ईरान ने परमाणु समझौता न मानने की घोषणा की

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अमरीका के साथ बढ़ते तनाव के बाद ईरान ने घोषणा की है वो 2015 के परमाणु समझौते के तहत लागू की गईं पाबंदियों का पालन अब नहीं करेगा.
एक बयान में कहा गया है कि वो अब परमाणु संवर्धन के लिए अपनी क्षमता, उसका स्तर, उसको समृद्ध करने के लिए अन्य सामग्री का भंडार करने, अनुसंधान या उसको विकसित करने की किसी भी पाबंदी का पालन नहीं करेगा.
तेहरान में ईरानी मंत्रिमंडल की बैठक के बाद यह बयान आया है. ईरान की ओर से यह बड़ी प्रतिक्रिया तब आई है जब हाल ही में बग़दाद में अमरीकी एयरस्ट्राइक में उसके जनरल क़ासिम सुलेमानी की मौत हो गई थी.
2015 के समझौते के अनुसार, ईरान अपनी संवेदनशील परमाणु गतिविधियों को सीमित करने और अंतरराष्ट्रीय निरीक्षकों को आने की अनुमति दी थी. इसके बदले में ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को ख़त्म किया गया था.
अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने 2018 में इस समझौते को रद्द कर दिया था. उन्होंने कहा था कि वो ईरान से नया समझौता करना चाहते हैं जो उसके परमाणु कार्यक्रम और बैलिस्टिक मिसाइल के विकास पर अनिश्चितकालीन रोक लगाएगा.
ईरान ने यह करने से इनकार कर दिया था और इसके बाद समझौते के तहत किए गए अपने वादों से वो पीछे हटने लगा था.
रविवार को इराक़ी सांसदों ने बग़दाद एयरपोर्ट पर सुलेमानी के मारे जाने के विरोध में इराक़ से विदेशी सुरक्षाबलों को निकालने के लिए एक ग़ैर-बाध्यकारी प्रस्ताव पास किया था.
इस्लामिक स्टेट समूह के ख़िलाफ़ बने अंतरराष्ट्रीय गठबंधन में 5,000 अमरीकी सैनिक हैं.
रविवार को इस प्रस्ताव पर मतदान के बाद गठबंधन का इराक़ में आईएस के ख़िलाफ़ अभियान रोक दिया गया है.

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ईरान ने क्या कहा है?
ईरान के सरकारी टीवी पर जारी किए गए बयान में कहा गया कि 2015 के समझौते के तहत जो सीमाएं तय की गई थीं उन्हें अब नहीं माना जाएगा.
बयान में कहा गया है, "ईरान अपना परमाणु संवर्धन कार्यक्रम बिना किसी रुकावट और तकनीकी ज़रूरतों के हिसाब से जारी रखेगा.
हालांकि, यह अभी साफ़ नहीं किया गया है कि ईरान इस समझौते से पूरी तरह से निकल रहा है या नहीं लेकिन इस बयान में ईरान ने कहा है कि वह संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था आईएईए के साथ सहयोग जारी रखेगा.
बयान में कहा गया है कि समझौते के तहत मिले लाभ तक वो इसके साथ जाने को तैयार था.
ईरान हमेशा से कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है.
2015 के समझौते में शामिल ब्रिटेन, फ़्रांस, जर्मनी, चीन और रूस ने इसको जीवित रखने की कोशिशें की थीं लेकिन प्रतिबंधों के कारण ईरान का तेल निर्यात तबाह होने के नज़दीक है और उसकी मुद्रा कमज़ोर हो गई है.

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'ईरान की 52 जगहों को निशाना बना रहे हैं'
वहीं, रविवार को अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा था कि अमरीका 52 ईरानी जगहों को 'निशाना' बना रहा है और अगर ईरान किसी अमरीकी नागरिक या संपत्ति पर हमला करता है तो, उस पर 'बहुत तेज़ी से और बहुत मज़बूती से' हमला होगा.
ट्रंप ने ट्वीट किया था कि जनरल की मौत के बाद "ईरान अमरीकी संपत्तियों को निशाना बनाने को लेकर बड़े साहस से बोल रहा है.'
उन्होंने कहा था कि अमरीका ने ऐसी 52 ईरानी जगहों को चिह्नित कर लिया है जो "काफ़ी महत्वपूर्ण हैं और ईरान और उसकी संस्कृति के लिए अहम हैं. वो निशाने पर हैं, ईरान अगर अमरीका पर हमला करता है तो बहुत तेज़ी और मज़बूती से हमला किया जाएगा."
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