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बेरूत के उसी बंदरगाह पर लगी आग, जहाँ पहले हुआ था धमाका
लेबनान की राजधानी बेरूत के उसी बंदरगाह पर बड़ी आग लगने की ख़बर है जहाँ पिछले महीने एक 'बड़ा विस्फोट' हुआ था और उस घटना में कम से कम 190 लोगों की मौत हो गई थी.
स्थानीय अधिकारियों ने बताया है कि आग बंदरगाह के ड्यूटी फ़्री ज़ोन में स्थित किसी तेल और टायर के गोदाम में लगी जिसे बढ़ने से रोक लिया गया.
स्थानीय प्रशासन के मुताबिक़, इस घटना में किसी की जान नहीं गई, मगर आग इतनी भयंकर थी कि उससे उठने वाले काले धुएं ने बेरूत शहर के पूरे आसमान को अपने रंग में रंग लिया था.
हालांकि आग लगने की वजह का स्पष्ट रूप से पता नहीं चल पाया है.
बताया गया है कि दमकल विभाग की गाड़ियाँ मौक़े पर मौजूद हैं और लेबनान की सेना ने कहा है कि 'आग पर नियंत्रण के लिए हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल करना पड़ा.'
सोशल मीडिया पर सर्कुलेट हो रहे वीडियोज़ में देखा जा सकता है कि जान बचाने के लिए बहुत से लोग घटनास्थल से दूर भाग रहे हैं.
बेरूत में सिविल डिफ़ेंस के डायरेक्टर जनरल रेयमंड खटर ने कहा कि 'जिस जगह आग लगी है, उसके आसपास के सभी रास्ते बंद कर दिये गए हैं ताकि आग को बढ़ने से रोका जा सके.'
बंदरगाह से निदेशक बासिम अल-क़ैसी ने एक स्थानीय रेडियो चैनल से बातचीत में कहा कि आग वहाँ से लगनी शुरू हुई जहाँ खाना बनाने के तेल के बड़े पीपे रखे होते हैं. इसके बाद आग उस इलाक़े तक पहुँची जहाँ टायरों का गोदाम है.
उन्होंने कहा कि "अभी यह कहना जल्दबाज़ी होगी कि आग गर्मी की वजह से लगी या इसकी वजह कोई और ग़लती रही." उन्होंने कहा कि सरकारी अधिकारी इस मामले की जाँच कर रहे हैं.
स्थानीय प्रशासन भले ही कह रहा है कि स्थिति नियंत्रण में है, पर सोशल मीडिया के ज़रिये मालूम पड़ता है कि इस आग को लेकर लोगों में कितनी चिंता है, क्योंकि पिछले महीने हुए बड़े धमाके की यादें अब तक लोगों के ज़ेहन से निकली नहीं हैं.
4 अगस्त को बेरूत बंदरगाह पर रखे 2,750 टन अमोनियम नाइट्रेट में आग लगने के बाद धमाका हो गया था जिसकी वजह से कम से कम 190 लोगों की जान गई थी और बेरूत बंदरगाह का एक बड़ा इलाक़ा पूरी तरह तबाह हो गया था. बंदरगाह समेत आसपास के रिहायशी इलाक़ों में भी धमाके से काफ़ी तबाही हुई थी.
स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, हज़ारों लोग उस धमाके में घायल हुए थे और क़रीब तीन लाख लोगों को बेघर होना पड़ा था. इस घटना के कुछ ही दिन बाद, गुस्साये प्रदर्शनकारियों को शांत करने के लिए लेबनान की सरकार को इस्तीफ़ा देना पड़ा था.
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