है? और ये कैसे हो सकता है?

अमरीकी क़ानून के तहत, राष्ट्रपति पद का चुनाव हर चार साल में, नवंबर महीने के पहले सोमवार के बाद आने वाले मंगलवार को होता है. इस लिहाज़ से 2020 का चुनाव 3 नवंबर को होना है.

अगर चुनाव की तारीख़ में कोई बदलाव होता है, तो यह निर्णय अमरीकी सांसद करेंगे, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नहीं.

चुनाव की तारीख़ में किसी भी बदलाव के पक्ष में संसद के दोनों सदनों में स्पष्ट बहुमत होना ज़रूरी है. यानी संसद के दोनों सदनों का इसके लिए राज़ी होना आवश्यक होगा, जिसकी संभावना काफ़ी कम लगती है क्योंकि अमरीकी संसद के निचले सदन 'हाउस ऑफ़ रीप्रज़ेन्टेटिव्स' में डेमोक्रेटिक पार्टी बहुमत में है और उन्होंने पहले ही कहा था कि वो चुनाव में किसी भी तरह की देरी के प्रस्ताव का समर्थन नहीं करेंगे.

बीबीसी

पढ़िए, अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव पर बीबीसी की ख़ास रिपोर्टें:

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अमरीकी संविधान के नियमानुसार, भले ही चुनाव की तारीख़ बदल दी जाये, मगर अमरीकी राष्ट्रपति का कार्यकाल चार साल ही रहेगा, यानी 20 जनवरी 2021 को राष्ट्रपति ट्रंप का कार्यकाल स्वतः समाप्त हो जायेगा.

इस तिथि को बदलने के लिए भी संविधान में संशोधन की आवश्यकता होगी. इसे दो-तिहाई अमरीकी सांसदों या राज्य-स्तरीय विधायिकाओं द्वारा अनुमोदित कराना होगा, जिसकी फिर से संभावना कम लगती है.

Trump and Marine One

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इमेज कैप्शन, राष्ट्रपति ट्रंप बुधवार को उसी विमान में सवार थे जिसमें होप हिक्स थीं. होप हिक्स कोरोना संक्रमित हैं, इसकी पुष्टि हो जाने के बाद ही राष्ट्रपति ट्रंप ने अपना कोविड सैंपल दिया था

अगर ट्रंप ज़्यादा बीमार हो गए, तो क्या होगा?

अभी तक तो राष्ट्रपति ट्रंप में कोरोना संक्रमण के 'हल्के लक्षण' बताये जाते हैं, मगर स्थिति बदली और वे ज़्यादा बीमार हो गये जिसके कारण वे अपनी ज़िम्मेदारियों को पूरा करने के लिए मौजूद नहीं रहे, तो उस स्थिति के लिए भी अमरीकी संविधान में व्यवस्था है.

अमरीकी संविधान का 25वां संशोधन अमरीका के राष्ट्रपति को उप-राष्ट्रपति के हाथ में सत्ता की कमान सौंपने की अनुमति देता है.

इसका अर्थ है कि ट्रंप के ज़्यादा बीमार होने पर उप-राष्ट्रपति माइक पेंस अमरीका के कार्यवाहक राष्ट्रपति बनेंगे और तंदरुस्त होने पर डोनाल्ड ट्रंप अपने पद पर दोबारा लौट सकेंगे. पूर्व राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन और जॉर्ज डब्ल्यू बुश के प्रशासन के दौरान यह देखने को मिला भी था.

अगर राष्ट्रपति तुरंत इतने बीमार हो जायें कि वे सत्ता सौंपने की स्थिति में ना रहें, तो कैबिनेट और उप-राष्ट्रपति मिलकर उन्हें असमर्थ घोषित कर सकते हैं. उस स्थिति में भी उप-राष्ट्रपति माइक पेंस ही राष्ट्रपति पद ग्रहण करेंगे.

लेकिन ऐसा ही कुछ अगर माइक पेंस के साथ भी होता है, तो 'राष्ट्रपति पद के उत्तराधिकार अधिनियम' के तहत संसद के निचले सदन की अध्यक्षा - नैन्सी पेलोसी जो एक डेमोक्रैट नेता हैं, कतार में अगले नंबर पर होंगी.

हालांकि, अमरीकी संविधान की समझ रखने वाले यह मानते हैं कि इस तरह का सत्ता हस्तांतरण बहुत सारे क़ानूनी झगड़ों को न्योता देगा जिसके नतीजे की यूँ कल्पना करना मुश्किल है.

Pence wears mask

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इमेज कैप्शन, उप-राष्ट्रपति माइक पेंस राष्ट्रपति पद की ज़िम्मेदारी ले सकते हैं, पर वे स्वत: ही रिपब्लिकन पार्टी के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार नहीं बन सकते

अगर ट्रंप चुनाव में खड़े नहीं हो पाये, तो बैलेट पर किसका नाम होगा?

कारण चाहे कोई भी हो, अगर किसी पार्टी ने किसी उम्मीदवार को राष्ट्रपति पद के लिए चुना हो और वो चुनाव के समय असमर्थ हो जाये, तो क्या किया जाये? इसे लेकर स्पष्ट प्रक्रिया मौजूद है.

उस स्थिति में पहले तो उप-राष्ट्रपति माइक पेंस राष्ट्रपति के कर्तव्यों को स्वीकार करेंगे, लेकिन यह ज़रूरी नहीं कि वे रिपब्लिकन पार्टी के चुनावी उम्मीदवार बन जायें - क्योंकि पार्टी ने आधिकारिक तौर पर पहले ही डोनाल्ड ट्रंप को राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के तौर पर नामित कर रखा है.

पार्टी के नियमों के तहत, रिपब्लिक नेशनल कमेटी (आरएनसी) के 168 सदस्य नये राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार का चुनाव करेंगे जिसमें माइक पेंस संभावित उम्मीदवारों में से एक होंगे. कमेटी द्वारा अगर माइक पेंस को ही राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के तौर पर चुना जाता है तो चुनाव के लिए उनके एक साथी को भी चुना जाएगा.

पर ग़ौर करने वाली बात यह है कि डैमोक्रेट और रिपब्लिकन पार्टी, दोनों ने ही एक बार चुने जाने के बाद अपने राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को कभी नहीं बदला.

चुनावी विश्लेषकों का मानना है कि 'अभी भी चुनाव के लिए समय है और उम्मीद करनी चाहिए कि इन वैकल्पिक रास्तों को अपनाने की नौबत नहीं आयेगी.' कुछ अमरीकी विश्लेषकों का नज़रिया है कि 'राष्ट्रपति ट्रंप का नाम बैलेट पर रहेगा, चाहे जो हो जाये.'

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