बेरूत ब्लास्टः मिसाइल अटैक से परमाणु बम तक, साज़िश की ये कहानियां कैसे फैलीं?

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- Author, मैरियाना स्प्रिंग
- पदनाम, विशेष संवाददाता, बीबीसी न्यूज़
बेरूत में हुए धमाकों की शुरुआती रिपोर्टें सोशल मीडिया पर विस्फोट के कुछ ही लम्हों बाद शेयर की जानें लगी थीं.
इनमें से ज़्यादातर वीडियो प्रामाणिक लग रही थीं. उन्हें बेरूत के लोगों ने अपने घरों से रिकॉर्ड किया था.
लेकिन धमाके की वजह को लेकर अफ़वाहों का बाज़ार इतनी तेज़ी से गर्म हुआ कि व्हॉट्सऐप और ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कई तरह की बातें कही-सुनी जाने लगीं.
क्या आपको अंदाज़ा है कि इंटरनेट की दुनिया में बेरूत के धमाकों को लेकर किस तरह की भ्रामक जानकारियां फैलाई गईं?
बेरूत ब्लास्ट से जुड़ी ऐसे ही कुछ फ़ेक न्यूज़ के बारे में हम आगे बात करेंगे.
पटाख़ों से परमाणु बम तक
सोशल मीडिया पर जो वीडियो शेयर किए जा रहे थे, उनमें पहले छोटे-छोटे धमाके दिखाई दे रहे थे, फिर आग लगी और उसके बाद ज़बर्दस्त धमाका हुआ.
शायद यही वजह थी कि ट्विटर पर कुछ लोग ये कहने लगे कि पटाख़ा फ़ैक्ट्री में ये धमाका हुआ है. ऐसे दावे उस वक़्त सच्चे भी लग रहे थे. लेकिन ट्विटर पर कुछ ट्वीट्स में ये कहा जाने लगा कि धमाका परमाणु बम की वजह से हुआ है.
इसकी वजह थी वीडियो फ़ुटेज में कुकुरमुत्ते जैसे आकार वाले बादल का बनना.

एक वेरिफ़ाइड ट्विटर हैंडल ने ट्वीट किया गया कि धमाका परमाणु बम के कारण हो सकता है. हालांकि वो ट्वीट बाद में डिलीट कर दिया गया.
जिस वेरिफ़ाइड ट्विटर हैंडल से परमाणु बम वाला दावा किया गया था, उसके एक लाख से ज़्यादा फॉलोअर्स थे और उस ट्वीट को हज़ारों की संख्या में शेयर और लाइक्स मिले थे.
हथियार विशेषज्ञों ने भी ये कहने में देरी नहीं कि ये धमाका किसी न्यूक्लियर डिवाइस की वजह से हुआ है.
उनका कहना था कि धमाके के बाद सफ़ेद धुआं उठता है और अचानक से गर्मी बढ़ जाती है और इससे लोगों के गंभीर रूप से जलने का ख़तरा रहता है.
साथ ही कुकुरमुत्ते जैसे बादल परमाणु बम के धमाकों के मामलों में कोई अनूठी बात नहीं है. विशेषज्ञों का कहना है कि नम हवा के एक जगह पर इकट्ठा हो जाने पर ये बादल चलता है.

'बम या मिसाइल अटैक'
बेबुनियाद दावे सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैलते रहे. परमाणु बम का इल्ज़ाम अमरीका, इसराइल या हेज़बुल्लाह पर लगाया गया.
ऐसी ख़बरें उन वेबसाइट्स पर पोस्ट की गईं जो ख़ास एजेंडे को बढ़ाने वाली थीं. साथ ही कुछ सार्वजनिक शख़्सियतों ने भी इस तरह की बातें सोशल मीडिया पर शेयर या पोस्ट किया.
इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक डॉयलॉग की रिसर्च के मुताबक़ फेसबुक, फोरचान, रेडिट और टेलीग्राम जैसे मैसेजिंग ऐप्स पर धुर दक्षिणपंथी समूहों ने साज़िश की इन कहानियों को फैलाया.
ऐसे संदेशों में ज़्यादातर ये झूठे दावे किए गए कि ये हमला इसराइल की ओर से किया गया है.
ये कहा गया कि हेज़बुल्लाह के हथियार डीपो पर इसराइल ने कोई बम गिराया है या फिर मिसाइल से हमला किया है.
इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक डॉयलॉग के क्लोए कॉलिवर ने बीबीसी न्यूज़ को बताया, "हमने भ्रामक सूचनाएं देने वाले स्रोतों को देखा है. इनमें धुर दक्षिणपंथी ऑनलाइन नेटवर्क हैं. ये लोग ब्लास्ट की प्रकृति और मक़सद को लेकर बेबुनियाद क़िस्म के दावे फैला रहे थे. इसराइल या दूसरे देशों को इस धमाके से जोड़ने के लिए कहानियां बुनी गई."
लेबनान और इसराइल दोनों ने ही ऐसी बातों से इनकार किया है कि इसराइल का इस घटना से कोई लेनादेना है.
साज़िश की कहानियों को हवा देने वालों ने फेसबुक पर धमाकों को लेकर कई तरह झूठे दावे किए. उन्होंने कहा कि ये हमले 'सरकार और सेंट्रल बैंकिंग सिस्टम' के बीच जारी लड़ाई से जुड़ा है.
इनमें QAnon की कॉन्सपिरेसी थिअरी के समर्थक भी शामिल थे. इस विचार के मानने वालों की राय है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सरकार, बिज़नेस और मीडिया में शैतान की पूजा करने वालों और बच्चों का शोषण करने वालों के ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ रहे हैं.
इसराइल के प्रधानमंत्री ने ब्लास्ट की जगह का ज़िक्र नहीं किया था

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इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू की तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट करके ये दावा किया गया कि वे मंगलवार को हुए बेरूत ब्लास्ट की जगह की तरफ़ इशारा कर रहे थे.
इस दुष्प्रचार के लिए बिन्यामिन नेतन्याहू की साल 2018 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में उनके संबोधन के दौरान की तस्वीरें इस्तेमाल की गईं.
कुछ सोशल मीडिया यूजर्स इन तस्वीरों को सबूत के तौर पर पेश कर रहे थे. उनका ये दावा था कि इन धमाकों के पीछे इसराइल का हाथ है.
बिन्यामिन नेतन्याहू की वो तस्वीरें तो सहीं थीं लेकिन उनका इस्तेमाल संदर्भ से हटकर किया जा रहा था.
नेतन्याहू दरअसल बेरूत के एक अन्य इलाक़े की ओर इशारा कर रहे थे जिनके बारे में उनका कहना था कि वहां हेज़बुल्लाह ने अपने हथियार छुपा कर रखे हैं.
नेतन्याहू जिस जगह की तरफ़ इशारा कर रहे थे, वो बेरूत ब्लास्ट की जगह से कई किलोमीटर दूर है.

ट्रंप की टिप्पणी
संभावित हमले की अफ़वाहों ने उस वक़्त और ज़ोर पकड़ लिया जब राष्ट्रपति ट्रंप ने व्हॉइट हाउस के प्रेस कॉन्फ्रेंस में बेरूत ब्लास्ट को 'एक दिल दहला देने वाला हमला' क़रार दिया.
इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक डॉयलॉग की रिसर्च से ये पता चला कि ट्रंप की टिप्पणी का कुछ धुर दक्षिणपंथी गुटों ने सोशल मीडिया पर तोड़मरोड़ कर 'चरमपंथी हमले' से जोड़कर प्रचार किया.
टेलीग्राम पर एक पोस्ट में ये दावा किया गया, "ट्रंप ने कहा कि ये 'दिल दहला देने वाले चरमपंथी हमले' की तरह लगता है."
जबकि राष्ट्रपति ट्रंप ने केवल इतना कहा था कि ये 'एक दिल दहला देने वाले हमले' की तरह लगता है.
क्लोए कॉलिवर कहते हैं, "ट्रंप की टिप्पणी को आधार बनाकर किए गए इन दावों ने साज़िश की कहानियों और भ्रामक सूचनाओं को और हवा दी. इससे संकट के समय ग़लत भाषा और संवाद का ख़तरा बढ़ जाता है."
सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट में ये भी दावा किया गया कि ट्रंप ने पहले ही धमाके की चेतावनी दी थी.
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