ट्रंप कोरोना के इलाज के लिए ख़ुद क्यों बन रहे हैं डॉक्टर
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अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वो कोरोना वायरस से बचाव के लिए हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन नाम की दवा ले रहे हैं.
व्हाइट हाउस में हुए एक बैठक में ट्रंप ने कहा कि उन्होंने हाल में मलेरिया और लूपस के इलाज में इस्तेमाल की जाने वाली दवा हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन लेना शुरू किया है.
उन्होंने कहा, "क़रीब देढ़ सप्ताह से मैं ये दवा ले रहा हूं और देखिए मैं आपके सामने स्वस्थ्य हूं."
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आम तौर पर इस दवा का इस्तेमाल मलेरिया के इलाज में किया जाता है.
लेकिन ये दवा कोरोना वायरस के मरीज़ों के मामले में कितनी कारगर है, अब तक इस बात के कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.
हालांकि इसके लिए क्लिनिकल ट्रायल फ़िलहाल जारी है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन भी यह कह चुका है कि हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन कोरोना के इलाज में कितना प्रभावी है, इसे लेकर कोई ठोस प्रमाण मौजूद नहीं है.
ट्रंप ने क्या कहा?
73 साल के ट्रंप सोमवार को व्हाइट हाउस में रेस्तरां व्यवसाय से जुड़े लोगों से मुलाक़ात कर रहे थे. इस दौरान उन्होंने कहा कि वो हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन ले रहे हैं.
उन्होंने कहा, "आपको ये जान कर आश्चर्य होगा कि कितने लोग ये दवा ले रहे हैं. ख़ास कर फ्रांटलाइन वर्कर कोरोना वायरस से बचने के लिए ये दवा ले रहे हैं. मैं खुद ये दवा ले रहा हूं."
जब ट्रंप से पूछा गया कि उन्हें हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन के इस्तेमाल के क्या सकारात्मक सबूत मिले, उन्होंने कहा, "मुझे इस संबंध में कई कॉल आए हैं. यही इसका सबूत है."
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ट्रंप के बयान पर प्रतिक्रिया
ट्रंप के इस बयान को लेकर जहां कई लोगों ने चिंता जताई है वहीं कई लोगों ने इसे डराने वाली बात कहा है.
वैज्ञानिकों का कहना है कि अब तक इस बात के पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं कि कोविड 19 के मरीज़ों को इस दवा के इस्तेमाल से फायदा होता है.
उनका कहना है कि इस दवा के इस्तेमाल से शरीर को नुक़सान हो सकता है, इससे गुर्दे और लिवर को भी नुक़सान पहुंच सकता है.
एक व्यक्ति ने लिखा, "मैं एक वैज्ञानिक हूं. राजनीति के बारे में मैं नहीं जानता लेकिन कृपया हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन न लें. ये नुक़सान पहुंचाने वाला हो सकता है और अब तक कोई ऐसे आँकड़े नहीं आए हैं जो बताएं कि कोविड 19 के मरीज़ इससे ठीक हुए हैं."
टॉम पोस्नान्स्की ने कहा, "वो व्यक्ति जो फ़ेस मास्क लगाने का समर्थन न करता हो, कोरोना महामारी के बीच अर्थव्यवस्था को फिर से जल्दी खोलने के बारे में सोच रहा हो और किसी ऐसी बीमारी के लिए दवा ले रहा हो जो उसे है ही नहीं और वो दवा जिस पर शोध किया जा रहा है, तो क्या ये वाकई सही है?"
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मार्च में ट्रंप ने कोरोना वायरस के इलाज के लिए हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन के इस्तेमाल का ज़िक्र किया था जिसके बाद से अमरीका में कई डॉक्टर अपने मरीज़ों हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन और क्लोरोक्वीन दे रहे हैं. हालांकि हाल के वक्त में इसमें कुछ कमी आई है.
कुछ लोग जो इस दवा पर पूरी तरह से निर्भर हैं उनका कहना है कि दवा की मांग बढ़ने के कारण बाज़ार में इसकी उपलब्धता कम हुई है जिसका असर उनके स्वास्थ्य पर पड़ा है.
लीज़ा ब्राउन डूबल्स सोशल मीडिया पर एक तस्वीर शेयर की और लिखा कि ये दवा लुपस से मरीज़ों के लिए ज़रूरी है. ये दवा न लेने पर "लुपस के मरीज़ों में हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन के मरीज़ों को इस समस्या का सामना करना पड़ता है."
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ट्रंप ही नहीं ब्राज़ील के राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो ने भी इस दवा का समर्थन किया था. फ़ेसबुक ने हाल में बोलसोनारो का एक वीडियो ग़लत जानकारी फैलाने की वजह से हटा दिया था.
इस वीडियो में बोलसोनारो ने दावा किया था कि, "हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन सभी जगहों पर काम कर रही है."
लंबे समय से हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन का इस्तेमाल मलेरिया के बुखार को कम करने में किया जाता रहा है और उम्मीद की जा रही है कि यह कोरोना वायरस को भी रोकने में सक्षम हो सकती है.
कोरोना के इलाज में मलेरिया की दवा के प्रभाव पर रिपोर्ट लिखने वाले ऑक्सफ़र्ड यूनिवर्सिटी के कोम गेबनिगी का कहना है, "यह दवा कितना कारगर है, यह जानने के लिए उच्च गुणवत्ता वाले रैंडम क्लिनिकल ट्रायल की ज़रूरत है."
ऐसा मेडिकल टेस्ट जिससे साबित हो सके कि किसी शख्स को कोरोना वायरस था और अब उसमें कुछ इम्युनिटी आ गई है. यह टेस्ट खून में एंटीबॉडीज का पता लगाता है, जिन्हें बीमारी से लड़ने के लिए शरीर पैदा करता है.
बिना लक्षण वाले
ऐसा शख्स जिसे बीमारी हुई मगर उसमें कोई लक्षण नहीं दिखाई दिए. कुछ स्टडीज से पता चला है कि कोरोना वायरस का शिकार हुए कुछ लोगों में तेज़ बुखार या कफ़ जैसे आम लक्षण नहीं नज़र आए.
कोरोना वायरस
वायरस समूह में से एक वायरस जिससे मनुष्यों या जानवरों में गंभीर या हल्की बीमारी हो सकती है. पूरी दुनिया में फैले कोरोना वायरस से कोविड-19 बीमारी हो रही है. सामान्य सर्दी या इंफ्लूएंजा (फ़्लू) फैलाने वाले दूसरे तरह के कोरोना वायरस हैं.
कोविड-19
कोरोना वायरस की वजह से फैल रही बीमारी का सबसे पहले पता 2019 के अंत में चीन के वुहान में लगा. यह मूलरूप में फ़ेफ़ड़ों पर असर डालता है.
संक्रमण की तेज़ी को रोकना
ट्रांसमिशन की दर को कम करना ताकि चार्ट पर प्रदर्शित किए जाने पर मामलों की संख्या के आधार पर पीक को फ्लैट कर कर्व को नीचे लाया जाए ताकि स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ते बोझ को कम किया जा सके.
फ़्लू
इंफ्लूएंजा का संक्षिप्त नाम. एक वायरस जो कि सीजनल बीमारियों में मनुष्यों और जानवरों में फैलता है.
सामुदायिक प्रतिरोधक क्षमता
एक बड़ी आबादी तक पहुंचने के बाद किस तरह से एक बीमारी का फैलाव सुस्त पड़ता है.
लड़ने में सक्षम
ऐसा शख्स जिसका शरीर किसी बीमारी के सामने टिक सके या उसे रोक दे वह इससे इम्यून कहा जाता है. एक बार जब कोई शख्स कोरोना वायरस से उबर जाता है तो ऐसा माना जाता है कि वह एक निश्चित अवधि तक इस बीमारी का फिर से शिकार नहीं हो सकता.
वायरस के असर करने की अवधि
किसी बीमारी का शिकार होने और उसका लक्षण दिखाई देना शुरू होने के बीच की अवधि
लॉकडाउन
आवाजाही या रोज़ाना की ज़िंदगी पर पाबंदियां, जिनमें सार्वजनिक इमारतें बंद हैं और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए कहा गया है. कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कई देशों में लॉकडाउन को कड़े उपायों के तौर पर लागू किया गया है."
शुरुआत
किसी क्लस्टर या अलग-अलग इलाकों में तेज रफ्तार से बीमारी के कई मामले सामने आना.
महामारी
किसी गंभीर बीमारी का कई देशों में एकसाथ तेजी से फैलना महामारी कहलाता है.
एकांतवास
किसी संक्रामक बीमारी को फैलने से रोकने के लिए इसकी जद में आए लोगों को अलग रखना.
सार्स
सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम एक कोरोना वायरस का ही प्रकार है जो कि एशिया में 2003 में शुरू हुआ था.
सेल्फ-आइसोलेशन
घर पर ही रहना और अन्य लोगों से सभी तरह के संपर्क से बचना ताकि बीमारी को फैलने से रोका जा सके.
सामाजिक दूरी
अन्य लोगों से दूर रहना ताकि बीमारी के ट्रांसमिशन की रफ्तार कम की जा सके. सरकार की सलाह है कि अपने साथ रह रहे लोगों के अलावा दोस्तों और रिश्तेदारों से न मिलें. साथ ही सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल से भी बचें.
आपातकालीन स्थिति
किसी संकट के वक्त सरकार द्वारा रोज़ाना की जिंदगी पर पाबंदी लगाने के मकसद से उठाए गए कदम. इसमें स्कूलों और दफ्तरों को बंद करना, लोगों की आवाजाही पर पाबंदी लगाना और यहां तक कि सैन्य बलों को तैनात करना ताकि रेगुलर इमर्जेंसी सेवाओं को सपोर्ट किया जा सके."
लक्षण
संक्रमण से लड़ने के लिए शरीर की कोशिश के तौर पर इम्यून सिस्टम से किसी बीमारी के संकेत. कोरोना वायरस का मुख्य लक्षण बुखार, सूखी खांसी और सांस लेने में दिक्कत होना है."
टीका
ऐसा इलाज जिससे शरीर एंटीबॉडीज पैदा करता है, जो कि बीमारी से लड़ता है और आगे के संक्रमण से लड़ने की इम्युनिटी देता है."
वेंटीलेटर
ऐसी मशीन जो कि ऐसे वक्त पर शरीर के लिए सांस लेने का काम करती है जब फ़ेफ़ड़े काम करना बंद करने लगते हैं.
विषाणु
एक छोटा सा एजेंट जो कि किसी जीवित सेल के भीतर अपनी कॉपी बना लेता है. वायरस की वजह से ये सेल मरने लगती हैं और शरीर की सामान्य केमिकल प्रक्रियाओं को अवरुद्ध कर देती हैं जिससे बीमारी हो जाती है.
मुख्य कहानी नीचे जारी है
ट्रांसलेटर
इन सभी शब्दों का क्या मतलब है?
अमरीका, ब्रिटेन, स्पेन और चीन में 20 से ज्यादा परीक्षण चल रहे हैं. कैबिनेट मंत्री माइकल गोव बताते हैं कि ब्रिटेन में मलेरिया-रोधी दवा की कोरोना वायरस के ऊपर पड़ने वाले प्रभावों पर लगातार क्लिनिकल परीक्षण किए जा रहे हैं.
अमरीका में भी हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन और एजिथ्रोमाइसिन जैसी दवाओं को साथ मिलाकर इसके कोरोना के इलाज में प्रभावी होने के ऊपर कई परीक्षण किए जा रहे हैं.
यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) अमरीका में किसी दवाई के इस्तेमाल की अनुमति देती है. उसने इन दवाइयों को आपातस्थिति में कोरोना के सीमित मामलों में उपयोग की इजाज़त तो दी लेकिन ये भी कहा कि किसी ख़ास परिस्थिति में अस्पताल अनुरोध करके इन दवाइयों का इस्तेमाल कोरोना के मरीज़ों पर कर सकता है.
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डॉक्टर की सलाह पर
फ़्रांस ने भी अपने डॉक्टरों को कोरोना के मरीज़ों को यह दवा देने की सलाह की इजाज़त दी लेकिन साथ ही में इसके साइड इफेक्ट को लेकर चेताया भी.
भारत के स्वास्थ्य मंत्री ने स्वास्थ्य क्षेत्र में काम करने वालों कर्मियों को ऐहतियातन हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन लेने की सलाह तो दी है, इसके साथ ही डॉक्टर की सलाह पर उन परिवारवालों को भी ये दवा खाने को कहा है जिन परिवारों में कोरोना के किसी मामले की पुष्टि हुई है.
हालांकि भारत सरकार की शोध संस्था ने इसके प्रयोग को लेकर चेतावनी दी है और कहा है कि यह 'प्रयोग' के स्तर पर है और आपतकालीन स्थिति में ही केवल इसका इस्तेमाल करना चाहिए.
मध्य-पूर्व के कई देशों ने भी अपने यहां इसके इस्तेमाल को इजाज़त दी है. इन देशों में बहरीन, मोरोक्को, अल्जीरिया और ट्यूनिशिया शामिल हैं. बहरीन का दावा है कि उसने सबसे पहले अपने यहां कोरोना के मरीज़ पर हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन का इस्तेमाल किया है.
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क्लोरोक्विन और इससे जुड़ी दवाइयां विकासशील देशों में पर्याप्त मात्रा में मौजूद हैं. इन देशों में मलेरिया के इलाज में इन दवाओं का इस्तेमाल होता आया है.
हालांकि धीरे-धीरे मलेरिया के ज़्यादा प्रतिरोधी होने की वजह से इस दवा का प्रभाव मलेरिया के मामले में कम होता गया है.
जॉर्डन ने जमाखोरी रोकने के लिए दवाई दुकानों में इसकी ब्रिक्री पर प्रतिबंध तक लगाया तो कुवैत के स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी निजी दवा दुकानों से इसे वापस ले लिया और सरकारी केंद्रों और अस्पतालों तक इसकी उपलब्धता को सीमित कर दिया. कीनिया में सिर्फ़ डॉक्टर की पर्ची पर ही इस दवा को बेचने का नियम बना दिया गया.
भारत इन दवाइयों का एक बड़ा उत्पादक देश है. लेकिन भारत ने इसके निर्यात पर पाबंदी लगा दी है.
कोरोना वायरस क्या है?लीड्स के कैटलिन सेसबसे ज्यादा पूछे जाने वाले
बीबीसी न्यूज़स्वास्थ्य टीम
कोरोना वायरस एक संक्रामक बीमारी है जिसका पता दिसंबर 2019 में चीन में चला. इसका संक्षिप्त नाम कोविड-19 है
सैकड़ों तरह के कोरोना वायरस होते हैं. इनमें से ज्यादातर सुअरों, ऊंटों, चमगादड़ों और बिल्लियों समेत अन्य जानवरों में पाए जाते हैं. लेकिन कोविड-19 जैसे कम ही वायरस हैं जो मनुष्यों को प्रभावित करते हैं
कुछ कोरोना वायरस मामूली से हल्की बीमारियां पैदा करते हैं. इनमें सामान्य जुकाम शामिल है. कोविड-19 उन वायरसों में शामिल है जिनकी वजह से निमोनिया जैसी ज्यादा गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं.
ज्यादातर संक्रमित लोगों में बुखार, हाथों-पैरों में दर्द और कफ़ जैसे हल्के लक्षण दिखाई देते हैं. ये लोग बिना किसी खास इलाज के ठीक हो जाते हैं.
लेकिन, कुछ उम्रदराज़ लोगों और पहले से ह्दय रोग, डायबिटीज़ या कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ रहे लोगों में इससे गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा रहता है.
एक बार आप कोरोना से उबर गए तो क्या आपको फिर से यह नहीं हो सकता?बाइसेस्टर से डेनिस मिशेलसबसे ज्यादा पूछे गए सवाल
बाीबीसी न्यूज़स्वास्थ्य टीम
जब लोग एक संक्रमण से उबर जाते हैं तो उनके शरीर में इस बात की समझ पैदा हो जाती है कि अगर उन्हें यह दोबारा हुआ तो इससे कैसे लड़ाई लड़नी है.
यह इम्युनिटी हमेशा नहीं रहती है या पूरी तरह से प्रभावी नहीं होती है. बाद में इसमें कमी आ सकती है.
ऐसा माना जा रहा है कि अगर आप एक बार कोरोना वायरस से रिकवर हो चुके हैं तो आपकी इम्युनिटी बढ़ जाएगी. हालांकि, यह नहीं पता कि यह इम्युनिटी कब तक चलेगी.
कोरोना वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड क्या है?जिलियन गिब्स
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
वैज्ञानिकों का कहना है कि औसतन पांच दिनों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं. लेकिन, कुछ लोगों में इससे पहले भी लक्षण दिख सकते हैं.
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि इसका इनक्यूबेशन पीरियड 14 दिन तक का हो सकता है. लेकिन कुछ शोधार्थियों का कहना है कि यह 24 दिन तक जा सकता है.
इनक्यूबेशन पीरियड को जानना और समझना बेहद जरूरी है. इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों को वायरस को फैलने से रोकने के लिए कारगर तरीके लाने में मदद मिलती है.
क्या कोरोना वायरस फ़्लू से ज्यादा संक्रमणकारी है?सिडनी से मेरी फिट्ज़पैट्रिक
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
दोनों वायरस बेहद संक्रामक हैं.
ऐसा माना जाता है कि कोरोना वायरस से पीड़ित एक शख्स औसतन दो या तीन और लोगों को संक्रमित करता है. जबकि फ़्लू वाला व्यक्ति एक और शख्स को इससे संक्रमित करता है.
फ़्लू और कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं.
बार-बार अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं
जब तक आपके हाथ साफ न हों अपने चेहरे को छूने से बचें
खांसते और छींकते समय टिश्यू का इस्तेमाल करें और उसे तुरंत सीधे डस्टबिन में डाल दें.
आप कितने दिनों से बीमार हैं?मेडस्टोन से नीता
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
हर पांच में से चार लोगों में कोविड-19 फ़्लू की तरह की एक मामूली बीमारी होती है.
इसके लक्षणों में बुख़ार और सूखी खांसी शामिल है. आप कुछ दिनों से बीमार होते हैं, लेकिन लक्षण दिखने के हफ्ते भर में आप ठीक हो सकते हैं.
अगर वायरस फ़ेफ़ड़ों में ठीक से बैठ गया तो यह सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया पैदा कर सकता है. हर सात में से एक शख्स को अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
अस्थमा वाले मरीजों के लिए कोरोना वायरस कितना ख़तरनाक है?फ़ल्किर्क से लेस्ले-एन
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
अस्थमा यूके की सलाह है कि आप अपना रोज़ाना का इनहेलर लेते रहें. इससे कोरोना वायरस समेत किसी भी रेस्पिरेटरी वायरस के चलते होने वाले अस्थमा अटैक से आपको बचने में मदद मिलेगी.
अगर आपको अपने अस्थमा के बढ़ने का डर है तो अपने साथ रिलीवर इनहेलर रखें. अगर आपका अस्थमा बिगड़ता है तो आपको कोरोना वायरस होने का ख़तरा है.
क्या ऐसे विकलांग लोग जिन्हें दूसरी कोई बीमारी नहीं है, उन्हें कोरोना वायरस होने का डर है?स्टॉकपोर्ट से अबीगेल आयरलैंड
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ह्दय और फ़ेफ़ड़ों की बीमारी या डायबिटीज जैसी पहले से मौजूद बीमारियों से जूझ रहे लोग और उम्रदराज़ लोगों में कोरोना वायरस ज्यादा गंभीर हो सकता है.
ऐसे विकलांग लोग जो कि किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं और जिनको कोई रेस्पिरेटरी दिक्कत नहीं है, उनके कोरोना वायरस से कोई अतिरिक्त ख़तरा हो, इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.
जिन्हें निमोनिया रह चुका है क्या उनमें कोरोना वायरस के हल्के लक्षण दिखाई देते हैं?कनाडा के मोंट्रियल से मार्जे
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कम संख्या में कोविड-19 निमोनिया बन सकता है. ऐसा उन लोगों के साथ ज्यादा होता है जिन्हें पहले से फ़ेफ़ड़ों की बीमारी हो.
लेकिन, चूंकि यह एक नया वायरस है, किसी में भी इसकी इम्युनिटी नहीं है. चाहे उन्हें पहले निमोनिया हो या सार्स जैसा दूसरा कोरोना वायरस रह चुका हो.
कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकारें इतने कड़े कदम क्यों उठा रही हैं जबकि फ़्लू इससे कहीं ज्यादा घातक जान पड़ता है?हार्लो से लोरैन स्मिथ
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शहरों को क्वारंटीन करना और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए बोलना सख्त कदम लग सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो वायरस पूरी रफ्तार से फैल जाएगा.
फ़्लू की तरह इस नए वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है. इस वजह से उम्रदराज़ लोगों और पहले से बीमारियों के शिकार लोगों के लिए यह ज्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.
क्या खुद को और दूसरों को वायरस से बचाने के लिए मुझे मास्क पहनना चाहिए?मैनचेस्टर से एन हार्डमैन
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
पूरी दुनिया में सरकारें मास्क पहनने की सलाह में लगातार संशोधन कर रही हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहा है जिन्हें कोरोना वायरस के लक्षण (लगातार तेज तापमान, कफ़ या छींकें आना) दिख रहे हैं या जो कोविड-19 के कनफ़र्म या संदिग्ध लोगों की देखभाल कर रहे हैं.
मास्क से आप खुद को और दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इन्हें अपने हाथ बार-बार धोने और घर के बाहर कम से कम निकलने जैसे अन्य उपायों के साथ इस्तेमाल किया जाए.
फ़ेस मास्क पहनने की सलाह को लेकर अलग-अलग चिंताएं हैं. कुछ देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके यहां स्वास्थकर्मियों के लिए इनकी कमी न पड़ जाए, जबकि दूसरे देशों की चिंता यह है कि मास्क पहने से लोगों में अपने सुरक्षित होने की झूठी तसल्ली न पैदा हो जाए. अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो आपके अपने चेहरे को छूने के आसार भी बढ़ जाते हैं.
यह सुनिश्चित कीजिए कि आप अपने इलाके में अनिवार्य नियमों से वाकिफ़ हों. जैसे कि कुछ जगहों पर अगर आप घर से बाहर जाे रहे हैं तो आपको मास्क पहनना जरूरी है. भारत, अर्जेंटीना, चीन, इटली और मोरक्को जैसे देशों के कई हिस्सों में यह अनिवार्य है.
अगर मैं ऐसे शख्स के साथ रह रहा हूं जो सेल्फ-आइसोलेशन में है तो मुझे क्या करना चाहिए?लंदन से ग्राहम राइट
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ रह रहे हैं जो कि सेल्फ-आइसोलेशन में है तो आपको उससे न्यूनतम संपर्क रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो तो एक कमरे में साथ न रहें.
सेल्फ-आइसोलेशन में रह रहे शख्स को एक हवादार कमरे में रहना चाहिए जिसमें एक खिड़की हो जिसे खोला जा सके. ऐसे शख्स को घर के दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए.
मैं पांच महीने की गर्भवती महिला हूं. अगर मैं संक्रमित हो जाती हूं तो मेरे बच्चे पर इसका क्या असर होगा?बीबीसी वेबसाइट के एक पाठक का सवाल
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर को समझने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी बारे में बेहद सीमित जानकारी मौजूद है.
यह नहीं पता कि वायरस से संक्रमित कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के दौरान इसे अपने भ्रूण या बच्चे को पास कर सकती है. लेकिन अभी तक यह वायरस एमनियोटिक फ्लूइड या ब्रेस्टमिल्क में नहीं पाया गया है.
गर्भवती महिलाओंं के बारे में अभी ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि वे आम लोगों के मुकाबले गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं. हालांकि, अपने शरीर और इम्यून सिस्टम में बदलाव होने के चलते गर्भवती महिलाएं कुछ रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस से बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं.
मैं अपने पांच महीने के बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हूं. अगर मैं कोरोना से संक्रमित हो जाती हूं तो मुझे क्या करना चाहिए?मीव मैकगोल्डरिक
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
अपने ब्रेस्ट मिल्क के जरिए माएं अपने बच्चों को संक्रमण से बचाव मुहैया करा सकती हैं.
अगर आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ पैदा कर रहा है तो इन्हें ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पास किया जा सकता है.
ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं को भी जोखिम से बचने के लिए दूसरों की तरह से ही सलाह का पालन करना चाहिए. अपने चेहरे को छींकते या खांसते वक्त ढक लें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को फेंक दें और हाथों को बार-बार धोएं. अपनी आंखों, नाक या चेहरे को बिना धोए हाथों से न छुएं.
बच्चों के लिए क्या जोखिम है?लंदन से लुइस
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
चीन और दूसरे देशों के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर बच्चे कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अप्रभावित दिखे हैं.
ऐसा शायद इस वजह है क्योंकि वे संक्रमण से लड़ने की ताकत रखते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या उनमें सर्दी जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं.
हालांकि, पहले से अस्थमा जैसी फ़ेफ़ड़ों की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.
End of मैं और मेरा परिवार
2005 में इस दवा पर पाबंदी लगने के बावजूद नाइजीरिया में लोग अभी भी मलेरिया की दवा के रूप में इसका इस्तेमाल कर रहे हैं. चीन में फरवरी के महीने में इस बात का ज़िक्र होने के बाद कि हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन कोरोना वायरस के मामलों में काम करती है.
नाइजीरिया के रोग नियंत्रक केंद्रों ने लोगों से अपील की है कि वो इस दवा को लेना बंद करें और कहा है कि, "विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना वायरस के इलाज में इस दवा के प्रभाव की पुष्टि नहीं की है."
बीबीसी के डैनियल सेमेनिओरिमा ने बताया है कि लागोस में लोग इस सलाह को अनसुना कर रहे हैं और अपने आप को सुरक्षित करने में लगे हुए हैं. इसके गंभीर नतीजे भी भुगतने पड़ रहे हैं. लागोस के अधिकारियों का कहना है कि कई लोग हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन के ओवरडोज से गंभीर रूप से बीमार पड़े हैं.