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कोरोना वायरस सिंगापुर में भयानक आर्थिक मंदी का बन रहा है कारण
कोरोना वायरस की मार झेल रही दुनिया में सिंगापुर को उन मुल्कों में गिना जा रहा है जिन्होंने इस महामारी के ख़िलाफ़ शानदार क़दम उठाए हैं.
सिंगापुर को अपनी इन कोशिशों के लिए वैश्विक मंचों पर तारीफ़ भी मिली है.
लेकिन अब इन क़दमों के चलते सिंगापुर की अर्थव्यवस्था तेज़ी से मंदी की ओर बढ़ रही है.
वायरस के प्रसार को रोकने के लिए सिंगापुर में अभी भी एक तरह का लॉकडाउन जारी है. इस वजह से रिटेल इंडस्ट्री और व्यापारिक संस्थानों में काम पहले की तरह नहीं हो पा रहा है.
कैसी हालत में है सिंगापुर की अर्थव्यवस्था
सिंगापुर की अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर लगातार गिरती जा रही है. इस तिमाही में सिंगापुर अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर पिछली तिमाही के मुक़ाबले 41.2 फ़ीसद घट गई है.
सिंगापुर के अधिकारियों की मानें तो 1965 में मलेशिया से आज़ाद होने के बाद ये आर्थिक मंदी सिंगापुर के इतिहास का सबसे बुरा रिसेशन यानी आर्थिक शिथिलता होगी.
ये आंकड़े बताते हैं कि इस महामारी के चलते आर्थिक मंदी कितनी भयानक हो सकती है जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है.
आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि दूसरी तिमाही में सिंगापुर की जीडीपी में पिछले साल इसी समय के मुक़ाबले 12.6 फ़ीसद का संकुचन आया है.
सिंगापुर उन पहले देशों में शामिल हैं जिन्होंने कोरोना वायरस और लॉकडाउन के दौर वाले आर्थिक वृद्धि के आंकड़े जारी कर दिए हैं.
ये आंकड़े बताते हैं कि कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए लगाया गया लॉकडाउन वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं को किस हद तक प्रभावित कर सकता है.
पहली तिमाही में क्या थी सिंगापुर की हालत
साल 2020 की पहली तिमाही ख़त्म होने पर पिछले साल की इसी तिमाही से आकलन करने पर पता चला था कि सिंगापुर की जीडीपी में 2.2 फ़ीसद की गिरावट आई थी.
मार्च में ख़त्म होने वाली पहली तिमाही की तुलना पिछली तिमाही के नतीजों से करने पर 10.6 फ़ीसद की गिरावट दर्ज की गई थी.
ये आंकड़े संकेत देते हैं कि इस महामारी ने सिंगापुर की अर्थव्यवस्था को दूसरी एशियाई अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में ज़्यादा नुक़सान पहुंचाया होगा.
वैश्विक व्यापार ने सिंगापुर के निर्यात पर निर्भर रहने वाले निर्माताओं पर भारी असर डाला है. इसके साथ ही कंस्ट्रक्शन का काम भी रुका हुआ है. और रिटेलर्स ने अपने सामान की बिक्री में रिकॉर्ड स्तर पर गिरावट देखी है.
इस ट्रेंड के उलट जापान की जीडीपी में इस तिमाही में पिछली तिमाही की तुलना में 20 फ़ीसदी का संकुचन आया है. हालांकि, इस हफ़्ते ये आंकड़े बता सकते हैं कि चीनी अर्थव्यवस्था एक बार फिर वृद्धि के रास्ते पर आ गई है.
लेकिन सिंगापुर के आंकड़े सत्ताधारी दल पिपुल्स एक्शन पार्टी पर दबाव डालेगी जिसने पिछले हफ़्ते 55 सालों में अपने सबसे बुरे चुनावी प्रदर्शन का मुंह देखा है.
सरकार ने पहले ही 67 अरब अमरीकी डॉलर या सिंगापुर की जीडीपी की लगभग बीस फ़ीसद राशि को स्टिमुली पैकेज के रूप में देने का फ़ैसला किया है ताकि लॉकडाउन की मार झेल रहे परिवार और व्यापारिक संस्थानों को राहत मिल सके.
सिंगापुर ने बीती 1 जून से लॉकडाउन में ढील देना शुरू कर दिया है. बीते 19 जून को सिंगापुर लॉकडाउन हटने के दूसरे चरण में पहुंच चुका है. इसके बाद ज़्यादातर दुकानें और रेस्त्रां अपना काम शुरू कर सकते हैं. हालांकि, सोशल डिस्टेंसिंग के नियम अभी भी जारी हैं.
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