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कोरोना के क़हर से कांपी इटली के लोगों की ज़िंदगी
इटली में कोरोना वायरस संकट हर बीतते दिन के साथ गंभीर होता जा रहा है. बीते तीन दिनों में हर दिन एक हज़ार से अधिक नए मामले सामने आए हैं. मरने वालों की तादाद 631 हो गई है जबकि 10 हज़ार से अधिक लोग संक्रमित हैं.
बीते चौबीस घंटों में ही इटली में 168 लोगों की मौत हुई है जबकि 529 नए मामले सामने आए हैं.
सरकार ने वायरस को रोकने के लिए बेहद सख़्त प्रतिबंध लगाए हैं. समूचे इटली में यात्रा प्रतिबंध हैं और लोगों के जुटने पर रोक है.
इटली में सिर्फ़ आवश्यक काम होने पर ही लोगों को यात्रा करने की अनुमति है.
सभी स्कूल और यूनिवर्सिटी बंद हैं और परीक्षाएं रद्द कर दी गई हैं.
इसी बीच ऑस्ट्रिया ने इटली से लोगों के आने पर रोक लगा दी है. सिर्फ़ उन्हीं लोगों को देश में दाख़िल होने दिया जाएगा जिनके पास स्वस्थ होने का मेडिकल सर्टिफ़िकेट होगा.
पाबंदियों की वजह से शादियां टल रही हैं और धार्मिक आयोजन रद्द किए जा रहे हैं.
प्रतिबंधों का अर्थव्यवस्था पर भी व्यापक असर हो रहा है जिसकी वजह से लोगों को क़र्ज़ की किश्त अदा करने में छूट दी गई है.
रोम में बार और रेस्त्रां तो खुले रहे लेकिन पर्यटक और ग्राहक नदारद रहे.
वहीं उत्तरी इटली के बोलोनिया में लोग नई और अजीब हक़ीक़त का सामना करने में संघर्ष कर रहे हैं.
प्यात्ज़ा मैजोरे और ग्रैंड बासीलीक के पास एक होटल चलाने वाली एक महिला बताती हैं कि वो सरकार जो कर रही है उसे लेकर असमंजस में हैं.
बीबीसी से बात करते हुए वो कहती हैं, "एक दिन वो कुछ कहते हैं और अगले दिन ठीक उसके उलटा. पहले उन्होंने कहा कि हालात बहुत ज़्यादा ख़राब हैं और अगले ही दिन कहा कि हालात इतने भी बुरे नहीं है."
पर्यटन उद्योग से जुड़े अन्य व्यापार की तरह ही उनके धंधे पर भी बहुत बुरा असर हुआ है. यूं तो ये पर्यटन का समय है, लेकिन सभी होटल खाली हैं.
दुकानें और कैफ़े खुले हैं लेकिन ग्राहकों और कर्मचारियों को सुरक्षित दूरी बनाकर रखनी पड़ रही है.
फ़िश शॉप चलाने वाले साल्वातोरे कहते हैं कि इटली ने कोरोना वायरस की गंभीरता को कम करके आंकने की ग़लती की.
वो कहते हैं, "वास्तव में, ये बहुत अहम चीज़ है, इस बात का डर है कि अस्पताल भर जाएंगे और सबकी देखभाल नहीं की जा सकेगी."
वो कहते हैं, "सबसे बड़ी बात ये है कि हम लोग अपने घर से बाहर बस खाना लेने के लिए ही निकले ताकि संक्रमण को रोका जा सके. सरकारी आदेश के बाद इतालवी लोगों को अहसास हुआ है कि ये बहुत ही गंभीर मामला है. हम सबके सही से बर्ताव करना होगा और नियम मानने होंगे."
यहां से कुछ दूर उत्तर में प्यात्चेंत्सा क़स्बे में, जहां कोरोना संक्रमण के 600 से अधिक मामले मिल चुके हैं, सबकुछ शांत हैं. फ़ोन के ज़रिए बात करने वाले स्थानीय लोगों ने बताया कि सड़कें बिलकुल शांत हैं. सिर्फ़ एंबुलेंस के सायरन की ही आवाज़ आती है.
एक स्थानीय पत्रकार रिकॉर्डो कहते हैं कि उन्हें महसूस हुआ कि लोग क्लौस्ट्रोफ़ोबिया (किसी जगह क़ैद हो जाने का डर) में जकड़े हैं.
वो बताते हैं कि, 'अनिश्चितता और डर का माहौल है. लोगों में ये भावना ख़त्म हो रही है कि वो एक तकनीक से सुरक्षित व्यवस्थित समाज में रह रहे हैं.'
रिकॉर्डो बताते हैं, "अवसाद दिखाई दे रहा है, बेचैनी दिखाई दे रही है, अफ़रा-तफ़री दिखाई दे रही है. और शाश्वत इतालवी अराजकता भी दिखाई दे रही है, लोग जो सरकार के बनाए नियम नहीं मानना चाहते."
लेकिन सबकुछ सिर्फ़ डरावना ही नहीं है. लोग इन हालात पर चुटकुले भी बना रहे हैं और मज़ाक भी कर रहे हैं.
एना प्यात्चेंत्सा की एक छात्रा हैं जो यूनिवर्सिटी ऑफ़ सिएना में पढ़ती हैं. वो इन दिनों टस्कनी में हैं. उनके परिजनों ने उनसे दूर ही रहने के लिए कहा है.
वो कहती हैं, "अपने घर से दूर रहने के लिए मजबूर किया जाना अजीब है. कोरोना वायरस अब हमारी हक़ीक़त बन गया है, इसने अब हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी को प्रभावित कर दिया है."
"मुझे लगता है कि सभी को अत्यधिक ज़िम्मेदारी दिखानी चाहिए और नियमों और प्रतिबंधों का पालन करना चाहिए."
वहीं बोलोनिया में बार और रेस्त्रां चलाने वाले मौरीज़ियो को अपनी और अपने दस कर्मचारियों की आजीविका की चिंता है.
वो कहते हैं, "उनके भी बाल-बच्चे हैं, मुझे लगता है कि अगले महीने से वेतन देना मुश्किल हो जाएगा. बहुत कम ही वेतन उनको मिल पाएगा. ये बेहद मुश्किल वक़्त है."
रियल एस्टेट क्षेत्र में काम करने वाली बेनेडेटा कहती हैं कि वो अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं. वो कहती हैं, "मुझे भी एक मास्क ख़रीदना चाहिए. मैं चिंतित हूं क्योंकि पूरा शहर शांत है. बिलकुल शांत."
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