इसराइल-यूएई समझौते ने मुसलमान देशों को बांटाः पाक उर्दू प्रेस रिव्यू

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- Author, इकबाल अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों में इस हफ़्ते कोरोना के अलावा भारत के कश्मीर और यूएई-इसराइल समझौते से जुड़ी ख़बरें सुर्ख़ियों में थीं. सबसे पहले बात इसराइल-यूएई समझौते की.
इसराइल और संयुक्त अरब अमीरात के बीच गुरुवार को हुए ऐतिहासिक समझौते की ख़बर ने जितनी सुर्ख़ियां इसराइल और यूएई में बटोरी, पाकिस्तान में भी ये ख़बर कम-ओ-बेश उतनी ही छाई रही.
इसराइल और यूएई के समझौते के मुताबिक़ इसराइल वेस्ट बैंक के बड़े हिस्सों को मिलाने की अपनी योजना फ़िलहाल स्थगित कर देगा और दोनों देशों के बीच राजनयिक रिश्ते शुरू हो जाएंगे.
अख़बार जंग ने सुर्ख़ी लगाई है, ''मुस्लिम दुनिया विभाजित, तुर्की और ईरान की तीव्र, पाकिस्तान की सधी हुई प्रतिक्रिया, नज़रें सऊदी अरब पर.''
अख़बार लिखता है कि इसराइल और यूएई के बीच हुए समझौते ने पूरी इस्लामी दुनिया को आपस में बांट दिया है. तुर्की और ईरान ने इस समझौते के कारण यूएई पर फ़लस्तीनी हितों के साथ ग़द्दारी करने का आरोप लगाया है.
अख़बार के मुताबिक़ तुर्की ने कहा है कि इतिहास और इलाक़े के लोगों का ज़मीर इसे नहीं भूलेगा और यूएई के इस रवैये को कभी नहीं भूलेंगे. अख़बार का दावा है कि तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने यूएई से राजनयिक संबंध ख़त्म करने के भी संकेत दिए हैं. अर्दोआन ने इस्तांबुल में पत्रकारों से बात करते हुए कहा था कि तुर्की अपने राजदूत को यूएई से वापस बुला सकता है.

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उधर ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने कहा कि फ़लस्तीनी जनता की मर्ज़ी के बग़ैर किया गया कोई भी फ़ैसला स्वीकार नहीं होगा. रूहानी ने कहा कि यूएई ने इस क़दम से फ़लस्तीनी अवाम की भावना को ठेस पहुंचाया है.
रूहानी ने कहा कि यूएई के शासक समझते हैं कि अमरीका और इसराइल से संबंध बढ़ा कर उनकी सुरक्षा और आर्थिक स्थिति में बेहतरी आएगी तो यूएई के शासकों को ये समझना बिल्कुल ग़लत है. अख़बार दुनिया के अनुसार ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि ये समझौता एक खंजर है जिसे यूएई ने फ़लस्तीनी जनता और मुसलमानों की कमर में घोंप दिया है.
अख़बार नवा-ए-वक़्त ने अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद और व्हाइट हाउस के सलाहकार जैरेड कशनर के हवाल से कहा है कि अगले तीन महीने के अंदर एक और अरब देश इसराइल के साथ समझौता करेगा. अख़बार ने इसराइली मीडिया का हवाला देते हुए लिखा है कि वो अगला अरब देश बहरीन होगा.
लेकिन यूएई ने इसका बचाव करते हुए कहा है कि यूएई ने अपने राष्ट्रीय हित को देखते हुए इसराइल के साथ ये समझौता किया है. मिस्र ने भी समझौते का स्वागत किया है. मिस्र के राष्ट्रपति अब्दुल फ़तह अल-सीसी ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि ये समझौता मध्य-पूर्व में शांति लाने में मदद करेगा.

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पाकिस्तान ने इस पर बहुत ही सधी हुई प्रतिक्रिया दी है. पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस समझौते के दूर तक परिणाम होंगे. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ज़ाहिद हफ़ीज ने कहा कि ''फ़लस्तीनियों के अधिकार में उनके आत्मनिर्णय का अधिकार भी शामिल है और दूसरी तरफ़ मध्य-पूर्व में शांति और स्थिरता भी पाकिस्तान की प्राथमिकता है.''
ओमान और बहरीन ने भी समझौते का स्वागत किया है लेकिन सबकी निगाहें सऊदी अरब पर टिकी हुई हैं. अख़बार के मुताबिक़ सऊदी अरब के लिए कोई भी फ़ैसला लेना बहुत मुश्किल होगा और विशेषज्ञों का कहना है कि सऊदी अरब बहुत ही संभल कर और विचार विमर्श करने के बाद कोई फ़ैसला करेगा.

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लेकिन पाकिस्तान के एक बड़े धार्मिक और राजनीतिक संगठन जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम ने कहा कि यूएई का इसराइल के साथ समझौते का फ़ैसला इस्लामी अवाम का फ़ैसला नहीं है. संगठन के प्रमुख मौलान फ़ज़लुर्रहमान ने कहा किया कि ये समझौता फ़लस्तीनी जनता के संघर्ष के ठीक विपरीत है और ये फ़ैसला अरब दुनिया या इस्लामी दुनिया का फ़ैसला नहीं है.
पाकिस्तान का स्वतंत्रता दिवस

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14 अगस्त को पाकिस्तान ने अपना 74वां स्वतंत्रता दिवस मनाया. अख़बार दुनिया के अनुसार इस मौक़े पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कहा कि वो अब पाकिस्तान के संस्थापक क़ायद-ए-आज़म मोहम्मद अली जिन्नाह और शायर अल्लामा इक़बाल के सपनों के पाकिस्तान की ओर चल पड़े हैं जहां क़ानून का राज होगा और सबको बराबर का अधिकार होगा. इमरान ख़ान ने भारत प्रशासित कश्मीरियों के बारे में कहा कि पूरा पाकिस्तान उनके साथ खड़ा है और वो राजनयिक, राजनीतिक और नैतिक समर्थन जारी रखेगा.

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उधर पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के राष्ट्रपति मसूद ख़ान ने कहा कि भारत प्रशासित कश्मीर के बग़ैर पाकिस्तान अधूरा है. अख़बार नवा-ए-वक़्त के मुताबिक़ पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस पर बोलते हुए राष्ट्रपति मसूद ख़ान ने कहा, "पाकिस्तान के नए नक़्शे ने 1947 वाली कश्मीरी रियासत की अक्कासी की है और उस नक़्शे के एक हिस्से पर जो कि हमारे जिस्म का हिस्सा है, उसपर दहशतगर्दी हो रही है. भारत ज़ुल्म ढा रहा है, अब हमें कड़ा रवैया अख़्तियार करना होगा."

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पाकिस्तान ने एक मंत्री ने कश्मीर के मुद्दे पर अपने ही विदेश मंत्रालय की जमकर आलोचना की.
अख़बार जंग के अनुसार पाकिस्तान की मानवाधिकार मंत्री शीरिन मज़ारी ने कहा कि प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने अपने भाषणों और बयान से अकेले पूरे कश्मीर की नैरेटिव बदल दी है लेकिन विदेश मंत्रालय और कुछ दूसरी संस्थाओं ने इमरान ख़ान की मेहनत और कश्मरीरियों के संघर्ष को नाकाम बना दिया है.
शीरिन मज़ारी का कहना था, "विदेश मंत्रालय काम करता, तो दुनिया कश्मीर पर हमारी बात ज़रूर सुनती. लेकिन हमारे राजनियक आराम, थ्रि पीस सूट, कलफ़ लगे कपड़े पहनने और टेलिफ़ोन करने के सिवा कुछ करने को तैयार नहीं हैं. पाकिस्तान क्या बरकीना फ़ासो जितना राजनयिक असर भी नहीं रखता जिसने अमरीका के ख़िलाफ़ प्रस्ताव पास करा लिया."
और अब बात कोरोना की

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पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने दावा किया है कि पाकिस्तान ने जिस तरह से कोरोना का मुक़ाबला किया है उस तरह से शायद ही दुनिया के किसी दूसरे देश ने किया होगा. अख़बार दुनिया के अनुसार पाकिस्तान में कोरोना वायरस के फैलने पर काफ़ी हद तक क़ाबू पा लिया गया है.
अख़बार के अनुसार पाकिस्तान में अब तक कोरोना संक्रमितों की संख्या 288047 हो गई है, जिनमें से 265624 लोग पूरी तरह रिकवर हो चुके हैं. पाकिस्तान में अब तक 6162 लोग कोरोना से मारे जा चुक हैं. एक्टिव कोरोना संक्रमित लोगों की तादाद अब सिर्फ़ 16261 रह गई है और वेंटिलेटर पर रहने वाले मरीज़ों की संख्या 150 से भी कम हैं.
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