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इसराइल, यूएई और बहरीन में समझौता: ट्रंप ने कहा 'नए मिडिल ईस्ट की सुबह'
संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन ने इसराइल के साथ अपने रिश्ते सामान्य करने के लिए ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर कर दिया है.
दोनों खाड़ी देशों के समझौते के बाद अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे 'नए मध्य पूर्व की शुरुआत' कहकर इसकी तारीफ़ की.
उन्होंने समझौते पर दस्तख़त का एक वीडियो शेयर किया और लिखा, "दशकों के विभाजन और संघर्ष के बाद आज हमने एक नए मिडिल ईस्ट की शुरुआत की है. इसराइल, संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन के लोगों को बधाई. भगवान आप सबका भला करे!"
डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कार्यक्रम में शरीक़ होने वाइट हाउस पहुँचे लोगों को सम्बोधित करते हुए कहा, "आज दोपहर हम यहाँ इतिहास बदलने आए हैं. इसराइल, यूएई और बहरीन अब एक दूसरे के यहाँ दूतावास बनाएंगे, राजदूत नियुक्त करेंगे और सहयोगी देशों के तौर पर काम करेंगे. वो अब दोस्त हैं."
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फ़लस्तीन नाराज़, जताई आपत्ति
अमरीका, यूएई और बहरीन ने इस समझौते को ऐतिहासिक बताया है. संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन को इस समझौते तक पहुँचाने में डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका रही है.
इसराइल-फ़लस्तीनी संघर्ष को हल करने के मक़सद से जनवरी में अपनी मध्य पूर्व शांति योजना पेश करने वाले राष्ट्रपति ट्रंप ने दोनों समझौते कराने में मदद की है.
इसी के साथ यूएई और बहरीन 1948 में इसराइल की स्थापना के बाद उसे मान्यता देने वाले तीसरे और चौथे अरब देश बन गए हैं.
पिछले महीने संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई भी इसराइल के साथ अपने रिश्ते सामान्य करने पर सहमत हुआ था. तभी से ये अटकलें लगाई जा रही थीं कि बहरीन भी ऐसा ही कर सकता है.
समझौते के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने उम्मीद जताई कि बाकी अरब देश भी इस दिशा में आगे बढ़ेंगे. हालाँकि फ़लस्तीन के लोगों ने अरब देशों से अपील की है जब तक फ़लस्तीन और इसराइल के बीच विवाद का हल नहीं निकल जाता, उन्हें इंतज़ार करना चाहिए.
ट्रंप की कूटनीतिक उपलब्धि है ये समझौता
अरब देश दशकों से इसराइल का बहिष्कार करते आए हैं. ज़्यादातर अरब देशों कहते आए हैं कि वो इसराइल के साथ रिश्ते तभी सामान्य करेंगे जब वो फ़लस्तीन के साथ जारी अपने विवाद का निबटारा कर लेगा.
इसराइल के प्रधानमंत्री बेंज़ामिन नेतन्याहू ने भी इस समझौते का स्वागत किया. उनहोने कहा, "आज इतिहास के करवट की दिन है. ये शांति की नई सुबह लेकर आएगा."
वहीं, फ़लस्तीनी नेता महमूद अब्बास ने कहा कि मध्य पूर्व में शांति तभी आ सकती जब इसराइल वहां क़ब्ज़ा की गई जगहों से पीछे हट जाएगा.
समाचार एजेंसी एफ़पी के अनुसार समझौते पर हस्ताक्षर के बाद अब्बास ने कहा, "मध्य पूर्व में शांति, सुरक्षा और स्थिरता तभी आएगी जब यहां से इसराइल का क़ब्ज़ा ख़त्म हो जाएगा."
इसराइल की सेना के मुताबिक़ जब समझौते पर हस्ताक्षर का कार्यक्रम चल रहा था तभी गज़ा पट्टी से इसराइल की तरफ़ दो रॉकेट फेंके गए.
विदेश मामलों की बीबीसी संवाददाता बारबरा प्लेट कहती हैं कि राष्ट्रपति ट्रंप और उनके दामाद जैरेड कशनर के लिए ये कूटनीतिक उपलब्धि है, जिन्होंने बहरीन और यूएई के साथ समझौते में मदद की.
मध्य-पूर्व के हालिया दौरे से लौटने के बाद कशनर ने पत्रकारों से कहा कि ट्रंप प्रशासन ने पूरे इलाक़े में "एक सकारात्मक ऊर्जा का प्रसार" किया है जो "बहुत ही बढ़िया है."
ट्रंप को चुनाव में मिलेगा फ़ायदा?
वाइट हाउस की ओर से जारी बिंदुओं से संकेत मिलते हैं कि ट्रंप इन अंतरराष्ट्रीय समझौतों की उपलब्धियों को अपने चुनाव अभियान में इस्तेमाल करेंगे.
वो ख़ुद को मध्य पूर्व की शांति और समृद्धि के लिए अगुआ के तौर पर पेश करेंगे क्योंकि और भी अरब और मुस्लिम देश इसराइल के साथ रिश्ते सामान्य करने के लिए आगे आ सकते हैं. ये भी नहीं भूलना चाहिए कि उन्हें इस साल शांति के नोबेल पुरस्कार के लिए नामित किया गया है.
इससे वो "सदी के सौदे" यानी इसराइल-फ़लस्तीन शांति समझौते से सबका ध्यान हटा सकेंगे, जिसे वो हासिल करने में नाकाम रहे हैं. उस प्रोजेक्ट की बड़े पैमाने पर आलोचना की गई थी क्योंकि उसे ज़्यादा इसराइल के पक्ष में बताया जा रहा था और फ़लस्तीनियों ने उसे ख़ारिज कर दिया था.
बीबीसी संवाददाता बारबरा प्लेट कहती हैं कि बाहरी मसले पर फ़ोकस करके ट्रंप प्रशासन फ़लस्तीनियों को कहना चाहता है कि वो अब इसराइल के साथ क्षेत्र के संबंधों को निर्धारित नहीं कर सकते हैं.
अगस्त में यूएई की घोषणा से पहले, इसराइल का खाड़ी के अरब देशों के साथ कोई राजनयिक संबंध नहीं था. लेकिन हाल में ईरान को लेकर साझा चिंताओं की वजह से उनके बीच अनौपचारिक संपर्क हुआ.
पिछले महीने इसराइल और यूएई के बीच पहली आधिकारिक उड़ान भरी गई, जिसे रिश्ते सामान्य करने के क्रम में एक बड़ा कदम माना गया.
विमान में सवार अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद और उनके वरिष्ठ सलाहकार जैरेड कशनर ने कहा था कि "यूएई समझौते में मध्य पूर्व की पूरी दिशा बदलने की क्षमता है."
बहरीन ने पिछले हफ़्ते कहा था कि वो इसराइल और यूएई के बीच की उड़ानों को अपना हवाई क्षेत्र इस्तेमाल करने की अनुमति देगा.
1999 में उत्तर-पश्चिम अफ्रीका में अरब लीग के एक सदस्य मौरीटानिया ने इसराइल के साथ राजनयिक संबध स्थापित किए थे, लेकिन 2010 में संबंधों को तोड़ दिया था.
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