ईरान को लेकर इराक़ में क्यों लगी है आग

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इराक़ में प्रदर्शनकारियों ने नजफ़ शहर में स्थित ईरानी वाणिज्य दूतावास को आग लगा दी है.
इराक़ में कई दिनों से सरकार विरोधी प्रदर्शन चल रहे हैं. प्रदर्शनकारियों ने 'इराक़ से बाहर जाओ ईरान' के नारे लगाए.
रिपोर्टों में कहा गया है कि प्रदर्शन शुरू होने से पहले ही ईरानी वाणिज्य दूतावास के कर्मचारी पहले ही सुरक्षित बाहर निकल गए थे.
ये इस महीने ईरानी वाणिज्य दूतावास पर दूसरा हमला है. इससे पहले करबला में भी ऐसा हमला हुआ था.
दो महीनों से चल रहे प्रदर्शनों और हिंसा के ताज़ा दौर में कम से कम 344 लोग मारे गए हैं.
लोग भ्रष्टाचार ख़त्म करने, ज़्यादा नौकरियाँ और बेहतर सेवाओं की मांग कर रहे हैं.
इन प्रदर्शनों के कारण दक्षिणी इराक़ और राजधानी बग़दाद सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए हैं.
प्रदर्शनकारी ईरान पर ये आरोप लगा रहे हैं कि वो इराक़ के अंदरूनी मामले में दखल दे रहा है और सरकार का समर्थन कर रहा है.
क्या है ताज़ा स्थिति

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नजफ़ में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने की बहुत कोशिशें की, लेकिन वे ईरानी वाणिज्य दूतावास में घुस गए और आग लगा दी.
ईरान न सिर्फ़ इराक़ की सरकार का समर्थन कर रहा है, बल्कि कई स्थानीय शिया मुस्लिम लड़ाकों का भी समर्थन कर रहा है.
ईरान ने प्रदर्शनकारियों से अपील भी की थी कि वो क़ानूनी दायरे में बदलाव की मांग करें. साथ ही ईरान ने पश्चिमी देशों पर इराक़ में अव्यवस्था फैलाने का आरोप भी लगाया.
मंगलवार की रात एक अन्य घटना में सुरक्षाकर्मियों ने करबला में दो लोगों को गोली मार दी, जिसमें उनकी मौत हो गई. राजधानी बग़दाद में भी दो लोग मारे गए. जबकि बसरा में भी एक व्यक्ति की गोलीबारी में मौत हो गई.
बसरा में प्रदर्शनकारियों ने सरकारी कर्मचारियों को दफ़्तर में जाने से रोका.
इराक़ में क्यों हो रहे हैं प्रदर्शन

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इराक़ में प्रधानमंत्री अदेल अब्दुल महदी ने एक साल पहले ही सत्ता संभाली है. उन्होंने देश में सुधार का वादा किया था, जो पूरा नहीं हो पाया है.
बढ़ती बेरोज़गारी, बढ़ते भ्रष्टाचार और ख़राब सेवाओं के कारण एक अक्तूबर को युवा इराक़ी राजधानी बग़दाद की सड़कों पर उतर आए थे.
धीरे-धीरे प्रदर्शन पूरे देश में फैल गया. सुरक्षाकर्मियों ने भी प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ जमकर बल प्रयोग किया.
उस दौरान छह दिन तक चले प्रदर्शनों में 149 आम लोगों की मौत हुई थी. प्रधानमंत्री महदी ने कैबिनेट को बदलने का वादा किया. उन्होंने ये भी कहा कि उच्च अधिकारियों के वेतन में कटौती की जाएगी. उन्होंने बेरोज़गारी कम करने के लिए कुछ योजनाओं की भी घोषणा की थी.
लेकिन प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रधानमंत्री के वादे पूरे नहीं हुए. इसके बाद अक्तूबर के आख़िर में वे दोबारा सड़कों पर उतर आए.
राष्ट्रपति बरहाम सालेह ने कहा है कि अगर पार्टियाँ किसी और के नाम पर सहमत होती हैं, तो प्रधानमंत्री त्यागपत्र दे देंगे.
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