अमरीका चुनाव: डोनाल्ड ट्रंप बनाम जो बाइडन, पहली बहस आख़िर किसने जीती

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- Author, एंथनी ज़र्चर
- पदनाम, उत्तर-अमरीका संवाददाता, बीबीसी
अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव की पहली बहस में मंगलवार को बहुत ही तीख़ी ज़ुबानी जंग देखने को मिली.
बहस के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और जो बाइडन के बीच काफ़ी तू-तू मैं-मैं हुई और दोनों नेताओं ने विभिन्न मुद्दों को लेकर एक-दूसरे पर छींटाकशी की.
यह एक ऐसी बहस थी, जिसका लाखों अमरीकियों को काफ़ी समय से इंतज़ार था, और बहस इतनी गर्मा-गर्म रहेगी, ऐसी भी बहुत से लोगों ने पहले ही उम्मीद की थी.
लेकिन सवाल ये है कि इस बहस का सुननेवालों पर क्या असर हुआ होगा? और डोनाल्ड ट्रंप-जो बाइडन के बीच हुई इस पहली बहस में किसे जीता हुआ समझा जाए?
पहली बहस में जो बाइडन का मक़सद अमरीकियों को यह दिखाना था कि वे दबाव की स्थिति का आसानी से सामना कर सकते हैं, बढ़ती उम्र कहीं से भी उनकी कमज़ोरी नहीं है और बहुत ही शांत ढंग से अपनी सारी बातें रख सकते हैं.
बहस को देखकर ऐसा लगता है कि वे अपने इस मक़सद को पूरा करने में सफल रहे. हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप लगातार उन्हें टोकते रहे और ट्रंप ने बाइडन को कम ही मौक़े दिए कि वे कुछ ऐसा कह पाएँ, जिससे ट्रंप के चुनावी अभियान को भारी चोट पहुँचे.
वहीं डोनाल्ड 'ट्विटर' ट्रंप ने भी क़रीब डेढ़ घंटे लंबी इस डिबेट में पूरा प्रदर्शन किया. लेकिन दुर्भाग्य की बात ये है कि बहुत से अमरीकी, यहाँ तक कि उनके समर्थक भी, ट्रंप के सोशल मीडिया स्टाइल को उनके ऐसे गुणों में से एक मानते हैं, जो आकर्षक नहीं हैं.
ट्रंप को चाहिए था कि वे पहली ही बहस के ज़रिए चुनावी दौड़ को हिलाकर रख दें जो अब तक उनके ख़िलाफ़ जाती दिखी है. लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि यह बहस उन 10 अमरीकी मतदाताओं में से सिर्फ़ एक मतदाता के नज़रिए को बदलने में सफल रही होगी, जो अभी भी यह तय नहीं कर पाए हैं कि वो किसे वोट करने वाले हैं.

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'आप थोड़ा चुप रहोगे?'
यह स्पष्ट था कि ये बहस किस तरह की होगी. डोनाल्ड ट्रंप का उद्देश्य जो बाइडन को परेशान करना था और इसके लिए उन्होंने पूर्व उप-राष्ट्रपति को लगातार टोकने की योजना बनाई.
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप ने बाइडन को कुल 73 बार बीच में टोका, जिसकी वजह से तीख़ी नोकझोंक भी हुई. ट्रंप ने बाइडन की बुद्धिमत्ता पर सवाल उठाया, तो बाइडन ने ट्रंप को जोकर कहा, उन्हें चुप कराया और यह तक कहा कि "क्या आप थोड़ा चुप रहोगे?"
कई बार ऐसा हुआ कि जब ट्रंप ने जो बाइडन पर हमला किया, तो डेमोक्रेट नेता धीमे-धीमे मुस्कुराते रहे.
जब बहस के संचालक क्रिस वैलेस ने घोषणा की कि अगला विषय कोरोना वायरस है और राष्ट्रपति पद के दोनों उम्मीदवारों के पास अपना-अपना पक्ष रखने के लिए ढाई-ढाई मिनट होंगे, तो बाइडन ने ट्रंप को ताना मारा: "इस विषय के लिए शुभकामनाएँ."
लोग कह रहे हैं कि इस प्रतिष्ठित बहस का संचालन मंगलवार की रात अमरीका में 'सबसे ख़राब काम' रहा होगा.

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कैमरे का ध्यान
कोरोना वायरस महामारी हमेशा से ही राष्ट्रपति ट्रंप के बोलने के लिए मुश्किल विषय रहा है. मंगलवार की बहस में यह विषय काफ़ी शुरुआत में ही आ गया और डोनाल्ड ट्रंप को यह बताना था कि उन्होंने उस महामारी से लड़ने के लिए क्या किया, जिससे अमरीका में अब तक दो लाख से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है.
राष्ट्रपति ट्रंप ने ऐसा किया भी. उन्होंने दलील दी कि उनके प्रशासन ने महामारी को रोकने के लिए कई क़दम उठाए, लोगों के बचाव के लिए फ़लां चीज़ें कीं, लेकिन जो बाइडन ने अपनी बातों से उनके लिए मुश्किलें पैदा कीं.
ट्रंप की दलीलों के जवाब में जो बाइडन ने कैमरे से नज़र मिलाते हुए, दर्शकों से पूछा कि 'क्या वो ट्रंप की इन बातों पर विश्वास करेंगे?'
जो बाइडन ने कहा, "बहुत सारे लोग महामारी के कारण मारे जा चुके हैं, और अगर ट्रंप ने अपने काम करने की रफ़्तार नहीं बढ़ाई और वे पहले से ज़्यादा स्मार्ट नहीं बने, आगे भी बहुत सारे लोग इस महामारी से मारे जाएँगे."
ट्रंप ने बहस के दौरान इस बात पर ज़ोर दिया कि जो बाइडन की रैलियों में बिल्कुल भीड़ नहीं दिखाई देती.
इसी दौरान उन्होंने कहा कि 'लोग चाहते हैं कि उनके काम-धंधों को खुलने दिया जाए.'
जिसके जवाब में जो बाइडन ने कहा, "लोग सुरक्षित भी रहना चाहते हैं."
इस बहस ने यह भी साफ़ किया कि दोनों नेताओं के बीच कोरोना वायरस महामारी और उससे लड़ने को लेकर कितना मतभेद है.

नस्लभेद का मुद्दा
नस्लभेद के मुद्दे और शहरी हिंसा के मामलों पर बात करने को लेकर जो बाइडन तो सहज दिखे, लेकिन ट्रंप को देखकर ऐसा लगा कि वे इन विषयों पर ज़्यादा बात नहीं करना चाहते.
जो बाइडन ने राष्ट्रपति ट्रंप पर नस्ल आधारित विभाजन भड़काने का आरोप लगाया.
उन्होंने कहा कि अमरीकी शहरों में अब नस्लवाद काम नहीं करता. ज़्यादातर बड़े शहर एकीकृत हैं. इनके लिए वास्तविक ख़तरा कोविड-19 और जलवायु परिवर्तन रहा है.
बहस के दौरान डोनाल्ड ट्रंप को एक मौक़ा दिया गया कि 'वे गोरे वर्चस्ववादियों और दक्षिणपंथी लोगों की हिंसा को अस्वीवार कर सकते हैं', जिसपर ट्रंप ने कहा कि 'वे ऐसा करेंगे, लेकिन फिर उन्होंने ऐसा करने की बजाय- सिर्फ़ एक दक्षिणपंथी संगठन 'द प्राउड बॉयज़' से ही कहा कि वो पीछे रहें.'
इसके बाद उन्होंने फ़ासीवाद-विरोधी कार्यकर्ताओं और एंटीफ़ा समर्थकों पर हमला करने की कोशिश की.
जॉर्ज फ़्लॉयड की मौत, अमरीका में संस्थागत नस्लवाद और पुलिस द्वारा की जाने वाली हिंसा पर सवाल उठना और उसके बाद पूरे देश में हुए विशाल प्रदर्शन - अमरीका में दशकों से ऐसा नहीं देखा गया. लेकिन मंगलवार की बहस में इतिहास के उन क्षणों पर बहुत ही कम प्रकाश डाला गया.

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ट्रंप ने दी काम की दलील
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने डिबेट के दौरान यह दलील दी कि उन्होंने अपने कार्यकाल में कम से कम चीज़ों को आगे बढ़ाया, बल्कि डेमोक्रेट लंबे वक़्त तक चीज़ों को लेकर बैठे रहे.
उन्होंने जो बाइडन को ताना मारा कि "मैंने अपने कार्यकाल के 47 महीने में जितना काम किया है, वो आपने 47 साल में भी नहीं किया."
जिसके जवाब में जो बाइडन ने कहा, "ट्रंप के कार्यकाल में अमरीका कमज़ोर हुआ है, बीमार हुआ है, ग़रीब हुआ है, पहले से ज़्यादा विभाजित दिखता है और पहले से ज़्यादा हिंसक भी."
साल 2016 में सारे अनुमानों के विपरीत डोनाल्ड ट्रंप अमरीका के राष्ट्रपति बने. पिछले साढ़े तीन सालों में उनका इस पद पर होना हर तरीक़े से चुनौतीपूर्ण रहा है. अपनी उस जीत को दोहराने के लिए ट्रंप के पास एक तरीक़ा यह है कि वो जो बाइडन के लंबे सार्वजनिक जीवन का इस्तेमाल, उन्हीं के ख़िलाफ़ करें.
बहस के दौरान ट्रंप के अन्य लक्ष्यों में से एक था बाइडन को उनकी पार्टी के लेफ़्ट विंग के रूप में चित्रित करना. लेकिन बाइडन ने इस मामले में बखूबी अपना बचाव किया.
जो बाइडन ने कुछ नीतियों पर खुलकर अपनी राय पेश की. ख़ासकर उन नीतियों के बारे में, जिन्हें उनकी पार्टी की ओर से पहले समर्थन मिला था, लेकिन अब बाइडन ने कहा है कि वो इन पर विचार कर रहे हैं.
बाइडन ने यह भी कहा कि जैसे-जैसे मतदान की तारीख़ नज़दीक आएगी, तब तक उनकी पार्टी का लेफ़्ट विंग भी उनके साथ मज़बूती से खड़ा होगा.

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बाइडन इस मुद्दे को भुना नहीं पाए
रविवार को जब न्यूयॉर्क टाइम्स अख़बार ने रिपोर्ट लिखी कि 'राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने कार्यकाल में बहुत कम टैक्स दिया या टैक्स की चोरी की', तो उस रिपोर्ट को एक बड़े धमाके की तरह देखा गया.
अख़बार ने कुछ दस्तावेज़ों के हवाले से लिखा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2016 में राष्ट्रपति का चुनाव लड़ने वाले वर्ष और उसके अगले साल व्हाइट हाउस में जाने के बाद केवल 750 अमरीकी डॉलर का आयकर अदा किया.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि ट्रंप ने पिछले 15 में से 10 सालों में कोई आयकर नहीं चुकाया.
राजनीतिक विश्लेषकों और भविष्यवक्ताओं ने सोचा कि ट्रंप पहली डिबेट के दौरान इस मुद्दे को आख़िर कैसे संभालेंगे. लेकिन जो बाइडन बहस के दौरान इस मुद्दे को उम्मीद के अनुसार बड़ा बना पाने में असमर्थ रहे.
डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी सफ़ाई में वही दलील दी जो उन्होंने 2016 में दी थी कि 'वे पिछले किसी भी राष्ट्रपति की तुलना में अमरीकी टैक्स सिस्टम के बारे में ज़्यादा बेहतर समझ रखते हैं, इसी वजह से वे टैक्स बचा पाते हैं.'
ट्रंप ने कहा कि उन्होंने अपने अनुभव के दम पर टैक्स अधिनियमों का फ़ायदा उठाया.
बहरहाल, आने वाले वक़्त में अगर टैक्स से जुड़ा यह मुद्दा थोड़ा बहुत उछलता है और चुनाव पर इसका ज़रा भी असर दिखता है, तो ऐसा कम से कम इस बहस की वजह से नहीं होगा.

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'इस चुनाव का अंत अच्छा नहीं होगा'
बहस का आख़िरी हिस्सा चुनाव की सुरक्षा और उससे जुड़ी चिंताओं पर केंद्रित था, जिसमें दोनों ही पक्षों ने यह चिंता ज़ाहिर की कि यह चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष नहीं होगा.
अगर इस बहस के मुद्दों पर जाया जाए तो आप कह सकते हैं कि बहस के ज़्यादातर हिस्सों में डोनाल्ड ट्रंप भ्रामक बातें कर रहे थे.
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि 'इस चुनाव का अंत अच्छा नहीं होगा'... और उनके इस बयान से दोनों ही पक्ष सहमति रख सकते हैं, हालांकि इस सहमति की वजहें अलग-अलग होंगी.
जो बाइडन ने इस बहस में अपना क़द बड़ा बनाने की कोशिश करते हुए कहा कि "वो उम्मीद करते हैं कि वोटों को गिनने और विजेता की घोषणा करने की पूरी प्रक्रिया निष्पक्षता और सम्मान के साथ निभाई जाए."

ऐसा लग रहा था कि उन्हें निष्कर्ष में कुछ और बातें भी कहनी हैं, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप ने उन्हें बीच में ही टोक दिया. इसके बाद क्रिस वैलेस ने बहस समाप्ति की घोषणा कर दी.
इस अव्यवस्थित शाम का अंत भी अचानक ही हो गया, और जो बातें हुईं उन्हें एक सार्थक बहस के रूप में नहीं देखा जा सकता. ऐसे कार्यक्रमों का असर चुनावों पर कम ही पड़ता है और ये बहस इतनी अव्यवस्थित थी कि इसने शायद ही मतदाताओं के निर्णय पर कोई असर डाला होगा.
ट्रंप के लिए शायद यह बुरी ख़बर है, क्योंकि उपनगरीय महिला मतदाता उनकी कमज़ोरी हैं, जिनका कहना है कि वो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तौर-तरीक़ों को ही नापसंद करती हैं.
लेकिन अगर ट्रंप का लक्ष्य यह था कि वो इस चुनाव अभियान को एक ऐसी शक़्ल दे दें जिसे कोई पहचान ही ना पाए और मतदाता इस कशमकश में ही रहें कि उन्हें इस चुनाव से क्या चाहिए और उनका इस चुनाव में क्या योगदान हो सकता है, तो उनकी इस शाम की मेहनत बेकार नहीं गई.
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