एना शेनॉल: वो महिला जिस पर अमरीका, चीन और ताइवान तीनों फ़िदा थे

इमेज स्रोत, Schlesinger Library/Radcliffe Institute
सत्ता के गलियारों में पहुंच रखने वाले दुनिया भर के लोगों में वे शायद सबसे ज़्यादा रसूखदार महिला थीं.
लेकिन इसके बावजूद एना शेनॉल के बारे में दुनिया बहुत कम जानती थी. शायद यही वजह थी कि 30 मार्च, 2018 को जब उनकी मौत हुई तो इसका कम ही जिक्र हुआ.
एना शेनॉल का एक चीनी नाम भी था, शेन शियांगमेई. वे अमरीका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी के राजनीतिक गलियारों में ख़ासा दखल रखती थीं.
अमरीका में लोग उन्हें चीन के अनऑफ़िशियल डिप्लोमेट के तौर पर जानते थे. 20वीं सदी के सियासी उतार-चढ़ावों के दौरान वे बेहद कामयाबी रहीं थीं.
राष्ट्रपति जॉन एफ़ कैनेडी से लेकर रिचर्ड निक्सन तक का नाम एना शेनॉल के दोस्तों में शुमार था. उनके मुलाकातियों में पूर्व विदेश हेनरी किसिंजर भी शामिल थे.
इतना ही नहीं एना शेनॉल चीन के क्रांतिकारी नेता डेंग शियोपिंग से लेकर ताइवान के सैनिक नेता चियांग काई-शेक तक भी पहुंच रखती थीं.
वॉशिंगटन पोस्ट अख़बार ने कभी एना शेनॉल को लेजेंडरी स्टील बटरफ़्लाई कहा था. कहा जाता है कि दुनिया के तमाम बड़े नेता उनसे प्रभावित थे.

इमेज स्रोत, Fox Photos/Getty Images
अमरीकी अफ़सर से एना का प्यार
डेंग शियोपिंग ने 1981 में एना शेनॉल से मिलने के बाद कहा था, "दुनिया में केवल एक एना शेनॉल हो सकती हैं."
शायद उनके शख़्सियत के जादू की एक बड़ी वजह ये भी थी कि हर किसी के सांचे में वे आसानी से ढल जाती थीं.
अमरीकियों के लिए वे साम्यवाद की धुर विरोधी थीं लेकिन चीनियों के लिए वे एक सम्मानित और मशहूर वॉर हीरो (युद्ध के नायक) की विधवा थीं.
ताइवान के लिए भी एना शेनॉल की एक अलग अहमियत थी. ताइवन को अमरीकी समर्थन दिलाने के लिए एना शेनॉल ने वॉशिंगटन में तगड़ी लामबंदी की थी.
1923 में उनका जन्म बीजिंग के एक शिक्षित और समृद्ध परिवार में हुआ था. हांगकांग में उनकी पढ़ाई हुई थी और बाद में वे एक चीनी न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्टर बन गईं.
साल 1944 में उन्हें वो ज़िम्मेदारी मिली जिससे उनकी ज़िंदगी ही बदल गई.
एना शेनॉल को चीन के युनान प्रांत की राजधानी कनिंग भेजा गया जहां उन्हें अमरीकी सेना के मेजर जनरल क्लेयर शेनॉल का इंटरव्यू लेना था.

इमेज स्रोत, Schlesinger Library/Radcliffe Institute
अमरीका में एना की शुरुआत
मेजर जनरल क्लेयर शेनॉल अमरीकी वायु सेना के 'फ़्लाइट टाइगर्स वॉलंटरियर्स ग्रुप' के लीडर की हैसियत से कनिंग दौरे पर आए हुए थे.
क्लेयर शेनॉल के दस्ते ने चीन को जापानी वायु सैनिक हमले से बचाने के लिए बड़ा योगदान दिया था.
एना शेनॉल अपने से उम्र में तीस साल बड़े क्लेयर शेनॉल्ट के प्यार में पड़ गईं.
जब द्वितीय विश्व युद्ध ख़त्म हुआ तो मेजर जनरल क्लेयर शेनॉल ने अमरीका में अपनी पत्नी को तलाक दे दिया और एना से शादी कर ली.
मेजर जनरल क्लेयर शेनॉल की 1958 में कैंसर से मौत हो गई. उस वक़्त एना की उम्र महज 35 साल की थी. वे अपनी दो बेटियों के साथ वॉशिंगटन रहने चली गईं.
पति का कारोबार संभाला और बतौर पत्रकार और अनुवादक अपनी ज़िंदगी नए सिरे से शुरू की.
वक़्त के साथ-साथ एना शेनॉल अमरीका की सबसे रसूखदार नागरिकों में शुमार हो गईं. लोग उनकी शख़्सियत और ग्लैमरस इमेज के कायल हो जाते थे.

इमेज स्रोत, Schlesinger Library/Radcliffe Institute
'वाटरगेट स्कैंडल'
एना की शोहरत उनकी पार्टियों की वजह से भी थी. 'वाटरगेट कॉम्प्लेक्स' में उनके पेंटहाउस में ये पार्टियां अक्सर हुआ करती थीं.
ये वहीं 'वाटरगेट स्कैंडल' वाला 'वाटरगेट कॉम्प्लेक्स' है जिसने अमरीका की राजनीति में बवंडर खड़ा कर दिया था. उस स्कैंडल में रिचर्ड निक्सन का नाम भी आया था.
एना शेनॉल ने रिपब्लिकन पार्टी के समर्थक के तौर पर निक्सन का समर्थन किया था और निक्सन उन्हें 'ड्रैगन लेडी' के नाम से बुलाते थे.
एना की जीवनी लिखने वाली कैथरीन फोर्सलुंड ने वाशिंगटन पोस्ट अख़बार को बताया था, "एना वो महिला थीं जिन्होंने अमरीकियों को, सरकारी अधिकारियों को, कारोबारियों को एक हद तक चीन से परिचित कराया था. इतना हीं नहीं उन्होंने एशियाई देशों को भी अमरीका के बारे में एक नज़रिया दिया था."
ऐसा भी नहीं था कि एना की ज़िंदगी में किसी तरह का कोई विवाद नहीं हुआ.
उनके दिवंगत पति की कंपनियां सीआईए ने खरीद ली थी और कहा जाता है कि इन कंपनियों का इस्तेमाल साम्यवाद विरोधी गतिविधियों में किया गया था.

इमेज स्रोत, Schlesinger Library, Radcliffe Institute
'गद्दारी' का आरोप
और फिर 'शेनॉल अफ़ेयर' वाला कांड हो गया.
साल 1968 में एफ़बीआई ने एना के फोन रिकॉर्ड किए जिसमें वे कथित तौर पर दक्षिण वियतनाम की सरकार से पेरिस शांति समझौते के बहिष्कार के लिए कह रही थीं.
वे रिचर्ड निक्सन के लिए खुफिया तरीके से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लामबंदी कर रही थीं.
अमरीकी राष्ट्रपति चुनावों में निक्सन की संभावनाओं को मजबूत करने के लिए एना ने पेरिस शांति समझौते को एक तरह से नाकाम कर दिया था.
तत्कालीन अमरीकी राष्ट्रपति लिंडन बी जॉनसन ने एना शेनॉल पर अमरीका के साथ गद्दारी करने का आरोप लगाया था.
लेकिन कुछ ही दिनों के बाद रिचर्ड निक्सन चुनाव जीत गए और एना शेनॉल पर कभी कोई मुकदमा नहीं चलाया गया.
एना शेनॉल की छवि भले ही एक ऐसी महिला की रही जो साज़िशों को अंजाम देने में महारत रखती थीं लेकिन शेन शियांगमेई के नाम से उनकी एक अलग ही शख़्सियत थी.

इमेज स्रोत, CNS
'अमरीका-चीन की दोस्ती'
चीन में एना के पति मेजर जनरल क्लेयर शेनॉल अमरीकी वायु सेना के 'फ़्लाइट टाइगर्स वॉलंटरियर्स ग्रुप' को बहुत सम्मान के साथ देखा जाता था.
साथ ही एना को अपने पति का नाम जीवित रखने वाली महिला के रूप में सराहा जाता है. साल 2015 में उन्हें चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने मेडल भी दिया था.
उन्हें देश के बाहर सक्रिय एक ऐसे कामयाब चीनी शख़्स समझा जाता है जिसने अमरीका और चीन के रिश्तों की बेहतरी के लिए काम किया था.
चीन की मीडिया में एना की मौत के बाद इस बात की चर्चा देखी गई कि उन्होंने अमरीका की राजनीति में क्या उपलब्धियां हासिल की थीं.
चीनी मीडिया के मुताबिक़ वे अमरीका व्हॉइट हाउस में दाखिल होने वाली पहली चीनी महिला थीं जिन्हें तत्कालीन राष्ट्रपति कैनेडी ने मिलने का समय दिया था.
चीन की सरकारी न्यूज़ एजेंसी शिन्हुआ ने एना को 'अमरीका-चीन की दोस्ती का राजदूत' कहा है.
ऐसी तारीफें कुछ हद तक बढ़ा चढ़ाकर कही गई बात लगती है क्योंकि शुरुआत में कई दशकों तक उन्हें चीन के साम्यवादी शासन का मुखर विरोधी माना जाता था.

इमेज स्रोत, Schlesinger Library/Radcliffe Institute
ताइवान
साल 1950 के आते-आते चीन का गृह युद्ध ख़त्म हो गया था और ताइवान वजूद में आ गया था.
एना ताइवान के नेता चियांग काई-शेक और उनकी पत्नी सूंग मेई-लिंग की भी अच्छी दोस्त थीं. सालों तक वे अमरीका में ताइवान के लिए लामबंदी करती रहीं.
साल 1979 में वे उस वक्त निराश हो गईं जब अमरीका ने चीन की साम्यवादी सरकार को मान्यता दे दी. लेकिन सियासी हवा एक बार फिर बदल गई.
1981 में रोनाल्ड रीगन ने एना को अमरीका की अनाधिकारिक दूत की हैसियत से चीन भेजा और दोस्ती के संकेत दिए.
तीन दशकों के बाद एना की ये पहली स्वदेश यात्रा थी. वे चीन के नेता डेंग शियापिंग से मिलीं.
उस ज़माने में अमरीकी अख़बारों में एना की डेंग शियापिंग से मुस्कुराकर हाथ मिलाते हुई तस्वीर छपी.
वॉशिंगटन लौटने के बाद एना ने अमरीकी प्रेस से कहा कि साम्यवादियों के बारे में उनकी भावनाएं नहीं बदली हैं.

इमेज स्रोत, Schlesinger Library/Radcliffe Institute
'पावरब्रोकर' एना
लेकिन इस बीच ताइवान में वे अपने साम्यवाद विरोधी रवैए के लिए जानी जाती रहीं.
एना की मौत के बाद ताइवान के विदेश मंत्रालय ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उन्होंने अमरीका-ताइवान के रिश्तों के सक्रिय योगदान किया था.
हालांकि एना ने बाद की ज़िंदगी में अमरीका-चीन-ताइवान के संबंधों को बेहतर बनाने के लिए खुद को समर्पित कर दिया था.
1990 में चीन जाने वाले ताइवानी व्यापार प्रतिनिधिमंडल की एना ने अगुवाई भी की थी.
'पावरब्रोकर' की हैसियत से जब उन्होंने अपना राजनीतिक जीवन शुरू किया था तो कम ही लोग उन्हें जानते थे. उनका तिरस्कार महज एक मेजबान कहकर किया जाता था.
लेकिन आहिस्ता-आहिस्ता वे पर्दे के पीछे काम करते हुए अपनी मौजूदगी दर्ज कराने लगीं.
साल 2002 में उन्होंने चीनी मीडिया से कहा था, "मेरा पूरा जीवन निर्वासन में पढ़ाई से लेकर, पत्रकारिता और फिर अमरीका में अकेले संघर्ष करने तक कई तरह के खट्टे-मीठे अनुभवों से भरा पड़ा है. मैंने आठ अमरीकी राष्ट्रपतियों के साथ कई महत्वपूर्ण कार्य किए और वो भी बिना कुछ लिए हुए."
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)















