कोरोना वायरस: दुनिया में कर्फ़्यू पर वुहान में जल्द ख़त्म हो सकते हैं प्रतिबंध

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कोरोना वायरस की शुरुआत चीन के वुहान शहर से हुई और अब यह वायरस दुनिया के 186 देशों में फैल चुका है. क़रीब चार लाख बीस हज़ार लोग दुनियाभर में संक्रमित पाये गए हैं और मरने वालों का आंकड़ा भी 20 हज़ार के पार पहुंच चुका है.
कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए दुनिया भर के कई देशों में लॉकडाउन की घोषणा कर दी गई है और कई जगहों पर तो कर्फ़्यू तक लगा दिया गया है.
भारत की बात करें यहां अगले 21 दिनों तक लॉकडाउन का आदेश जारी किया गया है. लेकिन इन सबके बीच कोरोना वायरस की प्रारंभिक जगह वुहान प्रतिबंधों में ढील देने की योजना बना रहा है.

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अधिकारियों का कहना है कि वुहान आठ अप्रैल तक अपने यहां लगे प्रतिबंधों को आशिंक तौर पर हटा लेगा.
वुहान को छोड़कर हुबोई प्रांत के अन्य हिस्सों में यात्रा प्रतिबंध को मंगलवार आधी रात से ही हटा दिया गया है. लेकिन सिर्फ़ उन स्थानीय लोगों के लिए जो पूरी तरह से स्वस्थ हैं.
एक सप्ताह बाद वुहान में एक नया मामला
भले ही वुहान ने अपने यहां संक्रमण के मामलों पर नियंत्रण लगा लिया हो लेकिन मंगलवार को यहां एक नया मामला सामने आया. लेकिन वुहान के लिहाज़ से यह बेहद महत्वपूर्ण है कि यहां बीते एक हफ़्ते में एक भी नया मामला नहीं आया था.
भारत ने अपने यहां संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए पहले 31 मार्च तक के लिए ही लॉकडाउन की घोषणा की थी लेकिन अब इसे बढ़ाकर 21 दिन के लिए कर दिया गया है.

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वहीं ब्रिटेन ने अपने यहां सख़्त प्रतिबंधों को लागू किया है.
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए कई तरह की पाबंदियों की घोषणा की है. ब्रिटेन के लोगों को घरों में ही रहने के लिए कहा गया है. ज़रूरी सामानों की ख़रीदारी, मेडिकल ज़रूरतों और किसी अनिवार्य काम के लिए ही बाहर जाने की छूट दी गई है.
ग़ैर-ज़रूरी उत्पादों की दुकानों को बंद रखने के लिए कहा गया है. इसके साथ ही सार्वजनिक स्थानों पर दो से ज़्यादा लोग एक साथ नहीं रह सकते हैं.
अगर लोग नियमों का पालन नहीं करेंगे तो पुलिस ऐसा करने पर मजबूर करेगी. प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने डाउनिंग स्ट्रीट से टेलिविज़न संबोधन में कहा कि जो पाबंदियों का पालन नहीं करेंगे उन पर जुर्माना लगेगा. प्रधानमंत्री ने लाइब्रेरी, खेल के मैदान, आउटडोर जिम और धार्मिक स्थलों को बंद रखने का आदेश दिया है.
पार्क कसरत के लिए खुले रहेंगे लेकिन समूह में लोग जमा नहीं हो सकेंगे. सरकार ने सोशल इवेंट्स पर भी पाबंदी लगा दी है. शादियां भी रोक दी गई हैं. बोरिस जॉनसन ने कहा कि तीन हफ़्ते बाद पाबंदियों की समीक्षा की जाएगी और हालात के हिसाब से फ़ैसला होगा.

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दुनिया भर में किये जा रहे हैं अलग-अलग उपाय
ब्रिटेन में कोरोना वायरस की वजह से अभी तक 422 लोगों के मौत की पुष्टि की जा चुकी है.
इसी बीच स्वास्थ्य विशोषज्ञों का कहना है कि अमरीकी लोगों को अपने समाजिक मेल-मिलाप को सीमित करने की ज़रूरत है. वरना इससे कोरोना वायरस के मामलों का प्रसार तेज़ी से होगा. अमरीका में अभी तक 775 लोगों की मौत हो चुकी है.
स्पेन में रक्षा मंत्रालय का कहना है कि स्पेन कोरोना वायरस माहामारी से निपटने के लिए सैनिकों की मदद ले रहा है. स्पेन के इन सैनिकों ने पाया कि रिटायरमंट होम्स में रह रहे बुज़ुर्ग मरीज़ों को यूं ही छोड़ दिया गया है. और कुछ मामलो में तो लोगों की अपने बिस्तर पर पड़े-पड़े ही मौत हो चुकी है.
मैड्रिड में आइस रिंक को एक अस्थायी मुर्दाघर में तब्दील किया गया है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बढ़ते मामलों को लेकर चेतावनी ज़ाहिर की है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दुनियाभर के देशों को चेतावनी दी है कि वो ज़्यादा से ज़्यादा संख्या में परीक्षण करें और कॉन्टेक्ट-ट्रेसिंग स्ट्रेटजी का पालन करें.

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जनवरी महीने से ही वुहान पूरी दुनिया से कटा हुआ है.लेकिन अब अधिकारियों का कहना है कि जिस व्यक्ति के पास स्मार्टफ़ोन के हेल्थ ऐप पर 'ग्रीन' कोड होगा वो आठ अप्रैल के बाद शहर से बाहर जा सकता है.
वुहान में एक सप्ताह तक कोई नया मामला सामने नहीं आया था लेकिन मंगलवार को यहां एक नया मामला सामने आया है.
हालांकि वुहान में अधिकारियों ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वे उन मामलों की ही गिनती कर रहे थे जो अस्पताल में भर्ती हुए.
आधिकारिक सरकारी आंकड़ों के मुताबिक़, चीन में बीते 24 घंटों में 78 नए मामले सामने आए हैं. इनमें से चार केस ऐसे हैं जो विदेश से आए लोगों द्वारा संक्रमित हो गए.
इसे सेकंड वेव कहा जा रहा है.
इस सेकंड वेव की वजह से भी ख़तरा बढ़ने की आशंका बनी हुई है. सबसे अधिक ख़तरा दक्षिण कोरिया और सिंगापुर जैसे देशों के लिए माना जा रहा है. जो बीते हफ़्ते इस वायरस के प्रसार पर क़ाबू पाने में काफी हद तक सफल रहे हैं.

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चीन ने क्या क़दम उठाए?
जनवरी में जब चीन ने कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए अभूतपूर्व कदमों का ऐलान किया तो कई जानकारों ने इस बात की ओर इशारा किया था कि इस तरह के कदमों को लोकतांत्रिक देशों में लागू करना कितना मुश्किल साबित होगा.
इन उपायों में पूरे हुबेई प्रांत और यहां रहने वाले 5.6 करोड़ लोगों को क्वारंटाइन करने (घर से बाहर निकलने और किसी से मिलने जैसी पाबंदियां लगाना) और इस वायरस की चपेट में आए लोगों के इलाज के लिए महज 10 दिनों में एक अस्थायी अस्पताल का निर्माण करना शामिल था.
इन कदमों के उठाए जाने के बाद से चीन में यह वायरस काबू में आता दिखा लेकिन बाकी की दुनिया में यह दो हफ़्तों में ही 13 गुना बढ़ गया.
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के प्रमुख टेड्रस एडॉनम ने कोरोना वायरस को एक पैनडेमिक (एक ऐसी महामारी जो दुनिया के बड़े हिस्से में फैल चुकी हो) घोषित करते हुए कहा कि इससे निबटने के लिए 'दुनिया भर के देशों को तत्काल और आक्रामक कदम' उठाने चाहिए.

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चीनः क्या सबसे बुरा दौर बीत चुका है?
चीनी राष्ट्रपति शी ज़िनपिंग ने 10 मार्च को कोरोना वायरस के पैदा होने वाले इलाके का दौरा किया. यह दौरा इस बात का संकेत था कि देश राष्ट्रीय आपातकाल के सबसे बुरे दौर से उबर चुका है.
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक़, कोरोना वायरस की चपेट में आने वाले लोगों की तादाद हर दिन घट रही है.
न्यूयॉर्क में काउंसिल ऑन फ़ॉरेन रिलेशंस में ग्लोबल हेल्थ के सीनियर फ़ेलो यानज़ोंग ख़्वान ने बीबीसी को बताया कि चीन के उठाए गए कदम बाकी की दुनिया में लागू करना मुश्किल है.
उन्होंने कहा, "चाहे लोकतांत्रिक हो या ग़ैर-लोकतांत्रिक, कोई भी देश ऐसा नहीं है जो समाज में इतने प्रभावी और समग्र रूप से दखल दे सके. यह किसी भी नज़रिये सेअच्छी चीज नहीं है. यह निराशाजनक है. भले ही कुछ लोकतांत्रिक देशों के नेता चीन के तरीकों को अपने यहां लागू करने में दिलचस्पी दिखा रहे हों लेकिन उनके पास ऐसा करने का ताकत और अधिकार नहीं है."

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घरों में रहने की सलाह
हालांकि मिलान स्थित विटा सैल्यूट सैन रफ़ाएले में माइक्रोबायॉलजी और वायरॉलजी के प्रोफ़ेसर डॉक्टर रोबर्टो बुरियानी का कहना है कि कोरोना वायरस से लड़ने के लिए तानाशाही का होना ज़रूरी नहीं है. यूरोप में इटली ने इस महाद्वीप के अब तक के सबसे सख़्त लॉकडाउन को लागू किया है.
इटली ने अपनी पूरी आबादी को लॉकडाउन में डाल दिया है. देश में खाने और फ़ार्मेसी को छोड़कर हर तरह की दुकान बंद है. एक जगह पर लोगों के इकट्ठे होने पर रोक लगा दी गई है और लोगों को अपने घरों में रहने की सलाह दी जा रही है.
यात्रा कर रहे हर शख़्स को इसका मकसद बताने वाला काग़ज़ साथ लेकर चलना ज़रूरी कर दिया गया है. स्कूल और विश्वविद्यालय बंद हैं.
डॉक्टर रोबर्टो ने ट्विटर पर पोस्ट किया है, "इस वायरस ने गले मिलने, किस करने, दोस्तों के साथ डिनर करने, कॉन्सर्ट्स, शाम को थियेटर ला स्काला में जाने समेत लोगों के सबकुछ छीन लिया है. इस जंग में जीत का दिन बेहद ख़ूबसूरत होगा. ये सब रफ़्तार की बात है."

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चीन से सबक
विश्व स्वास्थ्य संगठन के सलाहकार डॉक्टर ब्रूस अलवार्ड ने कहा कि देशों के इस वायरस से निपटने के तरीके इस बात पर नहीं टिके हैं कि वो एक लोकतांत्रिक देश हैं या तानाशाही वाले देश. डॉक्टर अलवार्ड ने हुबेई के दौरे पर गई एक फ़ैक्ट-फ़ाइंडिंग टीम की अगुआई की थी.
उनका कहना है कि असलियत यह है कि दुनिया ने चीन के अनुभव के असली सबक को अभी तक नहीं सीखा है.
अलवार्ड ने बीबीसी को बताया, "चीन से हमने यह सीखा है कि यह सब कुछ रफ़्तार पर टिका हुआ है. बेहद तेज़ रफ़्तार से मामलों को पहचानकर, उन्हें अलग-थलग कर, उनके नज़दीकी संपर्कों को ढूंढकर और उन्हें भी अलग-थलग करके ही आप इस तरह के वायरस को काबू में कर सकते हैं."
"लोगों को समझाया गया है कि हम किस तरह की बीमारी से जूझ रहे हैं. उन्हें समझाया गया है कि यह कितना गंभीर है और उन्हें इस लायक बनाया गया है कि वो सरकार के साथ मिलकर उठाए गए कदमों के प्रभावी होने के लिए काम कर सकें."

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