हाफ़िज़ सईद के बैंक खाते पर पाबंदी हटाने की ख़बर बेबुनियाद: पाकिस्तान

हाफ़िज़ सईद

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    • Author, शुमाइला जाफ़री
    • पदनाम, बीबीसी संवादादाता, इस्लामाबाद

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने जमात-उद-दावा के पाँच शीर्ष नेताओं के बैंक खातों पर लगी पाबंदी हटा लेने की ख़बरों का खंडन किया है.

मंत्रालय ने इस तरह की ख़बरों को बेबुनियाद क़रार दिया है.

पाकिस्तान के एक बड़े अंग्रेज़ी अख़बार द न्यूज़ में रविवार को एक ख़बर छपी थी जिसमें दावा किया गया था कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध लगाने संबंधी कमेटी ने हाफ़िज़ सईद समेंत जमात-उद-दावा के पाँच शीर्ष नेताओं के बैंक खातों पर लगी पाबंदी को हटाने के फ़ैसले को अपनी मंज़ूरी दे दी है.

एजाज़ सैयद की बाइलाइन से छपी ख़बर में कहा गया था कि हाफ़िज़ सईद, अबदुल सलाम भुट्टवी, हाजी एम अशरफ़, ज़फ़र इक़बाल और यहया मुजाहिद के बैंक खातों पर लगी पाबंदी हटा ली गई है. ये पाँचो नेता टेरर फ़ंडिंग के मामले में फ़िलहाल क़ैद की सज़ा काट रहे हैं.

उन पाँचों पर पंजाब सरकार के आतंकनिरोधी विभाग ने केस किया था.

एजाज़ सैयद एक वरिष्ठ पत्रकार हैं और पिछले दो दशक से आंतरिक और चरमपंथी गतिविधियों के मामलों को कवर करते रहे हैं.

संयुक्त राष्ट्र

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कब का है मामला

बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा, "जमात-उद-दावा के नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र से अपील की थी कि उनके बैंक खातों पर पिछले साल लगी पाबंदी हटा ली जाए ताकि वो अपने परिवार का ख़र्च चला सकें."

उनके मुताबिक़, "संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के नियमों के अंदर एक क़ानूनी प्रावधान है, जो चरमपंथियों को उनके बैंक खातों पर लगी पाबंदी को हटाने के लिए अपील करने की अनुमति देता है ताकि वो अपने परिवार का ख़र्च चला सकें. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को अधिकार है कि वो अपील को स्वीकार करे या उसे ख़ारिज कर दे. इस मामले में उनकी अपील की स्वीकार कर ली गई."

पत्रकार एजाज़ सैयद ने ये भी कहा कि जमात-उद-दावा के नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ये अपील पाकिस्तान सरकार की मदद से उनके विदेश मंत्रालय के ज़रिए की थी.

जमात-उद-दावा के एक नेता का नाम ज़ाहिर किए बिना एजाज़ सैयद ने अपनी ख़बर में लिखा है जमात के पाँचों नेताओं ने अलग-अलग अपील की थी और पहले वो ऐसा नहीं करना चाहते थे लेकिन फिर उन्हें ऐसा करने के लिए सलाह दी गई.

जमात-उद-दावा के नेता या एजाज़ सैयद ने ये नहीं बताया कि उन्हें अपील करने की सलाह किसने दी थी.

बीबीसी से बातचीत के दौरान एजाज़ सैयद ने कहा, "जमात-उद-दावा के प्रति पाकिस्तान सरकार का रवैया हमेशा से सकारात्मक रहा है, सरकार उन्हें चरमपंथी संगठन नहीं मानती है."

एजाज़ सैयद के अनुसार बैंक खाते दोबारा खुल जाने से जमात-उद-दावा के एक चरमपंथी संगठन की जो अंतरराष्ट्रीय छवि है उसमें कोई बदलाव नहीं होगा.

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता आयशा फ़ारूक़ी ने एजाज़ सैयद की ख़बर को बेबुनियाद कहते हुए ख़ारिज कर दिया.

उनके अनुसार सच्चाई ये है कि बैंक खातों पर लगी पाबंदी हटाने का फ़ैसला संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध लगाने वाली कमेटी की 15 अगस्त 2019 में होने वाली बैठक में लिया गया था. इस बैठक में पाकिस्तान से आए पत्र पर विचार किया गया और किसी भी सदस्य की तरफ़ से कोई आपत्ति नहीं होने के कारण पाकिस्तान से आई अपील को उसी बैठक में स्वीकार कर लिया गया था.

मुंबई हमला

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मुंबई हमलों के बाद लगी पाबंदी

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने पिछले साल सितंबर में ही इसकी जानकारी सार्वजनिक कर दी थी कि जमात-उद-दावा के नेताओं के कहने पर पाकिस्तान सरकार ने संयुक्त राष्ट्र कमेटी से बैंक खातों पर लगी पाबंदी हटाने की अपील की थी, जिसे स्वीकार कर लिया गया है.

मुंबई हमलों के बाद जमात-उद-दावा के नेताओं के बैंक खातों पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव संख्या 1267 के तहत पाबंदी लगाई गई थी.

संयुक्त राष्ट्र ने इसे चरमपंथी संगठन घोषित कर दिया था. पाकिस्तान ने भी 2019 में इस संगठन को बैन कर दिया था.

हाफ़िज़ सईद ने लाहौर की यूनिवर्सिटी ऑफ़ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलोजी में 25 साल तक पढ़ाया है और रिटायर होने के बाद उन्हें सरकार से पेंशन मिलती है.

विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ने इस बात की पुष्टि की है कि यूएन कमेटी ने पिछले साल बैंक खातों पर लगी पाबंदी हटा ली थी. उन्होंने इस बात पर नाराज़गी जताई कि भारतीय मीडिया का एक हिस्सा इस मामले को बग़ैर किसी कारण राजनीतिक शक्ल दे रहा है.

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