कोरोना संकट में अरबपति कैसे बना ये बिज़नेसमैन

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मुमकिन है कि कुछ हफ़्तों पहले तक आपने उनका नाम भी नहीं सुना होगा. हो सकता है, अभी भी नहीं सुना हो.
लेकिन हो सकता है कि लॉकडाउन के इस दौर में आपने उनकी वजह से अपने दोस्तों से बात की होगी.
वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग कंपनी 'ज़ूम' के फाउंडर एरिक युआन ज़िंदगी में पहली बार 'फोर्ब्स' मैगज़ीन की अरबपतियों वाली लिस्ट में शामिल हो गए हैं.
'फोर्ब्स' मैगज़ीन ने एरिक युआन की हैसियत 7.8 अरब डॉलर की आंकी है.
माइनिंग इंजीनियर के बेटे एरिक युआन का जन्म चीन के शानडोंग प्रांत में हुआ था.
चीन में इंजीनियरिंग की पढ़ाई, फिर जापान में चार साल की नौकरी और फिर वहां से अगला पड़ाव अमरीका.

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सिलिकॉन वैली में दस्तक
एरिक युआन की ज़िंदगी में अभी और भी मंज़िलें आनी थीं. लेकिन एरिक के लिए ये सफ़र बहुत आसान नहीं रहा था.
वे बिल गेट्स से प्रभावित थे, दुनिया के सबसे अमीर मुल्क में पहुंचना चाहते थे.
नब्बे के दशक में कैलिफोर्निया में फलफूल रही टेक्नॉलॉजी कंपनियों की लहर में वो शामिल होना चाहते थे.
लेकिन ऐसा नहीं था कि वहां कोई अपने दरवाज़े पर खड़ा इंतज़ार कर रहा था, बाहें फैलाये खड़ा था.
अमरीका में रहने और काम करने की इजाज़त मिलने से पहले आठ बार उनका वीज़ा ऐप्लिकेशन रद्द किया जा चुका था.
लेकिन तमाम चुनौतियों के बावजूद साल 1997 में एरिक युआन 27 साल की उम्र में एक नई ज़िंदगी शुरू करने सिलिकॉन वैली पहुंच गए.

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वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग ऐप
उनकी अंग्रेज़ी ज़रूर थोड़ी तंग थी लेकिन अपने हुनर को मांजने के लिए माकूल जगह की तलाश में उन्हें ज़्यादा वक़्त नहीं लगा.
टेक्नॉलॉजी फर्म 'वेबएक्स' में बतौर प्रोग्रामर उनका सफर शुरू हुआ. दशक भर बाद 'वेबएक्स' को एक दूसरी बड़ी कंपनी 'सिस्को सिस्टम्स' ने खरीद ली.
यहां एरिक युआन इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के चीफ़ हो गए.
साल 2011 में उन्होंने 'सिस्को' के अधिकारियों को एक ऐसे वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग ऐप को डेवलप करने का आइडिया दिया जो न केवल डेस्कटॉप और टैबलेट से काम करता बल्कि मोबाइल फोन से भी उसको एक्सेस किया जा सकता था.
'सिस्को' में ये आइडिया खारिज कर दिया गया. पर एरिक रुके नहीं. उन्होंने अपना बिज़नेस 'ज़ूम' शुरू करने के लिए इस्तीफा दे दिया.

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ये आइडिया कैसे आया?
ऑनलाइन पब्लिशिंग प्लेटफ़ॉर्म 'मीडियम' को दिए एक इंटरव्यू में एरिक ने कहा, "जब मैंने पहली बार ज़ूम की कल्पना की थी तो मैं चीन में एक यूनिवर्सिटी स्टूडेंट था. अपनी गर्लफ़्रेंड से मिलने के लिए मुझे अक्सर दस घंटों की ट्रेन पकड़नी होती थी. वो अब मेरी पत्नी हैं."
"मुझे उस तरह से सफर करना बिलकुल ही पसंद नहीं था. मैं सोचा करता था कि कोई ऐसा तरीका हो कि मैं बिना यात्रा किए अपनी गर्लफ्रेंड से मिल आऊं. ये वही सपने थे जिन पर ज़ूम की बुनियाद रखी गई है."
लेकिन अपने प्रोजेक्ट के लिए पैसा जुटाना कम चुनौतीपूर्ण नहीं था. सिस्को छोड़ने के बाद ऐसे निवेशक खोजना जिनको उनके प्रोजेक्ट पर भरोसा हो, वाकई एक मुश्किल भरा काम था.
निवेशकों की तरफ़ से इनकार की जो वजहें उन्हें बताई जा रही थीं, वो ये थी कि अब इस तरह के बिज़नेस में ज़्यादा गुंजाइश नहीं बची है, और किसी नए खिलाड़ी के लिए जगह भी नहीं है.

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बिज़नेस की टाइमिंग
'फिनांशियल टाइम्स' अख़बार के अनुसार एरिक युआन ने इसके लिए अपने दोस्तों और परिवार वालों से पैसा उधार लिया.
एरिक ने 'फिनांशियल टाइम्स' को बताया, "अगर आपको कोई बिज़नेस शुरू करते हैं तो इसकी टाइमिंग बहुत महत्वपूर्ण होती है. स्मार्टफोन और क्लाउड स्टोरेज कंपनियों के विस्तार ने ज़ूम जैसे प्रोडक्ट के लिए अनुकूल परिस्थितियां पैदा कर दी थीं."
'फोर्ब्स' मैगज़ीन से एरिक ने कहा, "यहां तक कि मेरी पत्नी भी आश्वस्त नहीं थीं लेकिन मैंने कहा कि ये एक लंबा और मुश्किल भरा सफर है. मुझे इसका अंदाजा है. लेकिन अगर मैं कोशिश नहीं करूंगा तो मुझे इसका पछतावा रहेगा."
इस तरह से मेहबूबा से मिलने के लिए की गई ट्रेन यात्रा ने एक ऐसे प्लेटफॉर्म को तैयार करने का रास्ता बनाया जो आज लंबी दूरी की बिज़नेस मीटिंग्स को मोबाइल या कम्प्यूटर स्क्रीन पर अंज़ाम दे रहा है.

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महामारी के दौरान कारोबार में उछाल
पिछले साल अप्रैल में नैस्डैक में सूचीबद्ध होने से पहले तक ज़ूम का कारोबार बढ़ ही रहा था. नैस्डैक में ज़ूम की लिस्टिंग भी कामयाब रही थी. क्लाउड सॉफ़्टवेयर कैटगिरी में ज़ूम सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाली कंपनियों में से एक थी.
सितंबर में जब ये सेक्टर संघर्ष कर रहा था, तभी भी ज़ूम के लिए हालात अच्छे ही रहे थे. दिसंबर तक सबकुछ नॉर्मल चल रहा था, तभी अचानक चीज़ें अप्रत्याशित रूप से बदल गई. दुनिया के सामने कोरोना वायरस की महामारी आ गई.
जब दुनिया भर के वित्तीय बाज़ार डूब रहे थे जो ज़ूम के शेयर 14 फीसदी की दर से चढ़ रहे थे. दिसंबर तक ज़ूम पर रोज़ाना एक करोड़ यूजर आते थे, मार्च तक ये संख्या बढ़कर 20 करोड़ हो गई. कंपनी के अपने आंकड़ों के मुताबिक़ अप्रैल में अभी तक ये संख्या बढ़कर 30 करोड़ हो गई है.
बाज़ार का अनुमान है कि पिछले तीन महीनों में एरिक युआन की हैसियत चार अरब डॉलर बढ़ गई है. क्योंकि लगभग पूरी दुनिया लॉकडाउन लागू है और लोगों को एक दूसरे से बातचीत के लिए एक प्लेटफ़ॉर्म चाहिए था.

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इस्तेमाल करना आसान है...
लॉकडाउन के बीच बिज़नेस मीटिंग्स या किसी और उद्देश्य से बातचीत के लिए माइक्रोसॉफ़्ट स्काइप और गूगल हैंगआउट जैसे खिलाड़ी मार्केट में पहले से मौजूद थे.
लेकिन इन सबके रहते हुए ज़ूम ने जबर्दस्त प्रदर्शन किया. एरिक युआन ने आख़िर कैसे ये मुमकिन कर दिखाया.
टेक्नॉलॉजी सेक्टर के जानकार ये कहते हैं कि ज़ूम की तरक्की के पीछे सबसे बड़ी वजह तो ये है कि इसे इस्तेमाल करना आसान है. इस पर यूजर रजिस्टर करने की ज़रूरत नहीं होती है. एक कॉल कॉन्फ्रेंस में 40 मिनट तक 100 लोग एक साथ जुड़ सकते हैं और ये फ्री है.
लेकिन ये एक दोधारी तलवार की तरह हो गया है.
इसे इस्तेमाल करना जितना आसान है, इस खूबी ने इसे डेटा सुरक्षा और प्राइवेसी के लिए लिहाज से ख़तरनाक़ बना दिया है.

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भरोसे का सवाल
ज़ूम की शुरुआती कल्पना एक बिज़नेस मीटिंग टूल के तौर पर की गई थी लेकिन अब सभी तबकों के लोग बड़े स्तर पर इसका इस्तेमाल कर रहे हैं.
कंपनी पर हैकिंग अटैक बढ़ गए हैं और दुनिया के सामने ये बात आ गई है कि ज़ूम इस्तेमाल करना जोखिम भरा हो सकता है.
ऐसी रिपोर्टें सामने आई हैं कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान हैकरों ने घुसपैठ कर ली और आपत्तिजनक पॉर्नोग्राफी वाले कंटेट पब्लिश कर दिए. आज कल इस चलन को ज़ूमबॉम्बिंग का नाम दिया जा रहा है.
ये बात भी सामने आई है कि मीटिंग को रिकॉर्ड करना भी सुरक्षित नहीं है क्योंकि दूसरे लोग बिना पूर्व अनुमति के इस तक पहुंच सकते हैं.
न्यूयॉर्क के एटॉर्नी जनरल लेटिटिया जेम्स ने ज़ूम से पूछा है कि क्या कंपनी ने अतिरिक्त सुरक्षा मापदंड लागू किए हैं. सांसद, मंत्री, कंपनियों के निदेशक और ज़ूम के अन्य क्लाइंट्स अब भरोसे का सवाल उठा रहे हैं.
"मैं बेहद शर्मिंदा हूं..."
एरिक युआन का कहना है कि ज़ूम की सर्विस कंपनियों की ज़रूरत के हिसाब से डिजाइन की गई थी और इतनी बड़ी तादाद में यूजर्स के आने के लिए कोई तैयारी नहीं की गई थी. प्राइवेसी और सिक्योरिटी के सवालों पर उन्होंने माना है कि वे उम्मीदों पर खरे नहीं उतरते.
इस समस्या के हल के लिए कई कदमों के उठाये जाने की घोषणा करते हुए एरिक ने अपने बयान में कहा, "मैं बेहद शर्मिंदा हूं..."
ब्रितानी साइबर सिक्योरिटी कंसल्टेंट ग्राहम क्लूले कहते हैं, "हाल के हफ्तों में कंपनी की काफी छानबीन हुई है. रिसर्चर्स ने उनके कोड्स को जांचा-परखा है. इसमें गंभीर कमियां पाई गई हैं. हालांकि कंपनी ने सॉफ़्टवेयर अपडेट्स जारी किए हैं और दूसरे सुरक्षा उपाय भी आजमाए जा रहे हैं."
"ज़ूम यकीनन वो प्लेटफ़ॉर्म नहीं है जिस पर बड़े राजनेता संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा करें. लेकिन ज़्यादातर आम लोगों के लिए ये बुरा विकल्प नहीं है."
बीते हफ़्तों में दूसरी कंपनियों ने भी अपनी रणनीति बदली है. कुछ रोज़ पहले फेसबुक ने मेसेंजर रूम का फीचर लॉन्च किया है जिस पर 50 लोग बिना किसी समय की पाबंदी के वर्चुअल मीटिंग कर सकते हैं.
लेकिन अभी इस बात को लेकर तस्वीर साफ़ नहीं है कि ज़ूम ने जो कामयाबी हासिल की है, वो इसे आने वाले समय में बरकरार रख पाएगा.

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