इसराइल और यूएई में शांति समझौते के बाद पहली ऐतिहासिक उड़ान

इसराइली विमान

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इसराइल और संयुक्त अरब अमीरात के बीच सोमवार को पहली कमर्शियल फ़्लाइट शुरू हुई. दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध शुरू होने की घोषणा के बाद इसे काफ़ी बड़ा क़दम माना जा रहा है.

इसराइल के एलअल विमान से इसराइल और अमरीका के अधिकारी तीन घंटे की यात्रा कर यूएई पहुँचे. इस विमान को सऊदी अरब के हवाई क्षेत्र से जाने की अनुमति दी गई जहाँ से आम तौर पर इसराइली विमान नहीं उड़ते हैं.

फ़्लाइट नंबर एलवाई971 में अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद और उनके वरिष्ठ सलाहकार जारेड कुशनर के साथ इसराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मीर बेन शब्बात भी थे.

फ़्लाइट का नंबर यूएई के डायलिंग कोड पर है. जबकि रिटर्न फ़्लाइट का नंबर है एलवाई972, जो इसराइल का इंटरनेशनल डायलिंग कोड है.

वर्ष 1948 में इसराइल के गठन के बाद यूएई तीसरा अरब देश है, जिसने इसराइल को मान्यता दी है.

शनिवार को संयुक्त अरब अमीरात ने इसराइल का बहिष्कार करने वाले क़ानून को ख़त्म कर दिया, जो 1972 से लागू था.

इसी महीने दोनों देशों के बीच सीधी टेलिफ़ोन सेवा भी बहाल हो गई है.

समझौता

ट्रंप के वरिष्ठ सलाहकार जारेड कुशनर भी विमान में मौजूद

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13 अगस्त को अमरीका की मध्यस्थता से दोनों देशों में हुए समझौते की घोषणा की गई थी.

माना जाता है कि राष्ट्रपति ट्रंप के वरिष्ठ सलाहकार जारेड कुशनर ने ही गुप्त वार्ताएँ की थी, जिसकी वजह से इसराइल और यूएई में समझौता हुआ.

यूएई जा रही संयुक्त टीम वहाँ सरकारी प्रतिनिधियों से मिलेगी और दोनों देशों के बीच सहयोग के क्षेत्रों पर चर्चा होगी.

हिब्रू में लिखे ट्वीट में इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने विमान सेवा शुरू होने की सराहना की और कहा के शांति के लिए शांति का उदाहरण है.

बिन्यामिन नेतन्याहू

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इसराइल और यूएई में समझौते की जहाँ कई देश सराहना कर रहे हैं और उन्होंने इसका स्वागत किया है. फ़लस्तीनी नेतृत्व इसे धोखा कह रहा है. फ़लस्तीनी नेताओं का कहना है कि अगल फ़लस्तीनी राष्ट्र के गठन के बिना यूएई का इसराइल को मान्यता देना धोखा है.

यूएई के साथ समझौते के बदले इसराइल ने पश्चिमी तट के कुछ इलाक़ों के विलय की विवादित योजना को टालने पर सहमति जताई. फ़लस्तीनी पश्चिमी तट पर अपना दावा करते हैं और एक अलग राष्ट्र के गठन की दिशा में वे इसे अहम मानते हैं.

यूएई से पहले मिस्र और जॉर्डन ने इसराइल को आधिकारिक रूप से मान्यता दी थी. इसराइल और मिस्र के बीच 1978 में संधि हुई थी, जबकि जॉर्डन के साथ इसराइल का शांति समझौता 1994 में हुआ था.

पश्चिमोत्तर अफ़्रीकी देश मौरिटानिया ने 1999 में इसराइल के साथ राजनयिक संबंध स्थापित किया था, लेकिन 2010 में उसने ये संबंध तोड़ लिया. मौरिटानिया अरब लीग का सदस्य देश है.

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