तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ग्रीस के जहाज़ को डुबोना चाहते थे: जर्मन अख़बार का दावा

अर्दोआन

इमेज स्रोत, Getty Images

पूर्वी भूमध्य सागर में तुर्की और ग्रीस के बीच तनाव को लेकर जर्मनी के अख़बार 'डी वेल्ट' ने एक चौंकाने वाला दावा किया है. अख़बार ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन पूर्वी भूमध्य सागर में ग्रीस के साथ सैन्य झड़प चाहते थे.

'अर्दोआन का सुनियोजित युद्ध' शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में कहा गया है कि "अगर तुर्की के राष्ट्रपति की चलती तो उनकी नौसेना ने काफ़ी समय पहले भूमध्य सागर में ग्रीस के एक जहाज़ को डुबो दिया होता."

इन दिनों पूर्वी भूमध्य सागर में ग्रीस और तुर्की के बीच तनाव बना हुआ है. विवादित समुद्री इलाक़े में तुर्की की ओर से गैस के नए भंडार मिलने का दावा करने के बाद हालात गंभीर हो गए हैं.

जिन इलाक़ों में तुर्की ने गैस खोजी है, ग्रीस भी उन इलाक़ों पर अपना दावा करता है. दोनों देशों के प्राकृतिक संसाधनों के लिए सामान्य सी दिखने वाली होड़ से शुरू हुआ सिलसिला अब सैन्य कार्रवाई की धमकियों तक पहुंच गया है.

तुर्की और ग्रीस के बीच पैदा हुए तनाव को कम करने के लिए जर्मनी मध्यस्थता कर रहा है.

तुर्की का जहाज़ ओरुक रीज़ (फ़ाइल तस्वीर)

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, तुर्की का जहाज़ ओरुक रीज़ (फ़ाइल तस्वीर)

क्या लिखा है अख़बार ने

'डी वेल्ट' ने तुर्की की सेना के सूत्रों के हवाले से लिखा है, "अर्दोआन ने तुर्की के जनरलों से कुछ दिन पहले कहा था कि वे ग्रीस के एक जहाज़ को डुबो दें और यह सुनिश्चित करें कि इस प्रक्रिया में किसी की मौत न हो."

मंगलवार को छपी अख़बार की रिपोर्ट में लिखा गया है कि "जब जनरलों ने इससे इनकार किया तो किसी ने ग्रीस के लड़ाकू विमान को मार गिराने का सुझाव दिया और कहा कि पायलट ख़ुद को बचा सकता है. मगर एक बार फिर तुर्की के जनरल इस पर सहमत नहीं हुए थे."

इस रिपोर्ट के मुताबिक़, तुर्की चाहता था कि यहां पर तनावपूर्ण हालात पैदा हों मगर किसी की जान लिए बिना.

वीडियो कैप्शन, अर्दोआन ने कहा, तुर्की एक क़दम भी नहीं हटेगा पीछे

'डी वेल्ट' का कहना है कि इन योजनाओं को जनरलों ने खारिज कर दिया वरना पूर्वी भूमध्य सागर में आज युद्ध छिड़ा होता.

जर्मन अख़बार की यह रिपोर्ट उस समय आई है जब फ्रांस भी ग्रीस के पक्ष में उतर आया है और यूएई ने अपने लड़ाकू जहाज़ों को ग्रीस के समर्थन में तैनात किया है.

ग्रीस, फ़्रांस और तुर्की तीनों नेटो के सदस्य हैं फिर भी इस मामले पर एक-दूसरे के ख़िलाफ़ लामबंद हो चुके हैं.

अर्दोआन और मैक्रों

इमेज स्रोत, Getty Images

धमकियों का सिलसिला

पिछले दिनों तुर्की और ग्रीस के बीच लड़ाकू जहाज़ों को लेकर भी विवाद हो गया था. तुर्की ने कहा था कि क्रीट द्वीप से ग्रीस के छह एफ़-16 जंगी जहाज़ों ने उस इलाक़े में घुसने की कोशिश की जहां तुर्की अपना ड्रिलिंग का काम कर रहा है. तुर्की का दावा था कि उसके एफ़-16 जंगी जहाज़ों ने ग्रीस के लड़ाकू विमानों को रोक दिया था.

तुर्की ने इस संबंध में वीडियो भी जारी किया था. मगर ग्रीस के मीडिया ने तुर्की पर आरोप लगाते हुए कहा था कि क्रीट में बेस पर लौट रहे उसके एफ़-16 विमानों का रास्ता तुर्की के फाइटर जेट्स ने रोका था.

फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने पूर्वी भूमध्य सागर में तुर्की के जहाज़ के आगे बढ़ने पर कड़ी प्रतिक्रिया दी थी और कहा था कि "तुर्की अपने ख़िलाफ़ कार्रवाई चाहता है, वो बातचीत का रास्ता समझना नहीं चाहता."

वीडियो कैप्शन, तुर्की और ग्रीस की लड़ाई में फ़्रांस किस तरह उतरा?

ग्रीस और फ्रांस ने इस तनाव के बीच इस इलाक़े में संयुक्त युद्धाभ्यास भी किया था. इसे लेकर तुर्की ने अधिकारिक चेतावनी जारी करते हुए कहा था कि जहाज़ इस क्षेत्र से दूर रहें.

तनाव बढ़ने के बाद अर्दोआन ने कहा था, "अगर फ़्रांस और ग्रीस दोनों से लड़ने का वक़्त आएगा तो हम बलिदान देने में संकोच नहीं करेंगे. सवाल यह है कि भूमध्यसागर में ये हमारे ख़िलाफ़ खड़े होंगे तो क्या ये बलिदान के लिए तैयार हैं?"

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)