You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
कोरोना लॉकडाउनः चाइल्ड पॉर्नोग्राफ़ी से जुड़े कंटेंट के डाउनलोड बढ़े
- Author, एंजेलो एटानाज़ियो
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़ वर्ल्ड
इंटरनेट पर एक चैट रूम में किसी ने 'हेलो' कहकर अपन बात शुरू की, "दुनिया भर में लोग लॉकडाउन में रह रहे हैं. क्या तुम्हें लगता है कि XXX पर और बच्चे बचे होंगे."
वो शख़्स एक ऐसी वेबसाइट का जिक्र कर रहा था जिसे अमूमन लोग नज़रअंदाज़ कर देते हैं.
इंटरनेट पर ऐसे कई फोरम हैं जहां बच्चों को लेकर इस तरह की बातें हो रही हैं. स्पेन की 'सेंट्रल साइबर क्राइम यूनिट' (यूसीसी) ऐसी गतिविधियों पर नज़र रखती है.
इसी 'साइबर क्राइम यूनिट' की मेंबर इंस्पेक्टर सेसिलिया कैरियोन कहती हैं, "पीडोफाइल (बच्चों पर गंदी नज़र रखने वाले) सर्कल्स. हम इन्हें यही कहकर बुलाते हैं. इन फोरम्स पर ये लोग अपने विचार शेयर करते हैं. अपनी ख्वाहिशें जताते हैं, फंतासियों की बात होती है और सलाह-मशविरे का आदान प्रदान भी होता है."
इन चैट ग्रुप्स में जब कोई ये पूछता है कि क्या कोई 'नया माल' आया है क्या? तो इस मतलब होता है कि किसी ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म पर कोई नई चीज़ अपलोड होने के बारे में पूछा जा रहा है.
'माल' शब्द का इस्तेमाल सामान्य तौर पर ये लोग बच्चों की तस्वीरों और वीडियो के लिए करते हैं. कई मामलों में ये नेक्ड होती हैं या फिर व्यस्कों द्वारा बच्चों के शोषण से जुड़ी होती हैं.
'पीडोफ़ाइल सर्कल'
सेसिलिया कैरियोन बताती हैं, "यहां उनका इशारा बच्चों से संपर्क करने, उन्हें बहलाने-फुसलाने से होता है ताकि वे यौन शोषण की ऐसी हरकतों को रिकॉर्ड कर सकें."
बच्चों पर गंदी नज़र रखने वाले लोगों के लिए ऐसी हरकतें आम बात होती हैं.
स्पेन के पुलिस विभाग ने भी इस बात की पुष्टि की है कि कोविड-19 की महामारी पर काबू पाने के लिए लगाए गए लॉकडाउन की वजह से 'पीडोफाइल सर्कल' के लोगों में बेतहाशा वृद्धि हुई है.
सेसिलिया का कहना है, "स्पेन में जब से लॉकडॉउन शुरू हुआ है, तब से ऐसे मामले बढ़े हैं. वे लोग हालात का फ़ायदा उठा रहे हैं."
चैट ग्रुप्स में कुछ कॉमेंट्स ऐसे थे जिनमें ये बताया गया था कि घर में क्वारंटीन के दौरान किसी बच्चे के साथ वे क्या करना चाहेंगे तो किसी कॉमेंट में ये पूछा गया था कि क्या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर नए कंटेंट के लिए लॉकडाउन अच्छा मौका है?
आंकड़ों की बदसूरत तस्वीर
कोरोना संकट से जूझ रहे स्पेन में 14 मार्च को राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा की गई थी.
बीबीसी मुंडो को मिले आंकड़ों के अनुसार राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा के ठीक तीन दिन बाद स्पेन में 17 से 24 मार्च वाले हफ़्ते के दौरान इंटरनेट पर चाइल्ड पॉर्नोग्राफ़ी से जुड़े कॉन्टेंट का 17,000 डाउनलोड्स किए गए थे.
इसके बाद वाले हफ़्ते (24 मार्च से 31 मार्च) में 21 हज़ार डाउनलोड्स दर्ज किए गए. पिछले हफ़्ते के आंकड़ों में ये 25 फ़ीसदी का उछाल था.
सेसिलिया कैरियोन कहती हैं, "अब इसमें थोड़ी गिरावट हुई है. लेकिन ये संख्या स्थिर बनी हुई है."
इंटरनेट पर चाइल्ड पॉर्नोग्राफ़ी की समस्या से अकेले स्पेन नहीं जूझ रहा है.
साइबर अपराध बढ़ गए हैं...
अप्रैल के शुरू में यूरोपीय पुलिस ऑफ़िस (यूरोपोल) की ओर से इस सिलसिले में एक रिपोर्ट भी जारी की गई थी.
रिपोर्ट में यूरोपोल की एग़्जिक्यूटिव डायरेक्टर कैथरीन डे बॉल ने कोविड-19 की महामारी से सबसे ज़्यादा प्रभावित देशों में इंटरनेट पर बच्चों के यौन शोषण के बढ़ते मामलों को लेकर चिंता जताई है.
इटली में पोस्ट एंड टेलीकॉम पुलिस विभाग की प्रमुख नुनज़िया कियार्डी कहती हैं, "हम सभी अपने घरों पर हैं, एक दूसरे से लगातार जुड़े हुए हैं. हम लोग ऑनलाइन पर ऐसी बहुत सारी चीज़ें करने की कोशिश करते हैं जो हकीकत की दुनिया में हम नहीं कर सकते हैं. और इसमें कोई शक नहीं कि इन दिनों सभी तरह के साइबर अपराध बढ़ गए हैं."
मार्च और अप्रैल के दरमियान कई हफ़्तों तक कोरोना संकट से सबसे ज़्यादा प्रभावित देशों में रहा. यहां बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई. यूरोप में लॉकडाउन की घोषणा करने वाला इटली पहला देश था. वहां आज भी लॉकडाउन लागू है.
चाइल्ड पॉर्नोग्राफ़ी
नुनज़िया कियार्डी कहती हैं, "हमारे पास जो आंकड़ें हैं, उससे ये संकेत मिलते हैं कि इस दौरान इंटरनेट पर चाइल्ड पॉर्नोग्राफ़ी से जुड़े अपराध और बच्चों के यौन शोषण से जुड़े मामले बढ़े हैं."
बीबीसी मुंडो के पास उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार पिछले साल पहली मार्च से 15 अप्रैल के बीच इटली में ऑनलाइन चाइल्ड पॉर्नोग्राफ़ी से जुड़े छह मामले दर्ज किए गए थे.
इस साल इसी अवधि में ऐसे मामलों की संख्या 30 गुना बढ़कर 181 हो गई है. इसमें हैरत की बात नहीं है कि देश में इस समय लॉकडाउन लागू है.
इटली की पुलिस ने 2020 में अभी तक इस तरह का 108,123 जीबी डिजिटल कंटेंट ज़ब्त किया है.
नेटफ्लिक्स की वेब सिरीज़ 'हाउस ऑफ़ कार्ड्स' के सभी एपिसोड्स के पांच गुना के बराबर ये आंकड़ा बैठता है.
आख़िरकार, इटली की पुलिस ने इस साल यौन शोषण के शिकार बच्चों की औसत उम्र में गिरावट ज़रूर दर्ज किया है. इस साल प्रभावित होने वाले ज़्यादातर बच्चे 10 साल से 13 साल की उम्र वाले थे.
ये एक नाटकीय वृद्धि है....
दुनिया भर की पुलिस एजेसियों के पास ऑनलाइन चाइल्ड पॉर्नोग्राफ़ी के ज़्यादातर एलर्ट अमरीकी संस्था नेशनल सेंटर फ़ॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉयटेड चिल्ड्रेन (एनसीएमईसी) की तरफ़ से रिपोर्ट किए जाते हैं.
'साइबरटिपलाइन' नाम से 'एनसीएमईसी' एक सर्विस चलाती है जिस पर अमरीका के इलेक्ट्रॉनिक सर्विस प्रोवाइडर्स और माइक्रोसॉफ़्ट, फ़ेसबुक, ट्विटर, गूगल और टिकटॉक जैसी टेक कंपनियों को क़ानून के तहत दुनिया भर में होने वाले ऑनलाइन चाइल्ड पॉर्नोग्राफ़ी के मामले रिपोर्ट करने होते हैं, चाहे वो किसी भी देश से क्यों न ऑपरेट किए जा रहे हों.
'एनसीएमईसी' इन रिपोर्टों की समीक्षा करती है और फिर इसे उस देश की पुलिस के साथ शेयर करती है, जहां से जुड़ा वो मामला होता है.
इस साल मार्च के महीने में 'एनसीएमईसी' को ऐसे कॉन्टेंट के 20 लाख से ज़्यादा शिकायतें मिलीं. पिछले इसी मार्च में रिपोर्ट किए मामलों की संख्या इस बार बढ़कर दोगुने से ज़्यादा हो गई है.
'एनसीएमईसी' के वाइस प्रेज़ीडेंट जॉन शेहान कहते हैं, "ये एक नाटकीय वृद्धि है."
तीन कॉमन बातें
बच्चों के यौन शोषण के ख़िलाफ़ पिछले 30 साल से मुहिम चला रहे ग़ैरसरकारी संगठन ईसीपीएटी इंटरनेश्नल की डिप्टी एग़्जिक्युटिव डायरेक्टर मैरी लॉरे लेमिनुएर कहती हैं, "बच्चों पर गंदी नज़र रखने वाले लोग आसानी से हालात का फ़ायदा उठा लेते हैं. इतिहास में पहले कभी इतनी बड़ी संख्या में बच्चों पर इस तरह का जोखिम नहीं आया था."
इंस्पेक्टर सेसिलिया कैरियोन कहती हैं, "पेडोफाइल सर्कल के ज़्यादातर लोगों में तीन बातें कॉमन देखने को मिलती हैं. पहली बात तो ये कि इनमें 99 फ़ीसदी पुरुष होते हैं. इनमें 13 साल से 15 साल की उम्र के किशोरों से लेकर रिटायर हो गए लोग तक शामिल होते हैं. ये समाज के सभी तबकों से होते हैं."
"इनमें बेरोज़गार लोग, प्रवासी, शीर्ष स्तर कोई मैनेजर या फिर कोई सम्मानित डॉक्टर, ये कोई भी हो सकते हैं. दूसरी बात ये है कि इस तरह के ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म्स पर सक्रिय रहने वाले पेडोफाइल लोग की ख़ास तरह तकनीकी पृष्ठभूमि होती है. जैसे कि वे अपनी पहचान छुपाकर इंटरनेट पर सक्रिय रह सकते हैं."
"हमने पुलिस की नज़र में आने से बचने के लिए टिप्स देने वाले मैनुअल्स भी देखे हैं. उदाहरण के लिए कौन सा ब्राउज़र इस्तेमाल करें, क्या कीवर्ड्स यूज करें और किस वेबसाइट से ये चीज़ें डाउनलोड करें."
असली मुश्किल कब आती है?
इन ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म्स पर इस तरह का कॉन्टेंट सर्वर से नहीं डाउनलोड किया जाता है बल्कि किसी और कम्प्यूटर से, जहां ये स्टोर किया हुआ होता है.
इंस्पेक्टर सेसिलिया कैरियोन बताती हैं, "चूंकि कॉन्टेंट किसी पीडोफाइल के कम्प्युटर पर स्टोर रहता है, इसलिए इसके लगातार सर्कुलेट होने का ख़तरा बना रहता है. इन्हें हटाना मुश्किल है क्योंकि ये किसी सर्वर पर नहीं होते."
स्पेन की पुलिस के चाइल्ड प्रोटेक्शन ग्रुप के एक सदस्य डेविड रेग्वेरो कहते हैं, "एक बार जब कोई वीडियो पीडोफाइल सर्कल के बीच वायरल हो जाता है. इसे उनके नेटवर्क से हटाना तकरीबन नामुमकिन हो जाता है."
लॉकडाउन ख़त्म होने के बाद कुछ और समस्याएं सामने आनी वाली हैं, जिन्हें लेकर पुलिस एजेंसियां चिंतित हैं.
पिछले 12 साल से ऑनलाइन चाइल्ड पॉर्नोग्राफ़ी के मामले देख रहे डेविड रेग्वेरो बताते हैं, "क्रिसमस, ईस्टर और गर्मी की छुट्टियों के बाद ऐसी समस्याएं अक्सर आती हैं. बच्चे कम्प्युटर और मोबाइल फोन के साथ ज़्यादा वक़्त गुजारते हैं. वे इंटरनेट से कनेक्टेड रहते हैं. हमने ऐसे मौकों पर बाल यौन शोषण के नए वीडियो और मामलों में वृद्धि देखी है."
बच्चे आसान शिकार कब बन जाते हैं?
पेडोफाइल सर्कल के लोग सोशल नेटवर्किंग के प्लेटफ़ॉर्म्स पर फ़ेक प्रोफ़ाइल रखते हैं. ऐसी प्रोफ़ाइल जिन पर बच्चे ज़्यादा विजिट करते हैं. या फिर अपराधी ऑनलाइन वीडियो गेम्स के चैटरूम में बच्चे का ही भेष धर लेते हैं.
जब वे बच्चों का ध्यान और भरोसा दोनों आकर्षित कर लेते हैं तो वे तस्वीरों और वीडियो की फरमाइश करना शुरू करते हैं. फिर ये फरमाइश नेक्ड और सेक्शुअल कॉन्टेंट की हो जाती है. एक बार ऐसा हुआ कि वहां ब्लैकमेल की शुरुआत हो जाती है.
डेविड रेग्वेरो कहते हैं, "अपराधी बच्चों को हफ़्तों और कई बार तो महीनों तक अपने दबाव में रखता है. शिकायतें तब आती है जब हालात बच्चों के लिए हद से गुजर जाता है और वे अपने मां-बाप को इसके बारे में बताते हैं. कभी-कभी तो मां-बाप को ही पहले पता चल जाता है."
मैरी लॉरे लेमिनुएर कहती हैं, "ज़्यादातर मामलों में तो बच्चों का शोषण करने वाले उसके क़रीबी लोग ही होते हैं. वो भाई हो सकता है, पिता हो सकता है, दादा या परिवार का कोई दोस्त. बच्चे शोषण करने वाले लोगों के साथ रहने के लिए मजबूर होते हैं. क्वारंटीन में रह रहे बच्चों के साथ ये ख़तरा बढ़ जाता है."
- कोरोना वायरस के क्या हैं लक्षण और कैसे कर सकते हैं बचाव
- कोरोना वायरसः किसी सतह पर कितनी देर ज़िंदा रहता है ये विषाणु
- कोरोना: महामारी से निपटने में दुनिया के सामने भारत ने पेश की मिसाल- नज़रिया
- कोरोना वायरस के संक्रमण जिन-जिन इलाजों से हो रहे ठीक
- कोरोना वायरसः भारत में इस पहली मौत पर क्यों उठ रहे सवाल?
- कोरोना वायरस: महामारी की आड़ में सत्ता और मज़बूत करने वाले ये नेता
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)