चीन ने हमला किया तो बहुत महंगा पड़ेगा: ताइवान

ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग-वेन

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग-वेन
    • Author, जॉन सडवर्थ
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, ताइपेई

ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग-वेन ने बीबीसी को दिए एक ख़ास इंटरव्यू में कहा है कि चीन को ताइवान पर हमला करना बहुत महंगा पड़ेगा. उन्होंने कहा कि अब ज़रूरत है कि चीन 'सच्चाई का सामना' करे और ताइवान को 'इज़्ज़त' दे.

डेमोक्रेटिक प्रोगेसिव पार्टी की साई इंग-वेन शनिवार को आए नतीजों में भारी मतों से जीतकर एक बार फिर ताइवान की राष्ट्रपति चुनी गई हैं. अपने चुनाव अभियान में उन्होंने चीन से उठ रहे ख़तरों पर लोगों का ध्यान केंद्रित कराने की ख़ासी कोशिश की थी.

चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी ताइवान पर लंबे वक़्त से अपना अधिकार जताती आई है. कम्युनिस्ट पार्टी ने ये भी कहा है कि ज़रूरत पड़ने पर उसके पास ताइवान को बलपूर्वक लेने का हक़ भी है.

वहीं, साई ईंग-वेन ने ज़ोर देकर कहा है कि ताइवान की संप्रभुता से किसी भी स्थिति में समझौता नहीं किया जा सकता.

63 वर्षीय वेन ने बीबीसी को दिए एक ख़ास इंटरव्यू में कहा, "हमें ख़ुद को एक स्वतंत्र देश घोषित करने की ज़रूरत नहीं है. हम पहले से ही एक स्वतंत्र राष्ट्र हैं और ख़ुद को रिपब्लिक ऑफ़ चाइना, ताइवान कहते हैं."

दोबारा चुनाव जीतने के बाद यह वेन का पहला साक्षात्कार है.

ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग-वेन

'लगातार धमकियां बढ़ा रहा है चीन'

वेन ने जैसी बातें कहीं, वो चीन को भड़काती हैं. चीन चाहता है कि 'वन चाइना पॉलिसी' हमेशा प्रासंगिक बनी रहे. राष्ट्रपति चुनाव वेन के मुख्य प्रतिद्वंद्वी रहे ख़ान ग्वो यी और उनकी पार्टी कुओमिनटांग भी 'वन चाइना पॉलिसी' के समर्थक हैं.

चीन का कहना है कि सिर्फ़ एक चीनी सरकार है और उसके इस रुख़ को कूटनीतिक रूप से स्वीकार करने को 'वन चाइना पॉलिसी' कहते हैं. आसान शब्दों में कहें तो 'वन चाइना पॉलिसी' मानने का मतलब इस बात को स्वीकार करना है कि ताइवान कोई अलग देश नहीं, बल्कि चीन का ही हिस्सा है.

साई इंग-वेन चीन और ताइवान के बीच मौजूदा स्थिति का समर्थन करती हैं और चीन से क़रीबी रिश्ते नहीं चाहतीं. वो हॉन्ग कॉन्ग के लोकतंत्र समर्थक प्रदर्नशनकारियों को पक्ष में भी खड़ी रही हैं.

वेन मानती हैं कि उनकी जीत इस बात का स्पष्ट संकेत है कि ताइवान के लोगों में 'वन चाइना पॉलिसी' के लिए समर्थन की भावना बहुत कम है.

उन्होंने कहा, "हालात अब बदल गए हैं. चीन भी बदल गया है. हम देख रहे हैं कि चीन पिछले तीन वर्षों से अधिक वक़्त से अपनी धमकियां तेज़ करता जा है...वो ताइवान में अपने एयरक्राफ़्ट और जंगी जहाज़ भेज रहे हैं. इसके अलावा हॉन्ग कॉन्ग में जो कुछ हो रहा है, उससे लोगों को इस सच का अहसास हो रहा है कि चीन की ओर से आ रही धमकियां वास्तविक हैं और वो दिन पर दिन गंभीर होती जा रही हैं."

वेन का मानना है कि ताइवान का हित सच्चाई का सामना करने में है. ख़ासकर उन ताइवानी युवाओं की इच्छाओं और सपनों को समझने में, जो अपने वोटों के ज़रिए उनकी तरफ़ आए हैं.

वेन भारी वोटों से जीतकर दोबारा राष्ट्रपति बनी हैं.

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, वेन भारी वोटों से जीतकर दोबारा राष्ट्रपति बनी हैं.

'ताइवान की इज़्ज़त करे चीन'

वेन ने कहा, "हमारी एक अलग पहचान है और हम अलग देश हैं. अगर इसके ख़िलाफ़ कोई और विचार उठता है तो युवा इसके विरोध में उठ खड़े होंगे. वो इसे स्वीकार नहीं करेंगे. हम एक क़ामयाब लोकतंत्र हैं, हम एक अच्छी-ख़ासी अर्थव्यवस्था हैं और हम चीन के सम्मान के क़ाबिल हैं."

साई इंग-वेन के आलोचकों का कहना है कि वो बेवजह भड़काऊ रुख़ अपनाती हैं और इससे वही ख़तरा बढ़ेगा जिसके प्रति वो ख़ुद सबको चेताती रहती है: खुलेआम दुश्मनी का ख़तरा.

हालांकि वेन का कहना है कि उन्होंने अपने बर्ताव में नियंत्रण दिखाया है. मिसाल के तौर पर, उन्होंने औपचारिक तौर पर स्वतंत्र राष्ट्र होने का एलान नहीं किया, न संविधान में कोई बदलाव किया और न ही झंडे में.

चीन का कहना है कि ताइवान की ओर से ऐसे किसी भी क़दम को वो सैन्य कार्रवाई की वजह मानेगा.

वेन ने कहा, "हमारे सामने बहुत से दबाव हैं. लेकिन पिछले तीन वर्षों से ज़्यादा समय से हम चीन से कहते हैं कि यथास्थिति बनाए रखना ही हमारी रणनीति है...मुझे लगता है कि चीन के लिए यह बहुत ही मैत्रीपूर्ण रवैया है."

ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग-वेन

इमेज स्रोत, Getty Images

'ताइवान पर हमला महंगा पड़ेगा'

वेन कहती हैं कि वो बातचीत के लिए तैयार हैं लेकिन साथ ही वो इससे भी अच्छी तरह वाकिफ़ हैं कि उनकी जीत के बाद चीन ताइवान पर दबाव बढ़ा सकता है.

इन सभी चीज़ों को ध्यान में रखते हुई वो ताइवान के व्यापारिक रिश्तों में विविधता लाने और इसकी अर्थव्यवस्था को मज़बूत बनाने की कोशिश कर रही हैं. इसके लिए वेन चीन में फ़ैक्ट्रियां बनाने वाले निवेशकों से ताइवान लौटने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं.

वो कहती हैं, "आप किसी भी समय युद्ध की आशंका से इनकार नहीं कर सकते. बात बस इतनी है कि आपको ख़ुद को तैयार रखना होगा और अपना बचाव करने की क्षमता विकसित करनी होगी."

क्या ताइवान इसके लिए तैयार है?

इस सवाल के जवाब में वेन कहती हैं, "हम पूरा प्रयास कर रहे हैं और अपनी क्षमता को मज़बूत करने के लिए बहुत सी कोशिशें कर रहे हैं. ताइवान पर हमला करना चीन के लिए बहुत महंगा पड़ेगा."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)