ट्रंप के ख़िलाफ़ महाभियोग जाँच में लगे औपचारिक आरोप

अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ख़िलाफ़ महाभियोग की कार्यवाही में डेमोक्रेटिक पार्टी के नियंत्रण वाली न्यायिक समिति ने उनके ख़िलाफ़ औपचारिक आरोप तय कर दिए हैं. ट्रंप के ख़िलाफ़ महाभियोग में ये एक अहम प्रक्रिया है.

न्यायिक समिति के चेयरमेन और डेमोक्रेटिक नेता जेरी नाडलेर के अनुसार ट्रंप के ख़िलाफ़ दो मुख्य आरोप हैं. पहला कि ट्रंप ने सत्ता का दुरुपयोग किया है और दूसरा ये कि राष्ट्रपति ने संसद के काम में बाधा डाली.

राष्ट्रपति पर आरोप है कि उन्होंने अपने घरेलु राजनीतिक लाभ के लिए यूक्रेन को मिलने वाली आर्थिक मदद को रोक दिया था.

लेकिन ट्रंप ने तमाम आरोपों को ख़ारिज करते हुए कहा कि संसद उनके ख़िलाफ़ जल्द से जल्द महाभियोग की प्रक्रिया पूरी करे.

व्हाइट हाउस के प्रवक्ता होगन गिडले ने बीबीसी से कहा कि राष्ट्रपति चाहते हैं कि मुक़दमा शुरू हो.

ट्रंप का दावा है कि उन्होंने ''कुछ भी ग़लत नहीं'' किया है और महाभियोग की प्रक्रिया ''पागलपन'' है.

लेकिन जेरी नाडलेर ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने 2020 में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में यूक्रेन से हस्तक्षेप करने के लिए दबाव डालकर राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ समझौता किया है और अमरीका के लोगों के प्रति ली गई शपथ को भी तोड़ा है. उन्होंने महाभियोग की जाँच में ट्रंप के सहयोग न करने की भी निंदा की है और इसे अप्रत्याशित बताया है.

व्हाइट हाउस की प्रवक्ता स्टेफ़नी ग्रिशम ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप उनके ख़िलाफ़ सभी झूठे आरोपों को सीनेट में संबोधित करेगें और उन्हें पूरी आशा है कि वो इस मामले में सभी आरोपों से पूरी तरह से बरी हो जाएंगे क्योंकि उन्होंने कुछ भी ग़लत नहीं किया है.

अगर प्रतिनिधि सभा (अमरीकी संसद का निचला सदन जैसे कि भारत में लोकसभा) की न्यायिक समिति इस सप्ताह के अंत तक उन आरोपों को सही ठहराती है तो समिति इसे निचले सदन में वोटिंग के लिए भेज देगी.

अगर इन आरोपों को सदन में भी पारित कर लिया जाता है जिस पर फ़िलहाल डेमोक्रेट का नियंत्रण है तब रिपब्लिकन पार्टी के नियंत्रण वाले सीनेट (संसद का ऊपरी सदन जैसे भारत में राज्य सभा) में महाभियोग का मुक़दमा चलेगा जो संभवत: जनवरी के शुरू में हो सकता है.

महाभियोग की प्रक्रिया तब शुरू की गई जब एक अंजान आदमी (विसिलब्लोअर) ने सितंबर में संसद से शिकायत की थी कि जुलाई में राष्ट्रपति ट्रंप ने यूक्रेन के राष्ट्रपति को फ़ोन किया था.

ट्रंप पर आरोप है कि उस फ़ोन कॉल में उन्होंने यूक्रेन के राष्टपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की से कहा था कि अगर वो अमरीका से सैन्य मदद चाहते हैं तो यूक्रेन को कुछ जाँच शुरू करनी होगी जिससे ट्रंप को राजनीतिक लाभ होगा.

ट्रंप ने कहा था कि अगर यूक्रेन उनके बताए मुताबिक़ जाँच शुरू करता है तो अमरीका उसे 40 करोड़ डॉलर की सैन्य मदद करेगा और ट्रंप यूक्रेन के राष्टपति से व्हाइट हाउस में मुलाक़ात करेंगे. ये सैन्य मदद देने के बारे में सदन पहले ही मंज़ूरी दे चुका था.

डेमोक्रेटिक सांसदों का कहना है कि एक कमज़ोर अमरीकी सहयोगी पर दबाव डालना सत्ता का दुरुपयोग है.

फ़ोन पर हुई इस बातचीत में राष्ट्रपति ट्रंप ने यूक्रेन के राष्ट्रपति से कथित तौर पर जो बाइडेन (अगले साल होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी के संभावित उम्मीदवार) और उनके बेटे हंटर बाइडेन के ख़िलाफ़ जाँच करने के लिए कहा था.

हंटर बाइडेन यूक्रेन की एक ऊर्जा कंपनी के बोर्ड मेम्बर बने थे जब उनके पिता यानी जो बाइडेन अमरीका के उपराष्ट्रपति थे.

ट्रंप की दूसरी माँग कथित तौर पर ये थी कि यूक्रेन को इस बात की पुष्टि करनी थी कि अमरीका के पिछले राष्ट्रपति चुनाव में रूस नहीं बल्कि दर असल यूक्रेन ने हस्तक्षेप किया था.

यूक्रेन के शामिल होने की थ्योरी को सबने ख़ारिज कर दिया है और अमरीकी ख़ुफ़िया विभाग का सर्वसम्मति से ये मानना है कि 2016 के चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार के ई-मेल लीक होने के पीछे रूस का हाथ था.

ट्रंप पर अभियोग सिद्ध हो गए तो क्या होगा?

अगर राष्ट्रपति ट्रंप के ख़िलाफ़ दो तिहाई बहुमत के साथ अभियोग सिद्ध हो जाते हैं तो वह अमरीकी इतिहास में महाभियोग की प्रक्रिया के चलते पद से हटाए जाने वाले पहले राष्ट्रपति होंगे. मगर फ़िलहाल ऐसा होना मुश्किल नज़र आता है.

महाभियोग की प्रक्रिया क्या है?

यह दो चरणों में होने वाली प्रक्रिया है जिसे संसद के दो सदन अंजाम देते हैं. इसमें महाभियोग पहला चरण है.

पहले चरण में निचले सदन यानी हाउस ऑफ़ रिप्रेज़ेन्टेटिव्स के नेता राष्ट्रपति पर लगे आरोपों को देखते हैं और तय करते हैं कि राष्ट्रपति पर औपचारिक तौर पर आरोप लगाएंगे या नहीं. इसे कहा जाता है, "महाभियोग के आरोपों की जाँच आगे बढ़ाना." फ़िलहाल ये प्रक्रिया हो चुकी है. अब अगर न्यायिक समिति आरोपों को सही मानती है तो निचले सदन में वोटिंग होगी.

निचले सदन में प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए साधारण बहुमत (51 फ़ीसदी) की ज़रूरत होती है. निचले सदन की मंज़री के बाद मामला ऊपरी सदन यानी

सीनेट में पहुँता है. सिनेट इसकी बाज़ाबता जाँच करती है और फिर वोटिंग होती है. अगर दो-तिहाई सांसद महाभियोग प्रस्ताव के पक्ष में वोट डालते हैं तो राष्ट्रपति को तत्काल प्रभाव से अपना पद छोड़ना होगा और उनकी जगह उप राष्ट्रपति कार्यभार संभालेंगे.

लेकिन सीनेट में रिपब्लिकन के पास भारी बहुमत है इसलिए लगता नहीं कि सीनेट में ट्रंप को कोई मुश्किल होगी.

किन अमरीकी राष्ट्रपतियों के ख़िलाफ़ लाया गया महाभियोग?

अमरीका के इतिहास में केवल दो राष्ट्रपतियों, 1886 में एंड्रयू जॉनसन और 1998 में बिल क्लिंटन के ख़िलाफ़ महाभियोग लाया गया था, लेकिन उन्हें पद से हटाया नहीं जा सका.

1974 में राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन पर अपने एक विरोधी की जासूसी करने का आरोप लगा था. इसे वॉटरगेट स्कैंडल का नाम दिया गया था.

लेकिन महाभियोग चलाने से पहले उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया था क्योंकि उन्हें पता था कि मामला सीनेट तक पहुँचेगा और उन्हें इस्तीफ़ा देना पड़ सकता है.

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